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भारतीय मीडिया का दोगलापन



मित्रों अगर दो आदमी किसी कुत्ते को अपने पास बुलाने की कोशिश करे .एक आदमी के पास रोटी का एक टुकड़ा हो और दूसरे आदमी का हाथ खाली हो तो कुत्ता किस आदमी के पास जायेगा ?

जाहिर है कुत्ता हमेशा उसी आदमी के पास जाता है जो उसे रोटी का टुकड़ा लेकर बुलाए ..
...
ठीक यही उदाहरण भारतीय मीडिया पर लागू होती है . एक सर्वे में भारतीय मीडिया को पुरे विश्व में सबसे भ्रष्ट और लालची बताया गया है ..क्योंकि आज लगभग सभी भारतीय मीडिया एक कॉर्पोरेट हॉउस की तरह चल रही है और स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड हो चुकी है . तो जाहिर है उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाना हो गया है .. नैतिकता , सच्चाई ,
निरभिकता , और ‌प्रजाहित आज भारतीय मीडिया के लिए महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कैसे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जाये ये महत्वपूर्ण है चाहे इसके लिए पत्रकारिता के सारे सिद्धांत की क़ुरबानी ही क्यों न देनी पड़े .

मित्रों अभी ताजा उदाहरण बाबा रामदेव का है .. आज गली गली में बहुत से ऐसे खोजी पत्रकार पैदा हो गए है जिनसे तो विकिलिक्स के असंजे भी शर्मा जाये .. कोई बालकृष्ण के गांव पहुच जाता है कोई बाबा रामदेव की कंपनी खोज रहा है .. जबकि कुछ दिनों पहले तक इस देश की सारी मीडिया बाबा रामदेव के आगे पीछे घुमती रहती थी .. रामदेव को स्वामी रामदेव बनाने में इस देश की मीडिया का भी बहुत योगदान है ये बात खुद बाबा रामदेव ने कही है क्योंकि योग को घर घर पहुचने का काम मीडिया ने किया है .

लेकिन आज यही मीडिया बाबा के पीछे खोजी पत्रकारिता क्यों कर रही है ? क्योंकि सरकार ने १३०० करोड़ का बजट भारत निर्माण के विज्ञापन के लिए निर्धारित किया है पहली बात तो कांग्रेस बार बार नैतिकता की बात करती है तो क्या सरकारी पैसे से किसी राजनितिक पार्टी का प्रचार नहीं हो सकता ..मैंने प्रधानमंत्री कर्यालय को पत्र लिखकर इस बाबत पूछा तो वहा से जबाब मिला की ये सरकार और सरकार की योजनाओ का प्रचार है ना की किसी पार्टी का .मैंने फिर पूछा पूछा की अगर ये सरकार का प्रचार है तो इसमें सोनिया गाँधी को क्यों दिखाया जाता है ? सोनिया गाँधी किस संवैधानिक पद पर है ?? तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने मेरे बार बार रीमाईनडर भेजने के बावजूद चुप्पी साध ली है ..

सरकार की ओर से सारे मीडिया को चेतावनी दे दी गई है की वो अब रामलीला मैदान की हैवातियत की फुटेज को ना दिखाए और अन्ना और बाबा रामदेव के बारे में नकारात्मक छबी ही दिखाए , नहीं तो उन्हें अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा . और करोडो रूपये के सरकारी विज्ञापन से भी हाथ धोना पड़ेगा .. एक बात मै और बता दूँ की इस देश के सभी मीडिया हाउसों ने विदेशी निवेश के नियमों की और शेयर ट्रान्सफर के नियमों की खुल कर धज्जिय उड़ाई है इसलिए सरकार के हुकम को हर एक मिडिया घराने को मानना जरुरी हो जाता है क्योंकि जो खुद दागदार हो वो दूसरे की कमियां नहीं बता सकता ..
चलते चलते अब  मित्रो द्वारा सुनाई गयी खबर भी निचे लिख रहा  हूँ 
दिग्विजय के बयानों से प्रभावित हो कर भारत सरकार का ऐलान,अब दिग्विजय के जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मुर्खता दिवस मनाया जायेगा.
अन्ना हजारे की दिग्विजय को पुणे के पागलखाने में दाखिले की नसीहत के बाद, पागलखाने के पागल अनशन पर बैठ गए.. ज्ञात हो की इससे पहले गधे भी इसी बात को लेकर अनशन पर बैठे थे..
 

14 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

मूर्ख दिवस की दिनांक बता देना।

blogtaknik ने कहा…

बहुत जल्दी सरकारी विज्ञापनों के द्वारा पता चल जायेगा ..

हरीश सिंह ने कहा…

महोदय आपकी बात सही है पर यह सभी पर लागू नहीं होती, आज सभी अख़बार व चैनल कार्पोरेट घराने के हैं, जो स्वच्छ पत्रकारिता के लिए अख़बार निकलना चाहेंगे वे सफल नहीं होंगे. क्योंकि उनका समर्थन आप भी नहीं करेंगे. यदि आप किसी को नौकर रखेंगे तो चाहेंगे की वह आपके कथनानुसार कार्य करे. यदि एक नहीं करेगा तो दूसरा भी आ जायेगा. यही हालत पत्रकारों के भी हैं. आप मालिको को दोष दे सकते हैं पर पत्रकारों को नहीं. उन्हें भी अपने परिवार को चलाना है. इसलिए नौकरी जरुरी है. आज भी बहुत से पत्रकार ऐसे हैं जो सिद्धांतो से समझौता नहीं करते. और उन्हें निकाल दिया जाता है या परेशान करके भागने को विवश कर दिया जाता है. मैं खुद भुक्तभोगी हूँ एक भ्रष्ट विज्ञापन दाता के खिलाफ खबर छापा तो शिकायत हुयी, जब उसके पक्ष में लिखने को कहा गया तो इस्तीफ़ा दे दिया. और वह NO .१ कहे जाने अख़बार से. ऐसा नहीं है की सब गलत है पर सभी के ऊपर अंगुली उठाकर हम उनका भी अपमान करते हैं जो ईमानदारी से अपना काम करते हैं. इसमें गलती पत्रकारों की नहीं. मालिको की है जिन्हें टी आर पी चाहिए ताकि विज्ञापन मिल सके.

हरीश सिंह ने कहा…

दिग्विजय के लिए सही कहा आपने. इसे तो इस्लाम कबूल कर लेना चाहिए. यह जयचंद और मानसिंह जैसे लोंगो की औलाद है.

drshyam ने कहा…

सही कहा हरीश जी पर यह भी उसी तरह है जैसे कुछ लोग तो राजनीति, व्यापार ,नेतागीरी, बाबागीरी आदि में भी ईमानदार हैं .....

सुनील दत्त ने कहा…

100% सत्य कहा आपने।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

१३०० करोड़ रुपये! इतनी बड़ी राशि, कुछ दवाखाने और स्कूल ही बना दिये जाते.

Er. Diwas Dinesh Gaur ने कहा…

वाह शानदार...सही कहा आपने मीडिया और कुत्तों में कोई अंतर नहीं है...
दिग्विजय पर की गयी टिप्पणी सटीक लगी...

अमीत तोमर ने कहा…

ये दिग्विजय नाम का प्राणी किसी अजीब नसल का जिव हे हे जिसे जितना जल्दी हो सके किसी चिड़िया घर के पिंजरें में डाल्देना चाहिए जरा इससे भी पढ़ें एक बार इसे जरुर पढ़े कॉग्रेस के चार चतुरो की पांच नादानियां | http://www.bharatyogi.net/2011/06/blog-post_15.html

किलर झपाटा ने कहा…

सारी बातें एकदम करेक्ट करेक्ट कही आपने। हा हा।

सुज्ञ ने कहा…

और सबसे बडी बात तो सरकार को अपनी जन-कल्याण की योजनाओं के प्रचार की क्या आवश्यकता? यह अनावश्यक खर्चे के धन को भी जन-कल्याण में लगाना चाहिए।

satpanthi ने कहा…

सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी अपने लाव लश्कर के साथ 8 जून से 15 जून तक स्विट्जरलैंड में थे .. फिर 19 जून को स्विस सरकार का बयान आता है की अब भारत को हम सारे खातेदारों की सूची और रकम का ब्यौरा देने को तैयार है ...

क्या सोनिया की स्विस यात्रा और उसके ३ दिन के बाद स्विस सरकार की इस घोषणा में कोई राज है ??

इसके पहले स्विस सरकार ने क्यों इंकार किया ?

Jai Hindu ने कहा…

is liye to digvijay ka naam digvijay nahi 'PIGVIJAY' hona chayie.

Jai Hindu ने कहा…

ॐ जी समस्त राष्ट्रनिष्ट बंधु, बांधवगण
*कॉग्रेस के चार चतुरो की पांच नादानियां |
*१. यदि मांगे मान ली थी तो बाबा जी को पत्र (४जून रात १० बजे) देने के बाद
सुबह तक जवाब का इंतज़ार क्यों नहीं किया | यदि ऐसा हो जाता तो आन्दोलन समाप्त
कराने का पूरा श्रेय कांग्रेस को मिलना था |
२. ४ जून की घटना का समर्थन कर इन चतुरो के कारण काग्रेस ने अपनी छवि दमनकारी,
भ्रष्टाचार समर्थक, आपातकाल समर्थक, हठधर्मी राष्ट्रीय दल के रूप मे बना ली है
| तथा देश के राजनैतिक परिद्रश्य मे अलग थलग नजर आ रही है |
३. भ्रष्टाचार पर तुरंत कार्यवाही नहीं करने से आम जनता को यह विशवास हो गया
है कि विदेशो मे जमा काला धन ठिकाने लगाने की प्रक्रिया जारी है और सारा पैसा
ठिकाने लगा देने के बाद बयान जारी होगा कि बाबा जी जितना काला धन बता रहे थे
उतना तो था ही नहीं ?
४. आन्दोलन के दौरान आचार्य बालकृष्ण को विदेशी सिद्ध करने की कोशिश मे वो ये
भूल गए कि उनकी मालकिन का जन्म विदेश मे हुआ है और आज तक बच्चो के पास दोहरी
नागरिकता है |
याद रहे "जिनके घर शीशे के होते है उन्हें दूसरो पर पत्थर नहीं फेकना चाहिए" |
5. आन्दोलन का कोई हल न निकलकर, काग्रेस के इन चतुरो ने भ्रष्टाचार और काले धन
की वापसी के मुद्दे को सभी आध्यात्मिक संतो, राष्ट्रवादी सामजिक संगठनो का
राष्ट्रीय संकल्प बनने दिया |
अब तो इन चतुर नादानों का भगवान् ही मालिक है |
ये उन लोगों के मुह पर एक करार तमाचा हे जो बाबा रामदेवजी और दुसरे देश भगतों के बारे में गलत बयान देते हें जेसे मिडिया जो पैसा खाकर जो मन में आया भोक दिया , कांग्रेसी नेता दिग्विजय जो मुह खोलता हे और कीचड़ फेकता हे, कांग्रेस को पहले अपने घर के अन्दर झाकना चाहिए जो दुनिया भर की गंदगियों से भरा पड़ा हे अगर कोई देश द्रोही इस लेख को पढ़ रहा हे तो वो अपना सिर खुजाएगा और पागल कुत्ते की तरहां कम्पुटर के आगे बेठ कर भोकेगा