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कॉग्रेस के शर्म का मर्म


''पुत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं !'' बच्चे के पैदा होने के बाद जब वह पालने में खेलना शुरू कर देता है तब उसी समय उसके पालने में हाथ-पैर चलाने के ढंग को देखकर अनुभवी लोग समझ जाया करते हैं कि यह बच्चा कैसा बनेगा आगे चलकर ? परन्तु इतना उन्नत अनुभव रखने वाला यह भारतवंशियों का समाज कौंग्रेस के जन्म काल की अठखेलियों का अर्थ क्यों नहीं समझ पाया ? यह निश्चय ही शोध का विषय है ! और तो और १८८५ से लेकर आज तक भारत वर्ष की यह जनता कौंग्रेस के हाथों लगातार लूटती रही और कभी भी इसके बेशर्मी का मर्म नहीं समझ पायी यह भी एक शोध का विषय है ! एक पर एक झूठे वादे और आश्वासन और फिर उसके बाद धोखाधड़ी ! इस धोखाधड़ी का प्रशिक्षण इन्होने अंग्रेजों से लिया है ! और अंग्रेजों के यहाँ रहते हुए ही ये लोग इस विद्या में पारंगत हो गए थे ! यह धोखाधड़ी कौंग्रेस का इतिहास रहा है ! कौंग्रेस के इसी चरित्र को देखकर अंग्रेज कहा करते थे कि हमारे जाने के बाद इस देश पर काले अंग्रेज राज करेंगे ! और यह सच साबित हो रहा है आज भी ! आजादी के पहले भी भारतीये राष्ट्रीय कौंग्रेस ने यही किया और आजादी के बाद इंदिरा-कौंग्रेस का चरित्र भी यही रहा है और अब बिना घोषणा के सोनियाँ-कौंग्रेस में तब्दील हो चुकि इस अराष्ट्रिये पार्टी का चरित्र आज भी वही है ! जनता आखिर इतने दिनों तक इस पार्टी का सामना करने के बाद भी इस दल की असलियत क्यों नहीं समझ पायी ?


हरेक प्राचीन देश की एक सनातन मनोदशा होती है ! उसी मनोदशा के आधार पर वहाँ का राष्ट्रीय समाज सभी बातों के बारे में सोचता-समझता है ! उस मनोदशा के बिलकुल विपरीत एकदम भिन्न मान्यता रखने वाले लोगों से जब उसका अचानक ही पाला पड़ जाता है तो उन बातों से निपटना उस समाज के लिए कठिन हो जाता है ! इन्हीं परिस्थितियों में से गुप्तचरी की व्यवस्था का जन्म हुआ था ! कालान्तर में हमने अपने इतिहास में कुछ अवसरों ऐसे भिन्न मनोदशा वाले लोगों को समझने में भूल की ! सनातन शाश्वत नीतियों के आधार पर हमारा सम्पूर्ण सामाजिक, राजनितिक, राजनयिक, आर्थिक, व्यापारिक, समाजिक, शैक्षणिक, वैज्ञानिक, सामरिक, सांस्कृतिक ताना-बाना बुना गया था !

हम युद्ध भी करते थे तो नीतियों के आधार पर ! राजा परस्पर युद्ध किया करते थे ! सेना आबादी से दूर जाकर किसी बृहत् मैदान में युद्ध किया करती थी ! आक्रमण सैनिक केवल सैनिकों पर ही किया करता था ! हमारे समाज का सामान्य जन इन युद्धों से प्रभावित नहीं होता था ! आम जनता अपनी सामान्य जीवनचर्या सामान्य रीती से चलाती रहती थी ! कभी भी आम समाज पर किसी राज्य की सेना ने हमला नहीं किया परकीयों से मुक्त प्राचीन भारत के इतिहास में ! इसीलिए इन युद्धों से सामान्य जनता की आर्थिक दशा प्रभावित नहीं होती थी ! युद्ध चूँकि देश के ही देशी राजाओं के मध्य होता था ! जनता को पता होता था की युद्ध के बाद जो भी राजा आएगा वह प्रजा वत्सल ही होगा ! क्योंकि यह युद्ध राजा की योग्यता सिद्ध करने के साधन स्वरुप समाज में स्वीकार्य होते थे ! और युद्ध में घायल हुए लोगों की सेवा बिना भेड़-भाव किये सभी लोग करते थे ! युद्ध में याचना करने पर क्षमा करने की परमपर भी थी ! पराजय स्वीकार कर लेने पर जीवन दान देने की परंपरा भी थी ! परन्तु जो हमलावर आये इस देश में उनकी मानसिक पृष्ठभूमि बिलकुल भिन्न थी ! हम प्रारम्भ में हमारी गुप्तचर व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ रहने के कारण हर बार इन हमलावरों को पराजित करने में सफल रहे !

परन्तु कालान्तर में हमारे समाज में मध्य काल में कई विकृतियाँ पनपती गयी हमारे भारत के ही कुछ कुटिल नीति नियंताओं की भूलों के कारण स्वरुप ! फलतः हमारा समाज कमजोर होने लग गया !और इस कमजोरी से ग्रसित सामाजिक परिस्थिति और हमारी पुरातन सांस्कृतिक मनोदशा के कारण हमारी उदारता ही हमारी कमजोरी बन गयी ! और हम इन हमलावरों की संकीर्ण कुटिल मनोभावों को न समझते हुए इन्हें जीवन दान देते चले गए ! और इसी का परिणाम हुआ कि हम गुलामी के गर्त में गिर गए ! बाद में इन परकीयों ने हमारी ताकत को समझने में देरी नहीं की और इन लोगों ने हमारे समाज की ताकत पर ही हमला बोलना प्रारम्भ कर दिया ताकि वो लम्बे समय तक इस देश पर शासन कर सकें ! अन्यथा स्वाभिमान से लबालब इस देश पर शासन करना संभव नहीं होता !


उन परकीयों की इन तमाम कुटिलताओं को आत्मसात कर चुकि है यह कौंग्रेस पार्टी ! अब हमें (जनता को) इनकी कुटिलताओं को समझने के लिए अपने पुरातन मानसिक ढर्रे से थोडा बाहर निकलने की आवश्यकता है ! हम अभी भी इन्हें राजा हरीश्चंद्र, शिवी, बलि, राम, कृष्ण, युद्धिष्ठिर, चन्द्रगुप्त, समुद्रगुप्त, कृष्णदेव राय, पृथ्वीराज चौहान सरीखे राजाओं की श्रेणी में रखकर ही सोच रहे हैं इनके बारे में ! परन्तु ये तो चोरों की परम्परा में दीक्षित, ठगी के सारे गुर जानने वाले, परकीयों का पुस्त्प्रेशन करने वाले, देश के दुश्मनों के हाथों में खेलने वाले, नरपिशाचों से भी घृणित निहायत गिरे हुए चरित्रहीन, देशद्रोही लूटेरे हैं ! मेरे भारतवंशियों इनके मानसिक धरातल को समझने में देरी न करो ! अन्यथा वर्तमान में तो खून के आंसू पी ही रहे हो भविष्य भी अच्छा नहीं बनेगा ! अगर अब भी न चेते तो अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या जबाब दोगे ? अगर तुम्हें अपने भारत से थोडा भी प्यार है तो इनका पूर्ण बहिष्कार करो ! यही एकमेव मार्ग है ! नान्यो पन्थाः ! दूसरा कोई रास्ता अब नहीं बचता है !

जो व्यक्ति भारत के सनातन शाश्वत मूल्यों की कदर नहीं करता वह इस देश का सच्चा सपूत हो ही नहीं सकता है ! वह परकीयों के पाले में चला गया धूर्त राष्ट्रद्रोही है ! उसे हमें शीघ्रातिशीघ्र पहचानने की आवश्यकता है ! हमारे सनातन सांकृतिक श्रद्धा के केंद्र हैं- हमारे माता-पिता (शास्त्र वर्णित अन्य सभी सम्बन्धी भी इसी श्रेणी में सम्मिलित ), गुरु (शिक्षक-प्रशिक्षक), मठ-मंदिर (भारत की धरती पर जन्में सभी मतों-पंथों के मंदिर और गुरूद्वारे इसी श्रेणी में सम्मिलित), गाय (गोवंशिये सभी पशु), गंगा (सभी पवित्र नद एवं नदियाँ, पवित्र सरोवर, झील, कुंड इत्यादी भी इसी श्रेणी में सम्मिलित), गीता (वेद एवं अन्य सभी सनातन एवं भारतीय मत-पंथों के शास्त्र भी इसी श्रेणी में सम्मिलित), पावन तीर्थस्थल, हमारे बृद्ध एवं महिलाएं और सबसे उपर देश का संत समाज !


जो भी व्यक्ति या समुदाय हमारे इन श्रद्धा के केन्द्रों पर आक्रमण करता है वह इस देश का सच्चा सपूत हो ही नहीं सकता ! वह निश्चित ही भेंड़ की खाल में छुपा हुआ कोई धोखेबाज भेड़िया है ! गोल-मोल बातें करने में सिद्धहस्त ये कांग्रेसी लोग इसी श्रेणी में सम्मिलित हैं ! अन्यथा बाबा रामदेव सरीखे संतों पर हमला करने की इनकी हिम्मत कैसे हुई ? अब यह प्रमाणित हो चूका है की ये राष्ट्रद्रोही हैं ! हमारी भूलों के कारण ये हमारे देश की सत्ता के शीर्ष तक पहुँच गए ! अब इस भूल का प्रायश्चित एक ही प्रकार से हो सकता है ! और वह है क्रांति ! तब तक इस क्रांति की मशाल जलार्ये रखना मेरे मित्रों जब तक कि दिल्ली के संसद भवन नाम का यह किला इन आततायियों के हाथ से खाली न करा लिया जाय !

याचना नहीं अब रन होगा ! संग्राम बड़ा भीषण होगा !!

3 टिप्‍पणियां:

drshyam ने कहा…

उस वैचारिक वृत्ति में तो शर्म होती ही नहीं....

blogtaknik ने कहा…

में अब एक शपथ ले चूका जब तक जीऊँगा न तो २३ मार्च १९३१ ओर ४ जून २०११ कभी नहीं भूलूंगा...न कभी इस वाहियात कांग्रेस नाम की नपुंसक सरकार को माफ़ करूँगा....

poonam singh ने कहा…

jai sri ram om shanti