समर्थक

Hindu and Christian girls forced to convert to Islam by Jihadis

9 टिप्‍पणियां:

आशुतोष की कलम ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
कौशलेन्द्र ने कहा…

नहीं आशू ! अपने क्रोध पर नियंत्रण करो वत्स ! ऊर्जा को यूं नष्ट मत होने दो. याद रखना हमें अपनी गरिमा बनाये रखनी है. एक १३ वर्ष की बच्ची के लिए पाकिस्तानी उग्रपंथियों ने जिस तरह के अश्लीलतम शब्दों का प्रयोग किया है हम भी यदि उन्हीं का अनुसरण करेंगे तो उनमें और हममे अंतर ही क्या रहा ? हमारी विशिष्टता हमारी शालीनता में है. समय-समय पर शास्त्र और शस्त्र दोनों का प्रयोग आर्यों ने किया है. क्रोध हमारी ऊर्जा का क्षरण करता है. ऊर्जा का संचय करो .......हम ब्राह्मण हैं ...यह हमारे आचरण से प्रकट होना चाहिए.
फेसबुक पर आज एक वीडियो पोस्ट किया है मैंने ...धैर्य से उसका भी अवलोकन करना. हर मुसलमान उग्रवादी नहीं होता ......कम से कम आम मुसलमान तो नहीं...कुछ लोग हैं जो भड़काने का काम करते हैं इसमें उनके स्वार्थ निहित हैं.

drshyam ने कहा…

--- हर ---- उग्रवादी नहीं होता .....

----यूं तो सभी होते हैं....कुछ विभीषणों के सिवाय...पर वे भी वहीं रावणों के यहां रहते हैं राम की शरण में नहीं आते....

आशुतोष की कलम ने कहा…

में एक सामान्य आदमी हूँ..ये भाव यहाँ आने वाले कई लोगों के रहे होंगे लेकिन शायद उनकी छवि ख़राब हो जाएगी इसलिए मन में ही गली दे लेते हैं...मैंने आज सिर्फ कईयों के मन की बात लिखी है..
मैं अमर्यादित भाषा को महिमामंडित नहीं करना चाहता हूँ न ही रोज रोज हर ब्लॉग पर कुछ ऐसा लिखता हूँ..मगर जो हो रहा है उसे देखकर अगर अब भी हमने धर्म की सभ्यता की दुहाई दी तो हम हार को गले लगायेंगे..
रावन हो या कौरव सब अधर्मी होते हुए भी युद्ध धर्म का पालन ज्यादातर जगहों पर करते पाए गए हैं....अधर्मियों के लिए यही भाषा उचित है....जैसे आज गाली दूषित मानसिकता का द्योतक है वैसे ही सतयुग में गुस्सा मन जाता होगा..
मगर राम ने भी कहा था..
विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीत।।
चाहता तो ये टिपण्णी हटा देता और सफेदपोश बना रहता मगर में असभ्य ही सही ..सभ्यता दिखा कर गुलामी और बलात्कार के अलवा क्या पाया है हमने????
कौशलेन्द्र भाई अगर इस टिपण्णी से किसी को (हिन्दू) कष्ट पहुंचा हो तो में क्षमा प्रार्थी हूँ..मगर सिक्के का दूसरा पहलु भी आप सब देखें ..
अगर घर में गंदगी आ गयी है तो उसके सफाई के लिए भंगी का सांकेतिक रूप तो लेना ही पड़ेगा भले ही बाद में मेरे हाथ का छुआ कोई न खाए..अपने घर की सफाई की आत्मसंतुष्टि तो रहेगी .

कौशलेन्द्र ने कहा…

आशुतोष ! जिसे आपने असभ्य भाषा स्वीकार किया है ....वह हमारी विवशता और दुर्बलता है. मैंने तो ऊर्जा संरक्षण की बात की है. आप तो वैसी असभ्य भाषा का प्रयोग भी नहीं कर सकेंगे जिसका प्रयोग फिरकापरस्त मुसलमानों ने उस ज़रा सी बच्ची के प्रति किया है. उनका कोई स्तर नहीं है गाली देने का .........दुष्टता और नीचता में हम उनके साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते ....और इस मामले में मुझे तो उनसे अपनी हार मानने में गर्व होता है.

सुज्ञ ने कहा…

सही कहा कौशलेन्द्र जी,

गाली गलोच असभ्य भाषा प्रयोग, हमारी विवशता और दुर्बलता की प्रतिक्रिया होते है। क्योंकि असंयमित वाणी से लक्ष्य सिद्ध नहीं होता।

आशुतोष जी

सम्वेदनाएँ महसुस करना और क्रोध प्रकट करना दोनो अलग अलग बाते है। क्रोध हमेशा हमारी आवश्यक उर्ज़ा को व्यर्थ नष्ट कर देता है।

यह विडिओ जाग्रति के लिये है। यह सच्चाई जान कर लोग सावधान व सुरक्षित रहे।

कौशलेन्द्र जी,
आभार इस प्रस्तुति के लिये।

हरीश सिंह ने कहा…

आशुतोष जी, कौशलेन्द्र जी और सुग्य जी सही कह रहे हैं. हमें अपशब्दों से बचना चाहिए. हमारे संस्कार ऐसे नहीं है, यह सच है की ऐसी बाते हमारे क्रोध को बढ़ावा देते हैं, पर हम क्रोध में विवेक खो देते हैं. हम लोग सच्चाईयों को सामने रख रहे हैं. मुसलमानों से अधिक क्रोध तो हमें उन डरपोक हिन्दुओ पर आता है जो हिन्दुओ के खिलाफ लिखी पोस्ट पर टिप्पणी करने पहुँच जाते है. पर यहाँ आने से डरते है. जब की यहाँ सच सबूत के साथ रखा जा रहा है और हमारे मुस्लिम भाइयों को जवाब नहीं सूझ रहा है और वे मुह चुरा रहे है. और उन्ही के डर से हिन्दू भी मुह चुरा रहा है.

आशुतोष की कलम ने कहा…

अमर्यादित टिपण्णी हटा दी गयी है..
क्षमा प्रार्थी हूँ..

कौशलेन्द्र ने कहा…

मुझे प्रसन्नता है आशू ! कि अब आप पूर्वापेक्षा और भी अधिक सशक्त बन गए हैं हमें मज़बूत आशुतोष चाहिए दुर्बल नहीं. हमारे शब्दों का मान रखकर हमारे प्रिय पात्र बन गए हो अब .