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फूहड़ता की स्वतंत्र अभिव्यक्ति

भाई सचिन अग्रवाल के नोट से कुछ हम सब के सोचने लायक
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बड़े हैरत की बात है हमेशा से हिन्दू धर्म अपनी शांतिप्रियता और धीरजता के चलते तमाम दुनिया में अत्याचारों और मजाकों के लिए सबसे आसान निशाना समझा जाता रहा है, कभी कोई महान चित्रकार हिन्दू देवी देवताओं की नग्न तस्वीरें बनाकर शोहरत हासिल कर लेता है कभी कोई विदेशी वेश्या काली का रूप धरकर मर्दों से आलिंगन करती हुई अपने आपको सबसे अलग दिखाने की कोशिश करती है इसी क्रम में अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हो रहे एक फैशन शो में एक मॉडल के अंत वस्त्रों पर और जूते चप्पलों पर हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीरों का प्रदर्शन किया गया, और हमेशा की तरह धर्मनिरपेक्षता के चलते दुनिया के एकमात्र हिन्दू बहुसंख्यक देश भारत की सरकार ने इस मामले में रूचि लेना उचित नहीं समझा और न अंतरराष्ट्रीय समाज में इस कुकृत्य के लिए कोई विरोध दर्ज कराया , समझ में ये नहीं आता की ऐसे मौकों पर जबकि हिन्दू धर्म और आस्था सर ए आम अपमानित हो रही होती है तब कान्हा छुप जाते हैं वो धर्मनिरपेक्ष और मानवता के ठेकेदार लोग हो ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी की मौत पर शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए और धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उसकी लाश को किसी विशेष मज़हब की रीति रिवाजों के अनुसार दफनाने की पैरवी करते हुए चिल्ल पौं मचाते हैं, धर्मनिरपेक्षता के असली मुआईने धार्मिक स्वतंत्रता, सर्व धर्मों का सम्मान और इंसानियत होते हैं शायद या सियासी धर्मनिरपेक्षता का मतलब सिर्फ एक ही धर्म की हिमायत करना और एक विशेष धर्म को बार बार टारगेट करना होता है ?अगर धर्मनिरपेक्षता का मतलब अपने ईष्ट देवी देवताओं का यूँ सर ए आम अपमान करवाना अपने पूर्वजों को नंगे खूटी पर टंगे हुए देखना और अपनी परंपरा, आस्था , और संस्कृति को वेश्यायों के अंत वस्त्रों, जूते चप्पलों पर देखकर मुस्कुरा देना और शांत रहना है तो ये तय है की ऐसी धर्मनिरपेक्षता एक दिन विश्व के सबसे पुराने, आध्यात्मिक और शांतिप्रिय धर्म के पतन का कारण बनेगी........


सचिन अग्रवाल 'तन्हा'
इगलास (अलीगढ)

6 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

हमारे माननीय नेता जी (परम-परम माननीय दिग्विजय सिंह जी ) जीते जी तो कुछ नहीं कर पाए ओसामा का ...मरने के बाद ही सही .......उसकी लाश पर ...... चलो उन्हें सियासत करने का मौक़ा तो मिला. ये देश के कर्णधार जी सेक्यूलर हैं ...अपनी सेक्यूलारिटी का प्रमाण भी दे दिया यह कहकर कि ओसामा को इस्लामिक रीति के अनुसार दफनाया जाना चाहिए था. कोई बात नहीं अब आप समुद्र में से उसकी लाश खोजवाकर निकलवाइये और फिर इस्लामिक रीति से दफ़न करवा दीजिये .......पक्का मानिए अगले इलेक्शन में आपकी चांदी ही चांदी होगी. मुस्लिम वोट तो मिलेगा ही ...औरों के वोट भी मिलेंगे क्योंकि उन्हें आपके कथन से यह प्रमाण मिल गया कि खून-खराबे और आतंक का इस्लाम के साथ गहरा नाता है ...तभी तो ओसामा अभी तक धार्मिक ही बना रहा.

किलर झपाटा ने कहा…

मेरे हिसाब से तो धर्मनिरपेक्ष शब्द ही गलत है। इसके बदले सभी लोगों को प्रॉपरली धर्म सापेक्ष होना चाहिए। दुनिया अपने आप संतुलित हो जाएगी।

सुज्ञ ने कहा…

जिन लोगों को धर्म प्रदत्त गुण जैसे सरलता, विनम्रता, सौम्यता, शान्ति, अहिंसा, संतोष और संयम की कोई अपेक्षा न हो्। अर्थात् ग्रहण ही न करना चाहते हो। सीधे शब्दों में अधर्मी ही कहो। वे ही धर्म से निरपेक्ष रह सकते है। अस्तु वे सेक्यूलर है, धर्मनिरपेक्ष है।

वैसे, धर्म को भी इनसे कोई खास अपेक्षा नहीं है।

Er. Diwas Dinesh Gaur ने कहा…

सही कहा आपने...यह धर्मनिरपेक्षता नहीं शर्मनिरपेक्षता है...शर्म आनी चाहिए इन शर्मनिर्पेक्षियों को अपने आप पर...

गंगाधर ने कहा…

आज तक किसी मुसलमान ने नहीं कहा की वह सेकुलर है. पर हिन्दू ही कायर है क्यों इस पर विस्तृत चर्चा की जरुरत है. हद तो यह है की जब मैं ऐसे हिन्दुओ पर अंगुली उठता था तो हमारे किलर झपाटा सहित सभी हिन्दू हमारे ऊपर ही लट्ठ लेकर दौड़ पड़ते थे. अब वही भासा सब बोल रहे हैं. हमें इन सेकुलर कायरो को जगाना होगा.

नेहा भाटिया ने कहा…

शर्म आनी चाहिए इन शर्मनिर्पेक्षियों को अपने आप पर...