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अयोध्या का सेकुलर कवि और रामभक्त



कुछ सेकुलर लोग और खबरिया चैनल बार बार कहते रहे की अयोध्या मुद्दा ख़तम हो चुका है... अरे भाई अगर ख़तम हो चुका है तो ये अपना समाचार का भोपू बंद करो और कुछ और दिखाओ...
सच ये है की राम हमारे अन्दर ही विराजमान है और उस सत्ता को ख़तम करना इन तुस्टीकरण के पुजारियों और मैकाले के अनुयायियों के बस की बात नहीं...
फिर भी एक बार मैने भी सेकुलर बनने की कोशिश कर ही डाली...आज का तथाकथित सेकुलर (या आप उसे हिन्दू विरोधी कह लें............
काफी दिनों से अयोध्या पर कुछ लिखने की सोच रहा था सोचा सेकुलरिज्म के रंग मे लिख डालू कुछ राम पर.... लेकिन कुछ पंक्तियाँ लिखने के बाद मेरे अन्दर का राम भक्त बार बार मुझे उद्वेलित करता था.... वह मुझे याद दिलाता था बाबर और औरन्जेब के अत्याचारों का... वह मुझे याद दिलाता था रानी पद्मिनी के जौहर से लेकर कश्मीरी पंडितों की व्यथा कथा... इसी द्वन्द के बिच लिखी है मैंने ये कविता.....





कश्मीर से अयोध्या तक
बस संगीनों का साया है
हे राम तुम्हारी नगरी में,
कैसा सन्नाटा छाया है...









ऐसी तो अयोध्या न थी कभी,
जहा मानवता की चिता जले..
इस मर्यादा की नगरी में,
सब खुद की मर्यादा भूले





हे राम तुम्हारी सृष्टी में
हैं कोटि कोटि गृह बसे हुए..
इस गर्भ गृह की रक्षा में,
आखिर अब कितनी बलि चढ़े...


इन लाशों के अम्बारों पर
बाबर और बाबरी बसतें हैं...
यहाँ हनुमान हैं कई खड़े...
जो राम ह्रदय में रखतें हैं...


इन विघ्नों के आवर्तों से
हम नहीं कभी अब तक हैं डरे...
हमने दधिची को पूजा है,
जो वज्र ह्रदय में रखतें हैं..

इस राम कृष्ण की धरती पर
हम भगवा ध्वज लहरायेंगे
ये हिन्दू धर्मं सनातन है
हम हिन्दू धर्म निभायेंगें

आहुति अब पूरी होगी
हम अश्वमेध को लायेंगे
जो जन्म भूमि है राम की...
वहां राम ही पूजे जायेंगे..

एक नहीं दो बार नहीं हर बार यही दोहरायेंगे
सौगंध राम की खाते हैं,हम मंदिर वहीँ बनायेंगे...
सौगंध राम की खाते हैं,हम मंदिर वहीँ बनायेंगे...



"आशुतोष नाथ तिवारी"

9 टिप्‍पणियां:

हरीश सिंह ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति आशुतोष जी, हर एक हिन्दू को यह मानना चाहिए की अयोध्या भगवान श्री राम की जन्मभूमि है. प्रभु श्री राम की मर्यादा के लिए यदि हमें अपनी जान भी न्योछावर करनी पड़े तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए. अयोध्या से हिन्दुओ की आस्था और मान-सम्मान जुडा है. हिन्दू काबा में जाकर मंदिर नहीं बना रहा है. जो मुसलमान राष्ट्रभक्त है और देश में अमन शांति चाहते हैं उन्हें अयोध्या मसले से दूर ही रहना होगा. बाबर का समर्थन करने वाले लोग राष्ट्रभक्त हो ही नहीं सकते. सुन्दर कविता आभार. मैं आपकी भावनाओ का आदर करता हूँ.

--

बेनामी ने कहा…

सत्य कहा आपने

बेनामी ने कहा…

VERY TRUE.

बेनामी ने कहा…

हल्ला बोल साहब
जिन भाईयो ने टिप्पड़ियो के माध्यम से इमेल दी है
उनको भी जल्दी शामिल करे
और ब्लाग का प्रचार तेजी से करे

हरीश सिंह ने कहा…

हम भी जुड़ेंगे "हल्ला बोल" से कृपया आमंत्रण भेंजे, editor.bhadohinews@gmail.com

गंगाधर ने कहा…

इन लाशों के अम्बारों पर
बाबर और बाबरी बसतें हैं...
यहाँ हनुमान हैं कई खड़े...
जो राम ह्रदय में रखतें हैं...
-----------
क्या बात है आशुतोष जी आपने तो झकझोर कर रख दिया/.

Abhi ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Abhi ने कहा…

बोहोत ही बढ़िया आशुतोष जी. मजा आ गया.

कौशलेन्द्र ने कहा…

आशुतोष जी ! मन के अंतर्द्वद्व के बाद भारतीय गौरव और आदर्शों के पक्ष में आपकी बुद्धि का समर्थन आदरयोग्य है.
हरीश भाया ! तने तो एकदम ठना-ठन बात कही है जी ! बाबर समर्थक व्यक्ति राष्ट्र भक्त हो ही नहीं सकता. वह मस्जिद आस्था की नहीं बाबर की बर्बरता की प्रतीक है ......उस मस्जिद की बात करने का अर्थ है उस बर्बरता की बात करना और बर्बरता को अपना आदर्श प्रदर्शित करना. मेरी समझ में नहीं आता ....यह प्रकरण तो न्यायालय में जाने योग्य है ही नहीं...सीधी सी बात है कि अयोध्या राम की थी ..और है ......बाबर तो बहुत बाद में आया था ....किसी विदेशी आक्रमणकारी का अयोध्या से क्या नाता हो सकता है भला ? यदि था भी तो हिंसा का था ...शान्ति भंग का था ...अयोध्या के लोगों की स्वतंत्रता के बलात हरण का था......ये बड़े-बड़े कानूनविद इतनी सी बात क्यों नहीं समझ पाते ? अयोध्या प्रकरण पर न्याय का पाखण्ड हो रहा है और राजनीति (दुष्टनीति शब्द अधिक उचित है ) हो रही है न्याय के नाम पर. इस पाखण्ड में शामिल सभी लोग देश भक्त नहीं हो सकते.