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ए ड्रिंक फोर यू सर....डा. श्याम गुप्त....

ड्रिंक फोर यू सर........ सुप्रीम कोर्ट ने भी महिलाओं, लडकियों को बार में , होटलों में कार्य करने को हरी झंडी दे दी कुछ हिदायतों के साथ .....देर रात में घर आने/ जाने के लिए सुविधा, उनसे अनैतिक कार्य कराया जाय ......अब अनैतिक कार्य क्या किसी क़ानून के तहत सरे आम, सब को कह कर कराया जाता है ? यह तो पहले भी कानूनन जुर्म था...इसमें नया क्या है.... ये सुविधाएं ही तो सब कुछ अनैतिक कार्य का कारण होती हैं जिनकी आड़ में सब धंधे होते हैं | यह तो उसी प्रकार हुआ कि ऊँट के आगे घास रखदें कि यह दिखाने को है, खाने को नहीं .... शेर के पिंजरे में आदमी छोड़ दिया जाय कि यह खेलने के लिए है खाने के लिए नहीं |...आखिर क्यों महिलायें होटलों में ड्रिक्स परोसें ...क्यों होटलों बार में सर्विस करें ...क्यों एयर होस्टेस महिलायें ही हों ....क्यों मालों/फ़र्मों/फेक्टरियों में सेल्सगर्ल हों, क्यों हर एरा-गेरा कंपनी के मालिक , अफसर की सेक्रेटरी महिला ही होती है... क्या इसके पीछे छुपी मानसिकता सभी को नहीं पता.....कम तनख्वाह...मजबूरी में हर तरह का काम करा लेने की इच्छा ....मल्टी-पर्पज कर्मचारी .....आखिर छुरी खरबूजा कहीं भी हो...साथ साथ हों ...खरबूजा तो कटेगा ही ....
वास्तव
में तो ऐसे सभी कार्यों में महिलाओं का कार्य करना प्रतिबंधित होना चाहिए.... क्या वास्तव में आप एक भी कारण बता सकते हैं कि----क्यों महिलायें बारों, होटलों में कार्य करें ...क्यों वे ही एयर-होस्टेस बनें...क्यों वे सेक्रेटरी बनें ....????????????

8 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

आधुनिकता और समानता के अधिकार के दंभ ने स्त्रियों को दिशाविहीन कर दिया है....पुरुष की आदिम चाल में एक बार फिर स्त्री फंस गयी है. हमारे देश के न्यालय भी पश्चिमी आँख से देखने और न्याय करने के अभ्यस्त हैं.....क्या कहा जाय ......हमारी क़ानून व्यवस्था भी हमारी ( भारतीय ) नहीं है.

हरीश सिंह ने कहा…

सच कहा आपने, डंके की चोट पर

abhishek1502 ने कहा…

purntaya sahmat

गंगाधर ने कहा…

sach bat

drshyam ने कहा…

सही कहा कौशलेन्द्र जी...वस्तुत: यह व्यवस्था पश्चिमी वैश्याव्रत्ति-परक संस्क्रिति की व्यवस्था है....जहां महिलायें सिर्फ़ इसी काम के लिये होती हैं...चहे वे किसी भी स्तर पर हों....

drshyam ने कहा…

धन्यवाद हरीश जी,अभिषेक व गन्गाधर जी....वास्तव में अब समय आगया है कि असत्य को काटने के लिये...हांजी..हांजी..या--मा ब्रूयात सत्यं अप्रियम-- की बज़ाय डन्के की चोट पर कहा जाय...

ZEAL ने कहा…

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महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर सकती सरकार तो कम से कम रात्री में ड्यूटी तथा इस प्रकार की सेवाओं पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाए जाने में ही समझदारी है।

वैसे ये फैसला किस महान हस्ती ने दिया है ? पुरुष अथवा महिला न्यायाधीश ने ? खैर जो भी हों , खेद होता है ऐसे गैर-जिम्मेदाराना फैसलों पर।

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drshyam ने कहा…

धन्यवाद दिव्या जी....