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     इस बार हल्ला बोला है जिन्होंने लोग उन्हें फौजिया रियाज़ के नाम से जानते हैं .......मैं बिना उनकी इजाज़त के उनकी नज़्म आप सबके सामने पेश करने का गुनाह कर रहा हूँ ......कुछ गुनाह अच्छे लगते हैं...यह भी उन्हीं में से एक है .....उनके अल्फाजों तक पहुँचने का रास्ता है -     iamfauziya.blogspot.com   



मौत के बाद...



कैसे जिए .....कैसे मरे
क्या फर्क पड़ा,
इमारतें गिराईं, बुनियादें हिलाईं
दूध-बारूद घोल बच्चों
को पिलाई...
तुम्हारी शुरुआत ने हमें, देखो कहाँ पहुँचाया,
तुम बैठे थे
आलीशान महल में,
हमें नसीब नहीं होती
नए शहर में नयी पनाहगाह..
तो अब ......जब मिल गया है तुम्हें
परमानेंट ठिकाना,
तो एक विडिओ टेप ज़रूए भिजवाना...
कहाँ गए तुम, कहाँ जा पाए
अपने जिहाद से क्या
जन्नत पा पाए,
खबर देना हमें कि
ऊपर बारूद है क्या,
गर नहीं तो दोज़ख में
तेज़ाब है क्या...
जन्नत पहुंचे
तो बताना हूरें असल में कैसी हैं,
क्या अलिफ़ लैला जैसी
अरबी पोशाक पहनती हैं या
लंबा सा नकाब ओढ़ती हैं...?
जिस "शरबत" का कुरान में जिक्र है
बताना ....क्या वो शराब है...?
बता सको तो ये भी बताना
कि हिटलर का दरवाज़ा कौन सा है?
क्या महात्मा को वहां भी लाठी की जगह
हूरें नसीब हैं ?
कहना ये भी कि सद्दाम सुन्नियों की जन्नत में गया
या वहां शियाओं का राज है...?
बुद्ध भगवान् हैं या आम इंसान है इसकी खबर देना
ओशो और साईं क्या पडोसी है ...?
सबकी खबर लेना...
क्यूंकि
कैसे जिए .....कैसे मरे
क्या फर्क पड़ा
ज़िन्दगी को पकड़ने की
कोशिश करते हुए,
तुम भी गए तड़पते हुए
जैसे सभी गए .......मौत से लड़ते हुए...

14 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

जो काम अच्छेखाँ मर्द नहीं कर पाए वह आपने कर दिखाया है फौजिया जी ! हम आपके तेजाबी ज़ज्बे को सलाम करते हैं .....आज मानवता को आपके जैसे विचार और अलफ़ाज़ चाहिए ....

सुज्ञ ने कहा…

सलाम पहुँचे!!

Mohinee ने कहा…

Loved it! True ques!

Hindustani ने कहा…

शानदार !!!!!!!!

sripraksh tiwari ने कहा…

अच्छा है

Arshad Ali ने कहा…

BAHUT KHOOB

abhishek1502 ने कहा…

वाह , बहुत ही सुन्दर रचना
रचनाकार को बधाई

Fauziya Reyaz ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Fauziya Reyaz ने कहा…

janaab aapne kavita uthaayi koi baat nahi par upar blog ka pata to sahi dete...its iamfauziya.blogspot.com
:-)

कौशलेन्द्र ने कहा…

ओह ! एक गलती और ........माफ़ कीजिये ....
दरअसल फौजिया जी ! हम आपकी रचना में इतने खो गए कि बाकी बातों का ख्याल ही न रहा. चलिए आप खफा नहीं हुईं ..अच्छा लगा .....यूँ फौजिया जैसी लड़की इन बातों से खफा नहीं होती ....उनका दिल बहुत बड़ा है ....आम आदमी से बहुत बड़ा.
मैंने और भी कई लोगों को यह रचना भेजी है ....है न ! सरासर डकैती ! !
इस ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया.

आशुतोष की कलम ने कहा…

बहुत ठीक कार्य किया कौशलेन्द्र जी ..इंतजार रहेगा अगले विडियो टेप का..

किलर झपाटा ने कहा…

वाह वाह बहुत ही ब्यूटिफ़ुली अभिव्यक्त्ड उद्‍गार्स ऑफ़ फ़ौजिया जी।
इसी बात पर अचानक समीरलाल जी के दोस्त ‘बवाल’ भाईजान का वो जबर्दस्त दार्शनिक शेर याद आ गया:-

मौत ने तारीख तय कर उसपे टुम्मा कर दिया
हमने भी इसकर के फ़ौरन मय पे चुम्मा कर दिया

शानदार प्रासंगिक रचना पढ़ने मिली। धन्यवाद।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

फौजिया का ब्लाग मेरे रोल में अपडेट नहीं हो रहा.. फौजिया एक बहुत अच्छी लड़की है, सिद्धान्तों वाली और मानवतावादी..

गंगाधर ने कहा…

लादेन और बाबर की औलादें फौजिया बहन को बहुत गरिया रहे होंगे, कही फतवा न जारी हो जाय, देख लो भैया सेकुलर कुत्तो और कट्टर मुस्लिम ब्लोगरों, यहाँ राष्ट्रभक्तो का सम्मान होता है. क्योंकि हम राम के आदर्शो का पालन करते हैं.