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मुस्लिम देशों में परिवर्तन की लहर ...

      आज कल मुस्लिम देशों में परिवर्तन की एक लहर उठी हुयी है. समुद्र में  कोई भी लहर यूँ ही नहीं उठा करती....इसके पीछे होता है समुद्र का हाहाकार और पीड़ा की एक लम्बी कहानी . यह लहर मिस्र से होती हुयी यमन तक पहुँच चुकी है. हमें ध्यान रखना होगा कि परिवर्तन की हर लहर का परिणाम सुखद होना अनिवार्य नहीं है . हर क्रान्ति मिस्र जैसी नहीं हो पाती. 
        एक ताज़े समाचार के अनुसार, यमन के एक शहर पर अलकायदा के तीन सौ विदोहियों ने कब्ज़ा कर लिया है. यह समाचार भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए खतरे का पूर्वाभास है. विश्व जन मानस में अलकायदा की हिंसक छवि बन चुकी है . उसी अलकायदा ने यमन के एक शहर पर कब्ज़ा कर लिया है. दूसरी और तालिबान ने पाकिस्तान के परमाणु आयुधों पर अपने इस्लामिक हक़ की खुले आम घोषणा कर दी है. यह स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में  पाकिस्तान के अन्दर एक भीषण उथल-पुथल होने वाली है. इस उथल-पुथल से भारत का अप्रभावित रह पाना संभव नहीं है....खासकर तब जबकि कट्टरपंथी लोगों की निगाहें पाकिस्तान के परमाणु ज़खीरों पर लगी हों और वे कटिबद्ध हों पूरी दुनिया में शरीयत का क़ानून लागू करने के लिए. 
        अब एक प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या पाकिस्तान अपने परमाणु ज़खीरों की सुरक्षा कर पाने में समर्थ है ? ईश्वर करे वह समर्थ हो सके ..पर यदि वह ऐसा न कर सका और परमाणु ज़खीरे तालिबानियों के हाथ लग गए तो उनका प्रयोग भारत के विरुद्ध नहीं किया जाएगा ऐसा सोचना भारी भूल होगी. 
       खतरा पाकिस्तान पर भी कम नहीं है......वह अपने ही जाल में बुरी तरह फंस चुका है. आने वाले समय में पाकिस्तान का अस्तित्व क्या और कैसा होगा ......यह चिंतनीय है. पर पाकिस्तान की आम अवाम का रुख कुछ तसल्ली देने वाला है. वे अमन चाहते हैं ......सत्ता की अस्थिरता, गरीबी, बेरोज़गारी, भूख, पेयजल की समस्या, कमर तोड़ महंगाई, खूनखराबा और विश्व बिरादरी में बदनामी ....ये कुछ ऐसे घटक हैं जिनसे पकिस्तान का बुद्धिजीवी वर्ग और आम आदमी दोनों ही आजिज़ आ चुके हैं. वे परिवर्तन चाहते हैं. पर इसके लिए वे कुछ कर पाने की स्थिति में अभी नहीं लगते. वे प्रतीक्षा में हैं....किसी चमत्कार की प्रतीक्षा में .....ठीक हम लोगों की तरह . आखिर हैं तो वे भी इसी भारतीय मानसिकता से जुड़े हुए ...केवल सीमा रेखा खींच देने से मानसिकता नहीं बदल जाया करती. 
     ......तो पाकिस्तान की अवाम भी परिवर्तन की प्रतीक्षा में है .......किन्तु इस बीच दुर्भाग्य से यदि कहीं तालिबानी अपने उद्देश्य में सफल हो गए तो यह प्रतीक्षा निराशा और पीड़ा के घोर अन्धकार में भी बदल सकती है....
          पाकिस्तान का अस्तित्व संकट में है. यदि स्थायी समाधान की बात करें तो एक ही श्रेष्ठ विकल्प उसके सामने है और वह है पाकिस्तान-भारत की सीमा-रेखा का लोप. कुछ लोगों को यह असंभव सा लग रहा होगा ..पर मैं आशान्वित हूँ. जर्मनी के प्रकरण में पहले भी ऐसा हो चुका है ...इसलिए भारत-पाक एकीकरण केवल खयाली पुलाव नहीं है. जिस दिन भारत-पाक की आम जनता यह चाह लेगी उसी दिन यह संभव हो जाएगा. 
        जनता क्यों चाहेगी ? इस चाहत के पीछे विकास की अनिवार्य आशाएं हैं. इन आशाओं को समझाना होगा. यह समझना होगा कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी हम कोई जमीनी विकास नहीं कर सके. पेय जल और दो वक़्त की रोटी हमारी पहली ज़रूरतें हैं जिन्हें छोड़कर हमारी सरकारें परमाणु आयुधों पर पानी की तरह पैसा बहा रही हैं. ज़रा सोचिये - दोनों देशों की सेनाओं पर जितना धन खर्च किया जा रहा है एकीकरण के बाद उसका सदुपयोग ज़मीनी ज़रूरतों के लिए किया जाएगा. भारत और पाकिस्तान अमेरिका और यूरोप के आयुधों के ग्राहक हैं .......हम अपनी अहम् ज़रूरतों का पैसा व्यर्थ के कार्यों के लिए इन देशों को देते जा रहे हैं. यह अब अवाम को समझना होगा. अवाम को यह भी समझना होगा कि पाकिस्तान की अपेक्षा भारत का मुसलमान अधिक महफूज़ और चैन से है. एकीकरण दोनों देशों के विकास और अमन-चैन की पहली ज़रुरत है. यह बात जिस दिन हम सच्चे मन से स्वीकार कर लेंगे उस दिन भारत -पाक के एकीकरण को कोई रोक नहीं सकेगा. और तब विश्व में एक महाशक्ति के रूप में भारत का जो अवतरण होगा उसे देख कर दुनिया हैरत में पड़े वगैर नहीं रह सकेगी. .....ईश्वर करे वह दिन शीघ्र ही आये .        

11 टिप्‍पणियां:

सुज्ञ ने कहा…

समसामयिक समस्या पर असाधारण चिंतन!! गहन विश्लेषण!! सार्थक निष्कर्ष!! बधाई कौशलेन्द्र जी!!

आशा करेंगे जनता शीघ्र जाग्रत हो!! जीवन आवश्यक जरूरतों और सहज शान्त जीवन के बारे में गम्भीरता से सोचे।

पृथ्वीराज ने कहा…

पाकिस्तान पुनः भारत का हिस्सा बनेगा लेकिन असुर जाति के विनाश के बाद.

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

गजब हो जायेगा अगर ऐसा हुआ तो, लेकिन ये बात पक्की है कि ये जर्मनी नहीं है,

बेनामी ने कहा…

आमीन

blogtaknik ने कहा…

और यह एक दिन जरुर हो कर रहेगा...

G.N.SHAW ने कहा…

सठीक चिंता

निरामिष ने कहा…

सार्थक प्रस्तुतिकरण

बेनामी ने कहा…

aapki bahut achhi soch hai kash aysa ho sakta

rubi sinha ने कहा…

पूरा विश्व भारतीय संस्कृत अपना ले विश्व में शांति हो जाएगी, ॐ नमः शिवाय

drshyam ने कहा…

होगा भई होगा...जै श्री राम...

हरीश सिंह ने कहा…

जहा इस्लाम के मानने वाले रहेंगे वहा जंग होती रहेगी. यह परिवर्तन नहीं, स्वार्थ की लड़ाई है, यह मुसलमानों का इतिहास बताता है.