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धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर श्वान : आयतित विचारधारा का भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:

धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर शब्द अक्सर सुनने में आता है हमारी रोजमर्रा की जीवनचर्या में..आइये प्रयास करते हैं इसका उदगम और भारतीय परिवेश में प्रासंगिकता.
इतिहास और उदगम: धर्मनिरपेक्षता शब्द का जनक जॉर्ज जेकब हॉलीयाक को माना जाता है,जो की मूलतः एक व्याख्याता और संपादक था..


ये राबर्ट ओवेन की विचारधारा से प्रभावित था जो समाजवाद के संस्थापक सदस्यों में से एक थे..राबर्ट ओवेन के विचार से
" सभी धर्म एक ही हास्यस्पद परिकल्पना पर आधारित हैं.जो मनुष्य को एक कमजोर मूर्ख पशु,उग्रता से पूर्ण धर्मांध व्यक्ति,एक कट्टरवादी या घाघ पाखंडी बनाती  है"

अब सेकुलर शब्द को गढ़ने वाले व्यक्ति के गुरु की विचारधारा ये थी तो शिष्य के सिधांत की स्वतः ही परिकल्पना की जा सकती है..आइये एक तथ्य और जान ले सेकुलर शब्द गढ़ने वाले हॉलीयाक के गुरु के बारे में अपने इस धर्म विरोध सिधांत के कुछ वर्षों बाद ओवेन ने आध्यात्म की राह पकड़ ली..


मुझे नहीं लगता की आध्यात्म किसी धर्म का विरोध सिखाता है क्यूकी यदि आध्यात्म बुढ़ापे का दर्शन है तो धर्म जवानी का ज्ञान..

जेकब हॉलीयाक ने १८४२ में ईशनिंदा के लिए ६ महीने हवालात में गुजारे..हवालात से बाहर आ के, इसने द मूवमेंट और द रिजनर नामक पत्र निकालना शुरू किया और इन पत्रों के मूल में था इसी धर्म विरोध... हेलियक ने इस पत्र के माध्यम से एक नई व्योस्था का आह्वान किया जो विज्ञान और तर्कों पर आधारित हो..इस व्यवस्था का नामकरण उसने "सेकुलरिज्म"किया जिसका भारतीय समानार्थी रूप हम "धर्मनिरपेक्षता" प्रयोग करते हैं..शाब्दिक रूप में इसकी कुछ परिभाषाएं हैं..

१ वो जीवन पद्धति जिनका आधार आध्यात्मिक अथवा धार्मिक न हो..
२ धार्मिक व्योस्था से मुक्त जीवन शैली..
३ वो राजनैतिक व्यवस्था जिसमें सभी धर्मो के लोग सामान अधिकार के पात्र हो.प्रसाशन एवं न्याय व्यवस्था निर्माण में धार्मिक रीती रिवाजों का हस्तक्षेप न हो..
४ ऐसी व्योस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए..

परिभाषा से और इतिहास से स्पष्ट है की इस शब्द का जन्म ही धर्म विरोध के स्थानीय और समसामयिक कारणों के फलस्वरूप हुआ..इसे हम एक जीवन पद्धति और समाज पद्धति के रूप में कैसे स्वीकार लें???

भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:इस शब्द की उत्पत्ति ईसाई धर्म के खिलाफ हुई थी ..ये मेरे समझ के बाहर है की ये हिन्दू बहुल हुन्दुस्थान में कैसे और क्यों लागू किया गया..और शायद इस परिकल्पना को मूर्त रूप देते समय क्या हमारे संविधान निर्माताओं ने ये नहीं सोचा की, भारत ऐसा देश है जहा हर १० किलोमीटर पर पानी का स्वाद और ५० किलोमीटर में पूजा पद्धति बदल जाती है.जिन्होंने सदियों से धार्मिक व्योस्थाओं पर आधारित समाज और कानून का पालन किया है वो अचानक सेकुलर कैसे हो जाएँगे..और अपने ही संविधान के दूसरे भागों में मुह की खायी हमारे नीति निर्माताओं ने..
सेकुलरिज्म का मतलब है की "ऐसी व्योस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए."जी नहीं हमारा संविधान एक तरफ भारत को सेकुलर कहता है और दूसरी ओर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू करता है..एक तरफ सेकुलर कानून है जिसमें मुश्लिम की शादी मुस्लिम धार्मिक कानूनों और तलाक ३ बार तलाक तलाक तलाक बोलने से होता है.. जिस सेकुलरिज्म का मूल धर्म विरोध था, वह अब धर्म के घालमेल से क्या साबित करना चाहता है..विरोधाभास बार बार यही दर्शाता हैं की सेकुलर जैसी कोई विचारधारा हमारे समाज में अवस्थित नहीं हो सकती, हाँ विशेषकर राजनितिक लोगों के धर्म की सेकुलर खेती में खाद पानी का काम करती है..
भारतीय परिवेश के लिए अक्सर कई अलग अलग विद्वान अलग अलग राय देते हैं इस मुद्दे पर कोई कहता है की इसका मतलब धर्मविरोध नहीं है, इसका अर्थ है "सभी धर्मों की समानता"..तो ये तो हमारे मूल अधिकारों में भी है, समानता का अधिकार क्या जरुरत है सेकुलर तड़का लगाने की,और हम उस सेकुलरिज्म को सर्व धर्म सम्भाव के लिए सीढ़ी मानतें है जिसकी उत्पत्ति ही धर्म विरोध के धरातल पर हुई थी..
तो क्या हमारी सदियों पुरानी हिंदुत्व की अवधारणा इस आयतित विचारधारा के सामने नहीं ठहरती,जिसके मूल में सर्व धर्म सम्भाव और सहिष्णुता है???हिंदुत्व ने आज तक सभी धर्मों को स्वीकार किया और स्थान दिया सम्मान दिया..
सेकुलरिज्म नामक बिदेशी बालक ने अभी जन्म लिया किलकारियां भरने की उम्र गयी नहीं की गुलाम मानसिकता और सत्ता और कानून के मठाधिशों ने इसका राज्याभिषेक कर इसे युगों युगों पुरानी संस्कृति और विचारधारा के सामने खड़ा कर दिया...
वस्तुतः अभी सेकुलरिज्म की परिभाषा ही विवादित है हर व्यक्ति हर संस्थान अपने तरह से विश्लेषण करता है..जैसे किसी चारित्रिक पतन के गर्त में जा चुकी स्त्री के बच्चे के पिता के नाम के विश्लेषण में हम सबकी अपनी अपनी राय होगी..हमारे भारतीय राजनैतिक परिवेश में इस विवादित बच्चे को गोद ले कर सबने अपनी अपनी रोटियां सकने का प्रबंध कर लिया..
भारत के परिवेश में गर्त की पराकाष्ठा ये है की सेकुलर होने के लिए आप को धर्म विरोधी नहीं होना है अगर आप हिन्दू विरोधी हैं तो आप सेकुलर है अगर आप मुश्लिम धर्म के समर्थक हैं तो आप सेकुलर हैं..राजनैतिक विचारधारों की बात करे तो एक धड़ा है जो हिन्दू समर्थन के नाम का झंडा लिया है और वो साम्प्रदायिक है...चलिए मान लिया की वो धड़ा साम्प्रदायिक है ..तो वो लोग जो मुश्लिम धर्म का समर्थन कर रहें है वो कैसे साम्प्रदायिक नहीं है...
क्या हज में सब्सिडी देना साम्प्रदायिकता के दायरे में आता है??क्यूंकि ये तो सेकुलरिज्म के मूल सिधांत का उलंघन हुआ जो कहता है की "प्रसाशन एवं न्याय व्यवस्था निर्माण में धार्मिक रीती रिवाजों का हस्तक्षेप न हो.."
लेकिन छुद्र राजनैतिक स्वार्थ के वशीभूत हो कर इसे सेकुलरिज्म कहते हैं हमारे व्योस्था चलाने वाले और हिन्दू समारोह में शिरकत करना भी साम्प्रदायिकता का द्योतक लगता है इन सेकुलर श्वानो को..
सेकुलर श्वान शब्द मेरे मन में एक प्राणी को देख कर आया जिसका मुख एकलव्य ने अपने वाणों से इस प्रकार बंद कर दिया था की वो अपनी प्राकृतिक आवाज निकलने में असमर्थ हो गया.. अब एकलव्य तो आज के युग में पैदा नहीं होते और इन श्वानो का मुख हर समय तुष्टिकरण और हिंदुविरोध की नैसर्गिक आवाज भो भो भो भो निकालता रहता है सत्ता,पैसे और प्रचार की हड्डियों के लिए..सेकुलर श्वान सबसे ज्यादा हिन्दू धर्म में पैदा हो गएँ हैं और इस का कारण हमारी गुलाम मानसिकता अपने आप को हीन समझने का जो प्रबंधन मैकाले ने किया था उस हीन भावना के बबूल रूपी वृक्ष को आज तक खाद पानी दे रहें हैं ये सेकुलर श्वान.
हम अपनी गुलाम मानसिकता की अभिव्यक्ति के लिए सेकुलर बनने में किस कदर खोये हैं..
 एक उदहारण अमेरिका का देना चाहूँगा "in the god we trust " का जी हाँ ये शब्द मिलेगा आप को अमेरिका के डालर पर लिखा हुआ जिस देश की जी हुजूरी हमारे व्योस्था के महानुभाव भी करते हैं..अमेरिका के सिक्के और डालर पर लिखा ये शब्द उनके धार्मिक ग्रन्थ बाइबिल से लिया गया है..इस शब्द का विरोध भी हुआ अमेरिका में मगर वहां के सरकार ने इन लोगों के सामने न झुकते हुए अपनी संस्कृति से समझौता नहीं किया.. और आप इसे पढ़ सकते हैं डालर पर "in the god we trust:" के रूप में लिखा हुआ..
मगर क्या ये संभव है की भारत के सिक्के पर या नोट पर जय श्री राम लिखा जा सके???.यहाँ तो दूरदर्शन के चिह्न सत्यम शिवम् सुन्दरम में शिव का नाम आने के कारण तुस्टीकरण करते हुए बदल दिया गया..ऐसे कई उदहारण मिल जाएँगे..यहाँ वही गुलाम मानसिकता इस्तेमाल हुई जो मैकाले ने दी थी की अपने संस्कार और धर्म को गौण मानो और विरोध करो:.
अभी भारतीय परिवेश में ये सेकुलरिज्म का सिधांत अपरिपक्व सा महसूस होता है और जिसका इस्तेमाल हर तीसरा ब्यक्ति अपनी उल जलूल मानसिकता हो सही ठहराने के लिए करता है..सेकुलरिज्म उस तर्क और विज्ञान को आधार मानता है जो बार बार अपनी ही परिकल्पना को संशोधित करता रहता है..और फिर कुछ दिनों बाद उसे उन्नयन के नाम पर पलट देता है..वस्तुतः ये विज्ञान और धर्म की पूर्णकालिक द्वन्द है जिसे सेकुलरिज्म का नाम दे कर अपनी राजनैतिक विचारधारा को सही ठहराने की सीढ़ी बना साम्प्रदायिकता और सांप्रदायिक समाज की परिकल्पना की जाती है..


मेरे समझ से सेकुलर श्वानो को हिंदुत्व और गीता का अध्ययन करना चाहिए वो उन्हें एक सही,प्रमाणिक .सांस्कृतिक समाज एवं जीवन व्योस्था देने में समर्थ है जो उनके तर्क और विज्ञान के दृष्टिकोण से हर जगह विशुद्ध और प्रमाणिक है ..क्यूकी हिंदुत्व की अवधारणा सनातन है और इसका इतिहास ने राम और कृष्ण पैदा किये हैं न की मैकाले और डलहौजी..








आइये गर्व से कहें की हम हिन्दुस्थान में रहतें है और हम सेकुलर  नहीं है क्यूकी हमने विश्व को समाजशास्त्र से लेकर आध्यात्म की शिक्षा दी है ...हम सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सदियों से आत्मनिर्भर और हमें नहीं जरुरत है ऐसी  सड़ी हुई आयतित अंग्रेजी विचारधारा की 
जिसमें हमारे मूल आदर्शों  की तिलांजलि देने रणनीति है.

जय हिंद जय हिन्दुस्थान 


22 टिप्‍पणियां:

हल्ला बोल ने कहा…

आशुतोष जी सेकुलर की जो परिभासा आपने दी है. वह सिर्फ एक राष्ट्रभक्त हिन्दू ही कर सकता है. क्या लिखू शायद मैं भी कही से शब्द खोजने की कोशिश कर रहा हूँ. बहुत खूब आभार

गंगाधर ने कहा…

अति उत्तम, जानकारी भरी पोस्ट, आभार

कौशलेन्द्र ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
कौशलेन्द्र ने कहा…

आशुतोष जी ! बहुत ही ज्वलंत और मौलिक प्रश्न उठाये हैं आपने. इस पर पूरे देश के सभी धर्मावलम्बियों को मंथन करने की आवश्यकता है. पश्चिम में जब इस सेक्यूलरिज्म की परिभाषा गढ़ी गयी थी उस समय चर्च सर्वशक्तिसंपन्न थे, उस समय आशीर्वाद से लेकर कोई भी सामाजिक-राजनीतिक पद मूल्य देकर खरीदा जा सकता था. चर्च अनियंत्रित हो गए थे और अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे थे. तब एक क्रान्ति के रूप में इस सेक्यूलरिज्म की अवधारणा का जन्म हुआ. पश्चिम के लिए यह आवश्यक था. नया धर्म था और उसकी आड़ में शोषण प्रारम्भ हो गया था. पर हमारे यहाँ तो धर्म की पूर्ण परिपक्व विज्ञान सम्मत अवधारणा युगों से है ...जिसमें कहीं कोई विवाद या विसंगति नहीं है
...सच तो यह है कि हमारे देश में सेक्यूलरिज्म की इस छद्म अवधारणा की कहीं कोई आवश्यकता नहीं है...इसकी कूटनीतिक आवश्यकता हो सकती है पर अन्य आवश्यकताएँ बिलकुल नहीं. विश्व बंधुत्व और सर्व धर्म समभाव की अवधारणा सनातन धर्म में पहले से है ही तब इस नयी पश्चिमी, अप्रासंगिक और अधकचरी अवधारणा की हमारे देश में क्या आवश्यकता ? सेक्यूलरिज्म की आड़ में जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है और सत्ता का निर्लज्ज खेल खेला जा रहा है.
आपने जो भी प्रश्न उठाये हैं उनका उत्तर नीति निर्माताओं को देना चाहिए. मैं चाहूंगा कि देश की जनता भी अपने आप से इन प्रश्नों के उत्तर पूछे.

हल्लाबोल जी एवं गंगाधर जी ! अब केवल आभार प्रकट करने से काम नहीं चलेगा ......मंथन करने और किसी रणनीति को बनाए जाने की आवश्यकता है ...इस ब्लॉग अभियान का उद्देश्य तभी सार्थक होगा.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

कौशलेन्द्र ठीक कह रहे हैं...

Abhishek ने कहा…

बोहोत ही अच्छी पोस्ट. सेक्युलरिस्म के नाम पर आज कल के नेता जो पाखंड दिखाते है उन पर भरोसा करने वालो को अब चेत जाना चाहिए.

सुज्ञ ने कहा…

आशुतोष जी,

आपनें नंगा कर दिया सेक्यूलरिज्म को!!

अब नंगा नहाएगा क्या,और निचोडेगा क्या?

कौशलेन्द्र जी ने भी सुपरिभाषित कर दिया…

"सच तो यह है कि हमारे देश में सेक्यूलरिज्म की इस छद्म अवधारणा की कहीं कोई आवश्यकता नहीं है...इसकी कूटनीतिक आवश्यकता हो सकती है पर अन्य आवश्यकताएँ बिलकुल नहीं. विश्व बंधुत्व और सर्व धर्म समभाव की अवधारणा सनातन धर्म में पहले से है ही तब इस नयी पश्चिमी, अप्रासंगिक और अधकचरी अवधारणा की हमारे देश में क्या आवश्यकता ? सेक्यूलरिज्म की आड़ में जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है और सत्ता का निर्लज्ज खेल खेला जा रहा है."

Bhupendra ने कहा…

अति उत्तम, जानकारी भरी पोस्ट....

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post.

प्यारे भाईयो ! आप ज्ञान की तलाश में हैं, एक दिन मंज़िल पर भी पहुंचेगे।
आपका स्वागत है हमारे दिल की दुनिया में हर दरवाज़े से।

Please see
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/11/father-manu-anwer-jamal_25.html

http://pyarimaan.blogspot.com/

http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/12/islam-is-sanatan-by-anwer-jamal.html

आ ग़ैरियत के पर्दे इक बार फिर उठा दें
बिछड़ों को फिर मिला दें, नक्शे दूई मिटा दें
सूनी पड़ी है मुद्दत से दिल की बस्ती
आ इक नया शिवाला इस देस में बना दें
दुनिया के तीरथों से ऊंचा हो अपना तीरथ
दामाने आसमां से इसका कलस मिला दें
हर सुब्ह उठके गाएं मन्तर वो मीठे मीठे
सारे पुजारियों को ‘मै‘ पीत की पिला दें
शक्ति भी शांति भी भक्तों के गीत में है
धरती के बासियों की मुक्ति प्रीत में है

Abhishek ने कहा…

@DR. ANWER JAMAL
कोई तेरे ब्लॉग में नहीं जाता है तो यहाँ क्यूँ रोने आ जाता है. हमको इस्लामिक पट्टी बांधे लोगो के ब्लॉग में जाने का शौक नहीं है. जो केवल हिन्दुओ की बेज्जत्ति करता है उसके ब्लॉग में टाइम बर्बाद करने का फायदा नहीं दीखता हमको. हाँ तू यहाँ आता रहा कर ताकि तुझे अपने मजहब और कांग्रेसी दलालों के तुषिकरण की बारे में सच्चाई का ज्ञान होता रहे.

गंगाधर ने कहा…

अरे भाई अभिषेक जी, आने दीजिये, नहीं आयेंगे तो सच का ज्ञान कैसे होगा. पर यह लोग तो यहाँ प्रचार करने आ रहे हैं. यह दिग्भ्रमित लोग हैं जो कभी मनु की वकालत करेंगे तो कभी मोहम्मद की. यह क्या कहना चाहते हैं इन्हें ही नहीं पता.

गंगाधर ने कहा…

यहाँ आयेंगे तभी तो जानेंगे असली इस्लाम का मर्म.

Abhishek ने कहा…

गंगाधर जी इनके यहाँ आने के लिए मैंने कुछ नहीं कहा मैं खुद चाहता हु ये लोग यहाँ आये और हिंदुत्व के बारे में जाने तभी तो इनके दिमाग में जो एक मात्र सच्चे धर्म(islam) का पर्दा पड़ा है वो हटेगा. किन्तु ये जमाल यहाँ कोई पोस्ट पढने नहीं न आएगा ये तो बस अपने सड़े-गले लेख के लिंक देने आएगा. मैं हल्ला-बोल जी से request करता हूँ इसके लिंक यहाँ प्रकाशित न करे.

नेहा भाटिया ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
आशुतोष की कलम ने कहा…

आप सभी का आभार ..
कौशलेन्द्र जी, सुज्ञ जी ..बहुत बढ़िया तरीके से आप ने समझाया इस बात को आभार..
अनवर भाई भी आये मगर सिर्फ NICE POST ...कुछ और भी ज्ञान दे देते भाई..
अभिषेक जी आने दीजिये ये भी जाने हमारे धरम के बारे में ..अपने ही भाई हैं..

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

भाईयों आपको इतना अच्छा नग़मा नक़द सुनाया और जो लिंक दिया वहां भी कुछ अच्छा ही लिखने की कोशिश की है बंदे ने।
क्या इनमें आपको ज्ञान का कोई मोती न मिला भाई ?
सादर वंदे !

http://pyarimaan.blogspot.com/

हल्ला बोल ने कहा…

हम लोग हमेशा उदार होते हैं अनवर साहब, इसी का लाभ तो लोग उठाते है. हमारे प्रेम को लोग कायरता समझते हैं. यही उनकी भूल है, आप स्वयं देखिये हमारा हर कमेन्ट आपने मिटाया और हम............... आपने जो भूले की है उम्मीद है आप प्रायश्चित अवश्य करेंगे.

तीसरी आंख ने कहा…

अतिसुंदर व्याख्या है

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आप कमेंट की क्या बात करते हो भाई हल्ला बोल।
आपके लिए हमने कुटी है छवाई चाहे जितना बोल।

हल्ला बोल ने कहा…

श्रीमान अनवर साहब, यह मंच किसी का मजाक उड़ाने या किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं बना है, हल्ला बोल पर जो भी प्रकाशित होता है वह एक प्रमाणिक सच है, मैं शुरू में हो बोल दिया हूँ हर विषय पर हम सार्थक बहस करने के लिए तैयार हैं.हम बहस उसी मुद्दे पर करेंगे. जो पोस्ट यहाँ प्रकाशित होगी. उसके लिए हम किसी और ब्लॉग पर जाने की जरुरत भी नहीं समझते है, जो राष्ट्रभक्त मुस्लिम हैं वे आयें और बहस भी करें. yaha न तो किसी को अपशब्द कहे जायेंगे और न ही किसी का मजाक उड़ाया जायेगा. पर शायरी छोड़ कर चल देना और लिंक देना, आप सार्थक बहस में हिस्सा ले सकते है, अन्यथा आप उन्ही सेकुलर श्वानो के साथ रहे जो आपकी हा माँ हा मिला कर दुम हिलाते हैं.

नेहा भाटिया ने कहा…

हमें शर्म तब आती है, जब ऐसे लेखो पर भी लोग मौन रहते हैं, सचमुच सेकुलर श्वान अधिक है.

आनन्‍द पाण्‍डेय ने कहा…

बन्‍धुओं

बहुत अच्‍छा लगा इस ब्‍लाग पर आकर

आदरणीय आशुतोष जी को हार्दिक धन्‍यवाद जो इस तरह के लेखों से हिन्‍दुसमाज को जागरित करते रहते हैं ।
जमाल जैसे लोगों पर ध्‍यान मत दीजिये,
ये आज से नहीं पिछले जाने कितने वर्षों से हिन्‍दुओं पर कीचड उछालने का काम कर रहे हैं पर आजतक इनका खुदा इनका साथ नहीं दे पाया ।
खास बात यह है कि इस तरह के लेख जिनके लिखे व पढे जाने की हिन्‍दू समाज में अधिकतम आवश्‍यकता है का चलन इस समय जोरों पर है जो कि खुशी की बात है ।
श्री आशुतोष जी का ही लिखा हुआ एक लेख , (गोवा स्‍वतन्‍त्रता के बारे में)मैने अपने ब्‍लाग पर भी प्रकाशित किया है ।


एक बात और कहनी है - भारत की जनसंख्‍या एक सौ इक्‍कीस करोण है जिसमें अभी भी 70 प्रतिशत आबादी हिन्‍दुओं की ही है, हम में से मात्र दो तीन प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो सेकुलर है अन्‍यथा हिन्‍दू धर्म व समाज के नाम पर भावनाएँ सभी की एक हैं, जरूरत है तो बस उन्‍हे जगाने की , और इस पावन दायित्‍व का निर्वाह आप जैसे सज्‍जन वृंद कर रहे हैं अत: विश्‍वास रखिये, हिन्‍दुओं का कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता, चाहे कटुत्‍व का सम्‍पूर्ण बलप्रयोग क्‍यूँ न हो जाए ।


जय हिन्‍द

जय सनातन हिन्‍दू धर्म