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साथ मरने की कसम खा लो जो खाई जाए..........

वन्दे मातरम बंधुओं,

प्यार सेहरा में रहे या की गुलिस्ताँ में रहे,
प्यार की तान ही सुननी है सुनाई जाए........

चार सू दिखती हैं लाशें यहाँ चलती फिरती,
जो पुर सुकून लगे शैय वो ही दिखाई जाए.........

वाद रुखसत के मेरी मैयत पर,
बड़ी महंगी है कोई चादर ना चड़ाई जाए.......

राह से भटके है जो भाई अपने,
राह पुर अमन की उनको है बताई जाए........

साथ जीने की कसम खाना बड़ा मुश्किल है,
साथ मरने की कसम खा लो जो खाई जाए..........

सरहदों के पार भी रहते तो इन्सां ही हैं,
हुक्मरानों को सिखाओ जो ये बात सिखाई जाए...........
पैसा जन्नत में किसी काम नही आयेगा,
हरेक सौदे पे कमिशन क्यों फिर खाई जाये ...........

विश्व गुरु जबकि रहा दुनियां में मेरा हिन्दोस्तां,
प्यार ओ तहजीब की अलख फिर से जगाई जाए........

संस्कारों पे अपने जो चलेंगे हम सब,
खून की नदी ना फिर धरती पे बहाई जाये.......


हाल बेहाल हुआ नाशाद वतन "दीवाना",
आओ मिल जुल के कोई बात बनाई जाए.........

समाचार-पत्र ...और ....सामाजिक सरोकार......डा श्याम गुप्त....

समाचार पत्रों में समाचारों का वर्गीकरण करके यदि देखा जाय तो अधिकाँश पृष्ठ फिल्म समाचार, नग्न तस्वीरें , विज्ञापन या खेल समाचारों से भरे होंगे , वास्तविक समाचार कितने होंगे .........
आप स्वयं देखिये...
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समाचार-पत्रों का----- समाचार लेखा जोखा.......
- टाइम्स ऑफ इंडिया ---अंग्रेज़ी ( बेंगलूरू ) ---दि-२८ जून ११ .....कुल पृष्ठ = २६ ( ६ पृष्ठ -अतिरिक्त सहित )

---फ़िल्म समाचार.......१+६( अतिरिक्त भाग )
( --अर्धनग्न चित्रों सहित ) ... ७ पृष्ठ ... (२६.९ %)

-- -स्पोर्ट.समाचार.........३+१/४ पृष्ठ ... (१२.५ %) =..... कुल १८+१/२ पृष्ठ (७१ %)
---कामर्सियल एड्स ... ८ + १/४ पृष्ठ .... (३१.७ %)

------------सामान्य समाचार ............................... =.......कुल ७+१/२ पृष्ठ ( २९ % )

२- राजस्थान पत्रिका----हिन्दी ...दि. २५ जून, ११ ...कुल पृष्ठ १४+४ =१८( ४ पृष्ठ का रिज्यूमे सहित )..

-----कमर्शियल एड्स + जैन धर्म एड्स,
+ मदभरी बातें सहित .....२+३/४ पृष्ठ ...(१५.३ %)
-------फिल्म समाचार ....१+१/४ पृष्ठ ...(६.९ %) =....कुल ..९ पृष्ठ ( ५० %)
-------खेल समाचार ...............१ पृष्ठ ...(५.५ %)
-------रेज्यूमे... (शिक्षा आदि ) ४ पृष्ठ ...(२२. %)
----------- सामान्य -समाचार + नीति कथाएं सहित .........= .... कुल ...९ पृष्ठ (५० %)

शहीदों की चिताओं पर ....नहीं लगते हैं अब मेले

दोस्तों आज 28 जून है ....हम लोगों के लिए एक और सामान्य सा दिन ........ आज सुबह सो कर उठे तो बूंदा बंदी हो रही थी ........बारिश की सुबह कितनी रोमांटिक होती है .........अपनी पत्नी के साथ आज बालकनी में बैठ के चाय पीते हुए अखबार देख रहा था ......दो दो अखबार देख डाले ........कहीं कोई ज़िक्र नहीं था ....कल टीवी पे सारे news channels खंगाले ....कुछ नहीं था .....हिन्दुस्तान gas और diesel के दामों में उलझा हुआ है ..........मेरी पत्नी मेरे भावों को पढ़ लेती है ........... उसने पूछा क्या हुआ .....अचानक इतने serious क्यों हो गए ..........मैंने कहा कितनी रोमांटिक लगती है न ये बूंदा बांदी .....बारिश की ये फुहार .........उस दिन भी हलकी बूंदा बांदी हो रही थी ....जब वो लोग .....उस रात अपने घर आखिरी ख़त लिख रहे थे ..........आज से 12 साल पहले ......सब 20 से 25 के बीच थे .......यानी मेरे बेटे से सिर्फ 2 -3 साल बड़े .........मेरा बेटा तो मुझे बच्चा लगता है अभी..... आखिर 20 - 22 साल भी कोई उम्र होती है जान देने की ........
दोस्तों शहादत दिवस है आज .........major P P Acharya ,Capt kenguruse और Capt Vijayant Thaapar ....सिपाही जगमाल सिंह और नायक तिलक सिंह का ....12 साल पहले आज की रात वो सब शहीद हुए थे वहां दूर .....drass में ....knoll नामक चोटी को फतह करते हुए .........कारगिल युद्ध में .........27 जून को एक पूरी प्लाटून शहीद हो गयी थी उसी चोटी पर .........शाम की roll call खुद commanding officer ..... colonel M B Ravindra naathan ने ली ...........वहां ये बताया की आज हमारी पूरी प्लाटून शहीद हो गए knoll पर .......सबने 2 मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी .........फिर colonel ने कहा ......कल के assault में जो जाना चाहता है ...एक कदम आगे आयेगा ....बाकी अपनी जगह खड़े रहेंगे ...........पूरी regiment एक कदम आगे आ गयी .......तब major आचार्य ने कहा की कल A कंपनी ने assault किया था .......आज B कंपनी करेगी .......और फिर उन्होंने अपनी टीम बनाई .........और कहा की चूंकि मैं कंपनी कमांडर हूँ इसलिए मैं लीड करूँगा .........उनकी टीम में 12 लोग थे...... अगले दिन सुबह निकलना था .....उस रात सबने अपने घर चिट्ठी लिखी .....major आचार्य ने भी लिखा था ....अपने पिता को .......हतॊ वा पराप्स्यसि सवर्गं जित्वा वा भॊक्ष्यसे महीम.........तस्माद उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः......गीता का ये श्लोक quote किया था ..........उस रात वो लोग जानते थे की लौट कर नहीं आयेंगे .............और नहीं आये ......capt थापर ने जो पत्र अपने घर लिखा था ....उस पर मैं पहले ये लेख .....http://akelachana.blogspot.com/2011/03/chief-of-army-staff.html लिख चुका हूँ ...........उन्होंने भी लिखा था की जब तक ये पत्र आप लोगों को मिलेगा ...मैं वहां अप्सराओं के बीच स्वर्ग का सुख भोग रहा होऊंगा ......... वो जानते थे की लौट के नहीं आएंगे ..........फिर भी गए .......उस रात हलकी बूंदा बांदी हो रही थी .........पर अगली सुबह मौसम साफ़ था एकदम ...और उस रात जब उन्होंने चढ़ना शुरू किया ................full moon night थी .......full moon night भी रोमांटिक लगती है कुछ लोगों को ............चाँद आसमान में चमक रहा था ........रात में भी सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था ..........हमें भी और दुश्मन को भी .........भयंकर गोला बारी हो रही थी .....सबसे आगे major आचार्य थे ......वही सबसे पहले शहीद हुए .....फिर सिपाही जगमाल सिंह ........वो अर्दली था capt थापर का ......major आचार्य ने उसे अपनी टीम में चुना नहीं था .....उस रात जब उसे पता चला की उसे नहीं चुना गया है तो वो खुद major आचार्य के टेंट में गया .......अगर मेरे साहब जायेंगे ....(यानी capt थापर) ......तो मैं भी जाऊंगा .......वो capt थापर से पहले शहीद हुआ उस रात .........उनकी बाहों में .........२२ साल उम्र थी उसकी ......आजकल इस उम्र के लड़के सारी रात अपनी girl friends को SMS भेजने में बिता देते हैं .......उनमे एक capt kenguruse था ....25 साल का .....वो नागा था ....नागालैंड का .......सुना है नागालैंड में लोग नफरत करते हैं ....हिन्दुस्तान से और हिन्दुस्तानी फ़ौज से ........graduation के बाद सरकारी स्कूल में teacher हो गया था ........दो साल मास्टरी की भी ......फिर बोला फ़ौज में जाऊंगा ........हिन्दुस्तानी फ़ौज में ....उस फ़ौज में जिससे उसका समाज नफरत करता है ...दिल से ......उस रात एक LMG चढ़ानी थी ऊपर .....बहुत फिसलन थी उस नंगे पहाड़ पे ......उस कडकडाती ठण्ड में ........अपने जूते उतार दिए उसने ......जिससे की पैरों को अच्छी पकड़ मिले चट्टानों पे .......सबसे पहले ऊपर चढ़ा, चोटी पे .........नंगे पाँव...... फिर कमर में बंधी रस्सी से अकेले दम वो LMG ऊपर खींची ......मरियल सा था ....मुश्कल से 50 किलो का .......5 फुट दो इंच का .......फिर उसी रस्सी को पकड़ के पूरी प्लाटून ऊपर आयी .....वहां दो पाकिस्तानी rifle से मारे और एक को अपनी उस नागा खुकरी से .....hand to hand combat में .......एकदम नज़दीक एक हथगोला फटा ...पेट में splinter लगा .......उस खड़े पहाड़ से 100 फुट नीचे गिरा .....वहां शहादत हुई .......capt थापर को बाईं आँख में गोली लगी थी ........जब body घर पहुंची तो चश्मा पहना दिया था ......दाढ़ी बढ़ी हुई थी .....6 फुट 1 इंच height थी .......इतना सजीला और ख़ूबसूरत जवान अपनी जिंदगी में नहीं देखा मैंने ............शहादत से दो दिन पहले का फोटो है उसी दाढ़ी में ........अगर फ़ौज में न होता तो मॉडल होता ....या फिर फिल्म स्टार .....24 साल की उम्र में शहादत दे दी ......वो जो आखिरी चिट्ठी लिखी उसने अपने माँ बाप को ...उसमें भी सब कुछ दे गया देश को ......मरने के बाद भी ...........निकाल लेना सारे अंग ....फूंकने से पहले .....ताकि काम आ सकें किसी के .......
आज सुबह के अखबार देख के बहुत दुःख हुआ ..........इतनी जल्दी भुला दिया इस अहसान फरामोश मुल्क ने ..........पूरे देश में चर्चा है आज ........ऐश्वर्या राय pregnent हो गयी है .......major आचार्य की बीवी भी pregnent थी .........जब उसका पति शहीद हुआ .........तीन महीने बाद जन्मी वो बच्ची ...........क्या सोच रही होगी वो लड़की आज के अखबार देख के ...........उस रात .......उस खड़ी चट्टान से 100 फुट नीचे गिर कर ......ज़िदगी के उन आखिरी क्षणों में .....मरने से पहले .....क्या कुछ सोचा होगा उस नागा लड़के ने ..........संवेदना शून्य हो जाता होगा ऐसी स्थिति में दिमाग आदमी का ........आज जैसे हमारा हो गया है ....जीते जागते भी .........वो लड़के उस रात अच्छी तरह जानते थे की वापस नहीं आयेंगे लौट के .....फिर भी गए .....क्या जज्बा होता होगा .......देश के प्रति ......क्या सोच के गए होंगे .........क्यों पैदा नहीं होता वो जज्बा हम लोगों में ....अपने देश के प्रति ......
सलाम है ....कारगिल शहीदों के उस जज्बे को ............13 july को capt विक्रम बत्रा का शहीदी दिवस है ....पूर्व में एक लेख उनपे भी लिख चूका हूँ ......http://akelachana.blogspot.com/2011/03/r.html ......इस बार 13 जुलाई को उनके घर पालम पुर जाने का विचार है ........ सुना था की ...शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ....वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा ...........अब तो कमबख्त वो मेले लगने भी बंद हो गए .....upa सरकार कारगिल विजय की बरसी नहीं मनाती .......चलो हम ही मना लें ......

प्रश्न और उत्तर....ड़ा श्याम गुप्त...

उछाले गए प्रश्न,
'अनुशासन हीन क्यों है आज की पीढ़ी?'
'क्यों है द्वंद्व, अंतर्द्वंद्व,दूरियां -
बच्चों व माता पिता के मध्य ?'

चुनते रहे पत्तियाँ, उत्तरों की--
बच्चों पर बड़े दबाव हैं,
पढाई के , ट्यूशन के,
माँ-बाप की आकांक्षाओं के |

बच्चों से बहुत कुछ सीख सकते हैं ,
माँ-बाप-
बच्चों को गुरु मान कर

बच्चोंको सिर्फ पैसे-सुविधा नहीं,
अपना समय भी दें ,
मित्र बनें ,
उनकी पूरी बात सुनें |

बच्चे भी माँ-बाप की बजाय ,
अपनी ही तानते हैं ;
दोस्तों व टीचर की अधिक मानते हैं ,
टीवी, सिनेमा, इंटरनेट को अधिक पहचानते हैं |

कौन जा पाया जड़ में ---
आरहा है देश में (अवांछित ) धन,
(बहुत कुछ हमारा अपना ही-
जो जमा किया हुआ है देश के -
जमाखोरों ने ,चोरों, भ्रष्टाचारियों ने )
योरोप अमेरिका के --
जुआ घरों से,
चकलाघरों से,
नंगे नाच के क्लबों से,
आतंकवाद व निरीहों पर अत्याचार व-
शस्त्रों की होड़ के पोषण के लिए,
हथियारों की बिक्री की ,
कमाई से |

कभी विकास के नाम पर सहायता,क़र्ज़ व-
एन जी ओ प्रोजेक्ट -या-
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बिकास में लिप्त--हमें ,
मोटी-मोटी आमदनी, पे व पर्क्स ,
के रूप में |
" जैसा खायें अन्न वैसा होगा मन ".....

सोमरस

रोचक जानकारी! क्या सोमरस और शराब एक ही हैं?

 

 
 
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कई बार लोगों को यह कहते हुए सुना जाता है कि प्राचीन वैदिक काल में भी सोमरस के रूप मे शराब का प्रचलन था। दूसरी तरफ हम देखते हैं कि वैदिक काल में आचार-विचार की इतनी पवित्रता का ध्यान रखा जाता था। बड़ा विरोधाभाष लगता है कि जिस समय की संस्कृति में धर्म-अध्यात्म इतना प्रचलित था तब के लोग शराब जैसी किसी नशीली वस्तु का उपयोग करते हों। क्योंकि धर्म-अध्यात्म की पुस्तकों में हम जगह जगह पर नशे की निंदा या बुराई सुनते हैं। सोमरस शराब जैसा ही पेय पदार्थ था इस बात का खंडन करने के लिये आइये हम कुछ वैदिक मंत्रों का ही उदाहरण लेते हैं-

मन्त्र: सुतपात्रे ............  दध्याशिर: ।। (ऋग्वेद-1/5/5)


अर्थ-  यह निचोडा हुआ शुद्ध दधिमिश्रित सोमरस , सोमपान की प्रबल इच्छा रखने वाले इन्द्र देव को प्राप्त हो  ।।

मन्त्र: तीव्रा: ....... तान्पिब ।। (ऋग्वेद-1/23/1)

अर्थ- हे वायुदेव यह निचोडा हुआ सोमरस तीखा होने के कारण दुग्ध में मिश्रित करके तैयार किया गया है।  आइये और इसका पान कीजिये  ।।

मन्त्र: शतं वा य: शुचीनां सहस्रं वा समाशिराम्  ।  एदुनिम्नं न रीयते  ।। (ऋग्वेद-1/30/2)

अर्थ-  नीचे की ओर बहते हुए जल के समान प्रवाहित होते सैकडो घड़े सोमरस में मिले हुए हजारों घडे दुग्ध मिल करके इन्द्र देव को प्राप्त हों।

इन सभी मन्त्रों में सोम में दही और दूध को मिलाने की बात कही गई है। जबकि यह सभी जानते हैं कि शराब में दूध और दही नहीं मिलाया जा सकता। अत: यह बात का स्पष्ट हो जाती है कि सोमरस जो भी हो लेकिन वह शराब जैसी नशा करने

वाली हानिकारक वस्तु तो नहीं थी। 

ऋग्वेद में आगे सोमरस के बारे में और भी वर्णन है। एक जगह पर सोम की इतनी उपलब्धता और प्रचलन दिखाया गया है कि इंसानों के साथ साथ गायों तक को सोमरस भरपेट खिलाये और पिलाये जाने की बात कही गई है।

अत: तमाम विश्लेषण और विचार करने पर यही नतीजा निकलता है कि सोमरस शराब नहीं बल्कि आजकल प्रचलित लस्सी की तरह ही कोई सामान्य पोष्टिक पेय पदार्थ रहा होगा जिसे सामान्य जन भी प्रतिदिन पीया करते थे।

देश हित के कार्यों में शर्तें नहीं-- सबका सहयोग हो.


किसी  भी आन्दोलन कि सफलता के लिए जरुरी हे कि उसमे   देश कि सारी जनता कि भागीदारी हो, ऐसा प्रतीत हो कि इस आन्दोलन में आन्दोलन कर्ता  समाज के हर वर्ग, संगठन, राजनेतिक दल जो भी उस आन्दोलन कि मूल भावना से सहमती रखते हुए सहयोग करे उनका सबका का समर्थन व् सहयोग बिना किसी शर्त स्वीकार करे, और उनके सहयोग का सन्मान करे. अन्ना हजारे का आन्दोलन उनके तथा उनके साथिओं के अहंकार, व दोगले पन के कारण अपने लक्ष्य से भटकता प्रतीत हो रहा हे. इसी वजह से वो सरकार से हार रहें हे, या अन्य किसी कारण या उद्देश्य के हारना  पूर्व निर्धारित था कह नहीं सकते, यह कारण कोंग्रेश के इशारे पर  बाबा रामदेव के आन्दोलन को कमजोर करना भी हो सकता हे,. 
      लोकपाल मुद्दे पर अंतिम असफल मीटिंग के बाद एक हिन्दी समाचार चेनल पर बोलते हुए केजरीवाल जी फरमा रहे थे कि वो इस मुद्दे पर अन्य नेताओं के साथ साथ भाजपा के अडवाणी जी, सुषमा जी व अन्य नेताओं से मिले पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, उनको इसकी तो शिकायत थी पर वो अपने दोगले पन को भूल जाते हे, कि वो हर दम  संघ को गाली देते रहते हे, जो कि भाजपा का प्रमुख सहयोगी संगठन हे, संघ लगभग 85 साल पुराना संगठन हे जिसे  अपने कई सहयोगी संगठनो के माध्यम से देश के लगभग  35 से 40 करोड़ लोगो  का समर्थन हासिल हे, धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़े मुस्लिम परस्त मानसिकता वाले लोगो कि जमात में खड़े केजरीवाल व उनके साथिओं को क्यों अपेक्षा हे कि भाजपा उनके  आन्दोलन में सहयोगी बने तथा वो भाजपा तथा उनके  सहयोगिओं को अछूत समझे, शर्म कि बात यह हे कि हिन्दू संगठनो को कोसते रहने वाले, अमरनाथ यात्रा को गलत कहने वाले, कश्मीर को भारत से अलग करने कि इच्छा रखने वाले अलगाव वादियो तथा नक्शली आतंकियो को गले लगाने वाले स्वामी अग्निवेश जैसे लोग उनके साथी हो सकते हे, अभी स्वामी अग्निवेश ने कहा कि अन्ना को जो मिला वो बहुत माने, अब आन्दोलन ना करे , करे तो संसद के मानसून सत्र के बाद करे, यही तो अन्ना कि नियत पर संदेह होता कि अभी तो उन्हें सरकार से सिवा धोके के मिला ही क्या हे, फिर भी अग्निवेश उन्हें आन्दोलन नहीं करने कि सलाह दे रहे हे. अगर अन्ना के दिल में सचाई हे अगर उन्होंने वाकई देश हित के लिए आन्दोलन किया हे अग्निवेश जेसे लोगो से दुरी बनाकर बाबा रामदेव तथा देश हित के काम में बिना किसी शर्तो को लगाये सभी संगठनों को साथ रखना चाहिए.    
      अन्ना हजारे एक तरफ तो कहते हे कि इस आन्दोलन में पुरे देश  कि भागीदारी हे पर बाबा रामदेव को शामिल करने को लेकर कुछ सवाल हे, जिन के स्पस्टीकरण के बाद ही उनको शामिल किया जायेगा, क्या यह अन्ना का अहंकार हे कि वो यह तय करेंगे कि हमारी शर्तों को मानने वाला ही सरकार कि गलत नीतिओ का विरोध करने का हक़दार हे, पर मुझे लगता हे बाबा रामदेव को शामिल करने में हिच किचाहट के पीछे   अन्ना और उनकी  कि टीम को दो तरह के डर हो सकते हे, पहला अगर उनका आन्दोलन केवल बाबा रामदेवजी के आन्दोलन को कमजोर करने मात्र के लिए खड़ा लिया गया था तो उनकी असलियत सामने आ जाएगी, क्यों कि यह देखा जा रहा हे कि कोंग्रेश अन्ना कि उतनी खतरनाक व  घटिया  तरीके से आलोचना नहीं करती हे जितनी बाबा रामदेव कि करती हे, दिग्विजय सिंह जेसे बकबकिए करते भी हे तो पलटी मार जाते हे, आलोचना करे तो भी कहते हे कि वो अन्ना का बहुत सन्मान करते हे, बाबा रामदेव के लिए तो सबसे नीचता पूर्ण तरीके से आलोचना करते हे, इससे मन में शंका होती हे अन्ना हजारे के आन्दोलन के मकसद पर./ फिर बाबा का आन्दोलन आजादी के बाद से देश के लुटे विदेशो में जमा धन को वापस लाने तथा लुटने वालो को कठोर सजा दिलाने, भविष्य में इसतरह कि लुट पर रोक लगाने तथा अन्य देश हित के कार्यो के लिए हे जबकि अन्ना का  आन्दोलन केवल लोकपाल के माध्यम से भविष्य में होने वाले भ्रस्टाचार को रोकने मात्र तक सिमित हे, तो क्या अन्ना उन  कोंग्रेशिओं को बचाना चाहते हे तथायह कहते कि अब तक  देश को लुटने वाले देश का धन अपने पास रखे, उसके मालिक बन जाएँ. 
      अन्ना हजारे जी को यह भय भी हो सकता कि बाबा के पीछे जो जन शक्ति हे उसके मुकाबले वो कंही नहीं ठहरते, जेसा कि उनके मुकाबले  बाबा के आन्दोलन में जनता कि विशाल उपस्थिति, जो बाबा के बुलावे पर पुरे देश से आई थी. बाबा के आन्दोलन में जनता का जुडाव उनकी कड़ी मेहनत, देश भर में भ्रमण कि वजह से थी,अन्ना जानते हे उनके आन्दोलन में लोगो से ज्यादा मीडिया का प्रचार ज्यादा था, जो फुले गुब्बारे से ज्यादा नहीं हे, बाबा के बुलावे पर देश भर से लोग आते हे उनके बुलावे पर नहीं, इसलिए वो यह कहते ही नहीं हे कि देश भर के लोग सम्मिलित हो, केवल टी.वी. पर चेहरा दिखाने को लालायित कुछ हजारो कि भीड़ तथा मीडिया का अति प्रचार ही अन्ना जी कि उपलब्धि हे, हो सकता हे बाबा के शामिल होने से बाबा ज्यादा श्रेय ले जाएँ ,अन्ना देखते रह जाएँ, क्यों कि बाबा ने कुछ किया तो हे, सरकार ने बर्बरता पूर्ण कार्यवाही कर उनके आन्दोलन को कुचला हे जबकि अन्ना तो बिना कुछ किये ही सरकार के सामने घुटने टेकते  प्रतीत हो रहें हे, 
        अन्ना तथा उनके सहयोगी संघ तथा भाजपा के सहयोगी होने कि सरकारी आलोचना से बिना डरे बाबा रामदेव तथा सभी का बिना कोई शर्ते लगाये सहयोग लेकर स्वामी अग्निवेश जेसे लोगो से छुटकारा पाकर  व्यापक आन्दोलन करेंगे तभी सफल होंगे तथा उनकी विश्वसनीयता बनेगी और देश में सन्मान मिलेगा. 

नेहरू गाँधी प्रधानमंत्री कैसे बने ? Nehru-First prime minister of India



जवाहर लाल नेहरू  हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री कैसे बने ? ( वीडियो देखे , सच्चाई पता चल जायेगा ) शायद हमलोगों में से बहुत लोगो को पता ही नहीं है ?
गाँधी परिवार  आज ही नही, देश के आजादी से लेकर अब तक देश और देश के लोगो के साथ घटिया मजाक करते आये है | भारत को अपने बाप का जागीर समझे पड़े है |
आज देश के हालत क्या है ? किसी से छिपा नहीं है |


मैडम का योगा .......और घुरहू का योग

                                            एक ज़माना था .....मारुती 800 नई नई हिन्दुस्तान में launch हुई थी .........और रातों रात पूरे देश की चहेती बन गयी ........वाह क्या ज़माना था .......फुर्र से निकल जाती थी बगल से .....कितनी सुन्दर लगती थी .........status symbol बन गयी थी सोसाइटी का .......बड़े बड़े रईस लोग  चलते थे ........उनकी बीवियां इठलाती थीं उसमें बैठ के ............मारुती ने भारत देश को कार में चढ़ना सिखाया .........फिर ज़माना बदला .....नयी नयी गाड़ियाँ बाज़ार में आने लगीं ...एक से एक शानदार .....लम्बी लम्बी ......महँगी महँगी .....और मारुती आम आदमी तक पहुँचने लगी .....जो लोग कल तक स्कूटर और साईकिल पर चलते थे ...वो भी मारुती पर चढ़ने लगे ....मारुती अब जन जन की कार बन गयी थी .......अदना सा आदमी भी मारुती खरीद रहा था ......अरे क्या है ...सिर्फ 3000 रु की तो किश्त है महीने की ...ले लो .........और ये क्या ....अचानक वही मारुती ,जो कल तक देश की आँख का तारा थी .......लोगों की दरिद्रता का द्योतक बन गयी .........पिछले दिनों एक बड़ा मजेदार किस्सा हुआ .......हुआ यूँ की हमारे एक दोस्त हैं .......दो गाड़ियाँ है उनके पास ........एक फाबिया है शायद और एक पुरानी मारुती 800 .........मारुती अक्सर खड़ी रहती है और दोनों लोग ज़्यादातर फाबिया पे चलते है ....एक दिन यूँ हुआ की मित्र महोदय 2 -3 दिन के लिए कहीं बाहर गए और फाबिया ले गए.....अब उनकी मैडम को पीछे से किट्टी पार्टी में जाना था पर उन्होंने कहा की .........मारुती 800 में   ???????   कभी नहीं .....मेरी इज्ज़त का फलूदा हो जायेगा शहर में .........वाह क्या बात है ....जो लोग कल तक मारुती में बैठ कर इठलाते थे वो अब उसके पास खड़े होने में भी तौहीन महसूस करते है .........क्योंकि मारुती अब गरीब की गाडी हो गयी है ......हाय  राम........ मैं मारुती में चलूंगी तो लोग क्या कहेंगे ....मेरे इतने खराब दिन आ गए हैं की मैं मारुती में ......
                                             एक बहुत बड़े योगाचार्य हुए हैं हमारे देश में .......BKS  AIYANGAR  साहब ...........सुना है की 95 साल के हैं .........पिछले 75 साल से योगा  सिखा रहे हैं पूरे विश्व में .........अभी पिछले दिनों चीन में थे ...वहां उन्होंने फरमाया की इस रम देउआ ( बाबा राम देव )   ने योग का भट्ठा  बैठा दिया है ............एकदम सड़क छाप बना दिया है ........योग तो बहुत ऊंची चीज़ है .........ये इसे कपाल भाती का package बना के बेच रहा है ........अय्यंगर साहब की व्यथा मैं समझ सकता हूँ .......आखिर 75 साल से योगा  सिखा रहे हैं वो .......यानी की जब रम देउआ पैदा हुआ तो उनको योगा  सिखाते 30 साल हो गए थे ...........मुझे याद है.....आज से लगभग 30 साल पहले .....हम लोग स्टुडेंट थे तब....... किताबों में पढ़ा करते थे ...की हमारे देश में किसी ज़माने में .........बड़े बड़े ग्रन्थ होते थे .........वेद ....उपनिषद ..........दर्शन शास्त्र .....और योग होता था ...बड़े बड़े योगी होते थे ...........सालों गुफाओं में बैठ के तपस्या और योग करते थे ....फिर जब योग सिद्ध हो जाता था तो बड़ी अलौकिक शक्तियां प्राप्त हो जाती थीं .......हवा  में उड़ जाते थे .......पानी पर चलने लगते थे ........ये की भगवान् कृष्ण बहुत बड़े योगी थे ......यानी की भगवान् टाइप लोग योग से ही भगवान् हो गए थे ........इस से बड़ी श्रद्धा होती थी योग के प्रति ......फिर अस्सी के दशक में एक धीरेन्द्र ब्रह्मचारी प्रकट हुए ..........वो भी पहुंचे हुए योगी थे .......उनके बारे में पता लगा की ये इंदिरा गाँधी के गुरु हैं .......अरे वाह ......इंदिरा जी योगा  भी करती थीं और इसी से इतनी बड़ी नेता हो गयीं विश्व की ........सो धीरेन्द्र ब्रह्मचारी रोज़ टीवी पर आ कर योगा  सिखाने लगे ............और सुना जाने लगा की देश की बहुत बड़ी बड़ी हस्तियाँ ....टाटा .बिडला और अम्बानी जैसे लोग उनसे सीखने लगे ............तो साहब अपने दिमाग में तो ये बात एकदम पत्थर की लकीर बन गयी की योगा  कर के तो आदमी परधान मनतरी  तक बन जाता है ....टाटा बिडला बन सकता है .......स्वाभाविक सी बात है हम लोगों के दिल में योगा  के लिए अपार श्रद्धा पैदा हो गयी ......फिर एक दिन मेरे पिता जी मुझे बताने लगे की वैसे ये धीरेन्द्र ब्रह्मचारी  है तो बहुत बड़ा चोर  पर योग इसका  एकदम सिद्ध है क्योंकि ये कलकत्ते  में मजमा  लगा के लोगों को दिखाता  था की कैसे  योग से आदमी को एक बाल्टी पानी पिलाते है तो उसका पूरा digestive system साफ़ हो जाता है ...और ये की पहले तो पेट से मल द्वार से गन्दा पानी निकलता है पर बाद में एकदम साफ़ पानी निकलता है .........एकदम इतना साफ़ जैसा नल से निकलता है ...........अब ये सुन के तो योगा  के प्रति हमारी श्रद्धा और बढ़   गयी ........हे भगवान् .....न     जाने कैसी कैसी विलक्षण योगिक क्रियाएं होती होंगी  ....काश हम भी कभी कर पाते  .........ख़ास  तौर पे जब कभी कब्ज हो जाती थी तो पिता जी की वो बात ....पेट साफ़ करने वाली बहुत याद आती थी .........और मैं कोसता  था की देखो  ये धीरेन्द्र ब्रह्मचारी ...स्साला मर गया ......और इतनी विलक्षण योगिक क्रिया का ज्ञान  भी अपने साथ  ही ले गया .............
                                                            फिर भैया हुआ यूँ की अस्सी के दशक में ही अमेरिका से ये खबर आयी  की भैया ये जो योगा है न ...ये बहुत अच्छी  चीज़ है ....और ये की अमेरिका और यूरोप  में  अंग्रेज  सब  बहुत ज्यादा  पैसा  दे  कर सीखते  हैं और उनको इस से बहुत लाभ हो रहा है ........अब इस से तो योगा की इज्ज़त देश में बहुत जादा  बढ़ गयी  ........की देखो भगवान् कृष्ण योगा  करते थे ......इंदिरा गाँधी करती थी ....टाटा बिडला करते है ...और अब अंग्रेज भी करते हैं तो निश्चित   रूप से योगा बहुत अच्छी चीज़ है ......अब अंग्रेज जिसकी  तारीफ  कर रहा है वो चीज़ कैसे खराब हो सकती  है ....मुफ्त में तो अंग्रेज अपने बाप की भी तारीफ नहीं करता ...........सो अपने गुरु अय्यंगर जी ...और ऐसे  ही न जाने कितने  ( महेश  योगी ,हरभजन  योगी ) जैसे international योगी गुरुओं ने खूब चाँदी काटी .......बड़े बड़े आश्रम बनाए देश विदेश में ........और योगा को खूब popular किया .......पर दिक्कत ये थी की योगा popular तो बहुत था पर लोकप्रिय नहीं हो पा रहा था .........बस ऊंची सोसाइटी की चीज़ बन कर रह गया था ..........हेमा मालिनी ....elizabeth taylor और jane fonda तो योगा करती थी पर अपनी कोसल्या मौसी को इसके बारे में कुछ पता नहीं था ........
                                                            फिर भैया....न जाने कहाँ से ...ये मुआ ....रम देउआ आ गया  ........और इसने  इतनी ऊंची चीज़ को एकदम सड़क छाप बना दिया ..........जिसे भगवान् कृष्ण जैसे लोग करते थे ......उसे अब गाँव में घुरहू कतवारू करने लगे ..........पहले मर्सिडीज़ में बैठ के लोग करते थे ........drawing room में ac चला के करते थे .......अब टूटी चौकी पे फटी हुई दरी बिछा के लोग कर रहे हैं ........और पिछले महीने तो हद ही हो गयी ....यहाँ हरिद्वार में भैया बोले ...चलो आज शंख प्रक्षालन करते हैं ........हमने कहा वो क्या ...अरे कुछ नहीं 2 -2 गिलास पानी पीते जाओ ...ये 6 simple exercise करते जाओ .......15 -20 मिनट में सारा पानी पेट से निकल जाएगा .........पहले एक दो बार गन्दा निकलेगा फिर एकदम साफ़ निकलेगा ..........मुझे वो पिता जी वाली बात याद आ गयी ........और फिर जब मेरा पेट साफ़ हो गया तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई .....ख़ुशी इस बात की तो थी ही  की पेट साफ़ हुआ ...पर इस बात की और ज्यादा थी की वो दुर्लभ विद्या जो मै समझता था की सिर्फ धीरेन्द्र ब्रह्मचारी को आती थी .....मुझे भी आ गयी  थी ...और अब पिछले हफ्ते मैंने अपनी पत्नी को सिखा दी ........
                                                          बाबा राम देव की ये देन है की उन्होंने योगा को, लोगों के drawing room से निकाल के गाँव गिरांव की चट्टी पर योग बना करआम आदमी  तक पहुंचा  दिया ........अब गुरु अय्यंगर जैसे लोग जो अमेरिका और यूरोप के अरबपतियों को सिखा रहे थे .....उनको तकलीफ होना तो स्वाभाविक है .........आपको क्या लगता है ........जिस दिन हिन्दुस्तान के सड़क छाप लोग मर्सिडीज़ चलाने लगे तो क्या ये अरबपति भी उसे चलाएंगे .........अजी नहीं जनाब ....तब ये उसके पास खड़े होने में भी अपनी तौहीन समझेंगे ............याद है न मारुती वाला किस्सा .........
                                                            पिछले 6 हफ्ते में मैंने अपना वज़न 7 -8 किलो कम किया है .....कोई dieting नहीं की ......कोई exercise नहीं की .......सिर्फ प्राणायाम करता हूँ रोज़ सुबह एक घंटा ....उसमे भी ख़ास तौर पे ....कपाल भाती .....बिना रुके आधा घंटा .........अब मुझे किसी  योग गुरु के certificate की ज़रुरत नहीं है की  कपाल भाती फर्जी है या असली .........या बाबा रम देव ठग है या साधू  .........हम तो भैया सुबह सुबह शुरू हो जाते हैं ......कुर्सी पे बैठ के .........फों फों  करने .......अय्यंगर जी कराएं योगा ..........हम तो योग कर रहे हैं ........


"हल्ला बोल" की जिम्मेदारी कौशलेन्द्र जी को

सभी बंधुओ को जय श्री  राम , 
आप सभी के सहयोग से "हल्ला  बोल " निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है. इस मंच के माध्यम से किया जा रहा प्रयास निश्चय ही एक  दिन  रंग लायेगा, इस संगठन के द्वारा किये जा रहे कार्य  निरंतर अबाध गति से बढ़ते रहे. इसके लिए संगठन का प्रमुख दायित्व  कौशलेन्द्र जी को सौंपा जा रहा है. उन्हें पूर्ण  रूप  से व्यवस्थापकीय अधिकार दिए जा रहे है. आज से आप इस मंच के अध्यक्ष हैं. आप सभी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, उम्मीद है की शीघ्र ही आप संगठन के सभी पदों  का चयन कर लेंगे . वैसे  इस संगठन जुड़े सभी लोग अपने  दायित्वों का निर्वहन समर्पण भाव से कर रहे हैं, किन्तु  पद के अनुसार जिम्मेदारियों को बाँट दिए जाने पर संगठन के कार्यों में तेज़ी आएगी. 
भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए देशभक्त हिन्दुओ को एकजुट करने के लिए गठित इस मंच को कामयाब बनाने  के लिए आप सभी लोंगो द्वारा किये जा रहे योगदान के लिए साधुवाद. कौशलेन्द्र जी को हार्दिक शुभकामना . 
                                                        जय श्री राम ......... हल्ला बोल

ऐश्वर्या राय का बच्चा पैदा करवाने में व्यस्त भारतीये मिडिया



जब देश की जनता भ्रष्टाचार का विष-दंश झेल रही है ! आम-आदमी प्रजातान्त्रिक तरीके से आन्दोलन करने पर भी अपने ही देश की आम-आदमी की सरकार के आदेश पर लाठी-डंडों का प्रहार झेल रही है ! जनता के वोट से आम-आदमी के लिए काम करने का वचन देकर जनता द्वारा चयनित हमारे सरकार के मंत्री देश-भक्तों को प्रतिदिन अपमानित, लांछित और हतोत्साहित करने का प्रयत्न कर रहे हैं ! देश का पैसा लूट कर ये नेता विदेशी बैंकों में जमा करा रहे हैं ! रोज नए-नए घपले-घोटाले उजागर हो रहे हैं ! भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह निकली है १० जनपथ से ! और यह भ्रष्टाचार की गंगा संसद भवन से होते हुए पूरब, पश्चिम एवं उत्तर भारत को पवित्र करती हुई सुदूर दक्षिण तक भी जा पहुँची है !




वह दक्षिण भारत जहाँ के लोग गंगा दर्शन को सदियों से तरसते रहते थे, जहाँ गंगा दर्शन जीवन की सबसे बड़ी साध मानी जाती रही है ! और जो लोग किन्ही कारणों से गंगा दर्शन का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर पाते थे तो गोदावरी को ही गंगा मानकर संतोष कर लिया करते थे ! वहाँ वेद व्यास और बाल्मीकि का तप भी भागीरथी-गंगा को नहीं पहुँचा पाया ! परन्तु धन्य हैं इटालवी देवी ''सोनिया माता'' जिनके पुण्य-प्रताप से यह भ्रष्टाचार की गंगा सुदूर दक्षिण भारत भी पहुँच गयी !



पूरा देश आतंकवाद (नक्सलवादी आतंकवाद + इस्लामी आतंकवाद ) की अग्नि में झुलस रहा है ! चाईना भारत की सीमाओं को प्रतिदिन इंच-इंच निगलता जा रहा है ! आज बांग्लादेश जैसे अस्तित्वविहीन देश भी हमें घुड़की दिखाने लगे हैं !



परन्तु हमारे देश की मिडिया को इन सब बातों से कोई लेना-देना नहीं है ! हमारे देश के सारे न्यूज चैनल ऐश्वर्या राय का बच्चा पैदा करवाने में व्यस्त हैं ! उनके लिए यह देश की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर है ! देल्हि के भीड़ भरे कनाट प्लेस में एक गरीब औरत ने जब दिन के उजाले में फुटपाथ पर बच्चा जना था तब भी इस मिडिया ने बच्चा पैदा करने का दृश्यांकन नहीं किया था ! पता नहीं उस मिडिया को आज ऐश्वर्या राय के पेट का बच्चा कैसा नजर आ गया ?



अमिताभ के ब्लॉग पर बस लिखने की देर थी ! ये कौंग्रेस के इशारे पर भ्रष्टाचार के तमाम मुदों से जनता का ध्यान कहीं और भटकाने के फ़िराक में बैठी शातिर बुद्धिजीवियों की जमात झपट पड़ी उस खबर पर ! लोग इस अवसर पर सलमान खान और शाहरुख़ खान जैसे देश भक्तों के इंटरभिव भी दिखा रहे हैं ! मेरे देशवासियों ''सोनिया माता'' द्वारा धरती पर उतारी गयी गंगा में दुबकी लगाओ और ऐश्वर्या राय के बच्चा होने का लाइव प्रसारण देखो टिभी चैनलों पर, आपके सारे दुःख दर्द अपने-आप दूर हो जायेंगे ! अगर सिग्नल कम आ रहे हों को कनिमोझी को याद कर लेना ! फिकर नोट !

स्वामी विवेकानन्द के नजर में इस्लाम ( swami VivekaNand about Islam ) - ३



९. किसी मुस्लिम देश में मंदिर बनाना वर्जित – “ ऐसा भारत में ही है कि यहाँ भारतीय ( हिंदू) मुसलमानों, ईसाईयों के लिए पूजा स्थल ( मस्जिद, गिरजाघर) बनवाते है, अन्यत्र कही नही | अगर आप एनी देशो में जाओ और मुसलमानों या एनी मतों के लोगो से कहो कि उन्हें अपने लिए मंदिर बनाने दो तो देखो वे तुम्हारी किस प्रकार मदद करते है, अनुमति देने कि जगह वे तुम्हे और तुम्हारे मंदिर को ही तोड़ डालने कि कोशिश करेंगे, यदि वे ऐसा कर सके |” ( ३:१४४)
१०. भारत में रहने वाले भी हिंदू – “ इसलिए यह शब्द ( हिंदू ) न केवल वास्तविक हिन्दुओ बल्कि मुसलमानों, ईसाईयों, जैनियों और एनी लोगो के लिए भी यही है, जो कि भारत में रहते है |” ( ३:११८ )
११. सैकड़ो वर्षों तक ‘अल्लाह–हो-अकबर’ गूंजता रहा – “बर्बर विदेशी आक्रान्ताओ की एक लहर के बाद दूसरी लहर इस हमारे पवित्र देश पर टकराती रही | वर्षों तक आकाश अल्लाह-हो-अकबर के नारों से गुंजायमान होता रहा और कोई हिंदू नही जानता था कि इसका अंतिम ‌‍‌क्षण कौन सा होगा| विश्व भर के ऐतिहासिक देशो मेसे भारत ने ही सबसे अधिक यातनाये और अपमान सहे है फिर भी हम लगभग उसी एक राष्ट्र के रूप में विद्यमान है और यदि आवश्यक हुआ तो सभी प्रकार कि आपदाओ को बार – बार सामना करने के लिए तैयार है | इतना ही नही, अभी हाल में ऐसे भी संकेत है कि हम ना केवल बलवान  ही है बल्कि बाहर निकालने को तैयार है क्योकि जीवन का अर्थ प्रसार है |” ( ३:३६९-७० )
१२. मुसलमानों को तरह न मानाने पर हत्या - “ अज्ञानी लोग ...... एनी किसी देसरे मनुष्य माकी समस्यायों का अपने स्वतंत्र चिंतन के अनुसार व्याख्या न करने देने को न केवल मना करते है, बल्कि यहाँ तक कहने साहस करते है कि एनी सभी विल्कुल गलत है और केवल वही सही है | यदि ऐसे लोगो का विरोध किया जाता है तो वे लड़ने लगते है और यहाँ तक कहते है कि वे उस आदमी को मार देंगे यदि वह ऐसा विश्वास नही करता है जैसा कि वे स्वयं करते है |” ( ४:५२ )
१३. पैगम्बर व् फरिस्तो कि पूजने में आपत्ति नहीं – “ मुसलमान प्रारंभ से ही मूर्ति पूजा के विरोधी रहे है लेकिनुन्हे पैगम्बरों या उनके सन्देश वाहको को पूजने या उनके प्रति आदर प्रकट करने में कोई आपत्ति नही होती है, बल्कि वास्तविक व्यवहार में एक पैगम्बर कि जगह हजारों ही हजार पीरों कि पूजा की जारही है | “ ( ४:१२१ )
१४. मुसलमान सर्वाधिक संप्रदायवादी – “इस ( इस्लाम ) के विषय में आज मुसलमान सबसे अधिक निर्दयी और सम्प्रदायवादी है उनका मुख्य सिध्दांत वाक्य है “ ईश्वर (अल्लाह) एक है और मुहम्मद उसका पैगम्बर है |” इसके अलावा सभी बाते न केवल बुरी है, बल्कि उन्हें फ़ौरन नष्ट कर देना चाहिए | प्रतेक स्त्री और पुरुष, जो इन सिध्दांत को पूरी तरह नही मानता है, उसे क्षण भर के चेतावनी के बाद मार देना चाहिए, प्रतेक वास्तु जो इस प्रकार की पूजा विधि के अनुकूल नहीं है, उसे फ़ौरन नष्ट कर देना चाहिए और प्रतेक पुस्तक जो इसके अलावा क्स्किस और बातों की शिक्षा देती है, उसे जला देना चाहिए | पिछले पांच सौ वर्षों में प्रशांत महासागर से लेकर आंध महासागर तक सारे विश्व में लगातार रक्तपात होता रहा है | यह है मुहम्मद्वाद ! फिर भी इन मुसलमानों में से ही, जहां कही कोई दार्शनिक व्यक्ति हुआ, उसने निश्चय ही इन अत्याचारों कि निंदा कि है |” ( ३ फरवरी १९००, कोपासडेना में दिए गए भाषण से, ४:१२६ )
१५. अल्लाह के लिए लड़ो – “ भारत में विदेशी आक्रान्ताओ की, सैकड़ो वर्षों तक लगातार, एक के बाद एक लहर आती रही और भारत को तोडती और नष्ट भ्रष्ट्र करती रही | यहाँ तलवारे चमकी और ‘ अल्लाह के लिए लड़ो और जीतो “ के नारों से भारत का आकाश जुन्जता रहा | लेकिन ये बाढ़े भारत के आदर्शो को बिना परिवर्तित किये हुए, स्वत: ही धीरे – धीरे समाप्त होती गयी |” ( ४:१५९ )
१६. मूर्ति पूजक हिंदू घृणास्पद – “ मुसलमानों के लिए यहूदी और ईसाई अत्यंत घृणा के पात्र नही है | उनकी नजरो में वे कम से कम ईमान के आदमी तो है | लेकिन ऐसा हिंदू के साथ नही हयाई | उनके अनुसार हिंदू मूर्ति पूजक है व् घृणास्पद ‘ काफ़िर’ है | इसलिए वह इस जीवन में नृशंस हत्या के योग्य है और मरने के बाद उसके लिए शाश्वत नरक तैयार है | मुसलमान सुलतानो ने काफिरो के अध्यात्मिक गुरुओ और पुजारियों के साथ यदि कोई सबसे अधिक कृपा की तो यह कि उन्हें किसी प्रकार अंतिम सांस लेने तक चुपचाप जी लेने के अनुमति दे दी | यह भी कभी कभी बड़ी दयालुता मानी गयी, यदि किसी मुस्लिम सुल्तान का धार्मिक जोश असामान्य या कुछ अधिक होता है तो ‘ काफिरो’ के कत्ले आम रूपी बड़े यग्य का फ़ौरन ही प्रबंध किया जाता है |” (४: ४४६ )
१७. यह कत्ले आम मुसलमान लाए – “ तुम जानते हो कि हिंदू धर्म किसी को यातना नही देता | यह एक ऐसा देश है जहां कि सभी प्रकार के सम्प्रदाय शांति और सौहार्द् के साथ रह सकते है | मुसलमान अपने साथ अत्याचार और कत्ले आम लाये, लेकिन उनके आने से पहले तक यहाँ शांति बनी रहती थी |” ( ५:१९० )
१८. मुसलमानों ने तलवार का सहारा लिया – “ भारत में मुसलमान ही ऐसे पहले लोग थे, जिन्होंने तलवार का सहारा लिए | “ ( ५:१९७ )
१९. एक हिंदू का कम होने का मतलब एक शत्रु का बढ़ना – “ सबसे पुराने इतिहासकार फरिश्ता के अनुसार हमें बताया गया है कि जब सबसे पहले मुसलमान भारत में आये तो यह साठ करोंड़ हिंदू थे और अब केवल बीस करोंड़ है ( यानी चालीस करोंड़ हिंदू मारे गए और धर्मान्तरित किये गए ) | और हिंदू धर्म से एक भी हिंदू का बाहर जाने का मतलब है एक हिंदू का कम होना नहीं है बल्कि एक दुश्मन का बढ़ जाना है” इसके अलावा इस्लाम और ईसाईयत में धर्मान्तरित अधिकांश हिंदू तो तलवार के बल पर धर्मान्तरित हुए है या उनके संताने है |
“ ( ५:२३३ )
२०. मुहम्मदीय विजय को भारत में पीछे हटाना पड़ा – “ मुसलमानों के विजय कि लहर जिसने सारी पृथ्वी को निगल लिया था, उसे भारत के सामने पीछे हटाना पड़ा | “ ( ५:५२८ ) 
२१. हशासिन शब्द ‘असेसिन‘ बन गया – “ मुसलमानों का ‘ हशासिन ‘ शब्द ‘ असेसिन् ‘ बन गया क्योकि मुहम्मदीय मत का एक पुराना सम्प्रदाय गैर- मुसलमानों को मारने को अपने धर्म का एक अंग मनाता था |” ( ५:४० )
२२. इस्लाम में हिंसा का प्रयोग – “ मुसलमानों ने हिन्द का सबसे अधिक प्रयोग किया | “ ( ७:२१७ )
२३. गैर मुसलमानों को मार दो – “ एक ऐसा रिलीजन भी हो सकता है जो अत्यंत भयंकर शिक्षाये देता हो | उदाहरण के लिए मुसम्मादीय मत ( इस्लाम ) मुसलमानों को उन सबकी हत्या करने कि अनुमति देता है जो कि उसके मतानुयायी नही है | ऐसा कुरान में स्पष्ट लिखा है कि “ अविश्वाशियो ( गैर-मुसलमानों ) को मार दें | यदि वे मुहम्मादीय ( मुसलमान ) नही हो जाते है |” उन्हें अग्नि में झोक देना और तलवार से काट देना चाहिए |”
अब यदि हम किसी मुसलमान से कहे कि ऐसा गलत है तो, वह स्वाभाविक तौर पर फ़ौरन पूछेगा कि “ तुम ऐसा कैसे जानते है ? तुम कैसे जानते ही कि ऐसा ठीक नही है ? मेरी धर्म पुस्तक ( कुरान ) कहती है कि ऐसा ही ठीक है | “ ( १७ नवंबर १८९९ को लन्दन में दिए गए भाषण में , प्रैक्टिकल वेदांत, भाग ३ से )
( समस्त उध्दरण अंग्रेजी के सम्पूर्ण विवेकनन्द वाद्रिमय के हिंदी अनुबाद से है, खंड एवं पृष्ठानुसार )

स्वामी विवेकानन्द के नजर में इस्लाम ( swami VivekaNand about Islam ) - ३



९. किसी मुस्लिम देश में मंदिर बनाना वर्जित – “ ऐसा भारत में ही है कि यहाँ भारतीय ( हिंदू) मुसलमानों, ईसाईयों के लिए पूजा स्थल ( मस्जिद, गिरजाघर) बनवाते है, अन्यत्र कही नही | अगर आप एनी देशो में जाओ और मुसलमानों या एनी मतों के लोगो से कहो कि उन्हें अपने लिए मंदिर बनाने दो तो देखो वे तुम्हारी किस प्रकार मदद करते है, अनुमति देने कि जगह वे तुम्हे और तुम्हारे मंदिर को ही तोड़ डालने कि कोशिश करेंगे, यदि वे ऐसा कर सके |” ( ३:१४४)
१०. भारत में रहने वाले भी हिंदू – “ इसलिए यह शब्द ( हिंदू ) न केवल वास्तविक हिन्दुओ बल्कि मुसलमानों, ईसाईयों, जैनियों और एनी लोगो के लिए भी यही है, जो कि भारत में रहते है |” ( ३:११८ )
११. सैकड़ो वर्षों तक ‘अल्लाह–हो-अकबर’ गूंजता रहा – “बर्बर विदेशी आक्रान्ताओ की एक लहर के बाद दूसरी लहर इस हमारे पवित्र देश पर टकराती रही | वर्षों तक आकाश अल्लाह-हो-अकबर के नारों से गुंजायमान होता रहा और कोई हिंदू नही जानता था कि इसका अंतिम ‌‍‌क्षण कौन सा होगा| विश्व भर के ऐतिहासिक देशो मेसे भारत ने ही सबसे अधिक यातनाये और अपमान सहे है फिर भी हम लगभग उसी एक राष्ट्र के रूप में विद्यमान है और यदि आवश्यक हुआ तो सभी प्रकार कि आपदाओ को बार – बार सामना करने के लिए तैयार है | इतना ही नही, अभी हाल में ऐसे भी संकेत है कि हम ना केवल बलवान  ही है बल्कि बाहर निकालने को तैयार है क्योकि जीवन का अर्थ प्रसार है |” ( ३:३६९-७० )
१२. मुसलमानों को तरह न मानाने पर हत्या - “ अज्ञानी लोग ...... एनी किसी देसरे मनुष्य माकी समस्यायों का अपने स्वतंत्र चिंतन के अनुसार व्याख्या न करने देने को न केवल मना करते है, बल्कि यहाँ तक कहने साहस करते है कि एनी सभी विल्कुल गलत है और केवल वही सही है | यदि ऐसे लोगो का विरोध किया जाता है तो वे लड़ने लगते है और यहाँ तक कहते है कि वे उस आदमी को मार देंगे यदि वह ऐसा विश्वास नही करता है जैसा कि वे स्वयं करते है |” ( ४:५२ )
१३. पैगम्बर व् फरिस्तो कि पूजने में आपत्ति नहीं – “ मुसलमान प्रारंभ से ही मूर्ति पूजा के विरोधी रहे है लेकिनुन्हे पैगम्बरों या उनके सन्देश वाहको को पूजने या उनके प्रति आदर प्रकट करने में कोई आपत्ति नही होती है, बल्कि वास्तविक व्यवहार में एक पैगम्बर कि जगह हजारों ही हजार पीरों कि पूजा की जारही है | “ ( ४:१२१ )
१४. मुसलमान सर्वाधिक संप्रदायवादी – “इस ( इस्लाम ) के विषय में आज मुसलमान सबसे अधिक निर्दयी और सम्प्रदायवादी है उनका मुख्य सिध्दांत वाक्य है “ ईश्वर (अल्लाह) एक है और मुहम्मद उसका पैगम्बर है |” इसके अलावा सभी बाते न केवल बुरी है, बल्कि उन्हें फ़ौरन नष्ट कर देना चाहिए | प्रतेक स्त्री और पुरुष, जो इन सिध्दांत को पूरी तरह नही मानता है, उसे क्षण भर के चेतावनी के बाद मार देना चाहिए, प्रतेक वास्तु जो इस प्रकार की पूजा विधि के अनुकूल नहीं है, उसे फ़ौरन नष्ट कर देना चाहिए और प्रतेक पुस्तक जो इसके अलावा क्स्किस और बातों की शिक्षा देती है, उसे जला देना चाहिए | पिछले पांच सौ वर्षों में प्रशांत महासागर से लेकर आंध महासागर तक सारे विश्व में लगातार रक्तपात होता रहा है | यह है मुहम्मद्वाद ! फिर भी इन मुसलमानों में से ही, जहां कही कोई दार्शनिक व्यक्ति हुआ, उसने निश्चय ही इन अत्याचारों कि निंदा कि है |” ( ३ फरवरी १९००, कोपासडेना में दिए गए भाषण से, ४:१२६ )
१५. अल्लाह के लिए लड़ो – “ भारत में विदेशी आक्रान्ताओ की, सैकड़ो वर्षों तक लगातार, एक के बाद एक लहर आती रही और भारत को तोडती और नष्ट भ्रष्ट्र करती रही | यहाँ तलवारे चमकी और ‘ अल्लाह के लिए लड़ो और जीतो “ के नारों से भारत का आकाश जुन्जता रहा | लेकिन ये बाढ़े भारत के आदर्शो को बिना परिवर्तित किये हुए, स्वत: ही धीरे – धीरे समाप्त होती गयी |” ( ४:१५९ )
१६. मूर्ति पूजक हिंदू घृणास्पद – “ मुसलमानों के लिए यहूदी और ईसाई अत्यंत घृणा के पात्र नही है | उनकी नजरो में वे कम से कम ईमान के आदमी तो है | लेकिन ऐसा हिंदू के साथ नही हयाई | उनके अनुसार हिंदू मूर्ति पूजक है व् घृणास्पद ‘ काफ़िर’ है | इसलिए वह इस जीवन में नृशंस हत्या के योग्य है और मरने के बाद उसके लिए शाश्वत नरक तैयार है | मुसलमान सुलतानो ने काफिरो के अध्यात्मिक गुरुओ और पुजारियों के साथ यदि कोई सबसे अधिक कृपा की तो यह कि उन्हें किसी प्रकार अंतिम सांस लेने तक चुपचाप जी लेने के अनुमति दे दी | यह भी कभी कभी बड़ी दयालुता मानी गयी, यदि किसी मुस्लिम सुल्तान का धार्मिक जोश असामान्य या कुछ अधिक होता है तो ‘ काफिरो’ के कत्ले आम रूपी बड़े यग्य का फ़ौरन ही प्रबंध किया जाता है |” (४: ४४६ )
१७. यह कत्ले आम मुसलमान लाए – “ तुम जानते हो कि हिंदू धर्म किसी को यातना नही देता | यह एक ऐसा देश है जहां कि सभी प्रकार के सम्प्रदाय शांति और सौहार्द् के साथ रह सकते है | मुसलमान अपने साथ अत्याचार और कत्ले आम लाये, लेकिन उनके आने से पहले तक यहाँ शांति बनी रहती थी |” ( ५:१९० )
१८. मुसलमानों ने तलवार का सहारा लिया – “ भारत में मुसलमान ही ऐसे पहले लोग थे, जिन्होंने तलवार का सहारा लिए | “ ( ५:१९७ )
१९. एक हिंदू का कम होने का मतलब एक शत्रु का बढ़ना – “ सबसे पुराने इतिहासकार फरिश्ता के अनुसार हमें बताया गया है कि जब सबसे पहले मुसलमान भारत में आये तो यह साठ करोंड़ हिंदू थे और अब केवल बीस करोंड़ है ( यानी चालीस करोंड़ हिंदू मारे गए और धर्मान्तरित किये गए ) | और हिंदू धर्म से एक भी हिंदू का बाहर जाने का मतलब है एक हिंदू का कम होना नहीं है बल्कि एक दुश्मन का बढ़ जाना है” इसके अलावा इस्लाम और ईसाईयत में धर्मान्तरित अधिकांश हिंदू तो तलवार के बल पर धर्मान्तरित हुए है या उनके संताने है |
“ ( ५:२३३ )
२०. मुहम्मदीय विजय को भारत में पीछे हटाना पड़ा – “ मुसलमानों के विजय कि लहर जिसने सारी पृथ्वी को निगल लिया था, उसे भारत के सामने पीछे हटाना पड़ा | “ ( ५:५२८ ) 
२१. हशासिन शब्द ‘असेसिन‘ बन गया – “ मुसलमानों का ‘ हशासिन ‘ शब्द ‘ असेसिन् ‘ बन गया क्योकि मुहम्मदीय मत का एक पुराना सम्प्रदाय गैर- मुसलमानों को मारने को अपने धर्म का एक अंग मनाता था |” ( ५:४० )
२२. इस्लाम में हिंसा का प्रयोग – “ मुसलमानों ने हिन्द का सबसे अधिक प्रयोग किया | “ ( ७:२१७ )
२३. गैर मुसलमानों को मार दो – “ एक ऐसा रिलीजन भी हो सकता है जो अत्यंत भयंकर शिक्षाये देता हो | उदाहरण के लिए मुसम्मादीय मत ( इस्लाम ) मुसलमानों को उन सबकी हत्या करने कि अनुमति देता है जो कि उसके मतानुयायी नही है | ऐसा कुरान में स्पष्ट लिखा है कि “ अविश्वाशियो ( गैर-मुसलमानों ) को मार दें | यदि वे मुहम्मादीय ( मुसलमान ) नही हो जाते है |” उन्हें अग्नि में झोक देना और तलवार से काट देना चाहिए |”
अब यदि हम किसी मुसलमान से कहे कि ऐसा गलत है तो, वह स्वाभाविक तौर पर फ़ौरन पूछेगा कि “ तुम ऐसा कैसे जानते है ? तुम कैसे जानते ही कि ऐसा ठीक नही है ? मेरी धर्म पुस्तक ( कुरान ) कहती है कि ऐसा ही ठीक है | “ ( १७ नवंबर १८९९ को लन्दन में दिए गए भाषण में , प्रैक्टिकल वेदांत, भाग ३ से )
( समस्त उध्दरण अंग्रेजी के सम्पूर्ण विवेकनन्द वाद्रिमय के हिंदी अनुबाद से है, खंड एवं पृष्ठानुसार )

प्रसिद्द भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त ने विश्व को शून्य से परिचित कराया .....और एक लम्बे समय के पश्चात अब छत्तीसगढ़ निवासी हायर सेकेंड्री के छात्र अंकुर तिवारी ने पुनः शून्य से टक्कर ली है. भारत की इस प्रतिभा को नमन.
उनकी लिखी पुस्तक " द मिस्ट्री ऑफ़  जीरो  " का एक अंश प्रस्तुत है आपके लिए   

Ankur Tiwari, Bilaspur, Chhatisgarh

Division by Zero : thoughts and solution - ©                                     
First person who thought for division by Zero was an Indian mathematician Brahmagupta. He should be credited for it. At present I (AnkuR Tiwari) also had done a little effort in this field by inventing out a new formula which is capable of dividing by Zero. I had devoted this formula to my country by naming it as ‘Bhartiya New Rule for Fraction’.

E-mail :-  mysteryofzero@gmail.com

क्या कोंग्रेश,अन्ना हजारे तथा मीडिया का गठजोड़ हे !


जब से बाबा रामदेव ने भ्रस्टाचार, देश तथा विदेश के काले धन को रास्ट्रीय सम्पति घोषित कर सारा धन देश को वापस दिलाने, भ्रस्टा चारिओं को कठोर सजा दिलाने का अभियान छेड़ा हे, कोंग्रेश पार्टी सबसे ज्यादा परेशानी में हे,जनहित के लगभग सभी क्षेत्रों में बुरी तरह से नाकाम से जन विरोधी छवि , तथा लगातार सामने आ रहे घोटालो से, तथा घोटाले बाजो को बचाने कि हर संभव कोशिस करने के कारण देश में भ्रस्टाचार समर्थक छवि बनने से तिलमिलाई हुयी हे, सबसे ज्यादा परेशानी तो इन सबके कारण अपनी पूजनीय महारानी,तथा सभी तरह के प्रेरणा दाता युवराज की मलिन होती छवि के कारण हो रही हे, क्योंकि यह तो सारा देश जनता हे, की उनकी पार्टी में इनकी सहमती,जानकारी और आदेश के बिना कुछ होता नहीं हे.
बाबा रामदेव के आन्दोलन के कारण जब ये मुद्दे देश व्यापी हो गए तो जरुरत थी किसी ऐसे व्यक्ति की जो अपना कोई ऐसा आन्दोलन चलाये जिससे बाबा रामदेव के आन्दोलन को कमजोर किया जा सके तथा जनता का ध्यान जो सीधे सीधे भ्रस्टाचार व् काले धन के मुद्दे पर केन्द्रित हो गया उससे से हटाया जा सके.
हालाँकि पक्के तोर पर तो नहीं कहा जा सकता पर कुछ घटनाओ तथा कारणों से ऐसी आशंका होती हे की अन्ना हजारे का आन्दोलन कोंग्रेश की बनायीं रणनीति का परिणाम हे, ताकि जनता का ध्यान बटाया जा सके.चूँकि बाबा रामदेव का आन्दोलन भाजपा के ज्यादा अनुकूल होता हे, अतः यह धारणा तो बनी हुयी थी की इस आन्दोलन को भाजपा का समर्थन हे. इसलिए बाबाजी के आन्दोलन को कमजोर करने के लिए अन्ना का जन लोकपाल रूपी एक सूत्रीय आन्दोलन सुरु कराया गया जिसमे मीडिया को भी सक्रीय रूप से भागीदार बनाया गया जोकि जाहिर रूप से कोंग्रेश की तरफ पक्षपाती हे,
अन्ना हजारे का आन्दोलन उनके, कोंग्रेश तथा मीडिया का गठजोड़ हे इसकी आसंका क्यों हे यह शंका मन में क्यों होती हे i कुछ घटनाये इसका इशारा करती हे, अन्ना ने चार अप्रैल को जो पहला अनसन सुरु किया था,उसके कुछ दिन पहले दिल्ली में बाबा रामदेव की जबरदस्त भ्रस्टाचार विरोधी रैली हुयी थी, जिसमे अन्ना समेत अनेक लोग समिलित हुए थे, समाचार चेनलो का पक्षपाती रवैया तभी सामने आ गया जब दिन भर चले इस कार्यक्रम का किसी भी समाचार चेनल पर जिक्र तक नहीं था, जबकि वहां पर लगभग सारा मीडिया मोजूद था, कुछ समाचार पत्रों ने किसी कोने में छापा होगा, क्योंकि बाबा रामदेव का आन्दोलन केवल भविष्य में होने वाले भ्रस्टाचार को रोकने मात्र के लिए नहीं था, बल्कि अब तक जिन लोगो ने देश की सम्पदा को लुटा देश का धन विदेशो में भेजा उनको भी पकड़ना तथा विदेशो से देश का धन वापस लाना जेसे व्यापक स्तर का था, क्योंकि इस अभियान की सफलता से ज्यादातर कान्ग्रेशियो की पोल खुलने का डर था इसलिए मीडिया ने इस आन्दोलन का प्रसारण ही नहीं किया, इसके विपरीत अन्ना के आन्दोलन को जो मात्र लोकपाल बिल तक के छोटे मकसद तक सिमित था, जो केवल भविष्य में होने वाले भ्रस्टाचार को रोकने मात्र के उद्देश्य के लिए था, समाचार चेनलों ने चार- पाँच दिनों तक दिन भर सीधा प्रसारण किया, कई तरह की चर्चाएँ आयोजित की, जबकि वहां केवल स्थानीय लोगो की भीड़ थी, परन्तु बाबा रामदेव के प्रोग्राम में देश भर से आई अन्ना के प्रोग्राम से कई गुना ज्यादा भीड़ थी. मीडिया ने अन्ना के आन्दोलन को देश व्यापी बनाया जबकि बाबा रामदेव के बहु उपयोगी, देश हित के महान आन्दोलन को छोटा और महत्वहीन करने का प्रयास किया,
यहाँ यह तो साबित होता हे की देश का ज्यादातर मीडिया स्वार्थी व कोंग्रेश का पक्षपाती हे, पर यंहा अन्ना के तरीके पर भी शंका होती हे, क्यों वो केवल लोकपाल की एक सूत्रीय मांग के लिए आन्दोलन कर रहे हे, वो क्यों नहीं चाहते की विदेशो में जमा देश का लुटा धन देश को वापस मिले,देश का धन लुटने वालों का नाम जनता जाने तथा ऐसे भ्र्स्ताचारियो को कठोर सजा मिले, शायद सिर्फ इसलिए की वो और उनके साथी यह अच्छी तरह से जानते हे की ऐसा आन्दोलन करने से सबसे ज्यादा फजीयत कोंग्रेश की होगी, देश हित से ज्यादा कोंग्रेश हित उनकी सोच में हे, तभी तो शायद बाबा रामदेव के आन्दोलन से जनता का ध्यान भटकने के लिए कोंग्रेश ने मीडिया के सहयोग से अन्ना के आन्दोलन को जबरदस्त प्रचारित कराया.
बाबा रामदेव ने अपने आन्दोलन में अन्ना को बुलाया पर अन्ना ने बाबा को नहीं, फिर भी बाबा रामदेव अपनी तरफ से समर्थन देने अन्ना के मंच पर गए तथा अपना व्यतव्य दिया पर अन्ना ने अपने अनसन समापन के बाद समर्थन करने वालो को धन्यवाद दिया उनको भी जो मंच पर नहीं आकर केवल समर्थन का सन्देश भिजवाया था, पर बाबा रामदेव को नहीं, यह अन्ना का अहंकार था या कोंग्रेश पार्टी का निर्देश पालन वो ही जाने, हाँ मीडिया को बाबा रामदेव की आलोचना का एक मुद्दा जरुर मिल गया जिसे उन्होंने हिंदुवादियो के लिए अपने चिरपरिचित घटिया अंदाज में भुनाया जेसे की बाबा के मंच पर नाचने के बावजूद भी अन्ना ने उन्हें समर्थन का धन्यवाद नहीं दिया, जिससे बाबा की इज्जत को मिटटी में मिलाया, हाँ सोनिया गाँधी का अन्ना हजारे को समर्थन के दिखावटी व्यक्तव्य का अन्ना ने बड़ा सा आभार माना और धन्यवाद दिया, यह किस तरफ झुकाव का संकेत हे.
अन्ना बार बार कहते हे, की वो सच बोलने से किसी से डरते नहीं हे, फिर क्यों नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के अभूतपूर्व विकास की सच्ची तारीफ करने के बाद हिन्दू विरोधी मानसिकता वालो तथा कोंग्रेश की आलोचना से डर कर अपने व्यतव्य पर कायरता पूर्ण सफाई देने लगे, क्यों निडरता से अपनी बात पर अडिग नहीं रहे की नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में जो विकाश किया हे वो वर्तमान की सचाई हे, बल्कि अपने को खोखले धर्मनिरपेक्षता की चादर में लपटने मोदी की आलोचना करने गुजरात चले गए, जहाँ उन्हें भ्रस्टाचार नजर आने लगा, इसकी भी जाँच की जरुरत हे की अन्ना को कोंग्रेश शासित तथा अन्य राज्यों जैसे महारास्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली,हरियाणा या यु, पी. में कहीं भ्रस्टाचार नहीं दिखा, क्या वो सच बोल रहे थे, या सोनिया को खुस करने कोंग्रेश की भाषा बोल रहे थे, शायद इसके बाद से ही कोंग्रेश ने अन्ना से दुरी बनाना सुरु किया और उनके ऊपर वास्तविक हमले सुरु किये, जो पहले जनता को भ्रम में रखने अन्ना के साथियों पर दिखावटी हमले कर रही थी.
यह भी विचारणीय विषय हे की अन्ना बार बार स्कूली बच्चों की तरह सोनिया गाँधी को शिकायत क्यों करते हे की कोंग्रेश वाले उन्हें भाजपा या संघ का मुखोटा बता कर आलोचना करते हे. अति ज्ञानी अन्ना की टीम यह तो जरुर ही समझती हे की कोंग्रेश में बिना सोनिया की सहमती व् आदेश के किसी की ओकात नहीं हे की कुछ भी बोले, फिर भी सोनिया से शिकायत, क्या यह जाहिर नहीं करता की अन्ना नोटंकी कर रहे हे. फिर अन्ना को भाजपा या संघ से परहेज क्यों हे, देश की कुल आबादी के करोड़ों लोग जो भाजपा को वोट देते हे, जो संघ से जुड़ा हे क्या वो भारतीय नहीं हे, क्या अन्ना देश की उस जनता का अपमान नहीं कर रहे हे जहाँ भाजपा की या उनके सहयोगिओं की सरकारे हे, जिसमे देश का विकसित राज्य गुजरात भी हे जिसका नेतृत्व देश के सर्व श्रेष्ठ घोषित मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे हे, भाजपा से दुरी का स्वांग करके लोकपाल के लिए आन्दोलन करना जाहिर करता हे की अन्ना की नियत सही नहीं हे, या अहंकारी प्रवृति हे,हो सकता हे उनका मूल मकसद बाबा के आन्दोलन से जनता का ध्यान हटाना हे, जो भाजपा के अनुकूल तथा कोंग्रेश के लिए उनके उजले चेहरों के पीछे की काली सचाई को सामने लाने वाला बन जाये.
अन्ना व उनकी टीम के लोग कहते हे कि पहले तो कोंग्रेसिओ को प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने में कोई आपति नहीं थी, अब पता नहीं क्यों मना कर रहे हे, या मनमोहन सिंघजी को लोकपाल के दायरे में आने में क्या डर हे,. पता नहीं जब भी सोनिया या राहुल गाँधी कि बात आती हे अन्ना के साथियो व मीडिया वालों कि अक्ल कंहा घास चरने चली जाती हे, जो यह नहीं समझ पाते कि पहले जब कोंग्रेशियो ने पी. एम. को लोकपाल के दायरे में लाने कि बात कही थी तब उनके दिमाक में मनमोहन सिंह जी थे , वो लोकपाल के सिकंजे में आये या नहीं उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता पर जब उनको यह याद आया कि मनमोहन सिंघजी तो कितने दिन पी एम रहेंगे उनका असली मकसद तो राहुल गाँधी को पी.एम. बनना हे, अब भला किस कोंग्रेशी में हिम्मत हे, कि वो कहे कि राहुल गाँधी को भी लोकपाल के दायरे में आना चाहिए. कोनसा कोंग्रेशी यह चाहेगा कि उनके पूर्व ह्रदय सम्राट राजीव गाँधी कि तरह का ही वर्त्तमान ह्रदय सम्राट राहुल गाँधी का भी हश्र हो, देश भर में बदनाम करने वाले भ्रस्टाचार के आरोपों कि जाँच का सामना करना पड़े, जो आरोप निश्चित रूप से लगेंगे ही. अब तो मीडिया ने भी राहुल गाँधी को पी. एम. बनाने का माहोल बनाने वाले, उनकी बिरुदावली गाने के, उनके गुणगान करने वाले प्रोग्राम बनाने शुरू कर दिए हे,मीडिया का यह करना समझ में आता हे क्योकि भारत निर्माण विज्ञापन का सरकारी बजट शायद १४०० करोड़ का हे इसका हिस्सा पाने के लिए लालची मीडिया देश हित और निष्पक्षता तो आसानी से छोड़ सकता हे, पर अगर अन्ना के साथियो को यह नहीं समझ में आये तो यही तो माना जायेगा ना कि वो राहुल गाँधी कि छवि जनता में ख़राब ना हो इसके लिए जनता कि नजर में असली बात लाना नहीं चाहते , वो यह नहीं कहते कि कोंग्रेश का मकसद मनमोहन जी को बचाना नहीं राहुल गाँधी को बचाना हे,
अन्ना कि टीम में स्वामी अग्निवेश का होना भी यह दर्शाता हे कि वो कोंग्रेश के पक्ष में हे, सब जानते हे अग्निवेश मुस्लिम परस्त मानसिकता के हे, हिंदूवादी संगठनो को गाली देना उनकी फितरत हे, अमरनाथ यात्रा को गलत पर कश्मीर के अलगाव वादी देश तोड़ने कि भावना रखने वाले नेताओं से गले मिलना सही मानते हे, नक्शली आतंकियो के खास हिमायती हे, आतंकी के मरने पर पुलिश को जी भर कर गालियाँ देते हे, पर सामूहिक नरसंहार में पचासों पुलिश के जवान मरे तो सुतुरमुर्ग कि तरह रेत में मुंह छुपाये पड़े रहते हे, अन्ना कि टीम का सहयोग कम, कोंग्रेस के भेदिये का रोल ज्यादा निभा रहे हे. यह भी इस बात का संकेत हे कि अन्ना का आन्दोलन का मकसद वो नहीं हे जो जनता को बताया जा रहा हे.
पहले तो अन्ना और कोंग्रेश द्वारा एक दुसरे कि आलोचना दिखावटी लगती थी, पर जबसे कोंग्रेश ने बाबा रामदेव के आन्दोलन को दमन पूर्वक कुचला हे, लगता हे कोंग्रेश अन्ना को भी निपटा देना चाहती हे, ताकि भविष्य में उनका भ्रस्टाचार बिना रूकावट चलता रहे, अन्ना कि भी प्रतिस्ठा दांव पर लग गयी हे, अगर अन्ना ने वास्तव में ही देश हित के लिए आन्दोलन शुरू किया था तो अपना अहंकार छोड़ कर, ढोंगी धर्मनिरपेक्षता को भूल रामदेव जी के साथ मिल कर अपना आन्दोलन चलाना चाहिए, स्वामी अग्निवेश तथा धर्मनिरपेक्षता के नाम पर साम्प्रदायिकता का जहर घोलने वालो से छुटकारा पाना चाहिए, भाजपा हो या संघ पुरे देश को अपना परिवार मान सबका सहयोग लेकर देश हित में अपना आन्दोलन चलाना चाहिए ,तभी वो पुरे देश का आदर पा सकेंगे मीडिया द्वारा प्रायोजित बढा चढ़ा कर दिखाया जाने वाला आदर देश कि सच्चाई नहीं हे, मीडिया तो कोंग्रेश का इशारा मिलते ही वेसी ही घटिया तरह कि आलोचना करने लगेगा जैसी आजकल बाबा रामदेव कि करने लगा हे.
इसमें एक संभावना यह भी हो सकती हे कि देश को धोका देने में माहिर हो चुकी कोंग्रेश ने बाबा रामदेव के आन्दोलन को कमजोर करने अन्ना के आन्दोलन को बढ़ावा दिया, फिर बाबा रामदेव को धोका देकर उनके आन्दोलन को दमन पूर्वक कुचल कर अपना मतलब निकाल जाने के बाद अन्ना को भी धोका दे रही हे, तभी तो पहले सारी बाते मान कर अब कुटिलता से लगभग सभी मंत्री अन्ना से कि सभी बातों से मुकरने लगें हे, हर बात में रोड़े लगा रहे हे, कभी लोकपाल बिल के दो मसोदे बना कर मंत्री परिसद को भेजने कि बात कभी सर्वदलीय बैठक में विचार, के बहाने बिल को टालना चाहती हे, जबकि सभी जानते हे, मंत्री परिषद् कोंग्रेशियो के मसोदे को ही मानेगी, और जब कोंग्रेश संख्या बल से पी.ए.सी. के रिपोर्ट को समाप्त करवा सकती हे, तो अपनी मनपसंद लोकपाल बिल के मसोदे को लागु क्यों नहीं करवा सकती,
कोंग्रेश का एकमात्र मकसद राहुल गाँधी तथा अपनी पार्टी के सांसदों को भ्रस्टाचार के आरोप होने पर भी किसी भी कार्यवाही से बचाना तथा देश का धन लुटते रहना हे, अन्ना अगर ईमानदारी से यह काम कर रहे हे तो बाबा रामदेव के साथ मिलकर यह आन्दोलन चलाना चाहिए तथा देश हित के लिए किसी का भी समर्थन निडरता से लेना चाहिए, फिर चाहे कोई कितनी हीआलोचना करे की वो भाजपा या संघ का मुखोटा हे. 

बाबा रामदेव के विरुद्ध मीडिया का दुष्प्रचार : उनके तर्कसंगत उत्तर

योग गुरु बाबा रामदेव और उनके भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के विरुद्ध मीडिया का दुष्प्रचार  चल रहा है और निश्चित रूप से यह सब मूल विषय से ध्यान हटाने के लिए , इस आन्दोलन को कमजोर करने के लिए उन व्यक्तियों के इशारे पर हो रहा है जो स्वयं ही भ्रष्ट हैं और ये आरोप कितने तथ्यहीन हैं आइये ये देख लेते हैं |
बाबा रामदेव को उतना जन  समर्थन नहीं मिला जितना की अन्ना हजारे को 
अन्ना हजारे ने अपना अनशन जंतर मंतर पर किया था | यह स्थान एक सड़क का छोटा सा हिस्सा है जो की धरना प्रदर्शनों के लिए आरक्षित है , अन्ना हजारे का धरना स्थल केवल ५ हजार लोगों से भार गया था जबकी स्वामी बाबा रामदेव ने तो अपने सत्याग्रह का प्रारंभ ही ४० जहर लोगों के साथ किया था |इसके अतिरिक्त अन्ना हजारे का अनशन शुरू हेने से कुछ दिन पहले से ही मीडिया ने उसके पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया था और इस प्रकार का प्रचार किया था जिससे अन्ना का समर्थन करना फैशन बन गया था और जंतर-मंतर पर उपस्थित लोगों में से अधिकांश ऐसे ही थे जो की शायद सोशल नेट्वर्किंग के लिए फोटो खिचवाने गए थे उनको ना तो लोकपाल या जनलोकपाल के बारे में पता था और ना ही  इसके प्रभाव के बारे में और दिल्ली के ही लोग थे जो एक दिन की पिकनिक पर आये थे जबकी बाबा रामदेव के सत्याग्रह में भारत के प्रत्येक स्थान से प्रत्येक आयु , प्रत्येक आर्थिक और सामाजिक वर्ग के लोग (दिल्ली के लोगों की भी संख्या काम नहीं थी) आये हुए थे और उन सबको पता था की सत्याग्रह की मांगें क्या हैं और उनका क्या प्रभाव होगा और उसमे से अधिकांश आमरण अनशन के लिए आये थे ना की फोटो इकट्ठी करने के लिए तो किसका समर्थन ज्यादा था इसका निर्णय आप ही करिए |

बाबा रामदेव के पांच सितारा सुविधाएं 
एक और दुष्प्रचार , बाबा स्वामी रामदेव जी के सत्याग्रह में १० लाख लोगों के आने का अनुमान था और उसमे से अधिकांश लोग आमरण अनशन के लिए आ रहे थे ,और भारत के सुदोर स्थानों से आ रहे थे जो की अन्न को त्याग कर केवल जल पीकर ही रामलीला मैदान में बैठने वाले थे | उन सत्याग्रहियों की सुविधा के लिए टेंट लगवाया गया था और पीने के पानी की व्यवस्था की गयी थी |

वे और हम....कविता...डा श्याम गुप्त....

वो दिखाए जारहे हैं ,
टीवी पर, सिनेमा में, उपन्यास , वीडियो गेम्स में -
अपनी महानता,
अपनी राष्ट्र-भक्ति,
अपनी कल्चर,
अपनी शक्ति ||

आदिबासी या निवासी ,
चाहे पूर्व का हो या पश्चिम का ,
उत्तर का या दक्षिण का |
भारत का हो या चीन का हो,
योरोप का हो , अफीकी हो,
कहीं का भी हो ,
जीतता सिर्फ अमेरिकी हीरो है,

मान्यताएं, आस्थाएं, संस्कृति ,
या सामाजिकतायें,
नई हों या पुरानी ,
वे ही हीरो हैं ;
उनके सम्मुख बाकी संसार जीरो है ||

झूठ मक्कारी और दंभ ,
अशौच और पाखण्ड ,
अनैतिकता नग्नता की होड,
रोटी और पैसे की दौड ,में रत-
वे कल्चर्ड हैं ,
बाकी सब अनकल्चर्ड हैं ||

हम परोस रहे हैं यहाँ ,
पिस्टल गोली बन्दूक से युक्त,
हिंसा तांडव नग्नता उन्मुक्त,
विदेशी फ़िल्में सीरियल, उपन्यास ,
कंसर्ट सौंदर्य-प्रतियोगिता नाच ||

हम व्यस्त हैं,
विदेशी नक़ल पर संगीत, अन्त्याक्षरी और-
अंग प्रदर्शनकारी सीरियलों में |
पिज्जा बर्गर मार्केटिंग और-
ब्रांडेड कमीजों में |
होटलों पब केसीनो और मयखानों में |
केम्प फोर्ट,शापर्स स्टॉप , और फोरम, क्रास रोड -
व वेव में समय गुजारने में |
अपनी क्षमता से,
विदेशी कंपनियों को संवारने में ||

हम बेहाल हैं ,
महवे ख्याल हैं,
उनकी अक्ल में, उनकी शक्ल में ,
हम मस्त हैं अभ्यस्त हैं,
उनकी नक़ल में ||

हम लगे हैं,
अपना सब कुछ हारने में,
कान्हा की बांसुरी को,
सस्ते मनोरंजन और-
विदेशी गीतों पर न्योछारने में |
या लकुटी और कामरिया को ,
विदेशी नक़ल पर वारने में ||

भारतीय मीडिया का दोगलापन



मित्रों अगर दो आदमी किसी कुत्ते को अपने पास बुलाने की कोशिश करे .एक आदमी के पास रोटी का एक टुकड़ा हो और दूसरे आदमी का हाथ खाली हो तो कुत्ता किस आदमी के पास जायेगा ?

जाहिर है कुत्ता हमेशा उसी आदमी के पास जाता है जो उसे रोटी का टुकड़ा लेकर बुलाए ..
...
ठीक यही उदाहरण भारतीय मीडिया पर लागू होती है . एक सर्वे में भारतीय मीडिया को पुरे विश्व में सबसे भ्रष्ट और लालची बताया गया है ..क्योंकि आज लगभग सभी भारतीय मीडिया एक कॉर्पोरेट हॉउस की तरह चल रही है और स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड हो चुकी है . तो जाहिर है उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाना हो गया है .. नैतिकता , सच्चाई ,
निरभिकता , और ‌प्रजाहित आज भारतीय मीडिया के लिए महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कैसे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जाये ये महत्वपूर्ण है चाहे इसके लिए पत्रकारिता के सारे सिद्धांत की क़ुरबानी ही क्यों न देनी पड़े .

मित्रों अभी ताजा उदाहरण बाबा रामदेव का है .. आज गली गली में बहुत से ऐसे खोजी पत्रकार पैदा हो गए है जिनसे तो विकिलिक्स के असंजे भी शर्मा जाये .. कोई बालकृष्ण के गांव पहुच जाता है कोई बाबा रामदेव की कंपनी खोज रहा है .. जबकि कुछ दिनों पहले तक इस देश की सारी मीडिया बाबा रामदेव के आगे पीछे घुमती रहती थी .. रामदेव को स्वामी रामदेव बनाने में इस देश की मीडिया का भी बहुत योगदान है ये बात खुद बाबा रामदेव ने कही है क्योंकि योग को घर घर पहुचने का काम मीडिया ने किया है .

लेकिन आज यही मीडिया बाबा के पीछे खोजी पत्रकारिता क्यों कर रही है ? क्योंकि सरकार ने १३०० करोड़ का बजट भारत निर्माण के विज्ञापन के लिए निर्धारित किया है पहली बात तो कांग्रेस बार बार नैतिकता की बात करती है तो क्या सरकारी पैसे से किसी राजनितिक पार्टी का प्रचार नहीं हो सकता ..मैंने प्रधानमंत्री कर्यालय को पत्र लिखकर इस बाबत पूछा तो वहा से जबाब मिला की ये सरकार और सरकार की योजनाओ का प्रचार है ना की किसी पार्टी का .मैंने फिर पूछा पूछा की अगर ये सरकार का प्रचार है तो इसमें सोनिया गाँधी को क्यों दिखाया जाता है ? सोनिया गाँधी किस संवैधानिक पद पर है ?? तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने मेरे बार बार रीमाईनडर भेजने के बावजूद चुप्पी साध ली है ..

सरकार की ओर से सारे मीडिया को चेतावनी दे दी गई है की वो अब रामलीला मैदान की हैवातियत की फुटेज को ना दिखाए और अन्ना और बाबा रामदेव के बारे में नकारात्मक छबी ही दिखाए , नहीं तो उन्हें अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा . और करोडो रूपये के सरकारी विज्ञापन से भी हाथ धोना पड़ेगा .. एक बात मै और बता दूँ की इस देश के सभी मीडिया हाउसों ने विदेशी निवेश के नियमों की और शेयर ट्रान्सफर के नियमों की खुल कर धज्जिय उड़ाई है इसलिए सरकार के हुकम को हर एक मिडिया घराने को मानना जरुरी हो जाता है क्योंकि जो खुद दागदार हो वो दूसरे की कमियां नहीं बता सकता ..
चलते चलते अब  मित्रो द्वारा सुनाई गयी खबर भी निचे लिख रहा  हूँ 
दिग्विजय के बयानों से प्रभावित हो कर भारत सरकार का ऐलान,अब दिग्विजय के जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मुर्खता दिवस मनाया जायेगा.
अन्ना हजारे की दिग्विजय को पुणे के पागलखाने में दाखिले की नसीहत के बाद, पागलखाने के पागल अनशन पर बैठ गए.. ज्ञात हो की इससे पहले गधे भी इसी बात को लेकर अनशन पर बैठे थे..
 

5 JUNE रामलीला मैदान से निकालने के बाद :एक प्रत्यक्षदर्शी के शब्दों में


मैं रामलीला मैदान में हुयी रावनलीला  का प्रत्यक्षदर्शी हूँ और मैंने आप लोगों को बताया भी है की वहां पर वास्तव में हुआ क्या था अब यह भी सुन लीजिये की वहां से निकले जाने के बाद लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी और पुलिस का क्या रवैया था |

जब हम लोगों को रामलीला मैदान से जबरन बर्बरता पूर्वक निकला जा रहा था तब हम लोग कोई प्रतिरोध नहीं कर रहे थे | बाबा ने हमें पहले ही माना कर दिया था की कोई भी स्थिति आ जाय आप लोग पुलिस के ऊपर प्रहार नहीं करेंगे और हम लोग अनुशासित थे और शांत थे इसलिए हम लोग शांति पूर्वक पीछे हट रहे थे परन्तु मन  में एक आक्रोश था की क्या हमारा आन्दोलन असफल हो जायेगा ??? पुलिस ने हमसे रामलीला मैदान छीन लिया था इस का क्रोध भी था | पुलिस की जो क्रूरता देखि थी उसका भी आक्रोश था | हमें अब बाहर तो निकलना ही था परन्तु कुछ लोग ऐसे थे जो जितनी अधिक देर तक संभव हो रामलीला मैदान में रुके रहना चाहते थे और मैं भी उन्ही में से एक था | पुलिसकर्मी हमें लाठियां मरकर भगा रहे थे और एक छोटे उद्घोषक से कह रहे थे की "परमिसन ख़तम कर दी गयी है ..............बाबा चले गए हैं ............अब आप लोग भी जाइए " और हम लोग ये देख रहे थे की अब पुलिस क्या हमें धक्के देकर बाहर निकलेगी ............तभी एक व्यक्ति ने मेज पर खड़े होकर कहा की "हमें निर्देश मिल गया है की हमें जंतर मंतर ने जाना है धरना देने के लिए |" यह सुनाने के बाद मैं भी मैदान से बाहर निकल गया |

काश वो दिन वापस आ पाते ..........

                                     मेरे पसंदीदा फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप द्वारा produced ताज़ा तरीन फिल्म 'शैतानका review पढ़ रहा था .......अभी देख नहीं पाया हूँ .....कहानी सुनते हैं कुछ यूँ है की कुछ youngsters मस्ती करते हुए किसी मुसीबत में फंस जाते हैं ....उस से निकलने के लिए हाथ पाँव मारते हैं और इसी बीच उनके अन्दर का शैतान जाग उठता है ......... अब मैं सोचने लगा की क्या वाकई हमारे अन्दर बैठा शैतान यूँ ही कभी मौका पा के बाहर जाता होगा ....वास्तविक जीवन में भी ......अपने अन्दर झाँका तो वाकई ऐसे बहुत से किस्से निकल आये ..........कुछ हंसाने वाले ....कुछ गुदगुदाने वाले ...........
                                                बहुत पुरानी बात है ......शायद 86 -87 की .....दिल्ली में था .....उस जमाने की बहु चर्चित फिल्म basic instinct रिलीज़ हुई थी ....तब तक ये multiplex का ज़माना नहीं आया था ......single screens ही हुआ करते थे .......उन दिनों दिल्ली में एक मात्र चाणक्य सिनेमा ही हुआ करता था जहाँ नई अंग्रेजी फिल्में लगा करती थी ........सो एक मित्र के साथ पहुँच गए हम ...प्लान था 6 से 9 देखेंगे और रात खाना खा के 11 बजे तक कमरे में वापस .........वहां पहुंचे तो हाउस फुल ......हॉल के सामने वाली मार्केट में एक उस्मान भाई हुआ करते थे ...उनका ढाबा था .......हमेशा फिल्म देख कर उनके यहाँ खाना खाते थे ....गप्पें मारते थे सो उनसे अच्छी खासी यारी हो गयी थी .....हाउस फुल का बोर्ड देख के भागे भागे उनके पास पहुंचे की उस्मान भाई कुछ जुगाड़ करो यार ....हॉल के सामने ही ढाबा  होने की वजह से उस्मान भाई के हॉल के स्टाफ से links थे ....पर कुछ हो सका और उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए ..... अब कोई चारा नहीं था ...सो तय किया की 9 से 12 देखेंगे .........तीन घंटे वहीं मार्केट में घूमे फिरे ...उस्मान भाई से जी भर के गप्पें मारी बढ़िया खाना खाया .....chicken curry और butter naan .....टिकेट के लिए विंडो पर पहुंचे तो होश उड़ गए .........बाप रे बाप ...इतनी भीड़ ....70 के दशक का amitabh bachhan का ज़माना याद गया ......अब लाइन में सबसे पीछे खड़े हो के तो मिल चुका टिकेट .....खैर टिकेट बिक्री शुरू हुई और हम दोनों बेचारे....  हारे जुआरी .....कारवां लुटते देखते रहे ..........बमुश्किल 5 मिनट बीते होंगे, की वो ....जिसे कहते हैं ...अन्दर बैठा शैतान...... जाग उठा .......अब हमसे  और देखा जा रहा था ,सो उठे और बुकिंग विंडो की तरफ बढे ........वहां ज़बरदस्त भीड़ थी .........पर ज़्यादातर लोग आसपास के IIT   और AIIMS के स्टुडेंट्स थे ... वो बेचारे ठहरे 40 -40 किलो के मर्द और मैं था 90 किलो का तगड़ा  पहलवान .......सो मैं भीड़ में घुस गया, एक दम ...जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह में घुसा था .............सबसे पहले मेरा एक ही लक्ष्य था की किसी तरह विंडो तक हाथ पहुँच जाए ..........खैर जैसा की फिल्मों में दिखाते है की अंतिम सीन में मरता हुआ हीरो किसी तरह रेंगता हुआ हेरोइन  तक पहुँच कर उसका हाथ थाम लेता है ....कुछ उसी अंदाज़ में मैंने वो टिकेट विंडो पकड़ ली ........मोटे शीशे की खिड़की थी ....उसे पकड़ के मैंने एक झटका पहले लेफ्ट मारा और एक राईट ...........अब वो बेचारे पढ़ पढ़ के सूख गए डाक्टर इंजिनियर  मुझ पहलवान का धक्का कहाँ बर्दाश्त कर पाते ...........चीख पुकार मच गए ......oh my god .....save me ....oh shit .........ये क्या हो रहा है .....पर कौन था वहां उनकी सुनने वाला उस रात रामलीला मैदान की तरह ....मैदान साफ़ था और मै विंडो पे सबसे आगे खड़ा था ......मैंने उस से 2 टिकट मांगे ........यही कोई 20 रु का एक टिकट रहा होगा .......वो बोला खुल्ले दो ......अब खुल्ले कहाँ से लाऊँ ??????मैंने कहा भाई मेरे तू 100 रु के पूरे दे दे .....और उसने मुझे 5 टिकटें पकड़ा दीं ........आप सोच सकते है .........क्या मनोदशा रही होगी हम दोनों की .........सचिन तेंदुलकर को वर्ल्ड कप जीत के वो ख़ुशी नहीं मिली होगी जो हमें वो टिकटे पा के मिली ......हम दोनों विजयी भाव से वहाँ बने एक चबूतरे पे बैठ के तमाशा देख रहे थे ...और उन बेचारों पे तरस खा रहे थे .........कुछ देर बाद मैंने महसूस किया  की हमारे इर्द गिर्द एक किस्म का मजमा सा लग गया था जैसे मदारी के इर्द गिर्द लग जाता है ...इस से पहले की मै कुछ समझ पाता एक लड़का .......सकुचाते हुए आया .......और बोला ...भाई साब टिकेट एक्स्ट्रा है .....हमने कहा नहीं .........तो वो बोला भैया कुछ एक्स्ट्रा पैसे ले लो ....मैंने उस से कहा ...क्यों बे हम तुझे ब्लैकिये नज़र आते हैं .........वो पीछे हट गया ...पर उसने हार नहीं मानी थी .....और कमबख्त एक विचार का प्रतिपादन तो कर ही गया .........अब कहते है की विश्व की बड़ी बड़ी क्रांतियाँ एक विचार की ही तो देन हैं .........सो वो विचार अब पनपने लगा .....भीड़ में भी और हमारे अन्दर भी .....वो बोला ...दे दो भाई साब .......तो मेरे वो मित्र बोल पड़े ...अच्छा चल कितने पैसे देगा .......30 ले लो ....मैंने कहा चल बे ......तब तक उनमे से कोई बोला 40 ले लो ........अब कमान मेरे उस मित्र ने सम्हाल ली ........और बोले ,देखो भाई 3 टिकटें हैं .......उसको मिलेंगी जो सबसे ज्यादा पैसे देगा .......तो साहब बाकायदा नीलामी हुई .......बढ़ चढ़ के बोली लगी ........यूँ मानो हुसैन साहब की नंगी........ देवी देवताओं वाली पेंटिंग बिक रही हो .....और मुझे याद है शायद 60 या 70 तक गयी .......और हमने भैया वो 3 टिकटें बेच दीं ....अब देखिये..... शैतान जब जाग जाता है तो क्या कुछ करता है ..........मैंने कहा की यार देख अपन आये थे entertainment के लिए ........वो तो हो गया ....फुल्टू  .......अब ये 2 भी बेच देते हैं फिल्म कल देख लेंगे ........पर उसमें कुछ गैरत बाकी थी सो उसने ये विचार कुचल दिया ...एकदम केंद्र सरकार की तरह .......खैर साहब बड़े मज़े से फिल्म देखी ..........मनः स्थिति ही कुछ ऐसी थी ..........इतनी हसीन शाम, फुल entertainment ......वो भी बिलकुल मुफ्त .........बड़ा मज़ा आया ...बेहतरीन  फिल्म थी ......रात बारह बजे बाहर निकले ........ऑटो लिया .....50 रु में .........आम दिन होता तो हम दोनों का तो हार्ट फेल हो जाता ऑटो लेने में .........पर आज कोई गम नहीं था ....ऑटो वाला चल पड़ा .......थोड़ी दूर ही चले थे की एक आदमी ने हाथ दिया .........सवारी पीछे बैठी हो तो दिल्ली के ऑटो वाले इस तरह नहीं रुकते ...........पर हमने कहा रोक ले यार ...इतनी रात गए बेचारा कहाँ जाएगा ........उसने रोक लिया ........अब हमने उस से पूछा ...हाँ भाई साब कहाँ जाओगे ...उसे भी उधर ही जाना था जिधर हम जा रहे थे ......मैंने कहा 50 रु लगेंगे ....और वो झट से मान गया ....हमने बैठा लिया .........थोड़ी ही देर में वो अन्दर बैठा शैतान ....कमबख्त फिर जाग गया .........घर के पास रेड लाईट पर ऑटो रोका ...और उसे 10 रु पकडाए ........ऑटो वाला इससे पहले की कुछ बोलता हमने उसे कपिल सिब्बल की तरह समझा दिया की बेटा अगर हम पीछे बैठे हैं तो ऑटो तो हमारा हुआ .......सो किराया तो हम शेयर करेंगे ... की तू ..........50 रु ये भाई साब देंगे ....10 ये रहे ........तू भी खुश हम भी खुश .........तेरा नेट प्रोफिट 10 रु........ हमारे प्रोफिट पे तू दिमाग मत लगा ..............अब ये तो तर्क ही ऐसा था की सुप्रीम कोर्ट मान जाए ...उस बेचारे की क्या मजाल .......दोनों भाई हँसते खिलखिलाते घर पहुंचे ............वो मस्ती भरे दिन अब भी याद आते हैं .............क्या बचपन था ...क्या अल्हड ...मदमस्त जवानी थी ..........काश वो दिन वापस पाते ..........