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सनातन संस्कृति को खतरा


सनातन संस्कृति सर्वाधिक प्रचीन और सर्वश्रेष्ठ सभ्य संस्कृति है। इस संस्कृति नें सर्वोच्छ उँचाई को हासिल कर लिया था। सनातन नें वह स्थिति प्राप्त कर ली थी जहाँ कोई भी विचारधारा आए उसे अपने रंग में रंग देती थी। क्योंकि इसके पास सर्वोच्छ निष्कर्ष निश्चित हो चुके थे इसलिए सामान्य जीवन धारा के छोटे छोटे सिद्धांतो का इसमें घुल जाना स्वभाविक था। अन्तत: सारी विचारधाराएँ इसमें घुलकर एक-मेव हो जाती थी।
किन्तु बाहरी विपरित विचारधाराएँ आई जो दर्शन की पूर्णता को प्राप्त नहीं थी। किसी भी तरह जीवन और भोग को महत्व देने वाली थी। वे कुसंस्कृतियाँ, सनातन से पूरी तरह विपरित थी।
उन कुसंस्कृतियों को सनातन नें पहले तो अपने रंग में रंगना चाहा, उसे सर्वोच्छ सिद्धांतो में आत्मसात करने का प्रयास किया पर मूल से ही भिन्न और विपरितता के कारण वे खलनायक की भूमिका में ही रही। सनातन दूध की तरह थी जो मिश्री को स्वयं में घोल देती थी। इन कुसंस्कृतियों का स्वभाव फिटकरी था, देखनें में मिश्री की डली पर स्वभाव कटु और विष समान था। स्वभाव मात्र कटु ही नहीं वह जिसका आधार लेती उसे भी बिगाड कर रख देती। इस फ़िटकरी नें दूध समान सनातन में भी बिगाड़ ही शूरू किया।
सनातन की पीढ़ी नें उनके आगमन पर पहले उन्हे स्वयं में घुलने का अवसर दिया, पर वह घुल न पाई। दूसरी पीढ़ी ने स्वतंत्र सौहार्द दिया। उस संस्कृति ने सौहार्द की कमजोरी पर राज किया। हमारी वर्तमान पीढ़ी सेक्युलर बन झुक गई, उसे हमले की छूट मिल गई। अब आने वाली सनातन पीढ़ी को सम्पूर्ण खा जाने की उसकी मानसिकता है। वह सनातन को अपने कुसंस्कारित विपरित रंग में रंग देने को आमदा है। वे कुटिलता से कहती है हमारे में कुछ समानताएं है। अत: हम जैसे बन जाओ। पूरी तरह से संस्कार विहिन, असभ्य वापस आदिम, भ्रष्ट!!

सावधान, सनातन संस्कृति वास्तव में खतरे में है!!

4 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

" इस्लाम ख़तरे में है " की तर्ज़ पर अब " सनातन धर्म " भी ख़तरे में है क्या ? जो सनातन है वह सत्य है और जो सत्य है उसे किसी से खतरा नहीं हो सकता. ख़तरे में हम हो सकते हैं क्योंकि हम नाशवान हैं ....विकारयुक्त हैं ...मर्यादाओं का उल्लंघन कर सकते हैं ....और धर्मच्युत हो सकते हैं. जो धर्मच्युत हो जाएगा वह असंस्कारी होकर स्वयं के अस्तित्व को ख़तरे में डालेगा. वास्तव में ख़तरे में तो हम हैं सनातन धर्म नहीं. सत्य को किससे खतरा हो सकता है भला ? आपसे विनम्र निवेदन है कि सनातन धर्म को इतना हल्का मत आंकिये.

Lies Destroyer ने कहा…

मेरा ईरादा सनातन धर्म को कमतर आंकने का नहीं है। कहने का मतलब ये है कि हमारे पर कुसंस्कृति के सोचे समझे आकृमण हो रहे है।
अनुआई धर्मच्युत को जाएगा तो धर्म को धारण कौन करेगा। धर्म की रक्षा ही हमारी रक्षा है।

बेनामी ने कहा…

ऐसी बात करे महोदय, कौशलेन्द्र जी सही कह रहे है. सनातन धर्म को कोई खतरा नहीं हो सकता, खतरा उन्हें है जो अधर्मी है. जो धर्म के नाम पर हिंसा करते है. मैं भी दिग्भ्रमित था जनाब\, आज आप लोंगो को मैं एक बात बताता हु. " भारतीय नागरिक" और कविता जी के भेजे हुए एक विडियो ने हमें पूर्ण रूपें शाकाहारी बना दिया. मुझे मांस भक्षण से घृणा हो गयी. मैं जान गया की हिंसा वह व्यक्ति ही कर सकता है जो दुसरे की मांस खाता हो. यदि सभी लोग दूसरे जीव की रक्षा करें तो पूरे विश्व में खुद बा खुद शांति हो जाएगी. मैं इसके लिए " निरामिष" का शुक्रगुजार हूँ. इस मंच के माध्यम से आप लोग सनातन धर्म का प्रचार करे, लोंगो को यह बताये की यही एक ऐसा धर्म है जो विश्व में शांति ला सकता है. जीव हत्या की प्रेरणा और जेहाद की बात करने वाला धर्म सिर्फ अशांति फैला सकता है. जय श्री राम . ॐ शांति ..................
आज मेरे यहाँ नेट में कुछ प्रॉब्लम है. लिहाजा बेनामी से कमेन्ट कर रहा हूँ. हरीश सिंह

बेनामी ने कहा…

ऐसी बात करे महोदय, कौशलेन्द्र जी सही कह रहे है. सनातन धर्म को कोई खतरा नहीं हो सकता, खतरा उन्हें है जो अधर्मी है. जो धर्म के नाम पर हिंसा करते है. मैं भी दिग्भ्रमित था जनाब\, आज आप लोंगो को मैं एक बात बताता हु. " भारतीय नागरिक" और कविता जी के भेजे हुए एक विडियो ने हमें पूर्ण रूपें शाकाहारी बना दिया. मुझे मांस भक्षण से घृणा हो गयी. मैं जान गया की हिंसा वह व्यक्ति ही कर सकता है जो दुसरे की मांस खाता हो. यदि सभी लोग दूसरे जीव की रक्षा करें तो पूरे विश्व में खुद बा खुद शांति हो जाएगी. मैं इसके लिए " निरामिष" का शुक्रगुजार हूँ. इस मंच के माध्यम से आप लोग सनातन धर्म का प्रचार करे, लोंगो को यह बताये की यही एक ऐसा धर्म है जो विश्व में शांति ला सकता है. जीव हत्या की प्रेरणा और जेहाद की बात करने वाला धर्म सिर्फ अशांति फैला सकता है. जय श्री राम . ॐ शांति ..................
आज मेरे यहाँ नेट में कुछ प्रॉब्लम है. लिहाजा बेनामी से कमेन्ट कर रहा हूँ. हरीश सिंह