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इस्लाम का एक और रूप

बंधुओ आप लोग इस लिंक पर भी जाएँ और देखे दुनिया के एक और कोने में इस्लाम का क्या रूप है। किस तरह गौ माता का कटा हुआ सर लेकर प्रदर्शन कर रहे है कायर इस्लाम के नाम पर। क्या इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
http://www.youtube.com/user/VHPSampark#p/u/59/LzZnzgXfyQY

13 टिप्‍पणियां:

आशुतोष की कलम ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
आशुतोष की कलम ने कहा…

आशुतोष की कलम ने कहा…
अरे अरे गंगा धर जी क्या सुबह सुबह दिखा दिया..
अब में अगर माँ बहन की गाली दू तो हरीश भाई बोलेंगे अमर्यादित है..
लेकिन आज STAR लगा के गाली नहीं लिखूंगा..हल्ला बोल या तो मेरी गालियों को स्वीकार करो इन हरम के पिल्लों के लिए या तो ऐसे विडियो का लिंक देने से मना करो गंगाधर जैसे को ........
या तो आशुतोष नाथ तिवारी को निष्कासित कर दो इस मंच से ...
जो लोग इस प्रदर्शन में शामिल हैं वो माँधरचोद हैं ...वो कोठे की रंडी की औलाद है जिन्हें अपने बाप का पता मालूम नहीं...इन हराम के पिल्लों के साथ सही कर रहा है अमेरिका ...
अब मुझे बेसक इस मंच से निकल दें आप सभी सम्मानित लोग,लेकिन मेरे मन में यही भावना है...जो की एक लेखक होने के कारण में छिपाऊंगा नहीं...

जो लोग मेरे इस टिपण्णी से सहमत नहीं वो कृपया मुझे अपनी मित्र सूची से निकाल दे...और जा के एक गाय का कटा सर ले कर अल्ला हु अकबर करें. इतने के बाद अगर आप सहृदयता और संस्कार की बात करते हैं तो आप सहृदय नहीं कायर हैं...अरे कायरों अब तो जागो...नहीं अगली बार सर हमारे तुम्हारे बच्चों का होगा किसी हिन्दू का होगा..

हरीश सिंह ने कहा…

आप तो नाहक ही हमें दोष दे रहे है आशु जी, गौमाता का काटा हुआ सिर देखकर जिस हिन्दू को गुस्सा न आये उसे तो अपनी माँ का काटा हुआ सिर देखकर भी नहीं आएगा. एक तो उन्होंने गुनाह किया किया की इस तरह कटे सिर को लेकर प्रदर्शन किया और उसके ऊपर पैर रखकर अपने शौर्य का प्रदर्शन कर रहे हैं. हद तो यह है की प्रत्येक भारतीय मुसलमान को इसका विरोध करना चाहिए, पर छोडिये जाने दीजिये उनको ही हम दोष क्यों दे, देखिएगा कायर हिन्दू भी चुप रहेंगे ताकि उनका नाजायज़ बाप नाराज़ न हो जाय. कही ""दिग्गी"" देख लिया तो वह समर्थन करेगा. कहेगा इसमें बुराई क्या है. जब अपने घर में जयचंद है तो मुसलमानों को ही दोष क्यों दे.

क्रांतिकारी हिन्दोस्तानी देशभक्त ने कहा…

आशु जी की टिप्पणी से पूर्ण सहमत हूँ और ये साले इतना करके सिर्फ अपनी नपुंसकता को ही साबित कर रहे हैं इससे ज्यादा और कर भी क्या सकते हैं !
जागो हिनोस्तानियो जाग जाओ वर्ना ये कौम एक दिन मेरे तुम्हारे सर लेकर एसे ही पर्दर्शन करेगी !
किसी घटिया की ओउलाद !

Laxmipat Dungarwal ने कहा…

hindu samaj ka durbhagya he, sangthit nahin he, desh ka sadhu samaj bhi apane apane ahankar or swarth ke karan sangthit hokar isaka virodh nahi karte,ram katha,krishna lila sunane vale sant kabhi bhi hinduon ka swabhiman jagane ka pravachan nahin dete, muslimon ko chhodo ham digvijay singh jese muslim parast logon ka hi virodh nahi karte,kisi ki aalochana me ashobhniy shabdon ka prayog bhi kayarta ki hi nishani he, hinduon ko jagrat karne ke liye V.H.P.jaise sangthano ko desh bhar me lagatar sabhayen katre rahana chhahiye.

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

आप सब से मैं भी सहमत हूँ

पृथ्वीराज ने कहा…

इन राक्षसो को बहुत भयंकर परिणाम भोगना पढ़ेगा.
देर है अंधेर नही है

rubi sinha ने कहा…

गौमाता का सर काटकर जिस तरह प्रदर्शन किया जा रहा है और वहा की सरकार चुप है यह हिन्दुओ का खुलेआम अपमान है. यह गाय का सर नहीं बल्कि प्रत्येक हिन्दू की माँ का सर काटा गया है. मुझे याद है किसी देश में कुछ वर्ष पहले कुरान के पन्ने फाड़ दिए गए थे तो भारत में भी मुसलमानों ने प्रदर्शन किये थे. पर अफ़सोस है हम हिन्दू kitne kayar ho गए है जो sab कुछ dekhkar भी चुप rahte हैं.

Mithilesh dubey ने कहा…

अफसोसजनक

ZEAL ने कहा…

रूबी सिन्हा जी की टिप्पणी से सहमत हूँ।

कौशलेन्द्र ने कहा…

यह प्रदर्शन धर्मान्धता, क्रूरता और पाशविकता का प्रतीक है. निश्चित ही कोई भी सुलझा व्यक्ति इस कृत्य की प्रशंसा तो करेगा नहीं. हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने के साथ ही एक मूक पशु के साथ अत्याचार करना और उसके मृत सर को अपनी क्रूरता के प्रदर्शन का माध्यम बनाना यदि किसी धर्म के समर्थन में हो रहा है तो ऐसा धर्म घोर निंदनीय है.
हम इस्लाम पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते पर बारम्बार एक ही बात सामने आती है कि क्या यह सब इस्लाम के नाम पर हो रहा है ? इस्लाम की रक्षा के लिए हो रहा है ? मुसलमानों में एक नारा लगता है कि - इस्लाम खतरे में है ....और बस इस्लाम को बचाने के लिए कुछ भी शुरू हो जाता है. विचारणीय है कि कोई धर्म इतना कमजोर है क्या कि बात-बात पर खतरे में पड़ जाता है ? यदि कोई धर्म इतना नाज़ुक है तो निश्चित ही वह मनुष्य के लिए कल्याणकारी कदापि नहीं हो सकता . धर्म मनुष्य की रक्षा के लिए है यह बात तो समझ में आती है .......पर मनुष्य धर्म की रक्षा के लिए है यह बात समझ में नहीं आती है.
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना २८ अगस्त २००९ को मलेशिया में घटित हुयी. इसके अन्य पक्ष हमारे लिए अभी अज्ञात हैं. यथा, यह प्रदर्शन किस प्रतिक्रियास्वरूप किया गया ? मलेशियन हिन्दुओं की तत्कालीन प्रतिक्रिया क्या रही ? मलेशियन पत्रकारों ने इसे किस रूप में लिया ? वहाँ के बुद्धिजीवियों की क्या प्रतिक्रिया रही ? भारत सरकार की ओर से क्या कोई विरोध प्रकट किया गया ? विश्व हिन्दू परिषद् ने इस पर तब क्या कार्यवाही क्या थी ?
विश्व हिन्दू परिषद् एक अधिकृत संस्था है हम चाहेंगे कि इस संस्था के द्वारा पूरे भारत समाज की ओर से नयी दिल्ली स्थित मलेशिया दूतावास के समक्ष इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया जाना चाहिए.जो लोग दिल्ली में हैं उन भाइयों से अनुरोध है कि वे इस घटना का सम्पूर्ण विवरण प्राप्त करने का प्रयास करें.

कौशलेन्द्र ने कहा…

आर्यपुत्री दिव्या ! इतने से काम नहीं चलेगा .......कोई ठोस योजना बनानी होगी .....विचार करो ...योजना बनाओ क्या किया जाना चाहिए. अब योजनाओं की आवश्यकता है ...क्रांतिकारी योजनाओं की. हम इतने सस्ते में तुम्हें यहाँ से जाने नहीं देंगे.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

व्यापारी बन चुके हैं हिन्दू.. जो सब कुछ बेच सकते हैं...