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धर्म कोई बुरा नहीं होता, धर्मांध बुरे हैं

मित्रो, पिछले काफी दिनों से धर्म को लेकर चर्चाएँ छिड़ी हैं, कुछ लोग इसे विवादित विषय मानकर ऐसी चर्चाओ में भाग नहीं लेना चाहते. बल्कि खुद भाग जाते हैं. जबकि मौजूदा दौर में इस बात पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए. हल्ला बोल ने एक ऐसा मंच हमें दिया है. जिस पर हम लोग अपनी बात खुलकर कह सकते है, किसी भी बात के लिए सबका अलग-अलग नजरिया होता है, जरुरी नहीं की वह बात सभी की समझ में आ जाय. समझ में तब आएगी जब  हम सौम्य शब्दों में इसकी चर्चा करेंगे. आज हिन्दू या मुसलमान की परिभाषा  क्या है यह आप लोंगो को पता हो, पर शायद हमें नहीं है. जब मैं कोई भी बात करता हूँ तो विरोध होने लगता है. आखिर क्यों ..? यदि मैं नासमझ हूँ तो आप लोग हमें समझाएं, मैं कोई ज्ञानी नहीं हूँ, एक मोटी बुद्धि का व्यक्ति भी हो सकता हूँ. आशुतोष जी का कहना है की वे मुझे समझ नहीं पाए, ऐसे तमाम लोग होंगे जो हमें नहीं समझ पायें होंगे. जब की हम समझते हैं की हमें एक दूसरे को अच्छी तरह समझना चाहिए. यदि हमें समझ नहीं है तो आप लोग ही हमें समझाईये. 
मै  पहले ही कह चुका हूँ की इस ब्लॉग के नियम हमें स्वीकार हैं. निश्चित रूप से हिन्दुओ को भगवान राम का चरित्र और आदर्श पालन करना चाहिए. वहा यह भी लिखा है की जो मुसलमान भारत माँ का सम्मान करे, वन्दे मातरम स्वीकार करे. तिरंगे का सम्मान करे, वह इस ब्लॉग का लेखक बन सकता है, यानि राष्ट्रभक्त मुसलमानों से "हल्ला बोल" को कोई आपत्ति नहीं है, फिर आप बताये क्या मुसलमान इस्लाम त्याग देगा, वह कुरान पढना छोड़ देगा. शायद नहीं..
मैंने बी.एन. शर्मा जी का भंडाफोडू  ब्लॉग पढ़ा है. और कुरान भी पढ़ा है. शर्मा जी लिखी बाते गलत नहीं है. यदि इस्लाम धर्म के मानने वाले उन सभी बातो का अनुकरण करें तो निश्चित रूप से वे सम्पूर्ण विश्व में वे इस्लाम का परचम लहराता ही देखेंगे. वे चाहेंगे की सभी मानव जाति मुसलमान हो जाय. संसार में एक भी मूर्तिपूजक न दिखाई दे, जैसा की लादेन की सोच है. मैं इस बात को भी मानता हूँ की आज के दौर में अधिकतर मुसलमान बाबर और लादेन का अनुकरण करते हैं. आज भी जब पाकिस्तान क्रिकेट जीतता है तो पटाखे छोड़ते हैं , मिठाइयाँ भी बांटते हैं. वे यह भूल जाते हैं की उसी पाकिस्तान में भारत से गए मुसलमान आज भी {मोहाजिर} शरणार्थी और बंगलादेश गए मुसलमान "बिहारी मुसलमान" कहे जाते हैं. 
मैं यह गर्व से कह सकता हूँ की भारत में रहने वाले मुसलमान आज भी विश्व के सबसे सुरक्षित स्थान में रहते है. यह उन्हें अपना धार्मिक आयोजन करने की पूरी आज़ादी है. . यह हिन्दुओ के ही प्रेम और भाईचारे के देन है.
इसके बावजूद जो मुसलमान इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाये वह हमें मंजूर नहीं है. मुसलमान यदि गुजरात कांड को गलत और  कश्मीर में हिन्दुओ पर हो रहे जुल्म का समर्थन करे तो यह भी मुझे मंजूर नहीं है. 
पर इसके लिए इस्लाम को दोषी ठहराना कहा तक उचित है. उन सभी बातों को गलत मानना  चाहिए जो वास्तव में गलत हैं.
महान वैज्ञानिक और पूर्व  राष्ट्रपति कलाम साहब, वीर अब्दुल हमीद, अशफाकुल्लाह खान भी तो मुसलमान है. 
क्रिकेट में भारत की तरफ से खेलने वाले ज़हीर खान भी तो मुसलमान हैं. पर इनका आदर तो सभी करते है, शायद आप लोग भी..
वही इस्लाम के नाम पर तिरंगा जलाने वाले, हिन्दुओ पर अत्याचार करने वाले, पाकिस्तान की जीत पर तालियाँ बजाने वाले, हिन्दू धर्म शास्त्रों पर अंगुली उठाने वाले, मकबूल फ़िदा हुसैन जैसे देवी देवताओ का नंगा चित्र बनाने वाले मुसलमानों को मैं नहीं स्वीकार करता. 
ऐसे लोंगो के लिए श्री राम का धनुष और कृष्ण का सुदर्शन चक्र उठाने से भी हमें परहेज नहीं है. इसे न तो हिंसा कही जाएगी और न हत्या, यह वध होता है और दुष्टों, राक्षसों का वध करना तो हिन्दू धर्म की परम्परा रही है. हिंसा  के लिए मैं हथियार उठाने का समर्थक नहीं हूँ पर वध के लिए हथियार उठाने को सदैव तैयार हूँ..
पर मैं आप लोंगो से पूछना चाहता हूँ आज कितने हिन्दू हैं जो वध के पक्षधर हैं. 

आज इस्लाम के नाम पर जो आतंक फैलाया जा रहा है, हिन्दुओ को प्रताड़ित किया जा रहा रहा है, जब उसके लिए मैं हिन्दुओ को दोषी ठहराता हूँ तो लोग मुझे बुरा भला कहने लगते है. उन्हें यह नहीं समझ में आता की मै मुल्ला हरीश हूँ या हिन्दू  हरीश सिंह हूँ. जो इंसानियत को तरजीह देता है, क्या एक मुसलमान ऐसा कर सकता है,  जुल्म सहना और चुप रहना भी तो मूक समर्थन है और यह समर्थन हिन्दू करता है. जो खुद को सेकुलर कहलाता है.
आप लोंगो से मैं कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ. . क्या ए राजा, कलमानी जैसे हिन्दुओ को हिन्दू अपना आदर्श मानेगा. ? वोट बैंक ख़राब न हो जाय इसीलिए धर्मनिरपेक्षता के नाम पर चुप रहने वाले उन हिन्दू नेताओ को आप अपना आदर्श मानेंगे जो मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ पर हो रहे अत्याचार को देखकर भी आपसी सौहार्द की बात करते हैं. .? क्या आप बसपा प्रमुख मायावती जी को अपना आदर्श मानेंगे जो भगवान राम की प्रतिमा और देवी देवताओ की प्रतिमा पर पेशाब करने{ प्रभु माफ़ करें} वाले पेरियार जैसे लोंगो के नाम पर मेले लगवाती हैं. .? क्या आप आप मुलायम सिंह को अपना आदर्श मानेंगे जो खुद को मुल्ला मुलायम सिंह कहलाना पसंद करते हैं और रामभक्तो पर इसलिए गोलियां चलवाते हैं ताकि उनका मुस्लिम वोट बैंक बचा रहे..?
यह कैसा हिंदुत्व है सच जानते हुए भी सच से मुह मोड़ता है. आप उन हिन्दुओ को क्या कहेंगे जो ऐसे लोंगो का समर्थन करके सत्ता सौप देते हैं. .. हिन्दू धर्म में भी बहुत से लोग भटके हुए हैं, उन्हें सच का ज्ञान नहीं है. क्या उन्हें गालियाँ देकर हम धर्म से जोड़ सकते हैं जी नहीं, उनके अन्दर छुपे हुए,दम तोड़ रहे हिंदुत्व को हमें जगाना होगा. यदि हमें हिन्दू और हिंदुत्व को मजबूत करना है तो प्रभु राम के आदर्शो का पालन करने के साथ दुष्टों और राक्षसों के वध को भी तैयार रहना होगा.. क्योंकि राक्षस सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं, भारी संख्या में हिन्दू चोले  में भी हैं. 
"हल्ला बोल" कौन है मैं नहीं जनता पर  मैं समझता हूँ की ब्लॉग जगत में  "हल्ला बोल" ने पहली बार हमें एक ऐसा मंच दिया है, जिस पर हम खुलकर सदियों से चले आ रहे धार्मिक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. पर सोचिये कितने हिन्दू इस ब्लॉग पर आ रहे हैं. कितने लोग इसे विवादित मानकर आना नहीं चाहते और वही लोग उन लोंगो के ब्लॉग पर जाकर समर्थन करते हैं जहा पर हिन्दू धर्म की खिल्लियाँ उड़ाई जाती हैं. हमारे आराध्य पर अंगुलियाँ उठाई जाती हैं. ऐसे लोंगो को आप किस श्रेणी का हिन्दू कहेंगे.. यहाँ पर उन मुसलमानों को भी आना चाहिए जो खुद को राष्ट्रभक्त समझते हैं, और खुलकर चर्चा करनी चाहिए. जब तक हम बात नहीं करेंगे तब तक विवाद ख़त्म नहीं होंगे.. 
कश्मीर के हालात भी बनेंगे, गोधरा भी होगा, गुजरात कांड भी होगा, पाकिस्तान की जीत पर तालियाँ भी बजेंगी, और हिन्दू मुसलमानों को गालियाँ भी देते रहेंगे, और धर्म के नाम पर हिन्दू संस्कृति पर प्रहार भी होता रहेगा.. और इसके दोषी सिर्फ मुसलमान ही नहीं वे दोमुहे हिन्दू भी होंगे जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कह कर अपनी कायरता दिखाते रहते हैं. 

36 टिप्‍पणियां:

Abhishek ने कहा…

@हरीश जी
आज आपने के बोहोत ही शानदार पोस्ट लिखी है. किन्तु प्रॉब्लम ये है यहाँ कोई मुसलिम आके अपने उन बंधुओ के बारे में विरोध प्रकट ही नहीं करता जो गलत कर रहे है. आपने भी एक पोस्ट लिखी थी डंके की चोट ब्लॉग में "क्या यही इस्लाम है" किन्तु आपकी इस पोस्ट पर भी किसी मुसलिम ने कुछ नहीं बोला अब इसका तो यही मतलब हो सकता है की सारे मुसलिम ब्लोगर उनके इन मुसलिम बंधुओ को मूक समर्थन दे रहे है.

हरीश सिंह ने कहा…

अभिषेक जी, मैं यही बात शुरू से कह रहा हूँ, पर कोई समझना ही नहीं चाहता, मैं जब इस ब्लॉग पर आया और नियम पढ़े तभी समझ गए की यह एक ऐसा मंच है जहाँ पर "मुस्लिम ब्लोगरो" को ही नहीं बल्कि उन कथित हिन्दुओ को भी चर्चा करनी चाहिए. जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कह कर मुह छिपा रहे हैं. जो मुस्लिम यहाँ विरोध करने नहीं आ रहे हैं, या चर्चा करने नहीं आ रहे हैं. वे या तो लादेन और बाबर के इस्लाम का समर्थन करते हैं. या फिर इस्लाम का सच देखकर चुप्पी साध लिए हैं, हो सकता है सच्चाई देखकर उनकी बोलती बंद हो और वे शर्मिंदा होकर मुह छिपा रहे हैं. जो बात हम अपने ब्लॉग "डंके की चोट पर" कहना चाहते थे शायद उसमे कही न कही कमिया थी या कहने का तरीका गलत था, पर भाव यही थे, अब वही काम "हल्ला बोल" महोदय बेहतर तरीके से अंजाम दे रहे हैं. पर सेकुलर हिन्दू कब कायरता छोड़ेंगे, इस पर भी सोचना होगा.

सुज्ञ ने कहा…

हरीश जी,

होंगे दोषी दोमुहे हिन्दु,गद्दार हिन्दु, और धर्मनिरपेक्ष हिन्दु। लेकिन उनकी घर वापसी के लिये मार्ग रखना पडेगा। सारा आरोप उनपर जड देने से हिन्दुत्व और भारतीय संस्कृति के दुश्मनों को बरी नहीं किया जा सकता।

पहले प्रथम कक्षा के मुख्य आरोपियों से संस्कृति को बचाना है। घर के भेदीयों को बादमें समझाया भी जा सकता है, न माने तो अन्तिम उपाय के तौर पर ही उन्हें परित्यक्त करना होगा। अन्यथा एकता दृढ न रहेगी।

इस मंच को हिन्दुओं का मंच ही रहना चाहिए, आपसी चर्चा के नाम पर मुसलमानों को भडास निकालने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। ऐसी बातों के लिये उनके पास कई मंच है।
यहाँ न कोई भ्रांति है, न किसी उस दृष्टिकोण की आवश्यकता।

आपने पिछली हमारी टिप्पणी का जवाब न दिया मंत्र और आयत छोडने के बारे में?

आप इजाजत दें तो बहुत कुछ पूछना है… आपके लेखों और विचारधारा के बारे में।

chooti baat ने कहा…

सारे मुसलिम ब्लोगर उनके इन मुसलिम बंधुओ को मूक समर्थन दे रहे है.

हरीश सिंह ने कहा…

sugy ji ham charcha awshy karna chahenge, aap likhiye main jawab rat ko likhoonga, abhi nikal raha hu. jaruri kam hai.

आशुतोष ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
आशुतोष ने कहा…

अभी एक मुसलमान बंधू से बात हो रही थी..खुल कर चर्चा हुई ..
उन्होंने बोला की हम आतंकवाद नहीं करते मगर जो करते हैं उनको मूक समर्थन देते हैं ताकि हिन्दू हमें दबाये नहीं..
हास्यास्पद था हिन्दू उन्हें दबाये नहीं का विचार मगर ध्यान से देख्हें तो सत्यता यही है...
अब कुछ बाद हिन्दू धर्म की...
यहाँ सेकुलर नामर्द श्वान ज्यादा हो गए हैं..अब इस ब्लॉग पर देखिये कितने हिन्दू आ रहें है मगर फालो करके चेहरा दिखने में गद्दारों की सेकुलारियत चली जाएगी...वहीँ किसी मुस्लिम ब्लॉग पर जाएँ देखे किस तरह वो एकजुट हैं यही उनकी शक्ति है..
अभी मैं कुछ इस्लाम के विरोध में लिखू तो मुश्लिम गाली दे समझ में आता है ये नामर्द सेकुलर कुत्ते भी हाँ में हाँ मिलते हुए भोंकने लगते हैं.. यही गद्दार हैं पतन का कारन..
कभी किसी मुश्लिम को देखा है अपने भाइयों को गाली देते हुए...आपस में कितना भी कटे मारें जब बात हिन्दू की आई तो सब एकजुट हो जाते है..

@हरीश जी : जब सेकुलर नामर्दों की फ़ौज खड़ी हो गयी है तो उनको कडवी जड़ी बूटियां खिलाकर उनका पौरुष जगाना और याद दिलाना पड़ता है..आप यहाँ हिन्दू धर्म की पहले अच्छी बातें लिखना शुरू करे जब आप के पास विषय ख़तम हो जाए तो गद्दारों की बात करें..इतिहास गवाह है गद्दारों की कोई जात नहीं होती ..आज हिन्दू मूर्ति पर मूतते हैं तो कल जरुरत पड़ने पर मस्जिद या चर्च में वो ही गद्दार मल त्याग भी कर सकते हैं...उनसे अच्छा तो मुश्लिम है जो गलत ही सही अपने धर्म का है..

सुज्ञ ने कहा…

हरीश साहब,

प्रश्न 1- वह मंत्र-आयत वाली टिप्पणी का आपका क्या उत्तर है?

प्रश्न 2- आपने विचार तो एक हिन्दु धर्मनिरपेक्ष की शैली में रखे, और हिन्दु-सेक्यूलरों को ही गाली दे रहे है, यह कैसे?

क्रांतिकारी हिन्दोस्तानी देशभक्त ने कहा…

अच्छी पोस्ट लिखी है

हरीश सिंह ने कहा…

सुग्य जी, आपके पहले प्रश्न के उत्तर में मैं माफ़ी चाहूँगा क्योंकि हिन्दू धर्म में कोई मन्त्र या कोई प्रकरण ऐसा है ही नहीं जो हिंसा प्रदर्शित करता है. बल्कि यही एक धर्म ऐसा है जो प्रेम और भाईचारा सिखाता है, पर इसी प्रेम का अधिकतर मुसलमान फायदा उठाते है, जबकि कुरान मैंने विधिवत पढ़ा है और उसमे बहुत सी बाते ऐसी है जो मानवता और इंसानियत के विरुद्ध हैं.
यदि मुसलमान चाहता है की हम उसका सम्मान करे तो उन बातो का उसे खुद विरोध करना होगा,
२.. मैं धर्मनिरपेक्ष नहीं हूँ. मैं कट्टर हिन्दू हूँ इसीलिए इंसानियत की बात करता हूँ. इंसानियत सिर्फ हिन्दुओ में है. मैं उन हिन्दुओ का विरोध करता हूँ जो खुद को सेकुलर कहकर कायरता दिखाते हैं. मेरी पोस्ट से यदि आपको ऐसा लगा की मैं सेकुलर हूँ तो यह आपकी भूल है. मैं उन हिन्दुओ का हमेशा विरोध करूँगा जो मुसलमानों का मनोबल बढ़ा रहे हैं,
आज उन्ही कायरों की वजह से यह परिश्तिथियाँ पैदा हुई है. वोट की राजनीती में वे देश को बेचने का काम कर कर रहे हैं.ऐसे गद्दारों को मैं पसंद नहीं करता.
--

हरीश सिंह ने कहा…

और आशुतोष जी आप तो कहते हैं की आप हमको समझ नहीं पाए है पर आप खुद आज मेरी ही भाषा बोल रहे हैं. मैं भी तो यही चाहता हूँ की हिन्दू जगे और वह करे जो उसे करना चाहिए. जो मुसलमान हैं वे हिन्दुओ की बुराई करे यह बात तो समझ में आती है पर जब यही काम हिन्दू करेगा तो हम सदैव उस पर अंगुली उठाएंगे. आपराध करने वाले से बड़ा दोषी वह है जो इन्हें बढ़ावा दे रहा है.

कौशलेन्द्र ने कहा…

इस ब्लॉग पर एक सकारात्मक और सुखद बात यह हो रही है कि काई और जलकुम्भी की घनी मोटी परतें हट रही हैं .....सरोवर का स्वच्छ नीर दृष्टव्य हो उठा है. निश्चित ही ऐसा मंच निर्मित करने के लिए हल्ला बोल के अनाम सूत्रधार प्रशंसा के पात्र हैं . हरीश जी के विचारों को लेकर जो द्विविधा थी अब शनैः-शनैः दूर होती जा रही है.....उनकी विचारधारा की दिशा स्पष्ट होती जा रही है.
हमें आज के सेक्युलर (इसका हिन्दी में अर्थ जो भी हो पर धर्मनिरपेक्ष के भाव में तो नहीं है ) और कबीर दास एवं स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों के अंतर को अच्छी तरह समझना होगा. कबीरदास धार्मिक समदृष्टि के सिद्धांत के पोषक थे, स्वामी दयानंद सरस्वती हिन्दू पाखण्ड को दूर कर शुद्ध आर्य संस्कृति की पुनर्स्थापना के क्रांतिकारी थे. जब कि आज का भारतीय सेक्युलर केवल और केवल अवसरवादिता का पोषक और आर्य संस्कृति का शोषक भर है. मैं इस मंच से बड़े ही स्पष्ट शब्दों में इस सेक्युलरिज्म का कडा विरोध करता हूँ.
आज के तथाकथित सेक्युलर्स और कम्यूनिस्ट्स में धर्म के विषय में मैंने एक समानता देखी है और वह यह कि ये दोनों ही लोग सनातन हिन्दू धर्म और उनकी परम्पराओं को तो जी भर कर कोसते हैं पर इफ्तिखार की दावत में या एक्समस के उत्सवों में खुल कर न केवल भाग लेते हैं अपितु बाना भी वैसा ही धारण करने में गौरवान्वित होते हैं. इनका सारा सेक्युलरिज्म केवल सनातन धर्म के विरुद्ध विषवमन के लिए ही है ...हर समाज में कुछ न कुछ बुराईयाँ होती हैं ...(हम पूर्ण आदर्श की शत प्रतिशत आशा करके स्वयं को धोखे में ही रखेंगे) .....पर ये सेक्युलर हिन्दू इतर समाज के बारे में आश्चर्य जनक रूप से मौन धारण किये रहते हैं . निश्चित ही ये लोग किसी धर्म के अनुयायी नहीं होते ...इनका एक मात्र धर्म सत्ता सुख की प्राप्ति के छद्म उपायों में ही निहित है ...मैं इन लोगों को अधर्मी संज्ञा देना चाहूंगा . .....तथापि, जैसा कि हरीश जी ने कहा - हमारे द्वार उनके लिए भी सदा खुले रहने रहने चाहिए....क्योंकि यह हमारी रणनीति का एक भाग तो है ही सनातन धर्म का आदर्श भी है. धर्म के विषय में हमें अन्यों से तुलना करने की आवश्यकता अभी नहीं है बल्कि हमें तो स्वयं से ही बार-बार तुलना करनी है ...प्रतिस्पर्धा करनी है.

सुज्ञ ने कहा…

हरीश जी,
एक संशय और है………आपके ब्लॉग डके की चोट पर एक पोस्ट में आपके यह विचार है………
“कट्टर हम मुसलमानों को कहते हैं पर कट्टरता हिन्दुओ की नस में भरी है. जो दर्शन सनातन धर्म में था वही दर्शन इस्लाम में है. मुसलमान ही आज के दौर में सनातन धर्म का पालन कर रहा है. हिन्दू तो भटक गया है उसे तो यह भी नहीं पता की उसका धर्म क्या है. ”

क्या यह आपके स्थिर विचार है?

निशांत ने कहा…

धर्म के नाम पर उन्माद करना
कतई बर्दाश्त नहीं होगा

अपने कुछ लोगों की रक्षा के लिए
इंसानियत को शर्मशार करना
एक भारतीय होने के नायते सोभा नहीं देता
चाहे वो किसी धर्म के हो

हर धर्म में अच्छी बातें भी होती हैं
और हम इंसानों के जैसा सोच कर उन बातों को ही ग्रहण कर ले
तो देश का सम्मान बढेगा
देश हित सर्वोपरि है ..
वेदों के श्लोकों में भी देश को ही सर्वोपरि बताया गया है
राम जी ने भी सभी तबके के लोगों के मन में जगह बनायीं थी

अंध विश्वाश नहीं होनी चाहिए

कुतर्क करके मनमानी नहीं चलेगी

वेदों के अनुसार अगर निरामिष भोजन सर्वोपरि है
इससे बौधिक विकास होता है ,तामसिक प्रवितियाँ नष्ट होती है
तो ये कतई गलत नहीं है..
सुश्रुता,चरक ,च्यवन आदि ऋषियों ने बहुत पहले इसे साबित किया है..

जय हिंद..
जय मानवता
जय श्री राम ..

kalagi avataar aayega aur paap ka ant hoga jab ham apne mail ko saaf karenge
aur ek udaharan banenge aane waale pidhi ke liye

isi par ek kavita likhi hai abhi abhi

http://abhishekinsight.blogspot.com/2011/04/blog-post_27.html

Dwarka Baheti 'Dwarkesh' ने कहा…

हरीशजी,
आप तो गीता के जानकर हैं.सब से पहले हर मानव को यह जानना चाहिये कि धर्म क्या है ?आज से ५ हजार साल पहले जब ईसाई-धर्म पैदा भी नहीं हुआ था व इस्लाम-धर्म का आता-पता भी नहीं था, उस समय गीता में जब भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से धर्म कि बात करते हैं तो वह धर्म कौन सा था?
करते हुए निस्वार्थ ही, स्व-स्वाभाविक कर्म,
अन्त जहाँ सब पंथ का, उस शिखर पहुँचना धर्म.
अतः हमें स्वार्थी,भ्रष्टाचारी,पदलोलुप,'डिवाइड एंड रुल',वाले नेताओं से बचना चाहिये एवम सच्चे धर्म का प्रचार व प्रसार करने के लिए इस 'हल्ला बोल' का इस्तेमाल करना चाहिये.तभी एक सुसंस्कृत,समृद्ध,एकजुट राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे.

सुज्ञ ने कहा…

हल्ला बोल के सूत्रधर जी,

कृपया "जय श्री राम" शब्दों से अग्नी का इफेक्ट निकाल लें। शौर्य-आक्रोश के लिये वहां धनुष-बाण भी दर्शित किये जा सकते है।

किलर झपाटा ने कहा…

प्यारे बुल्ले भाई याने हरीश जी,
आज आपने बहुत ही अच्छी पोस्ट लिखी है। खिंचाई दोनों तरफ़ के धर्मांधों और फ़ाल्तू पंचाइतियों (जमाल आदि) की होना चाहिये। करेक्ट हैं आप आज। आय एम विथ यू।

किलर झपाटा ने कहा…

डियर हल्ला बोल,
यू आर गोइंग ग्रेट।
कैरी ऑन विथ इंसानियत ऑन टॉप प्रायोरिटी। पीपुल विल सी यू विथ रिस्पेक्ट वन डे। आय एम विथ यू टू।

सुज्ञ ने कहा…

हरीश जी,

अब चर्चा करें आपकी आज की इस पोस्ट पर,

पहले तो मैं शिर्षक में ही उलझ कर रह गया!!

शिर्षक है…1-धर्म कोई बुरा नहीं होता, 2- धर्मांध बुरे हैं
1-धर्म कोई बुरा नहीं होता--- धर्म के बुरे होने की परिभाषा, मैं नहीं जानता,बुरा किसे कहा जाता है, क्या होता है। किन्तु यह सत्य है कि कईं विधर्मी दृष्टिकोण सर्वथा मिथ्या और भ्रांत उपदेश है। मैं तो कईं कुलत पुलिंदों को 'धर्म' ही नहीं मानता। अब इन ओरो को सुहाती शालीन पर डरी डरी वाणी कि'कोई भी बुरा नहीं होता' के क्या मायने रह गये है। और अगर कोई भी धर्म? बुरा नहीं होता तो हम यहाँ 'हल्ला-बोल' पर अलग चौकी खोले क्यों बैठे है?

2- धर्मांध बुरे हैं---- धर्मांध से आपका अभिप्राय स्वयं के धर्म को सदगुणों के आधार पर श्रेष्ठ कहने से, और बिना अशान्ति के भय एवं घिघियाये बिना गलत मत को गलत कहने से है या धर्म की श्रेष्ठता का गौरव लेने से है, तो यहाँ हम सभी हल्लांग धर्मांध ही है।

अपने ही धर्म के प्रति समर्पित, और उसे ही श्रेष्ठ मानने को दृढ प्रतिज्ञ है, साथ ही विधर्मी प्रचार का प्रतिकार करते है, इसलिये हमें यह धर्मांध विशेषण स्वीकार है, मैं मानता हूँ यही 'हल्ला बोल' का स्वरक्षा उद्देश्य है।

हरीश सिंह ने कहा…

सुज्ञ जी, "डंके की चोट पर" हमने कहा ...“कट्टर हम मुसलमानों को कहते हैं पर कट्टरता हिन्दुओ की नस में भरी है. जो दर्शन सनातन धर्म में था वही दर्शन इस्लाम में है. मुसलमान ही आज के दौर में सनातन धर्म का पालन कर रहा है. हिन्दू तो भटक गया है उसे तो यह भी नहीं पता की उसका धर्म क्या है. ”
हिन्दुओ की उस कट्टरता का मैं विरोधी हूँ जिसे कुरीति कहते हैं, हिन्दू धर्म के प्रति उतना गंभीर नहीं है जितना कुरीतियों का पोषक करने में है. और यही कुरीतियाँ ही हमें कमजोर कर कर रही है. कितने मुसलमान और ईसाईयों को आपने धर्म परिवर्तन कर हिन्दू बनते देखा है. जबकि हिन्दुओ के धर्म परिवर्तन की ख़बरें हमेशा प्रकाश में आती हैं. आशुतोष जी की टिप्पणी पढ़े आप, बहुत ही सार्थक बातें लिखी हैं उन्होंने. धर्म के नाम पर मुसलमान जितना एकजुट है उतना हिन्दू नहीं है, और यही दूरियां हमारे लिए खतरनाक है, जाति-पाति, छुआछूत के नाम पर हम बंटे हुए हैं. जिसका फायदा अन्य लोग उठाते हैं.
२....... आप जानते है हमलोग जिस धर्म का प्रतिनिधित्व करते है. वही सबसे पुराना धर्म है. इसके पश्चात् जितने धर्म या संप्रदाय बने वह सनातन धर्म के ही अंग हैं, जब धर्मो या सम्प्रदायों का सृजन हुआ. तो उनकी धार्मिक पुस्तके भी लिखी गयी. मुसलमान भले ही कहें की कुरान आसमान से उतारी गयी पुस्तक है, पर इस बात को मैं नहीं मानता, आसमान में कोई प्रेस नहीं लगा है और अल्लाह को क्या केवल अरबी ही आती थी, अल्लाह की वाणी को मोहम्मद लिखते थे, या उनके कहने पर अन्य लोग लिखते थे............... खैर जो भी बाते है वे विश्वास करने लायक नहीं है. वहा पर कुछ लोंगो ने विचार कर इस्लाम की स्थापना की और सनातन धर्म के धर्मशास्त्रो की कुछ बातें लेकर और कुछ अपनी सुविधानुसार लिखकर कुरान की रचना की होगी.. आप भी देखिये अधिकतर बाते मिलती हैं. { आप उन बातों पर मुझसे अब प्रश्न मत करियेगा... क्योंकि यहाँ हम कुरान का उल्लेख करने नहीं आये हैं. }
हिन्दुओ को धर्म के प्रति उसी तरह कट्टर होना चाहिए जैसे मुसलमान हैं, धर्म के प्रति समर्पण वैसे ही होना चाहिए. पर हम तो सेकुलर {कायर} और भारतीय कहकर मुह चुरा लेते हैं. जो हिन्दू धर्म के प्रति समर्पित नहीं हो सकता वह भारत माँ के प्रति भी समर्पण नहीं दिखा सकता...
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'Dwarkesh' जी मैं आपकी बात से पूर्ण सहमत हूँ, और आप बड़े हैं. मैं आपसे माफ़ी चाहूँगा मैं गीता का जानकर नहीं हूँ, विद्वान गीता की एक-एक पंक्तियों की व्याख्या जिस तरह करते हैं, उसे सुनकर लगता है की अभी तो मैं प्राथमिक कक्षा में पढ़ रहा हूँ. पर इतना अवश्य मानता हूँ गीता को विश्व का धर्मशास्त्र घोषित करना चाहिए.
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झपाटा जी, कम से कम आपके विचार मेरे प्रति बदले तो सही, आपकी राय सही है, मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहूँगा पर मुस्लिम ब्लोगरो को आना चाहिए. अच्छी बातो का ग्रहण और गलत बातो का विरोध तो सभी को करना चाहिए. एक बात आपकी बहुत अच्छी लगती है, जानते हैं क्या...... ही ही ही
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सुग्य जी, शीर्षक का भाव आपके मन में जो आया उसे मैं गलत नहीं कहूँगा........... पर जब मैं लिख रहा था तो उस समय........... "धर्म कोई बुरा नहीं होता" का मतलब है जब सभी धर्म की जननी सनातन धर्म है और अन्य धर्मो के धर्मशास्त्र सनातन धर्म के ग्रंथो का अपभ्रंस तो कोई धर्म बुरा कैसे,
धर्मांध बुरे इसलिए है की उन्ही पुस्तको में लिखी अच्छी बातो का उदाहरण देंगे पर पालन नहीं करेंगे. यदि हमें विश्वशांति लानी है तो जिन लोंगो के धर्म शास्त्रों में गलत बाते लिखी हैं, उनका विरोध वे खुद करें और मानने से इंकार कर दे. हिन्दुओ ने ऐसी कई बातो को तरजीह न देते हुए उन बातो की तिलांजलि दी है. और काफी बदलाव भी हो रहे है... हम धर्म का पालन करे, पर धर्म को हथियार न बनाये, आज इस्लामिक आतंकवाद क्या है. वे लोग धर्म को हथियार बनाकर इंसानियत की हत्या कर रहे हैं. और आम मुसलमान चुप्पी साधकर उनका मूक समर्थन. यह धर्मान्धता नहीं तो और क्या है ..

mahendra srivastava ने कहा…

मै पहली बार आपके ब्लाग पर आया हूं। वाकई अच्छे विचार हैं।

सुज्ञ ने कहा…

हरीश जी,
'सनातन' से इस तरह की समानता से हम सहमत नहीं। सत्य, इमानदारी, दान अच्छा व्यवहार हर दर्शन- दृष्टिकोण के उपदेशों में उपलब्ध है। मात्र इस आधार पर किसी को समकक्ष खडा करना या सनातन के अंग सम निरूपित करना, कम से कम मुझे तो स्वीकार्य नहीं है।

समान बातें, यकसां आदि भ्रमजाल है, मूल सिद्धांतो में जमीं आसमान का अन्तर है। यह एक अंगुली पकडाने जैसा है। फिर पूरा हाथ जाएगा, और अन्ततः शरीर।

सनातन अहिंसा को सर्वाधिक महत्व देता है।'अहिंसा परमो धर्मः' जबकि वहां अहिसा को कोई स्थान नहीं है।
सनातन प्रकृति के नियंत्रित उपभोग को प्रधानता देता है, इसीलिये प्राकृतिक पेड-पौधो-प्राणीयों की सांकेतिक पूजा करता है। जबकि वहां भोग़-भोग और भोगवाद ही है।
गंगा-जमुनी संस्कृति में हमारे उपर इसके दुष्प्रभाव को स्पष्ठ देखा जा सकता है।
और भी कईं विभिन्नताएं है, समकक्ष ठहरना दुखप्रद है, आप चाहेंगे तो कभी उनकी भी चर्चा करेंगे।

सुज्ञ ने कहा…

हल्ला बोल के सूत्रधर जी,

आपका बहुत बहुत आभार, आपने हमारे निवेदन सम्मान दिया।

सभी लेखक बंधुओं से निवेदन है वे अपने लेखो द्वारा हल्ला-बोल के मुहर्त से ही जारी इन दो यज्ञों में आहूति देते रहें………

प्रथम पवित्र यज्ञ है, 'वैचारिक परिशुद्धता यज्ञ'
"हे वरूणदेव हम तुम्हारा आह्वान करते है, हम हमारी मिथ्या मान्यताओं को इस अग्नी में विसर्जित करते है।जैसे तुम निर्मल जल रूप पवित्र हो वैसे ही हमारे विचार वाणी को निर्मल करो"

द्वितीय पवित्र यज्ञ है 'साहस शौर्य परिवर्धक यज्ञ'
" हे अग्नीकुमार हम तुम्हारा आह्वान करते है, हम हमारे हीन-बोध,अपराध-बोध और भीरूता का इस पवित्र अग्नी में विसर्जन करते है। आप हमारे अन्तर में साहस शौर्य और वीरता का तेज भर दो"

इसे कर्मकाण्ड की तरह नहीं, इन भावो को हमें जीना होगा।

अजय कुमार दूबे ने कहा…

सुज्ञ जी

मै आपके विचार से पूरी तरह सहमत हु . सनातन धर्म के समकक्ष किसी अन्य संप्रदाय को मानना गलत है .

इस मंच के सूत्रधार को बहुत बहुत शुभकामनायें !!

हल्ला बोल ने कहा…

आप सभी को हमारी तरफ से शुभकामना, आप लोग जिस तरह विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, उसके लिए आप धन्यवाद के पात्र है, इसी तरह इस मंच की गरिमा बनाये रखे. शालीन भाषा में ही चर्चा अच्छी लगती है. अपशब्दों से खुद को दूर रखें, ताकि हिन्दू धर्म के संस्कार और भारतीय संस्कृति प्रभावित न हो. आशुतोष जी, आपने सही कहा, मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, पर हिन्दुओ में काफी लोग डरपोक हैं, जहाँ पर हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाया जाता है. वहां पर समर्थक बान जायेंगे. पर हिन्दू मंच पर समर्थक बनने से डर लगता है लोंगो को, हमें उन डरपोक लोंगो का डर भी निकलना है. उनके अन्दर छटपटा रहे हिंदुत्व को जगाना होगा. और इसके लिए सुग्य जी, अजय जी, हरीश जी, निशांत जी, द्वारिकेश जी, कौशलेन्द्र जी सहित इस मंच से जुड़े सभी बंधुओ का सहयोग चाहिए, इसके लिए सुग्य जी की तरह विचार भी रखने होंगे, जय श्री राम.

सुज्ञ ने कहा…

आभार, संचालक जी, आपके संदेश के लिये!!

मैं डॉक्टर साहब कौशलेन्द्र जी की प्रतिक्रिया का इन्तजार कर रहा हूँ, तकि पता चले कि चर्चा पटरी पर है।

साथ ही अपने एक और विचार से आपको अवगत करवा दूँ…… अक्सर लोग कहते हैं- "किसी के धर्म को बुरा न कहो"। लेकिन मैं मानता हूँ उस मत सम्प्रदाय दृष्टिकोण को अवश्य बुरा कहो जिसको पालन करते हुए लोग सभ्य व संस्कारित न बन पाए हो, इन्सान न बन पाए हो या उनके मत नें उन्हें मायावी कपटी बनने को प्रेरित किया हो। ऐसे दुष्प्रभावी धर्म पर चोट करो, पर मानव को चोट मत पहुँचाओ भले वह मानव उन धर्मो का फोलोअर हो।

निशांत ने कहा…

sabse pahle is charcha ke liye sabko aabhar...

manav ki bhaavna ko thesh na pahunche
manav ka man hi darpan hai
ek din use apni karni par paschataap hota hai..
hame bas har us manav ko jo bhatak raha hai..
jo samaj ke liye ek galat sanskriti laa raha hai use badalane ka prayaas karna chahiye...

man me ishwar hai
karm me ishwar hai..

jai hind...
ashfaaq ,bismil,bhagat,subhash ...anna,kalam banane ki shakti sab me hai ....aur ye har maa har pita chahte hain...aur hamari bharat maa bhi yahi chahti hai ki ham ashfaaq,bismil ,bhagat ,aurvindo bane...

jai shri krishna

कौशलेन्द्र ने कहा…

विलम्ब के लिए क्षमा याचना. आज दिन भर हॉस्पिटल में ही व्यस्त रहा. शाम को जब इधर आया तो अंतरजाल ने सहयोग करने से मना कर दिया. तत्रास्तु .........
सर्व प्रथम सुज्ञ जी के दोनों यज्ञों का स्वागत ....... 'वैचारिक परिशुद्धता यज्ञ' एवं 'साहस शौर्य परिवर्धक यज्ञ'
हरीश जी उवाच - "२.. मैं धर्मनिरपेक्ष नहीं हूँ. मैं कट्टर हिन्दू हूँ इसीलिए इंसानियत की बात करता हूँ. इंसानियत सिर्फ हिन्दुओ में है."
हरीश जी पुनश्च उवाच -“कट्टर हम मुसलमानों को कहते हैं पर कट्टरता हिन्दुओ की नस में भरी है. जो दर्शन सनातन धर्म में था वही दर्शन इस्लाम में है. मुसलमान ही आज के दौर में सनातन धर्म का पालन कर रहा है.
हरीश जी पुनश्च उवाच -हिन्दुओ को धर्म के प्रति उसी तरह कट्टर होना चाहिए जैसे मुसलमान हैं.
....फिर हममें और उनमें अंतर ही क्या रह गया ? हरीश जी आपका आशय कट्टरता से नहीं "निष्ठा" से है ...विचारों को शब्दों में प्रकट करते समय आप इतने हड़बड़ा क्यों जाते हैं ?
हरीश जी ! यद्यपि आपका भाव ऐसा नहीं है तथापि आपके वक्तव्यों में "कट्टरता" को लेकर परस्पर विरोधाभास प्रकट हो रहा है. इसीलिये लोग दिग्भ्रमित हो रहे हैं. "इंसानियत सिर्फ हिन्दुओ में है." इससे अन्य धर्मावलम्बियों का अपमान होता है....मैं यहूदियों की बात कर रहा हूँ जो सनातन धर्म से इतने प्रभावित हैं कि यहाँ आकर भारतीय दर्शन में रम जाते हैं .... मुझे ऋषिकेश में वे ही अधिक दिखाई देते हैं. मैंने पहले ही कहा कि हमें "तोल मोल के बोल " पर अधिक ध्यान देना होगा.
हरीश जी पुनश्च उवाच - जो दर्शन सनातन धर्म में था वही दर्शन इस्लाम में है. मुसलमान ही आज के दौर में सनातन धर्म का पालन कर रहा है. बिलकुल नहीं श्रीमान जी ! यदि ऐसा है तो फिर यह विरोध क्यों ? फिर तो हमें ही उनका अनुकरण कर लेना चाहिए. कम से कम उन्होंने हमारे पुरातन धर्म को जीवित तो रखा.
हरीश जी पुनश्च उवाच -जब सभी धर्म की जननी सनातन धर्म है और अन्य धर्मो के धर्मशास्त्र सनातन धर्म के ग्रंथो का अपभ्रंस तो कोई धर्म बुरा कैसे ? मान्यवर ! जिस तरह माता-पिता के सारे गुण उनके बच्चों में अवतरित नहीं होते उसी तरह सभी धर्मों में समानता नहीं है. आंशिक समानता हो सकती है पर विरोधाभास की सम्भावनाओं से भी मना नहीं किया जा सकता. और फिर जेनरेशन गेप के व्यावहारिक कॉन्सेप्ट का क्या होगा ? अपभ्रंश शब्द स्वयं में मूल से विकृति का द्योतक है.
हरीश जी पुनश्च उवाच -यदि हमें विश्वशांति लानी है तो जिन लोंगो के धर्म शास्त्रों में गलत बाते लिखी हैं,(यहाँ पुनः विरोधाभास हो गया है...सभी लोग ध्यान रखें , अंतरजाल पर आप पूरे विश्व के सामने होते हैं, पूरे विश्व में आपके वक्तव्यों की समीक्षा की जाती है ) उनका विरोध वे खुद करें और मानने से इंकार कर दे. शत प्रतिशत सहमति. मैं भी प्रकारांतर से इस बात को कह चुका हूँ. हर किसी को अपने घर की सफाई की ओर ध्यान देना चाहिए.किन्तु ...किन्तु ....किन्तु....जो स्वयं को अस्वच्छ मानने को तैयार ही नहीं है वह सफाई करेगा कैसे ?....सारे उलझाव यहीं पर हैं.
हरीश जी पुनश्च उवाच -यहाँ पर उन मुसलमानों को भी आना चाहिए जो खुद को राष्ट्रभक्त समझते हैं, और खुलकर चर्चा करनी चाहिए. जब तक हम बात नहीं करेंगे तब तक विवाद ख़त्म नहीं होंगे..
यह मैं भी चाहता हूँ ...पर अभी नहीं ...कुछ प्रतीक्षा कीजिये ...
सुज्ञ जी उवाच -"इस मंच को हिन्दुओं का मंच ही रहना चाहिए, आपसी चर्चा के नाम पर मुसलमानों को भडास निकालने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। ऐसी बातों के लिये उनके पास कई मंच है।".....किन्तु सुज्ञ जी ! फिर विवाद दूर कैसे होंगे ? हम इसे भड़ास मंच नहीं बनने देंगे. स्वस्थ्य संभाषा के लिए स्वस्थ्य मस्तिष्क के राष्ट्रवादी मुस्लिमों का हमें स्वागत करना चाहिए .....किन्तु जैसा मैंने कहा अभी कुछ प्रतीक्षा करनी होगी......तब तक जब तक हम स्वयं में 'एक' और 'सबल' नहीं हो जाते ...भले ही कई वर्ष लग जाएँ.
सुज्ञ जी पुनश्च उवाच- "उस मत सम्प्रदाय दृष्टिकोण को अवश्य बुरा कहो जिसको पालन करते हुए लोग सभ्य व संस्कारित न बन पाए हो, इन्सान न बन पाए हो या उनके मत नें उन्हें मायावी कपटी बनने को प्रेरित किया हो।" शत प्रतिशत सहमति ....ऐसा ही होगा ...हम इसीलिये एक जुट होने का प्रयास कर रहे हैं ....अपनी नपुंसकता को पहचान कर समर्थ और सक्षम होने का प्रयास कर रहे हैं.

कौशलेन्द्र ने कहा…

प्रिय बंधुओ ! अभी तो हम खुद ही होली खेल रहे हैं. हरीश जी हमें अपने रंग में और हम उन्हें अपने रंग में रंगने का प्रयास कर रहे हैं.....हम तब तक रंग डालेंगे जब तक सभी लोग रंग में सराबोर हो कर स्वयं के अतिरिक्त और किसी को भी न पहचानने के लायक न हो जाएँ ...स्वयं को पहचानना होगा ...सभी लोग इस लीला में यदि सफल हो गए तो समझ लेना हम अपने उद्देश्य को पा गए.होली के बाद हम श्वेत परिधान में अलख जगायेंगे .....अपने परिधान को बचाते हुए ....कहीं कोई दाग न लग जाए.यही आर्ष परम्परा है ....जिसे हमने भुला दिया है. फिर जब दीपावली आयेगी तब हम मुसलमानों को भी आमंत्रित करेंगे राष्ट्र के विजय पर्व में सम्मिलित होने के लिए.......तब हम इस योग्य हो जायेंगे कि उन्हें कह सकें कि हमारे जैसा बनना है तो वे भी परिमार्जन करें और संविधान संशोधन की परम्परा की तरह अपने धर्म को व्यावहारिक बनाएं.
हाँ ! अब मुझे भी कुरआन का अध्ययन करना होगा....और सुज्ञ जी आपको भी. ...
शुभ रात्रि.

महेश बारमाटे "माही" ने कहा…

dekhiye...
na to main hindu hoon na musalmaan or na or kuch...

aaj agar aap sirf deshbhakti kee baat karen to jyada behtar hoga...
aap ne shayad kis film me suna hoga ki sachcha musalmaan koun hota hai...
wo log jo aatankwad faila rahe hain, pakistan kee khushi ka jashn mana rahe hain ya bharat ke virodh me Tiranga jala rahe hain,main ye nahi kahta ki ye log sahi kar rhe hain...
ye baat to shayad kuraan me bhi na likhi ho. har dharmik granth me likhi baat ko logon ne apne hisab se samjha or jana.. pr jisne poori tarah se samjha usne kabhi kisi ke kaam me dakhal andaji na ki...
kya aap mujhe ye bta sakte hain k hamare hindu grantho me kahaan hindu hone ki sachchi paribhasha milegi mujhe ?

aap hindutv ko samarthan dete hain sahi hai par pahle insaan banne ki koshish karen... fir bharteeya hone ki, fir sabko apne jaisa banane ki...

agar koi sachcha bharteeya hoga to wo hamesha Akhand Bharat ka sapna dekhega or uske liye jaroori kadam bhi badhayega...

bharteeyata ke naam mera samarthan hmesha aapke saath hai, par kisi dharm vishesh ke virodh me katai nahi...

dhanyawaad

हरीश सिंह ने कहा…

कौशलेन्द्र जी, सुग्य जी, आप दोनों के विचार अपनी जगह दुरुस्त हैं, हिन्दुओ में कट्टरता नहीं निष्ठां होनी चाहिए, मेरा मतलब भी वही था, पर शब्दों का हेर-फेर था. आप लोंगो की तरह मैं विद्वान नहीं लिहाजा मेरे शब्दों से अधिक मेरे भावो पर ध्यान दिया करें. मैं सिर्फ इतना कहने आया हूँ की शायद कुछ कारण वश मुझे कुछ दिन के लिए दूर रहना पड़े, पर मित्रमंडली से चर्चा के लिए मन में छटपटाहट अवश्य रहेगी. शीघ्र ही वापस आऊंगा. तब तक लिए प्रणाम, जय राम जी की... ओम शांति.
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हो सके तो महेश जी की बातों का जवाब दे

vishwajeetsingh ने कहा…

हरीश जी नमस्कार
मैं हिन्दू धर्म और कुरान पर आपके विचारों से सहमत हूँ , मैं आज-कल जालंधर के मुस्लिम विद्वानों द्वारा किये गये कुरान के हिन्दी अनुवाद का अध्ययन कर रहा हूँ , कुरान मेँ कई जगह तो गैर मुस्लिमों की विशेष तौर से मूर्तिपूजकों की हत्या करने का खुलेआम आदेश दिया गया हैं ।
एक सुन्दर सार्थक आत्मचिंतनीय अभिव्यक्ति ...... आभार ।
www.satyasamvad.blogspot.com

सुज्ञ ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
ROHIT ने कहा…

महेश बरमाटे जी
हम सब सनातन धर्मी है.
आज के समय मे सनातन धर्मीयो को हिन्दु कहा जाता है.
अतः आप ऐसा न कहे कि आप हिन्दु नही है.
आप हिन्दु थे और हिन्दु ही रहेँगे.
भले ही आपने बौध धर्म अपनाया हो .
क्यो कि बौध धर्म भी सनातन धर्म का अंग है.
जैसे एक पेड़ मे कई शाखाये निकली होती है
वैसे ही वौध धर्म हो या जैन धर्म या सिख धर्म सब सनातन धर्म रुपी पेड़ की शाखाये है.अतः हम आप सब सनातन धर्मी है. और ये ब्लाग सनातन धर्म की रक्षा के लिये बनाया गया है.
हमारा उददेश्य है इस सनातन धर्म रुपी पेड़ के किनारे जो दो खरपतवार रुपी धर्म {-जैसे इस्लाम और ईसाई उग आये है. और सनातन धर्म को चुनौती देने की असफल कोशिश कर रहे है.-}
को हटाना है.

ROHIT ने कहा…

महेश बरमाटे जी
आपने कहा हर धर्म मे अच्छी बात लिखी होती है.
आपकी बात लगभग सही है केवल एक धर्म को छोड़कर.
केवल एक धर्म ऐसा है जिसमे लिखी बातो के कारण ही विश्व मे आतंकवाद फैल रहा है.
मुंबई हमले का आरोपी अजमल कसाब का जब नार्को टेस्ट हुआ और उससे पूछा गया कि तुमने ऐसा क्यो किया.
तब उसने बताया कि उसके आकाओ ने उससे कहा था कि काफिरो को मारने से जन्नत मिलेगी और जन्नत मे हूरे( सुंदर लड़किया) मिलेँगी.

आपको पता है कि ये बात और इससे भी कई गुना भयानक बाते कुरान मे लिखी है. जिसको पढ़कर इस विश्व मे आतंकवाद फैल रहा है.

आप इस ब्लाग पर जाये आपको सारी जानकारी हो जायेगी
BHANDAFODU.BLOGSPOT.COM

बेनामी ने कहा…

धर्म का उद्देश्य - मानव समाज में सत्य, न्याय एवं नैतिकता (सदाचरण) की स्थापना करना ।
व्यक्तिगत धर्म- सत्य, न्याय एवं नैतिक दृष्टि से उत्तम कर्म करना, व्यक्तिगत धर्म है ।
सामाजिक धर्म- मानव समाज में सत्य, न्याय एवं नैतिकता की स्थापना के लिए कर्म करना, सामाजिक धर्म है । ईश्वर या स्थिर बुद्धि मनुष्य सामाजिक धर्म को पूर्ण रूप से निभाते है ।
धर्म संकट- सत्य और न्याय में विरोधाभास की स्थिति को धर्मसंकट कहा जाता है । उस स्थिति में मानव कल्याण व मानवीय मूल्यों की दृष्टि से सत्य और न्याय में से जो उत्तम हो, उसे चुना जाता है ।
धर्म को अपनाया नहीं जाता, धर्म का पालन किया जाता है । धर्म के विरुद्ध किया गया कर्म, अधर्म होता है ।
व्यक्ति के कत्र्तव्य पालन की दृष्टि से धर्म -
राजधर्म, राष्ट्रधर्म, मनुष्यधर्म, पितृधर्म, पुत्रधर्म, मातृधर्म, पुत्रीधर्म, भ्राताधर्म इत्यादि ।
धर्म सनातन है भगवान शिव (त्रिदेव) से लेकर इस क्षण तक व अनन्त काल तक रहेगा ।
धर्म एवं उपासना द्वारा मोक्ष एक दूसरे आश्रित, परन्तु अलग-अलग है । ज्ञान अनन्त है एवं श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान का सार है ।
राजतंत्र में धर्म का पालन राजतांत्रिक मूल्यों से, लोकतंत्र में धर्म का पालन लोकतांत्रिक मूल्यों के हिसाब से किया जाता है ।
कृपया इस ज्ञान को सर्वत्र फैलावें । by- kpopsbjri