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तुम हमारी चोटियों की बर्फ को यूँ मत कुरेदो






तुम हमारी चोटियों की बर्फ को यूँ मत कुरेदो
दहकता लावा ह्रदय में है की हम ज्वालामुखी हैं
लास्य भी हमने किया है और तांडव भी किये हैं
वंश मीरा और शिव का विष पिया है और जिए हैं



5 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

कहां मुर्दों को जगाने की कोशिश कर रहे हैंं..

आशुतोष की कलम ने कहा…

कुछ घटनाओं से ऐसा ही लग रहा है मुर्दों में जन फुकने के चक्कर में कहीं उम्र न बीत जाए..
कर्म पर अपना अधिकार है वो कर रहा हूँ ..धन्यवाद्

Ankit.....................the real scholar ने कहा…

जाग उठा है हिन्दू फिर से निज हिंदुत्व बचने को , अंगडाई ले चले पुत्र हैं माँ के कष्ट मिटने को

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

देर है अंधेर नहीं

हरीश सिंह ने कहा…

भैया आप ज्वालामुखी हैं इसमें कोई दो राय नहीं. यहाँ मुर्दों में जान फूंकने जैसी बात करके हताशा का परिचय न दे, हमें सोये हुए को जगाना है. उनके अन्दर दम तोड़ रहे हिंदुत्व को आवाज़ देकर नवजीवन देना है.