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धन्य है वो मानव जिन्होने पवित्र भारतवर्ष मे सनातन धर्म मे जन्म लिया है.

मित्रो
बहुत जन्मो के पुण्य के फलस्वरुप इस महान भारतवर्ष मे महान सनातन धर्म मे जन्म होता है.

और हम लोग बहुत खुशनसीब है कि हम लोगो को ऐसा अवसर प्राप्त है जो देवताओ के लिये भी दुर्लभ है.

भारत भूमि की महिमा अनन्त और अवर्णनीय है.

देवगण भारत मे जन्म लेने की इच्छा करते हुये ये सोचते है.
कि हम लोग कब संचित किये हुये महान अक्षय,निर्मल एवं शुभ पुण्य के फलस्वरुप भारत मे जन्म लेँगे और कब वहाँ महान पुण्य करके परमपद को प्राप्त होँगे.

नारदपुराण मे सनक जी नारद जी से कहते है.
नारद जी! जो भारत भूमि मे जन्म लेकर परमात्मा श्री विष्णु जी की आराधना मे लग जाता है उसके समान पुणयात्मा तीनो लोको मे नही है.

भागवत मे कहा गया है
"देवता भी भारत मे उत्पन्न हुये मनुष्यो की महिमा इस प्रकार गाते है-

अहा,
जिन जीवो ने भारतवर्ष मे भगवान की सेवा के योग्य मनुष्य जन्म लिया है उन्होने ऐसा क्या पुण्य किया है?
अथवा इन पर स्वयं श्रीहरि ही प्रसन्न हो गये है ? इस परम सौभाग्य के लिये निरन्तर हम भी तरसते रहते है
(5/19/21)

इस देश का नाम भारतवर्ष कैसे पड़ा इसका पुराणो मे स्पष्ट उल्लेख है.
कि स्वायम्भुव मनु के ज्येष्ठ पुत्र थे प्रियव्रत !
इन्होने ज्योतिर्मय रथ द्धारा सात बार वसुधातल की परिक्रमा की ,इनसे जो परिखाएँ बनी ,वे सात समुद्र हुये और उनके किनारे के क्षेत्र सात महाद्वीप हुये.
इन द्वीपो के नाम क्रमशः जम्बु, प्लक्ष, शाल्मलि ,कुश, क्रौँच,शाक तथा पुष्कर नाम से प्रसिद्व हुये.

महराज प्रियव्रत के आग्नीध्र आदि सात पुत्र इन सात द्वीपो के अधिपति हुये.
सबसे बड़े पुत्र आग्नीध्र जम्बुद्धीप के अधिपति हुये.

महाराज आग्नीध्र ने जम्बुद्धीप को अपने नौ पुत्रो मे बराबर बाँट कर दे दिया.
इन नौ खण्डो के नाम इनके नौ पुत्रो के नाम पर क्रमशः नाभि, किम्पुरुष, हरिवर्ष, इलाव्रत, रम्यक, हिरण्मय, कुरु, भद्राश्व तथा केतुमाल पड़े.

ज्यष्ठ पुत्र नाभि के नाम पर खण्ड(वर्ष) का नाम अजनाभवर्ष पड़ा.

राजा नाभि के सौ पुत्र हुये. जिनमे ज्येष्ठ पुत्र थे भरत.
उनकी अत्यन्त लोकप्रियता तथा सदगुणशालिता के कारण अजनाभवर्ष का नाम भारतवर्ष पड़ा.

अजनाभं नामैतदर्षँ भारतमिति यत आरभ्य व्यपदिशन्ति( भागवत 5/7/3)

यह भारतभूमि अनन्त काल से सुसंस्क्रत,सुजला,सुफला रही है.
इस देश मे उत्पन्न साधु सन्तो से पूरी प्रथ्वी के मानवो ने शिक्षा प्राप्त की है.

इस भारतभूमि पर स्वयं भगवान कई रुपो मे अवतरित हुये है.
अयोध्या, मथुरा , काशी ,रामेशवरम, व्रंदावन ,हरिद्धार जैसी पवित्र स्थान यही पर है.

भगवान शिव का पवित्र कैलाश पर्वत भी यही है.

भगवती सीता और सती का जन्मस्थान भी इसी भूमि मे है.
बड़े बड़े साधु संत मुनि महात्मा भक्त सत्यवादी, सब इसी भूमि पर पैदा हुये है.

परोपकारी, वीर, न्यायप्रिय राजागण तथा साध्वी तपस्विनी ,पतिव्रता नारीरत्न भी इसी भारत मे हुये है.

गंगा, यमुना,सरस्वती,सिन्धु,नर्मदा,क्रष्णा , कावेरी जैसी पुण्य नदियाँ इस भारत भूमि को पवित्र कर रही है

यह भारत धर्मभूमि पुण्यभूमि, देवभूमि और सांस्क्रतिक भूमि है.

ऐसी पवित्र भूमि मे आर्य{हिन्दू} बन कर जन्म लेना अत्यन्त सौभाग्य की बात है.
जो केवल परमात्मा की क्रपा से ही मिलता है.

8 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

इन धन्य लोगों में हम व आप भी तो है,
जानकारी से भरा हुआ लेख है,
हम पर परमात्मा की कृपा है,

सुज्ञ ने कहा…

आपने आर्य भूमि भारतवर्ष की सर्वोत्तम स्तूति की है।आप धन्य है, जिनकी जिव्हा पर यह स्तुति रमण कर रही है।

हरीश सिंह ने कहा…

गर्व से कहो हम हिन्दू हैं और हमने भारत माता की गोद में खेला है. वन्दे मातरम

पृथ्वीराज ने कहा…

जी हाँ जाट देवता जी
हम सब बहुत भाग्यशाली है.

पृथ्वीराज ने कहा…

आदरणीय सुग्य जी
मैने तो छोटा सा प्रयास किया है सागर को अपनी मुटठी मे समेटने का.
क्यो कि भारत भूमि और सनातन धर्म की महिमा तो इतनी है कि उसका बखान करने के लिये कई जन्म भी कम पड़ेँगे.

vishwajeetsingh ने कहा…

भारत भूमि आदि काल से ही धर्मभूमि - पुण्यभूमि है , यह इसकी महिमा है कि इस्लाम सम्प्रदाय का प्रर्वतक मोहम्मद भी भारत की ओर मुँह करके ईश्वर स्तुति किया करता था और ईसाई सम्प्रदाय के प्रभु ईसा मसीह ने भी सच्चे ज्ञान की प्राप्ति भारत में की और बाद में भारत में ही प्राण त्यागे ।
भारत माता के प्रति समर्पण भाव को दर्शाती उत्तम अभिव्यक्ति ...... आभार ।
वन्दे भारत मातरम्

rubi sinha ने कहा…

भारत माता के प्रति समर्पण भाव को दर्शाती उत्तम अभिव्यक्ति ...... आभार ।
वन्दे भारत मातरम्

I and god ने कहा…

छमा करिये ,

जब तक हिंदू अपने शाश्त्रों को आदर , पढ़ंनआ शुरू नहीं करेगा, मुसलमानों व कुरआन की आलोचना से क्या होगा.

जरा पूछिए इस ब्लॉग के मेम्बरों से , कितनों ने रामायण , गीतआ , महाभारत , भागवतम परही है.

सच्चे हिंदू बनो, अधर्मी खुद भाग जायेंगे.