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सर्व देव ऋषिवारो को नमस्कार का मन्त्र

ॐ परमकृपालू परमातुमाकी कृपासे प्राथना कर रहा हूँ.
ॐ नमो श्री सदगुरु पात्र ब्रह्मा ईन्द्र ईमामशाह आद्य-विष्णु निरंजन कल्कि नारायण आपकी आशीष ...



आद्य नारायणको नमस्कार !! ब्रह्मा,विष्णु, महेशको नमस्कार !! आध शक्ति माता को नमस्कार !! श्री कल्कि नारायणको नमस्कार !! प्रथम पुरूषको नमस्कार !! हरिवंश कुल परिवारको नमस्कार !! धरती आसमानको नमस्कार !! पवन-पानिको नमस्कार !! चंद्र-सूर्यको नमस्कार !! नव लाख ताराको नमस्कार !! बार मेघ को नमस्कार !! नवकुल नागको नमस्कार !! सात समुद्रको नमस्कार !! नो सो निन्यानबे नदीओको नमस्कार !! गयारा रूद्रको नमस्कार !! अश्विनी कुमारोको नमस्कार !! उनचास मरूतको नमस्कार !! चौद ब्रह्मांडको नमस्कार !! नवग्रहको नमस्कार !! सात वार, सताईस नक्षत्रको नमस्कार !! पंदर तिथी बारहकरणको नमस्कार !! सात द्वीपको नमस्कार, नवखंड पृथ्वीको नमस्कार !! चोबीस मुल्कको नमस्कार !! अष्टकुल पर्वतको नमस्कार !! अठारहभार वनस्पितको नमस्कार !! चार वेदको नमस्कार !! चार ग्रंथको नमस्कार, चार खाण, चार वाणको नमस्कार ; अग्नि, तेज अन्नदेवको नमस्कार !! आदि, अंत,मध्यके देवको नमस्कार !! उतर,दिक्षण,पूर्व पिश्चमको नमस्कार !! दश दिग्पालको नमस्कार !! दश दीशाओको नमस्कार !! नवनाथ चोर्यासी सिद्धको नमस्कार !! चोसथ जोगणीको नमस्कार !! अठ्याशी सहस्त्र ऋषीको नमस्कार !! एक लाख असी हजार संत-महात्माओंको नमस्कार, अडसठ तीर्थको नमस्कार !! निन्यानबे करोडी झांखाको नमस्कार !! छप्पनकरोडी मेंघाको नमस्कार !! बत्रीस करोडी किन्नरको नमस्कार !! पांच करोडी प्रहलादको नमस्कार !! सात करोडी हरिश्चंद्रको नमस्कार !! नव करोडी युधिस्टिर को नमस्कार !! बार करोडी कमला कुंवरको नमस्कार !! त्रेतीस करोडी देवताओको नमस्कार !! सर्व ऋषिवर गत-गंगाको नमस्कार !! दश अवतारको नमस्कार, मुखी सेवकको नमस्कार, चौदह-भुवनना देव-ऋषिवरको नमस्कार !! करण कल्पके अनंत करोडी देवको नमस्कार !! स्वामी ! हमारे अपराध क्षमा करो, सतधर्म(सनातन) के मार्ग में रखो !! लक्ष चोर्यासीके फेरा टालो. तेत्रीस करोडी देवो का मिलाप कराओ !! जांबु द्वीपके स्वामी!! सदगुरु ब्रह्मा.....

ॐ श्री कल्कि नारायणको नमो नम:


प्रिय धर्मीजनों ऊपर जो सर्व देव ऋषिवारो को नमस्कार का मन्त्र दिया गया है वह वास्तव में एक तपस्या के समान हे. जिसे सभी सनातन धर्मियो को सुबह और रात में सोने से पहले एक बार अवस्य बोलना चाहिए क्युकी परमात्मा ने हमें मनुष्य का अवतार दिया है तो हमें उसका गुणगान गाना चाहिए. इस मन्त्र में विष्णु भगवान के दस अवतार, ब्रह्मा, महेश, तेतीश करोड़ देवी देवता आध सकती(नारायणी) चारो दिशा और इस श्रिस्टी से समस्त चल अचल भगवान की बनाई लीला को नमस्कार किया गया है. यह मन्त्र सभी धर्मो के लिए है यह मन्त्र हिन्दुओ की भिन भिन संप्रदाय को एक करने वाला है. यह मन्त्र सभी भारतीयों के लिए है. जय हिंद जय भारत




6 टिप्‍पणियां:

जाट देवता ने कहा…

वाह वाह वाह क्या जानदार ब्लाग शुरु किया है आपने,
अरे आशुतोष भाई यहाँ भी विराजमान है।
लगे रहो पूरी मेहनत से हम भी आपके साथ है।

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत खुबसूरत प्रयास आपको बहुत सारी शुभकामनाएँ |

विजय कर्ण ने कहा…

बिलकुल सही कहा है मन्त्र को एक बार अवस्य बोलना चाहिए

आशुतोष ने कहा…

जय हिंद..
बहुत ताकत होती है इस नमस्कार मन्त्र में ..
सबको मेरा नमस्कार..
जाट देवता ..यहाँ आयें और हिन्दू होने गर्व महसूस करें..
जय श्री राम

शिक्षामित्र ने कहा…

नमस्कार के बहाने अपने धर्म-ज्ञान को परखने का भी अवसर मिला।

किलर झपाटा ने कहा…

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
बहुत सुन्दर और ज्ञानवर्धक पोस्ट।