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ये इश्लाम है????????????


विशाल जी ने ये ईमेल भेजी थी..सोचा आप सब से साझा करूँ..

क्या यही है इश्लाम  की असलियत...इस  साल के बच्चे का अपराध इतना था की उसने इरान की 
एक दुकान से भूख के कारण एक रोटी चुरा ली...
अब इसके हाथों के साथ क्या हो रहा है ,..आप तस्वीरों में खुद देख लें???
अब में क्या बोलू इश्लाम  की महानता के बारे में.. बस ये जानना चाहूँगा किसी  
इश्लामिक विद्वान से की वो बताएं की ये कौन सा इश्लाम है????
अगर इसने कोई भी अपराध किया हो क्या साल के बच्चे की ये सजा होनी चाहिए???????

धन्य हैं ऐसा इश्लाम(अगर कही है तो)
.......................................

This is hideous!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

THERE ARE NO WORDS TO DESCRIBE THIS!!!!!
MAY GOD HAVE MERCY ON US WHO TOLERATE THE MUSLIM!!!









 

                                   



No religion can ever justify such hideous crimes..... What sort of a civilization is this?
Pass it on ......let the world know what's happening in the name of Islam


श्री राम इन्हें सद्बुद्धि दें......जो भी धर्म ऐसा करता है चाहे इश्लाम हिन्दू या इसाई यह एक निंदनीय  कृत्य है...

12 टिप्‍पणियां:

Er. Diwas Dinesh Gaur ने कहा…

सच में यह तो क्रूरता से भरा है...कोई भी धर्म इस प्रकार की क्रूरता को कैसे स्वीकृति दे सकता है? यदि कोई धर्म ऐसा करता है तो उस धर्म को नष्ट होना ही चाहिए व उसके अनुयाइयों को मानवता का दुश्मन माना जाना चाहिए...

किलर झपाटा ने कहा…

ये इस्लाम का ही नहीं वरन मानवता का भी दुखद पहलू है।

बेनामी ने कहा…

photo nahi dikh raha hai.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?

बेनामी ने कहा…

aise krity islam me hi nahi har jagah ho rahe hai, pet bharne ke liye hindu bhi aisa hi kar raha hai. islam ko nahak dosh mat de.

blogtaknik ने कहा…

चित्र नहीं दिख रहें है कृपया चित्र को upload करें

PRITHVI RAJ ने कहा…

राक्षसीय लोग राक्षसीय काम

blogtaknik ने कहा…

कुछ लोग अपने आप को भगवान का दूत समजते है. और सोचते है कि ईसवरीय कानून दूसरों के लिए है खुद तो पाप करते है पर दूसरों के छोटे से गुनाह पर सैतान बन जाते है. ईसवरीय कानून सबके लिए बराबर है. और शास्त्रो मै तो १२ साल से कम उम्र के लिए कोय दंड का प्रावधान नहीं है. बारह के बाद बुध्धि और सोलह के बाद सुध्धि बताया गया है.

हरीश सिंह ने कहा…

क्रूरता से भरा

कौशलेन्द्र ने कहा…

इक्कीसवीं सदी में न्याय की आड़ में अमानवीय कृत्यों को यदि इस्लामिक जामा पहनाया जा रहा है तो ऐसा जामा मनुष्य जाति पर कलंक है .....इस्लाम को एकमात्र श्रेष्ठ धर्म बताने वाले तथाकथित ठेकेदार इस दृश्य को देखकर यदि विचलित नहीं होते तो वे पशु से भी गए बीते हैं. ऐसा लगता है कि इरान में ऐसा क़ानून बनाते समय वहाँ मनुष्य नामक कोई प्राणी था ही नहीं ....जो थे वे निर्बुद्धि वहशी लोग थे. लानत है ऐसे लोगों पर और ऐसे क़ानून पर. क्रूरतम लोग ...क्रूरतम क़ानून ...क्रूरतम धर्म ....क्रूरतम आचरण .....

कौशलेन्द्र ने कहा…

ब्राज़ील से एनी की टिप्पणी जोकि उन्होंने मुझे ऑरकुट पर प्रेषित की है .......वे इस कुदृश्य को देखकर कितनी आहत हुयी हैं यह उनकी टिप्पणी से प्रकट हो रहा है.
.......But a picture shocked me too, is the second time I've seen: that of an infant with om truck passing over his little arm. What barbarism. Hardly believe it still exists. It makes me sick to see my friend, too bad ..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

इस्लाम में कहने की ही शान्ति और प्रेम है, हो क्या रहा है सबके सामने है...