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मुस्लिम वोटो के लिए गिडगिडाते चंद्रबाबू नायडू--

आज सुबह अख़बार में इस खबर ने बहुत दुःख पहुँचाया कि प्रगतिशील माने जाने वाले चंद्रबाबू नायडू सत्ता प्राप्तिके लिए मुस्लिमो के आगे वोटो के लिए गिडगिडा रहे हें, वेसे तो जिन लोगो को यह भरोसा नहीं होता हे, कि जनता उनके काम पर, उनके विकाश कार्यों पर विस्वास कर उन्हें वोट देगी उनके लिए जीत के लिए मुसलमानों के सामने वोटो के लिए गिडगिडाना , मुस्लिम टोपी पहन हिन्दुओं से ज्यादा मुस्लिम हितेषी साबित करना ही एक मात्र रास्ता रह जाता हे. इसके लिए चंद्रबाबू व उन जेसे नेताओं के पास विकास के पैमाने पर अपनी असफलताओं को छुपाने तथा सत्ता पाने के लिए वही घिसेपिटे तरीके हे भाजपा सांप्रदायिक पार्टी हे,हमने नरेन्द्र मोदी का विरोध किया. वेसे विकाश के मामले में वो नरेन्द्र मोदी के आगे कहीं नहीं टिकते, नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में जैसा अभूतपूर्व विकास किया हे चंद्रबाबू तो वेसे विकास कि कल्पना ही नहीं कर सकते, विकास करना तो बहुत दूर कि बात हे. नरेन्द्र मोदी का विकास पुरे गुजरात का विकास हे, ना कि हिन्दू या मुसलमान का. तभी तो तमाम मिडिया, ढोंगी सामाजिक तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता, पूरी कांग्रेश पार्टी, चंद्रबाबू तथा उनके जैसे धर्मनिरपेक्ष (सही अर्थ --धर्मविहीन )लोगो के तमाम दुस्प्रचार करने तथा समूची ताकत झोंकने के बावजूद नरेन्द्र मोदी को पराजित नहीं कर सके. कहते हे ना कि झूट कितना ही बड़ा क्यों हो, कितने ही लोग कितनी ही बार बोले सच के सामने टिक नहीं सकता,
अब बेचारे चंद्रबाबू भी क्या करे, गुजरात में जो झूट नहीं चला वो हैदराबाद में तो चला सकते हे, ना तो गुजरात के विकास कि सच्चाई जनता को बता सकते हे, ना इस सच्चाई को जानते हुए भी जनता को बता सकते हे कि गुजरात में हिन्दू के साथ साथ मुसलमान भी नरेन्द्र मोदी को वोट देते हे, चंद्रबाबू नायडू कहते हे, गोधरा कांड के बाद हुए दंगो के बाद भाजपा के साथ होते हुए भी उन्होंने ही नरेन्द्र मोदी को हटाने कि सबसे पहले मांग कि थी, पर वो यह नहीं बताते कि उन्होंने गोधरा कांड कि आलोचना भी कि थी, शायद ऐसे लोगो के लिए धर्मनिरपेक्षता का मतलब यही होता होगा कि मुसलिमों के द्वारा हिन्दू मरे तो चुप बेठो,पर अगर हिन्दू के द्वारा मुस्लिम मरे तो हिन्दू कि जम कर आलोचना करो, वेसे भला हो उस समय के भाजपा नेताओं का जिन्होंने नरेन्द्र मोदी को हटाने कि बजाय चंद्रबाबू को जाने दिया जिनके नेत्रत्व में आज गुजरात अकल्पनीय प्रगति कर रहा हे, चंद्रबाबू नायडू कि तरह प्रदेश कि जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर नहीं किया. इसलिए अब बेचारे चन्द्र बाबु नायडू को वोटो के लिए मुसलमानों के सामने गिडगिडाना पड़ रहा हे. उनके लिए धर्म आधारित आरक्षण कि असंवेधानिक मांग तथा शादिखानो तथा मस्जिदों के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता कि मांग करनी पड़ रही हे, वो हिन्दुओं के लिए मंदिर निर्माण, या हिन्दू तीर्थ यात्रा के लिए आर्थिक सहायता के लिए कोई मांग नहीं करते हे.
ऐसा कई बार सुना कि चंद्रबाबू नायडू ने धोके से पार्टी कि कमान अपने ससुर तेलगु देशम के संस्थापक श्री एन. टी. रामाराव से हथिया ली थी. लगता हे धोका देना उनकी खास विशेसता हे, अपने फायदे के लिए भाजपा के साथ जुड़े, अपने प्रदेश के लिए केंद्र से जम कर आर्थिक सहायता ली, हैदराबाद का बहुत विकाश किया, केवल हैदराबाद के विकाश को पुरे प्रदेश का विकाश मानने कि नादानी करते रहे, गाँव को, किषानो, बुनकरों को भूल गए, अपनेआप को विकाश पुरुष समझने के चंद्रबाबू के अहंकार का राजशेखर रेड्डी ने फायदा उठाया, गावं गावं में पदयात्राएं कि. अगले चुनाव में चंद्रबाबू रास्ते पर आ गए, खुद तो डूबे ही भाजपा को भी केंद्र में ले डूबे. चंद्रबाबू कि कारगुजारिओं का नुकसान भाजपा को भी हुआ.
ऐसे लोग जब भाजपा के साथ सत्ता में होते हे, या भाजपा के सहयोग से सत्ता मिलती हो तब इनके लिए भाजपा अच्छी होती हे किसी भी कारण से सत्ता से बाहर हो जाने पर भाजपा सांप्रदायिक हो जाती हे, चंद्रबाबू तथा उन जेसे नेता ऐसे समय भाजपा को धोका देकर मुसलमानों के सामने गिडगिडाने लगते हे. कहावत हे कि मुर्खता व नादानी में आदमी अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मार लेता हे, पर चंद्रबाबू नायडू तो महा नादान हे जो कुल्हाड़ी पर पैर मार रहें हे, लगातार मारते ही जा रहें,पहली बार अपनी कारगुजारिओं से खुद के साथ साथ भाजपा का भी भट्टा बैठाया, भाजपा और नरेन्द्र मोदी को हार का जिम्मेदार ठहराया, दूसरी बार के चुनाव में सोचा भाजपा से अलग रहने से, उसे सांप्रदायिक पार्टी बताकर उसकी व् नरेन्द्र मोदी कि जमकर आलोचना करने से, मुस्लिम मतदाता पट जायेगा, मुस्लिमो को पटाने के कई जतन किये, मुस्लिम टोपी पहनकर सलाम करते हुए कई पोस्टर लगवाये, कई बड़े मुस्लिम नेताओं को अपने साथ मिलाया, पर कुछ नहीं हुवा, जो नादानी उन्होंने तब कि वो लगातार करते जा रहे हे, मुस्लिम तो उनके लाख गिडगिडाने पर भी ओवेस्सी कि एम.आइ.एम. पार्टी को छोड़ने वाले नहीं हे , उलटे हिन्दुओं के काफी वोट टूट कर भाजपा में जाने से चंद्रबाबू नायडू कि हालत ना घर के ना घाट के जैसी हो गई, दुसरे विधानसभा चुनाव के बाद हुए अन्य दुसरे चुनाव इसका सबूत हे. भगवान जाने कब नायडू जी को सदबुधि आयेगी कि चुनाव में जीत नरेन्द्र मोदी कि तरह पूरी जनता के विकास पर ध्यान देने, हर गावं शहर , हर जाति,धरम के विकास पर बराबर ध्यान देकर पूरी जनता का विस्वास जितने से मिलती हे. अपने फायदे के लिए जिस पार्टी का साथ लो, मतलब निकलजाने पर पर उसके साथ धोका दे कर किसी विसेस संप्रदाय के सामने गिडगिडाने से नहीं. जनता विकाश करने वालो तथा किसी कि भावनाएं भड़का कर वोट पाने कि लालसा रखने वालों को पहचानती हे. यह बात जब चंद्रबाबू नायडू समझेंगे तभी सफल होंगे.



प्रस्तुतकर्ता Laxmipat Dungarwal

5 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

बहुत अच्छे, ऐसा ही होना चाहिए, ऐसे लोगों के साथ,

हरीश सिंह ने कहा…

आज सभी मुस्लिम वोटो के लिए गिडगिडा रहे हैं जनाब, इसका कारन हिन्दू ही है, जब हम ऐसा कहते है तो लोंगो को बुरा लगता है. पर यह भी सोचे की आज मुसलमान जब वोट देने की बरी आती है तो एकजुट हो जाता है. यही कारन है की राजनितिक पार्टियाँ मुसलमानों के तलवे चाटती हैं. हद तो यह है की हिन्दू आज अल्पसंख्यक है क्योंकि वह जातियों में बाँट चूका है. ताकत एकता में होती है. और वह ताकत मुस्लिमो में है तभी सभी पार्टियाँ उनके लिए तेल लेकर खड़ी है.

हरीश सिंह ने कहा…

आपने लिखा अच्छा है ऐसे लोंगो के साथ ऐसा ही होना चाहिए क्योंकि यही लोग तो सेकुलर श्वान हैं.

पृथ्वीराज ने कहा…

जो हडडी डालेगा ये उसकी तरफ भागेँगे.
अगर हिन्दु एकजुट होकर एक वोट बैँक बना ले . तो किसी नेता की क्या मजाल कि वो हिँदुत्व के विरोध मे जरा सा भी बोले.

rubi sinha ने कहा…

हिन्दुओ को एकजुट होने की आवश्यकता है नहीं तो एक बार फिर मुग़ल शासन होगा