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मेरठ: साम्प्रादायिक हिंसा और आगजनी के बाद तनाव व्याप्त

मेरठ। बीती रात एक समुदाय के लोगों ने शहर के एक धार्मिक स्थल में जबरन प्रवेश करके कथित तौर पर वहां के धर्मगुरु की पिटाई कर दी और धार्मिक पुस्तक जला दी, जिससे उग्र भीड़ के कई जगह आगजनी और गोलीबारी करने के बाद शहर में तनाव का माहौल है।पुलिस ने बताया कि धार्मिक पुस्तक को नुकसान पहुंचाने तथा धर्मगुरु से मारपीट करने से हिंसक हुए लोगों के कई जगह आगजनी करने के बाद अब भी इलाके में तनाव का माहौल है।

स्थिति उस समय बिगड़ी जब दोनों सम्प्रदायों के लोग सड़कों पर उतर आए। उग्रभीड़ ने इस बीच तीन बसों के अलावा अन्य कई वाहनों तथा करीब 100 दुकानों में आग लगा दी। इसके अलावा भीड़ ने पुलिस चौकियों को भी आग के हवाले कर दिया। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अहतियातन आज शहर के सभी सरकारी तथा निजी स्कूलों को बंद रखने के आदेश दिए हैं।

'मेरठ दंगों में प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है'

मेरठ को साम्प्रदायिक दंगे की आग में झोंकने का प्रयास एक सुनियोजित षड्यन्त्र है। इस षड्यन्त्र की आड़ में जिस तरह से समुदाय विशेष के लोगों की दुकानों, घरों एवम् वाहनों को चुन-चुनकर आग के हवाले किया गया और स्थानीय पुलिस प्रषासन घटना स्थल पर मूक दर्षक बना रहा, वह चिन्ता का विषय है। घटना के दौरान प्रभावित क्षेत्र में लगभग डेढ़ घण्टे तक बिजली की कटौती से स्पष्ट होता है कि पूरी घटना सत्ता द्वारा प्रायोजित थी जिसमें स्थानीय प्रषासन भी सहयोग कर रहा था। यह बातें गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी एवं गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कही हैं।

कल रात मेरठ में हुये दंगे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होनें कहा कि सम्पूर्ण घटना के पीछे खरखौदा के विधायक हाजी याकूब कुरैषी की भूमिका सन्देहास्पद है। उत्तर प्रदेश सरकार सम्पूर्ण घटना की जांच न्यायधीशों के एक दल से करवाए।

8 टिप्‍पणियां:

आशुतोष ने कहा…

धर्मस्थल और धर्म की पुस्तकों को जलाना निंदनीय है..
इसको न्यायाधीश नहीं सुलझा सकते ..इसका इलाज दुनिया में एक जगह मिलता है..
गुजरात में और डाक्टर हैं नरेन्द्र मोदी..देखिये २००२ के बाद हिन्दू मुश्लिम कैसे भाई भाई हो गए..और कोई दंगा नहीं हुआ

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

देश के कई हिस्सों में इसी प्रकार दंगे हो चुके हैं. पुलिस समय पर कार्रवाई करने में पता नहीं क्यों चूकती है और अब तो छोटी-छोटी बात पर दंगा होने लगता है, पता नहीं किस प्रकार का प्रयोग सा होने लगा है.. कोई सुनियोजित साजिश ही है.. जांच कहां होनी है...

ROHIT ने कहा…

ये वही विधायक हाजी याकूब कुरैशी है. जिसने अपने माँस के कारोबार से मेरठ मे सड़ांध मचा रखी है.
जिसने अभी अपनी बेटी के निकाह मे जनता का पैसा खूब बहाया था.
सैकड़ो करोड़ लुटाये थे.
हर पुरुष बाराती को मोटर साइकिल और महिला को टीवी फ्रिज दिया था.
ये वही है जिसने मुहम्मद का कार्टून बनाने वाले का सिर काटने पर 51 करोड़ इनाम देने का एलान किया था.
दंगा भी इसी ने कराया और हिँदुओ की सैकड़ो दुकाने जलवा दी.

सुज्ञ ने कहा…

यह पवित्र भूमि इन माँसभक्षी गिद्धों का बोझ क्यों उठा लेती है।

अब इन लोगों का बुरा अंत होना ही चाहिए।

abhishek1502 ने कहा…

धार्मिक पुस्तक जलाना एक अफवाह मात्र थी , जिस का सहारा ले कर दंगा किया गया और हिन्दुओ को पुनः निशाना बनाया गया .

विजय रंजन ने कहा…

duniya bnane wale kya tere man me samayee, kaahe ko duniya banayee Toone, kahe ko duniya banayee.

chooti baat ने कहा…

jab apni sarkar hi mil gayi to aam admi
kya karega

हरीश सिंह ने कहा…

यदि धार्मिक पुस्तक जलाई गयी थी तो उसके लिए भारतीय कानून है. धर्म के नाम पर हिंसा सर्वथा अनुचित है. जिन लोंगो ने हिंसा फैलाई उन्होंने यह नहीं सोचा होगा की जिनकी दुकाने जलाई, जो शिकार बनाये गए. वे दोषी नहीं होंगे. पर जब मानसिकता में ही हिंसा हो तो उसका इलाज कैसे हो सकता है.