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ताजमहल..... मकबरा नहीं............ अति प्राचीन शिव मंदिर है

 यह पोस्ट हमें मेल द्वारा  blogtaknik के माध्यम से मिली, हमें लगा की यह जानकारी भरी पोस्ट सबके सामने आनी चाहिए. 

ॐ सनातन परमोधर्मॐ पुस्तक" TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा

 बी.बी.सी. कहता है...........
ताजमहल...........
एक छुपा हुआ सत्य..........
कभी मत कहो कि.........
यह एक मकबरा है..........

ताजमहल का आकाशीय दृश्य...... 

 


निचले तल के२२गुप्त कमरों मे सेएककमरा...

आँगन में शिखर के छायाचित्र कि बनावट...

आतंरिक पानी का कुंवा............

कमरों के मध्य 300फीट लंबा गलियारा..

एक बंद कमरे की वैदिक शैली में निर्मित छत...

शिखर के ठीक पास का दृश्य.....

मकबरे के पास संगीतालय........एक विरोधाभास.........

विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा.....

बहुत से साक्ष्यों को छुपाने के लिए,गुप्त ईंटों से बंद किया गया दरवाजा......

प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल........

ताज के पिछले हिस्से का दृश्य और बाइस कमरों का समूह........

ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा.........

निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह.........

ईंटों से बंद किया गया विशाल रोशनदान .....

गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....

पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजों का दृश्य........

ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य


दीवारों पर बने हुए फूल......जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ ) ....


निचले तल पर जाने के लिए सीढियां........

दरवाजों मेंलगी गुप्त दीवार,जिससे अन्य कमरों का सम्पर्क था..... 
बुरहानपुर मध्य प्रदेश मे स्थित महल जहाँ मुमताज-उल-ज़मानी कि मृत्यु हुई थी......

बादशाह नामा के अनुसार,, इस स्थान पर मुमताज को दफनाया गया......... 
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अब कृपया इसे पढ़ें ......... 
प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........ 
"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था"
प्रो.ओक. अपनी पुस्तक"TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस 
बात में विश्वास रखते हैं कि,--
  सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवायाथा.....
 
ओक कहते हैं कि...... 
ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था. 
अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था,,
  => शाहजहाँ के दरबारी लेखक"मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी"ने अपने"बादशाहनामा"में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000  से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 परइस बात का उल्लेख है किशाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बादबुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया थाऔरइसके ०६ माह बाद,तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार ,को अकबराबाद आगरा लाया गयाफ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए,आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे. 
  इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह मेंवे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैंजो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा 
जयसिंह को दिए गए थे....... 

  =>यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिएछीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था 
उदाहरनार्थ हुमायूँअकबरएतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं .... 
  =>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है--------- 
  ="महलशब्दअफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में
भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता... 

यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है--------- 
पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था,,,बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ... 
और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए,,,यह समझ से परे है... 
  प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण हैसाथ ही साथ ओक कहते हैं कि---- 
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी,चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है.....
   इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं......
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था----- 

==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कियह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है... 
==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था......
==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया,,परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया,जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था......
==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा,के लिखित विवरण से पता चलता है कि,औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था.......
प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि ,ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है....... 
आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं,जो आम जनता की पहुँच से परे हैं 
प्रो. ओक.जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं....... 
==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है,, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है,फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब....???? 
राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं....
प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाएऔर अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे .... 
  ज़रा सोचिये....!!!!!!
  कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत,शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, "तेजो महालयको बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों......?????   
तथा...... 
  इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों........???????
  

 आंसू टपक रहे हैंहवेली के बाम से,,,,,,,,
रूहें लिपट के रोटी हैं हर खासों आम से.....
अपनों ने बुना था हमें
,कुदरत के काम से,,,,
 
फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं हम गैरों के नाम से......
  









22 टिप्‍पणियां:

Dr. Mandhata Singh ने कहा…

यह मेल मुझे भी भगवानदास ने भेजा था। मैंने अपने कई मित्रों को फारवर्ड भी किया। आपने यह अच्छा किया कि बहुत सुंदर तरीके से ब्लाग में पेश किया। धन्यवाद।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

p.n.oak साहब की किताबें पढ़ने लायक है... यह पुस्तक www.apnihindi.com से डाउनलोड़ की जा सकती है...

गंगाधर ने कहा…

भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिए बहुत से कुचक्र रचे गए हैं. उसमे यह भी एक है, सभी को एकजुट होकर जाँच की मांग करनी चाहिए, यह शिव मन्दिर है.

Mohinee ने कहा…

I am reading same book in Marathi. Oak ji can not challenged. these photos are very clear, and thanks to Indian citizen too!

आशुतोष की कलम ने कहा…

में इस पर एक शोध कार्य कर रहा था सोचा था की हल्ला बोल पर लगाऊंगा मगर अप ने लगभग लगभग वही बात कह दी..
हमारी सरकार नामर्द है उसे उन बंद कमरों को खोल कर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए..
जय हिंद

कौशलेन्द्र ने कहा…

पुरुषोत्तम नारायण ओक जी रचित और भी कई ऐसी पुस्तकें हैं जिनमें उन्होंने पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टियों से कई तथाकथित मुस्लिम इमारतों का भंडाफोड़ किया है कि वे वास्तव में हिन्दू भवन रहे हैं जिन पर मुस्लिम नवाबों , सुल्तानों या बादशाहों ने अतिक्रमण कर उन्हें मुस्लिम इमारतों का खिताब ही नहीं दिया बल्कि उनका निर्माण भी खुद के द्वारा किया गया प्रचारित किया ....देश के आज़ाद होने के बाद भारत की सरकार को आगरा, फतेहपुर सीकरी और लखनऊ के प्राचीन पुरातात्विक महत्त्व के भवनों के बारे में इमानदारी से शोध करना चाहिए था ...प्रत्युत भारत की सभी सरकारों ने मुस्लिम वोटों के लालच में देश और विश्व को भारत के प्राचीन गौरवमयी इतिहास से दूर रखने का ही प्रयास किया है. ओक जी ने जिन तथ्यों के साथ वास्तविकता को प्रकाश में लाने का काम किया है उस पर भारत की सरकार को चाहिए कि वह जनता को अपना स्पष्टीकरण दे. ओक जी का कार्य अत्यधिक श्रमसाध्य रहा है उसे आगे बढाए जाने की आवश्यकता है. राष्ट्रवादी संगठनों को चाहिए वे इस मामले में सामने आयें .........क्योंकि सरकार तो अयोध्या मसले को ही नहीं सुलझा पायी है अभी तक ....बनारस...मथुरा ,,,,फतेहपुर सीकरी....और लखनऊ तो बहुत दूर की बात है. भारत का गौरवमयी इतिहास विश्व के समक्ष आना ही चाहिए. और इसके लिए राष्ट्रवादी मुस्लिमों को भी सामने आना चाहिए.

कौशलेन्द्र ने कहा…

कृपया इसे पढ़कर देश के गौरवमयी इतिहास के लिए अपनी भूमिका तय कीजिये...क्या सब कुछ यूँ ही चलता रहना चाहिए या इसमें किसी परिवर्तन की आवश्यकता है ? हमारा उपलब्ध इतिहास अभी भी बंदी है इसकी आज़ादी के लिए हमें अपनी सक्रिय भूमिका तय करनी ही होगी.

Hindustani ने कहा…

कब तक हिन्दू गहरी नींद सूता रहेगा. ये सब जानकर तो उसकी नींद टूटनी चाहिए.

किलर झपाटा ने कहा…

वाह वाह बहुत शानदार जानकारी। ये तो सरकारें हैं जो वोटों के चक्कर में तथ्य छिपाये रहती हैं मगर मित्रों यदि इसी तरह हल्ला बोला जाता रहा विभिन्न मंचों से, तो पक्का है के एक ना एक दिन सूरतें बदलेंगी। चित्रों से सत्य उजागर हो रहा है। पर चूंकि अब वहाँ कब्र है इसलिये उसे तेजोमहालय कहना या बनाना अब उचित नहीं है। पर ताजमहल के इतिहास के साथ इस सत्य को जोड़ कर इतिहास को सुधारा जाना चाहिये। वो भी तत्काल प्रभाव से।

किलर झपाटा ने कहा…

हर हर महादेव

अल्पना वर्मा ने कहा…

आँखें खोल देने के लिए प्रयाप्त जानकारी पूर्ण लेख.

RameshGhildiyal"Dhad" ने कहा…

AAshutosh ji...AAp to swyam shiv hai..aapne to bada hi paropkar ka kam kar diya Ok ji ki sangrahit jaankaari yahan lagakar...atyant hi ashchary janak..aur gyaanvardhak jaankari ke liye hardik dhanyvaad...
sarkaar se hamaari maang hai ki vo turant kaaryvaahi kar mamla saaf kare aur...avshayak kadm uthae...
saath hi Jaipur Rajgharane se bhi apeel hai ki vo apne sangrah se un durlabh sambandhit dastavejon ko sarkar ko uplabdh karaae aur disple kare...

RameshGhildiyal"Dhad" ने कहा…

AAshutosh ji...AAp to swyam shiv hai..aapne to bada hi paropkar ka kam kar diya Ok ji ki sangrahit jaankaari yahan lagakar...atyant hi ashchary janak..aur gyaanvardhak jaankari ke liye hardik dhanyvaad...
sarkaar se hamaari maang hai ki vo turant kaaryvaahi kar mamla saaf kare aur...avshayak kadm uthae...
saath hi Jaipur Rajgharane se bhi apeel hai ki vo apne sangrah se un durlabh sambandhit dastavejon ko sarkar ko uplabdh karaae aur disple kare...

महाशक्ति ने कहा…

http://mahashakti.bharatuday.in/2009/12/blog-post_19.html

महाशक्ति पर इसी से सम्‍बन्धित एक लेख है..

blogtaknik ने कहा…

@महाशक्ति आपको भी अपना लेख इस ब्लॉग मै सामिल करना चाहिए. ताकि हिंदू संगठित होकर महाशक्ति बन सके हर हर महादेव...

raj ने कहा…

हिंदुस्तान माँ हिन्दू क कन्वर्शन पे रोक लगा देना चाहिए और कुछ कफे सकत कानून लाना चाहिए हिन्दू धर्म के बचाव के लिए

बेनामी ने कहा…

अवश्य ही मैं हमेशा से कहता हँ कि सारे ही इस्लीमिक निर्माण हमारे धर्म स्थलों को तोड कर बनाये गये हैं

ashi amroha ने कहा…

isi prakar mene bhi ak khoj ki old fort Delhi me jo main bulding he usme upr shiv ling bne hue he bhar se hi inko dekha ja skta he

नरेश दिनकर नांदेड ने कहा…

ये सब जानकर में हेरान हूँ।

बेनामी ने कहा…

हमारे हिन्दु ओँ के लिए यह एक शरम नाक बात हँ जलदी से जलदी इतिहास मे सुधार होना चाहीए

आमूल ने कहा…

अच्छा लेख

Pramendra Pratap Singh ने कहा…

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