समर्थक

               धर्म-परिवर्तन


धर्म से धरती का नाता भूल कर जो चल दिया 
राष्ट्र से ही तोड़ नाता राष्ट्र-द्रोही बन गया.

द्रोह करके धर्म से जो भी पलायन कर गया 
भारत से पहले येरूशलम का वो दीवाना हो गया.

जो हुआ अपना नहीं वो क्या हमें दे पायेगा 
सूर्य का अपमान कर जुगुनू के ही गुन गायेगा.

रख आर्ष ग्रंथों में अश्रद्धा कोई नीति क्या सिखलाएगा 
कुछ सीखकर चालें विदेशी वो मात क्या दे पायेगा.

ज्ञान की जिस संपदा का सम्मान रिपुओं ने किया 
पोथियाँ पढ़कर विदेशी खुद को ही तुमने खो दिया.
   
धर्म त्यागी बन्धु मेरे सांझ घिर आयी है अब
लौट आओ घर तुम्हारे बिन अधूरा हो गया.



कब जागेगा हिंदू स्वाभिमान

आजकल जबसे मालेगांव बम विस्फोटो  में कुछ हिंदू लोगों पर आरोप लगे हैं. , देश के सभी धर्मनिरपेक्ष (सही मतलब धर्मविहीन) दलों तथा अपने को निष्पक्ष मानने की गलतफहमी पाले मिडिया ने एक नया शब्द बनाया "हिंदू आतंकवाद "। पहले हुए ज्यादातर विस्फोटों में मुस्लिम लोग ही आरोपी साबित हुए थे तब इन्हीं दलों तथा समाचार चैनलों  मुस्लिम आतंकवाद शब्द पर आपत्ति थी , उनका कहना था की आतंकवादी का कोई धर्म नही होता , आतंकवादी केवल आतंकवादी हैं  , यह बेहद शर्मनाक हैं.  मात्र एक घटना जिसमें कुछ साबित होने से पहले ही अपने को धर्मनिरपेक्ष मानने वाले दलों तथा पत्रकारों ने हिंदू आतंकवाद जैसे  शब्द को न केवल उछाला, बल्कि हिंदू संगठनो , हिंदू समाज को बदनाम करने  का बेहद आक्रामक घटिया स्तरका लंबा अभियान चलाया जो आजतक जारी है । हिंदू शंकराचार्य की केवल मात्र गिरफ़्तारी  पर,कुछ भी साबित होने से पहले ही बेहद निम्न स्तर अभियान शंकराचार्य बहुत बड़े अपराधी हों। एक सम्मानित  और बुजुर्ग सन्यासी के अपमान पर भी हिंदू समाज चुप रहा जबकि हैदराबाद में बम विस्फोटों  के आरोपी को छुडाने मुस्लिम पुरुषों  तथा महिलाओं ने पुलिस आयुक्त के कार्यालय पर हमला बोल दिया। मिडिया के लिए यह बहुत मामूली घटना थी। हिंदू देवी देवताओं के अश्लील चित्र बनाने वाले बदमिजाज चित्रकार को मिडिया महान कहता है , परन्तु अपने भगवान् के अपमान से नाराज कोई हिंदू व्यक्ति या संगठन इसके विरोध में कोई प्रदर्शन या तोड़फोड़ करता है  तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला कहकर उन्हें तालिबानी, हुडदंगी  ; आदि शब्दों के संबोधन से बदनाम करने का आक्रामक अभियान चलाता हे , देश का बाकी  हिंदू समाज चुप रहता है , वहीं डेनमार्क में खुदा का कार्टून बनाने  पर देश का मुस्लिम समाज देशभर में हिंसात्मक आन्दोलन करता है  , पूरे  देश में भय का वातावरण बनता है , तथाकथित बुद्धिजीवी, निष्पक्षता का दावा करने वाले पत्रकारों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के झूठे दावे मुस्लिमों के भय, या सांप्रदायिक कहे जाने के भय से गायब हो जातें है  बल्कि वो हुडदंग  की आलोचना करने की बजाय धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कहकर कार्टून बनाने वाले की अलोचाने करतें हें। मेंगलोर में शराबखाने में युवा लडके लड़कियों को शराब पीने  से रोकने में हुयी मारपीट में एक हिंदू संगठन के शामिल होने से मिडिया व कांग्रेस सहित धर्मनिरपेक्ष मानानेवाले दलों ने इस तरह प्रचारित किया मानो इसमें बीजेपी , तथा आरएसएस , - जैसे  सभी हिंदूवादी संगठनों की साजिस हो , हमला कराने वालों को, हिन्दुओ को अपमानित करने में इस्तेमाल करने वाले अपने मनपसंद शब्दों जेसे तालिबानी, हुद्रंगी, खौफनाक  , तथा हिंदू संस्कृति की रक्षा के ठेकेदार बता कर अपमानित किया । ऐसा  लगा जेसे समाचार चेनल वाले हिंदू संस्कृति को समाप्त करने वालों को बचाने वाले ठेकदार हों। या शिक्षा पानें की उमर की लड़के, लड़कियों में शराब का जहर फैलाने वालों के एजेंट। बाबरी मस्जिद गिराने को जिसमे एक भी मुस्लिम नही मरा परन्तु उसकी प्रतिक्रिया में मुंबई में कराये गए बम विस्फोटों  में सेंकडों हिंदू मरे परन्तु हमारे धर्मनिरपेक्ष दल तथा मिडिया वाले बम कांड से ज्यादा डरावनी घटना बाबरी मस्जिद गिराने को बताकर हिन्दुओं को बदनाम कराने में पुरा श्रम करते हैं । इसके विपरीत गोधरा में ट्रेन में हिन्दुओ को जलाने  की साजिस को मात्र एक दुर्घटना , उसकी प्रतिक्रिया में हुए गुजरात दंगो को अत्यंत खतरनाक तथा आक्रामक तरीके से वर्षों बीतने पर भी धर्मनिरपेक्ष दल मुस्लिम समाज को भयभीत रख वोट के लिए देश को भुलाने नहीं देते तथा मिडिया वाले हिंदू संगठनों को बदनाम करने के अपने खास पसंदीदा कार्य के तहत बार बार विशेष  रूप से चुनाव के वक्त चित्रों सहित दंगों की खबरें प्रसारित करतें हें कंधमाल में एक वृद्ध सन्यासी की हत्या पर मिडिया तथा धर्मनिरपेक्ष दल खामोस रहतें हें परन्तु उसकी प्रतिक्रिया में जो हुआ  उसे रास्ट्रीय शर्म कहते हें केवल इसलिए की हत्या का शिकार साधू हिंदू था तथा मारने का आरोप इसाइयों पर था, जबकि बाद के दंगों में इसाइयों के मरने की बात थी। हिंदू समाज फ़िर भी सोता रहा। हमें अपने पवित्रतम तीर्थ तक जाने के लिए थोडी सी जमीं के लिए महीनो संघर्ष करना पड़ता हे, चंद हिंदू विरोधियो के सामने धर्मनिरपेक्ष दल घुटने टेक देतें हें, यह आन्दोलन केवल जम्मू के लोगों का नहीं बल्कि नब्बे करोड़ हिन्दुओ का था परन्तु अफ़सोस की बात हे देश के हिन्दुओ का स्वाभिमान नहीं जगा जम्मू के हिन्दुओ के समर्थन में कहीं प्रदर्शन  नहीं हुए जबकि इसी देश में मुस्लिमो को हज के लिए धन दिया जाता हें। देश के धर्मनिरपेक्ष दल सिमी को तो सामाजिक संगठन कहते हें, जबकि आर एस एस -तथा विश्व हिन्दू परिषद् को आतंकवादी संगठन कहते हें, बार बार सुनते हे किसी कंपनी ने चप्पलों पर, किसीने अधोवस्त्रों पर हिंदू देवताओं के चित्र बना दिए,मुठ्ठी भर लोग विदेशों में रहने वाले भारतीय विरोध करतें हें। देश में कहीं चर्चा नहीं होती। क्या आपने सोचा हे हिन्दुओ पर ही बार बार हमला क्यों होता हें, क्यों बार बार हिन्दुओ को अपमानित किया जाता हें, सदियों से हिंदू मारा जाता रहा है , हमारे पर होने वाले हर हमले के बाद हमसे शांत रहने की अपील की जाती हें। कहतें हैं  हिंदू सहनशील है  , क्या यह वाकई में सहनशीलता है , एक दो बार के हमलों पर चुप रहना तो सहनशीलता हो सकती है ,पर बार बार हमले होने पर भी चुप रहना केवल कायरता है । हम क्यों कायर हुए , क्यों हम हमारे हर अपमान पर चुप रहते  है, कहने को तो हम देश की कुल जनसँख्या का ८५% हें परन्तु फिर भी उपेक्षित  है क्योंकि हम संगठित नही  है। हमारे हित की बात करने वाले  दलों, तथा संगठनों को सांप्रदायिक कह कर अपमानित किया जाता  है, अपने को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दलों ने हमें जाति , संप्रदाय, क्षेत्र आदि  के आधार पर न केवल बांटा बल्कि लड़ाया भी। आज हम बिखरे हुए लकडी के उन टुकडों की तरह  है , जिन्हें कोई भी तोड़ सकता है, पर हमें वो लकडियों का गठ्ठर बनना  है जिसे कोई तोड़ने की सोच भी नहीं सके बल्कि अगर किसी तोरने वाले के ऊपर गिरे तो उसका कचूमर निकाल  दे। आज हमें राम कथा सुनाने वाले ज्यादातर संत, महात्मा हमें राम के बाल रूप,पिता के वचन के लिए सब कुछ त्याग करने, लक्षमण भरत के भात्र प्रेम की कथा सुना कर भावविभोर तो करतें  है, परन्तु हमें राम का वह रूप भी अपनाना  है जहाँ राम ने माता सीता के अपमान का बदला लेने के लिए वानरों और भालुओं को संगठित कर उनकी सेना बनाकर रावन को नेस्तनाबूद कर दिया था, आज देश में चारों और अनगिनत रावन फेलें हुवें  है,क्या उन्हें मिटाने आप फ़िर किसी राम के अवतार लेने का इंतजार करेंगे, नही अब आपके ख़ुद के राम बनने का समय है , हमें ख़ुद ही रावनो का संहार करना हें। ,मैं  एक कविता से अपनी बात कहना चाहूँगा. , 
ख़ुद बन जायें राम...
नही करें इंतजार और अब, 
फिर से होंगे प्रकट राम , 
देश में फैले  अनगिनत रावण  , 
उन्हें मिटाने ख़ुद बन जायें राम १। । 
राम ने लिया अवतार धरा पर , 
पर रहें नहीं भगवान् बनकर , 
कर्म किए कष्टों को झेला ,
रहे हमेशां मानव बनकर। २। 
दुःख - सुख तो आते जाते हैं  ,
दुखों  से क्यूँ घबरातें हैं
दुखों  से लड़े  अपने बल पर, 
भगवान  को क्यूँ बुलाते हें। ३।
सहते हैं  सब जुल्म अत्याचार, 
नहीं करते सामना बने रहते लाचार , 
नहीं करते कर्म , बस करते इंतजार , 
कभी तो लेंगे भगवन अवतार। ४। 
राम तो थे विष्णु के अवतार , 
उनकी शक्ति थी अपरम्पार , 
रावन को मार सकतें थे अयोध्या से, 
नहीं थी लंका जाने की दरकार । ५। 
हमको कर्म करना सिखाना था, 
वीरो की तरह लड़ना सिखाना था, 
नहीं करें इंतजार चमत्कार का, 
ख़ुद अपनी रक्षा का संकल्प जगाना था। ६। 
क्रूर अपूर्व बलशाली राक्षशों को , 
मायावी शक्तिधारी , वरदानी असुरों को, 
साधारण वानरों भालुओ ने जीता, 
आत्मबल , संगठन, सहयोग से जीता। ७।
आज हम हैं  स्वार्थी व कायर, 
अपनें लिए ही जीते मरते हें, 
एकता और संगठन नहीं बनातें , 
छोटे छोटे राक्षसों से डरतें हें। ८। 
संगठन में शक्ति हें, बल हें, 
संगठन से पैदा होता आत्मबल हैं
मार  सकतें हैं भ्रष्टों अप्राधिओं को, 
हम सब में इतना दमख़म हैं। ९। 
राम को न खोजो मंदिरों में , 
राम तो कण कण में हैं
अपने मन के रावन को निकालों , 
राम हम सब के मन में हैं। १०। -_________। 

अपनी शक्ति को पहचाने, जो हमारी एकता में है, हिंदू एकता में हमारा स्वभिमान है , किसी भी अन्याय व अपमान पर पूरे देश में संगठित होकर खड़े हों। हिन्दुओ के संगठित होने का मतलब किसी का विरोध नहीं हमारे स्वाभिमान की रक्षा है. वन्दे मातरम ...

यह पोस्ट लक्ष्मीपत डूंगरवाल  द्वारा भेजी गयी है.

डरे सहमे हिन्दू ब्लागर

सभी हिन्दू भाइयों को जय श्री राम और भारत माता के सच्चे सपूतों को वन्दे मातरम
मेरा शीर्षक पढ़कर निश्चित रूप से आप सभी गुस्सा होंगे पर एक बात कहने में मुझे तनिक भी हिचक नहीं हैपहली बात भारत में हर मुस्लिम ब्लोगर भारत विरोधी है और वह भारत को इस्लामिक देश के रूप में देखना चाहता हैदूसरी बात अधिकतर हिन्दू ब्लोगर मुस्लिमो से डरा हुआ हैउसे डर है की उसके घर में घुसकर कोई बाबर और लादेन का समर्थक उसकी खटिया कड़ी कर देहल्ला बोल के नियमो में कोई भी ऐसी शर्त नहीं है की कोई भी यहाँ आने से परहेज़ करे पर मुस्लिम यहाँ नहीं आना चाहता क्योंकि वह भारत को इस्लामिक देश बनाना चाहता है और उसे राष्ट्रवाद की बकवास पसंद नहीं है
मुझे शर्म आती है उन हिन्दू ब्लोगरो पर जो छुपकर मुसलमानों का समर्थन इसलिए करते हैं की कही कोई मुसलमान नाराज़ हो जायइस ब्लॉग पर आगंतुको का जो आंकड़ा दिख रहा है उससे लग रहा है की यहाँ पर बहुत से लोग आये और पोस्ट पढ़े पर तो कमेन्ट करने की हिम्मत जुटा सके और ही समर्थक बन सके क्योंकि वे लादेन और बाबर के वंशजो से डरे और सहमे हैं
जो मुस्लिम ब्लोगर हिन्दुओ के खिलाफ जमकर लिखते हैं उनके ब्लोगों पर जाकर समर्थक भी बनते हैं और टिपण्णी भी करते हैंभले ही वहा पर उनकी माँ-बहन.............. जा रही होहिन्दू ब्लोगर शिव जी की बुराई सुनकर भी शांत रहते हैं क्योंकि उन्हें मुसलमानों को नाराज़ नहीं करना हैजबकि हिन्दू ब्लोगर यदि डरपोक नहीं हैं तो उन्हें उन मुस्लिम ब्लोगरो के निजी ब्लॉग और सामूहिक ब्लॉग का बहिस्कार करना चाहिए पर नहीं भला अपने आका को कैसे नाराज़ करेंगेऐसे ही हिन्दू एक दिन देश को गुलाम बनाने में मुसलमानों का साथ देंगेयदि देश का बंटवारा दुबारा हुआ तो {भगवान करे} उसमे ऐसे ही सेकुलर कायर ब्लोगरो का हाथ होगाजो लात भी खाते रहेंगे और कहेंगे की भैया मुस्लिम भाई तुम्हारी लात बड़ी प्यारी है एक बार दुबारा मारों अरे कायरों अब तो जाग जाओ आखिर कब तक सेकुलरवाद के नाम पर भरता माता को गाली देने वालो का समर्थन करते रहोगोजिस हिसाब से यहाँ पर विजिटर आये उसके हिसाब से समर्थको का आंकड़ा १०० के पर होना था पर मुह छुपाकर भागने वाले कायरो का क्या होगाहे भगवान इन कायरो को सद्बुद्धि दो

सर्व देव ऋषिवारो को नमस्कार का मन्त्र

ॐ परमकृपालू परमातुमाकी कृपासे प्राथना कर रहा हूँ.
ॐ नमो श्री सदगुरु पात्र ब्रह्मा ईन्द्र ईमामशाह आद्य-विष्णु निरंजन कल्कि नारायण आपकी आशीष ...



आद्य नारायणको नमस्कार !! ब्रह्मा,विष्णु, महेशको नमस्कार !! आध शक्ति माता को नमस्कार !! श्री कल्कि नारायणको नमस्कार !! प्रथम पुरूषको नमस्कार !! हरिवंश कुल परिवारको नमस्कार !! धरती आसमानको नमस्कार !! पवन-पानिको नमस्कार !! चंद्र-सूर्यको नमस्कार !! नव लाख ताराको नमस्कार !! बार मेघ को नमस्कार !! नवकुल नागको नमस्कार !! सात समुद्रको नमस्कार !! नो सो निन्यानबे नदीओको नमस्कार !! गयारा रूद्रको नमस्कार !! अश्विनी कुमारोको नमस्कार !! उनचास मरूतको नमस्कार !! चौद ब्रह्मांडको नमस्कार !! नवग्रहको नमस्कार !! सात वार, सताईस नक्षत्रको नमस्कार !! पंदर तिथी बारहकरणको नमस्कार !! सात द्वीपको नमस्कार, नवखंड पृथ्वीको नमस्कार !! चोबीस मुल्कको नमस्कार !! अष्टकुल पर्वतको नमस्कार !! अठारहभार वनस्पितको नमस्कार !! चार वेदको नमस्कार !! चार ग्रंथको नमस्कार, चार खाण, चार वाणको नमस्कार ; अग्नि, तेज अन्नदेवको नमस्कार !! आदि, अंत,मध्यके देवको नमस्कार !! उतर,दिक्षण,पूर्व पिश्चमको नमस्कार !! दश दिग्पालको नमस्कार !! दश दीशाओको नमस्कार !! नवनाथ चोर्यासी सिद्धको नमस्कार !! चोसथ जोगणीको नमस्कार !! अठ्याशी सहस्त्र ऋषीको नमस्कार !! एक लाख असी हजार संत-महात्माओंको नमस्कार, अडसठ तीर्थको नमस्कार !! निन्यानबे करोडी झांखाको नमस्कार !! छप्पनकरोडी मेंघाको नमस्कार !! बत्रीस करोडी किन्नरको नमस्कार !! पांच करोडी प्रहलादको नमस्कार !! सात करोडी हरिश्चंद्रको नमस्कार !! नव करोडी युधिस्टिर को नमस्कार !! बार करोडी कमला कुंवरको नमस्कार !! त्रेतीस करोडी देवताओको नमस्कार !! सर्व ऋषिवर गत-गंगाको नमस्कार !! दश अवतारको नमस्कार, मुखी सेवकको नमस्कार, चौदह-भुवनना देव-ऋषिवरको नमस्कार !! करण कल्पके अनंत करोडी देवको नमस्कार !! स्वामी ! हमारे अपराध क्षमा करो, सतधर्म(सनातन) के मार्ग में रखो !! लक्ष चोर्यासीके फेरा टालो. तेत्रीस करोडी देवो का मिलाप कराओ !! जांबु द्वीपके स्वामी!! सदगुरु ब्रह्मा.....

ॐ श्री कल्कि नारायणको नमो नम:


प्रिय धर्मीजनों ऊपर जो सर्व देव ऋषिवारो को नमस्कार का मन्त्र दिया गया है वह वास्तव में एक तपस्या के समान हे. जिसे सभी सनातन धर्मियो को सुबह और रात में सोने से पहले एक बार अवस्य बोलना चाहिए क्युकी परमात्मा ने हमें मनुष्य का अवतार दिया है तो हमें उसका गुणगान गाना चाहिए. इस मन्त्र में विष्णु भगवान के दस अवतार, ब्रह्मा, महेश, तेतीश करोड़ देवी देवता आध सकती(नारायणी) चारो दिशा और इस श्रिस्टी से समस्त चल अचल भगवान की बनाई लीला को नमस्कार किया गया है. यह मन्त्र सभी धर्मो के लिए है यह मन्त्र हिन्दुओ की भिन भिन संप्रदाय को एक करने वाला है. यह मन्त्र सभी भारतीयों के लिए है. जय हिंद जय भारत




धर्म कोई बुरा नहीं होता, धर्मांध बुरे हैं

मित्रो, पिछले काफी दिनों से धर्म को लेकर चर्चाएँ छिड़ी हैं, कुछ लोग इसे विवादित विषय मानकर ऐसी चर्चाओ में भाग नहीं लेना चाहते. बल्कि खुद भाग जाते हैं. जबकि मौजूदा दौर में इस बात पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए. हल्ला बोल ने एक ऐसा मंच हमें दिया है. जिस पर हम लोग अपनी बात खुलकर कह सकते है, किसी भी बात के लिए सबका अलग-अलग नजरिया होता है, जरुरी नहीं की वह बात सभी की समझ में आ जाय. समझ में तब आएगी जब  हम सौम्य शब्दों में इसकी चर्चा करेंगे. आज हिन्दू या मुसलमान की परिभाषा  क्या है यह आप लोंगो को पता हो, पर शायद हमें नहीं है. जब मैं कोई भी बात करता हूँ तो विरोध होने लगता है. आखिर क्यों ..? यदि मैं नासमझ हूँ तो आप लोग हमें समझाएं, मैं कोई ज्ञानी नहीं हूँ, एक मोटी बुद्धि का व्यक्ति भी हो सकता हूँ. आशुतोष जी का कहना है की वे मुझे समझ नहीं पाए, ऐसे तमाम लोग होंगे जो हमें नहीं समझ पायें होंगे. जब की हम समझते हैं की हमें एक दूसरे को अच्छी तरह समझना चाहिए. यदि हमें समझ नहीं है तो आप लोग ही हमें समझाईये. 
मै  पहले ही कह चुका हूँ की इस ब्लॉग के नियम हमें स्वीकार हैं. निश्चित रूप से हिन्दुओ को भगवान राम का चरित्र और आदर्श पालन करना चाहिए. वहा यह भी लिखा है की जो मुसलमान भारत माँ का सम्मान करे, वन्दे मातरम स्वीकार करे. तिरंगे का सम्मान करे, वह इस ब्लॉग का लेखक बन सकता है, यानि राष्ट्रभक्त मुसलमानों से "हल्ला बोल" को कोई आपत्ति नहीं है, फिर आप बताये क्या मुसलमान इस्लाम त्याग देगा, वह कुरान पढना छोड़ देगा. शायद नहीं..
मैंने बी.एन. शर्मा जी का भंडाफोडू  ब्लॉग पढ़ा है. और कुरान भी पढ़ा है. शर्मा जी लिखी बाते गलत नहीं है. यदि इस्लाम धर्म के मानने वाले उन सभी बातो का अनुकरण करें तो निश्चित रूप से वे सम्पूर्ण विश्व में वे इस्लाम का परचम लहराता ही देखेंगे. वे चाहेंगे की सभी मानव जाति मुसलमान हो जाय. संसार में एक भी मूर्तिपूजक न दिखाई दे, जैसा की लादेन की सोच है. मैं इस बात को भी मानता हूँ की आज के दौर में अधिकतर मुसलमान बाबर और लादेन का अनुकरण करते हैं. आज भी जब पाकिस्तान क्रिकेट जीतता है तो पटाखे छोड़ते हैं , मिठाइयाँ भी बांटते हैं. वे यह भूल जाते हैं की उसी पाकिस्तान में भारत से गए मुसलमान आज भी {मोहाजिर} शरणार्थी और बंगलादेश गए मुसलमान "बिहारी मुसलमान" कहे जाते हैं. 
मैं यह गर्व से कह सकता हूँ की भारत में रहने वाले मुसलमान आज भी विश्व के सबसे सुरक्षित स्थान में रहते है. यह उन्हें अपना धार्मिक आयोजन करने की पूरी आज़ादी है. . यह हिन्दुओ के ही प्रेम और भाईचारे के देन है.
इसके बावजूद जो मुसलमान इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाये वह हमें मंजूर नहीं है. मुसलमान यदि गुजरात कांड को गलत और  कश्मीर में हिन्दुओ पर हो रहे जुल्म का समर्थन करे तो यह भी मुझे मंजूर नहीं है. 
पर इसके लिए इस्लाम को दोषी ठहराना कहा तक उचित है. उन सभी बातों को गलत मानना  चाहिए जो वास्तव में गलत हैं.
महान वैज्ञानिक और पूर्व  राष्ट्रपति कलाम साहब, वीर अब्दुल हमीद, अशफाकुल्लाह खान भी तो मुसलमान है. 
क्रिकेट में भारत की तरफ से खेलने वाले ज़हीर खान भी तो मुसलमान हैं. पर इनका आदर तो सभी करते है, शायद आप लोग भी..
वही इस्लाम के नाम पर तिरंगा जलाने वाले, हिन्दुओ पर अत्याचार करने वाले, पाकिस्तान की जीत पर तालियाँ बजाने वाले, हिन्दू धर्म शास्त्रों पर अंगुली उठाने वाले, मकबूल फ़िदा हुसैन जैसे देवी देवताओ का नंगा चित्र बनाने वाले मुसलमानों को मैं नहीं स्वीकार करता. 
ऐसे लोंगो के लिए श्री राम का धनुष और कृष्ण का सुदर्शन चक्र उठाने से भी हमें परहेज नहीं है. इसे न तो हिंसा कही जाएगी और न हत्या, यह वध होता है और दुष्टों, राक्षसों का वध करना तो हिन्दू धर्म की परम्परा रही है. हिंसा  के लिए मैं हथियार उठाने का समर्थक नहीं हूँ पर वध के लिए हथियार उठाने को सदैव तैयार हूँ..
पर मैं आप लोंगो से पूछना चाहता हूँ आज कितने हिन्दू हैं जो वध के पक्षधर हैं. 

आज इस्लाम के नाम पर जो आतंक फैलाया जा रहा है, हिन्दुओ को प्रताड़ित किया जा रहा रहा है, जब उसके लिए मैं हिन्दुओ को दोषी ठहराता हूँ तो लोग मुझे बुरा भला कहने लगते है. उन्हें यह नहीं समझ में आता की मै मुल्ला हरीश हूँ या हिन्दू  हरीश सिंह हूँ. जो इंसानियत को तरजीह देता है, क्या एक मुसलमान ऐसा कर सकता है,  जुल्म सहना और चुप रहना भी तो मूक समर्थन है और यह समर्थन हिन्दू करता है. जो खुद को सेकुलर कहलाता है.
आप लोंगो से मैं कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ. . क्या ए राजा, कलमानी जैसे हिन्दुओ को हिन्दू अपना आदर्श मानेगा. ? वोट बैंक ख़राब न हो जाय इसीलिए धर्मनिरपेक्षता के नाम पर चुप रहने वाले उन हिन्दू नेताओ को आप अपना आदर्श मानेंगे जो मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ पर हो रहे अत्याचार को देखकर भी आपसी सौहार्द की बात करते हैं. .? क्या आप बसपा प्रमुख मायावती जी को अपना आदर्श मानेंगे जो भगवान राम की प्रतिमा और देवी देवताओ की प्रतिमा पर पेशाब करने{ प्रभु माफ़ करें} वाले पेरियार जैसे लोंगो के नाम पर मेले लगवाती हैं. .? क्या आप आप मुलायम सिंह को अपना आदर्श मानेंगे जो खुद को मुल्ला मुलायम सिंह कहलाना पसंद करते हैं और रामभक्तो पर इसलिए गोलियां चलवाते हैं ताकि उनका मुस्लिम वोट बैंक बचा रहे..?
यह कैसा हिंदुत्व है सच जानते हुए भी सच से मुह मोड़ता है. आप उन हिन्दुओ को क्या कहेंगे जो ऐसे लोंगो का समर्थन करके सत्ता सौप देते हैं. .. हिन्दू धर्म में भी बहुत से लोग भटके हुए हैं, उन्हें सच का ज्ञान नहीं है. क्या उन्हें गालियाँ देकर हम धर्म से जोड़ सकते हैं जी नहीं, उनके अन्दर छुपे हुए,दम तोड़ रहे हिंदुत्व को हमें जगाना होगा. यदि हमें हिन्दू और हिंदुत्व को मजबूत करना है तो प्रभु राम के आदर्शो का पालन करने के साथ दुष्टों और राक्षसों के वध को भी तैयार रहना होगा.. क्योंकि राक्षस सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं, भारी संख्या में हिन्दू चोले  में भी हैं. 
"हल्ला बोल" कौन है मैं नहीं जनता पर  मैं समझता हूँ की ब्लॉग जगत में  "हल्ला बोल" ने पहली बार हमें एक ऐसा मंच दिया है, जिस पर हम खुलकर सदियों से चले आ रहे धार्मिक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. पर सोचिये कितने हिन्दू इस ब्लॉग पर आ रहे हैं. कितने लोग इसे विवादित मानकर आना नहीं चाहते और वही लोग उन लोंगो के ब्लॉग पर जाकर समर्थन करते हैं जहा पर हिन्दू धर्म की खिल्लियाँ उड़ाई जाती हैं. हमारे आराध्य पर अंगुलियाँ उठाई जाती हैं. ऐसे लोंगो को आप किस श्रेणी का हिन्दू कहेंगे.. यहाँ पर उन मुसलमानों को भी आना चाहिए जो खुद को राष्ट्रभक्त समझते हैं, और खुलकर चर्चा करनी चाहिए. जब तक हम बात नहीं करेंगे तब तक विवाद ख़त्म नहीं होंगे.. 
कश्मीर के हालात भी बनेंगे, गोधरा भी होगा, गुजरात कांड भी होगा, पाकिस्तान की जीत पर तालियाँ भी बजेंगी, और हिन्दू मुसलमानों को गालियाँ भी देते रहेंगे, और धर्म के नाम पर हिन्दू संस्कृति पर प्रहार भी होता रहेगा.. और इसके दोषी सिर्फ मुसलमान ही नहीं वे दोमुहे हिन्दू भी होंगे जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कह कर अपनी कायरता दिखाते रहते हैं. 

प्रथम चर्चा

पहले अपना परिचय दे दूँ......एक  सनातनधर्मी भारतीय हूँ, देश की व्यवस्था से व्यथित और समाज के पतन से चिंतित. धर्म के विषय में क्रांतिकारी विचार हैं जो कदाचित परम्परावादियों के लिए अरुचिकर हों. अब इस ब्लॉग पर बुलाया गया है तो अस्वीकार करना उचित नहीं लगा......आ गया हूँ तो पहले सफाई अभियान में जुट जाना चाहता हूँ ....धुल उड़ेगी .....नाक से होते हुए मेरे ही फेफड़ों में सबसे अधिक जायेगी तो स्पष्ट है कि सर्वाधिक क्षति भी मुझे ही होगी. किन्तु सदियों से जमी धूल को साफ़ करने किसी को तो आगे आना होगा ...तो फिलहाल मैं एक सफायीवाले की भूमिका में हूँ.
     व्यावहारिक बात यह है कि लोग पहले घर के अन्दर की सफाई करते हैं और फिर बाहर की. आभ्यंतर और बाह्य स्वच्छता अभियान के क्रम में हमें अपने ऊपर लादी गयी बहुत सी वंचनाओं को भी हटाना होगा, फिर अपना परिमार्जन करना होगा ...इसके बाद बाह्य स्वच्छता में धर्म के विद्रूपों, भारतीय परिवेश में धर्म का स्वरूप, आयातित धर्मों का भारतीय परिवेश में औचित्य आदि विषयों पर मंथन और आन्दोलन का प्रयास किया जाएगा. 
      भारत के लोग यदि यह अनुभव करते हैं कि कुछ भी ठीक नहीं चल रहा ..और किसी बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है तो इसके लिए एक रणनीति बनानी होगी, यूँ ही कहीं भी घात-प्रतिघात से कोई सफल क्रान्ति नहीं की जा सकती.
      मैं आप सबसे एक बात जानना चाहता हूँ, भाषा से लेकर संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्म तक के प्रत्येक क्षेत्र में हमारी श्रेष्ठता के बाद भी हमें हजारों वर्षों की पराधीनता क्यों झेलनी पडी ? मध्य एशिया एवं उत्तर-पूर्वी एशिया के आततायी विदेशी आक्रमणकारियों को इसके लिए उत्तरदायी ठहराना बड़ा सरल है. किन्तु मैं बड़े ही स्पष्ट और विनम्र शब्दों में कहना चाहता हूँ कि दूसरों को दोष देने से हम स्वयं के दोषों को पहचानने में भारी त्रुटि कर बैठते हैं. परिणाम होता है एक लंबा उलझाव. हमें अपने ही दोषों को पहचान कर उनका परिहार करना होगा.  मार्गावारोध तभी दूर हो सकेगा. तो आज और अधिक नहीं बस .....आज की विनम्र प्रस्तुति माँ भारती के श्री चरणों में सादर समर्पित-

सजने से पहले टूट कर सपने बिखर गए  /
आज़ाद  है ये  देश फिर भी लोग मर गए //
देव-दैत्य , सुर-असुर  थे  कब  यहाँ  नहीं / 
जय बिना संग्राम के मिल पाती है नहीं //
प्रतीक्षा हम अवतार की क्यों जाने कर रहे /
हैं शक्ति से संपन्न फिर भी बेबस ही रहे //
गुणगान ही अतीत का हम करते रह गए /
और विश्व दौड़ में प्रथम ये म्लेच्छ  आ गए //

हम आर्य हैं महान हैं इस भ्रम में जी रहे /
जाने किस व्यामोह में मोहित बने हुए //  
कर्म योग गीता का हम पा नहीं सके /
बस आत्म मुग्धता में हम खोये रह गए //
गद्दारियों से है भरा अतीत कम नहीं /
देश को ही बेचने में शर्म भी नहीं //
विश्वास अपने रक्त का ही तोड़ते रहे /
हम रूस या अमेरिका को ताकते रहे //
जो डर गया वो पीढ़ियों को दास कर गया /
भिड़ गया जो रण में वो ही ताज पा गया //
हम दासता में  उनकी जी के खुश बने रहे /
क्या है स्वाभिमान यह तो भूल ही गए //
आतंक के हों दंश या संकट हो कोई भी /
सदियों से सहते-सहते हम अभ्यस्त हो गए //
जी लिया विदेशियों ने ज्ञान वेद का /
सार पा लिया उन्होंने कर्म योग का //
वे देखते ही देखते सिरमौर बन गए /
हम वेद पाठ करके जाने कबके सो गए //


अवतार लेगा कोई इसकी राह छोड़ दो /
बनके भगीरथ खुद ही ये बाधाएं तोड़ दो //
संकटों की बाढ़ की हर धार मोड़ दो /
पल-पल जो बोले झूठ वो जिव्हा मरोड़ दो //
आतंक जिनका धर्म है मुंह उनका तोड़ दो /
कुछ काली की माला में भी नर-मुंड जोड़ दो //
जिन दीपकों से घर जले उनको बुझाना है /
रोशन करे जो घर वही दीपक जलाना है //
राणा-शिवा जैसा वही जौहर दिखाना है /
जग में हमें फिर से वही सम्मान पाना है //
अभी तो राम-कृष्ण-आज़ाद-बोस का काम बाकी है /
जो क़र्ज़ चुका दे धरती का वह दाम बाकी है //
मरते नहीं वे लोग जो कुछ ऐसा कर गए /
मरने से पहले देश के कुछ काम आ गए //