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क्या कोंग्रेश,अन्ना हजारे तथा मीडिया का गठजोड़ हे !


जब से बाबा रामदेव ने भ्रस्टाचार, देश तथा विदेश के काले धन को रास्ट्रीय सम्पति घोषित कर सारा धन देश को वापस दिलाने, भ्रस्टा चारिओं को कठोर सजा दिलाने का अभियान छेड़ा हे, कोंग्रेश पार्टी सबसे ज्यादा परेशानी में हे,जनहित के लगभग सभी क्षेत्रों में बुरी तरह से नाकाम से जन विरोधी छवि , तथा लगातार सामने आ रहे घोटालो से, तथा घोटाले बाजो को बचाने कि हर संभव कोशिस करने के कारण देश में भ्रस्टाचार समर्थक छवि बनने से तिलमिलाई हुयी हे, सबसे ज्यादा परेशानी तो इन सबके कारण अपनी पूजनीय महारानी,तथा सभी तरह के प्रेरणा दाता युवराज की मलिन होती छवि के कारण हो रही हे, क्योंकि यह तो सारा देश जनता हे, की उनकी पार्टी में इनकी सहमती,जानकारी और आदेश के बिना कुछ होता नहीं हे.
बाबा रामदेव के आन्दोलन के कारण जब ये मुद्दे देश व्यापी हो गए तो जरुरत थी किसी ऐसे व्यक्ति की जो अपना कोई ऐसा आन्दोलन चलाये जिससे बाबा रामदेव के आन्दोलन को कमजोर किया जा सके तथा जनता का ध्यान जो सीधे सीधे भ्रस्टाचार व् काले धन के मुद्दे पर केन्द्रित हो गया उससे से हटाया जा सके.
हालाँकि पक्के तोर पर तो नहीं कहा जा सकता पर कुछ घटनाओ तथा कारणों से ऐसी आशंका होती हे की अन्ना हजारे का आन्दोलन कोंग्रेश की बनायीं रणनीति का परिणाम हे, ताकि जनता का ध्यान बटाया जा सके.चूँकि बाबा रामदेव का आन्दोलन भाजपा के ज्यादा अनुकूल होता हे, अतः यह धारणा तो बनी हुयी थी की इस आन्दोलन को भाजपा का समर्थन हे. इसलिए बाबाजी के आन्दोलन को कमजोर करने के लिए अन्ना का जन लोकपाल रूपी एक सूत्रीय आन्दोलन सुरु कराया गया जिसमे मीडिया को भी सक्रीय रूप से भागीदार बनाया गया जोकि जाहिर रूप से कोंग्रेश की तरफ पक्षपाती हे,
अन्ना हजारे का आन्दोलन उनके, कोंग्रेश तथा मीडिया का गठजोड़ हे इसकी आसंका क्यों हे यह शंका मन में क्यों होती हे i कुछ घटनाये इसका इशारा करती हे, अन्ना ने चार अप्रैल को जो पहला अनसन सुरु किया था,उसके कुछ दिन पहले दिल्ली में बाबा रामदेव की जबरदस्त भ्रस्टाचार विरोधी रैली हुयी थी, जिसमे अन्ना समेत अनेक लोग समिलित हुए थे, समाचार चेनलो का पक्षपाती रवैया तभी सामने आ गया जब दिन भर चले इस कार्यक्रम का किसी भी समाचार चेनल पर जिक्र तक नहीं था, जबकि वहां पर लगभग सारा मीडिया मोजूद था, कुछ समाचार पत्रों ने किसी कोने में छापा होगा, क्योंकि बाबा रामदेव का आन्दोलन केवल भविष्य में होने वाले भ्रस्टाचार को रोकने मात्र के लिए नहीं था, बल्कि अब तक जिन लोगो ने देश की सम्पदा को लुटा देश का धन विदेशो में भेजा उनको भी पकड़ना तथा विदेशो से देश का धन वापस लाना जेसे व्यापक स्तर का था, क्योंकि इस अभियान की सफलता से ज्यादातर कान्ग्रेशियो की पोल खुलने का डर था इसलिए मीडिया ने इस आन्दोलन का प्रसारण ही नहीं किया, इसके विपरीत अन्ना के आन्दोलन को जो मात्र लोकपाल बिल तक के छोटे मकसद तक सिमित था, जो केवल भविष्य में होने वाले भ्रस्टाचार को रोकने मात्र के उद्देश्य के लिए था, समाचार चेनलों ने चार- पाँच दिनों तक दिन भर सीधा प्रसारण किया, कई तरह की चर्चाएँ आयोजित की, जबकि वहां केवल स्थानीय लोगो की भीड़ थी, परन्तु बाबा रामदेव के प्रोग्राम में देश भर से आई अन्ना के प्रोग्राम से कई गुना ज्यादा भीड़ थी. मीडिया ने अन्ना के आन्दोलन को देश व्यापी बनाया जबकि बाबा रामदेव के बहु उपयोगी, देश हित के महान आन्दोलन को छोटा और महत्वहीन करने का प्रयास किया,
यहाँ यह तो साबित होता हे की देश का ज्यादातर मीडिया स्वार्थी व कोंग्रेश का पक्षपाती हे, पर यंहा अन्ना के तरीके पर भी शंका होती हे, क्यों वो केवल लोकपाल की एक सूत्रीय मांग के लिए आन्दोलन कर रहे हे, वो क्यों नहीं चाहते की विदेशो में जमा देश का लुटा धन देश को वापस मिले,देश का धन लुटने वालों का नाम जनता जाने तथा ऐसे भ्र्स्ताचारियो को कठोर सजा मिले, शायद सिर्फ इसलिए की वो और उनके साथी यह अच्छी तरह से जानते हे की ऐसा आन्दोलन करने से सबसे ज्यादा फजीयत कोंग्रेश की होगी, देश हित से ज्यादा कोंग्रेश हित उनकी सोच में हे, तभी तो शायद बाबा रामदेव के आन्दोलन से जनता का ध्यान भटकने के लिए कोंग्रेश ने मीडिया के सहयोग से अन्ना के आन्दोलन को जबरदस्त प्रचारित कराया.
बाबा रामदेव ने अपने आन्दोलन में अन्ना को बुलाया पर अन्ना ने बाबा को नहीं, फिर भी बाबा रामदेव अपनी तरफ से समर्थन देने अन्ना के मंच पर गए तथा अपना व्यतव्य दिया पर अन्ना ने अपने अनसन समापन के बाद समर्थन करने वालो को धन्यवाद दिया उनको भी जो मंच पर नहीं आकर केवल समर्थन का सन्देश भिजवाया था, पर बाबा रामदेव को नहीं, यह अन्ना का अहंकार था या कोंग्रेश पार्टी का निर्देश पालन वो ही जाने, हाँ मीडिया को बाबा रामदेव की आलोचना का एक मुद्दा जरुर मिल गया जिसे उन्होंने हिंदुवादियो के लिए अपने चिरपरिचित घटिया अंदाज में भुनाया जेसे की बाबा के मंच पर नाचने के बावजूद भी अन्ना ने उन्हें समर्थन का धन्यवाद नहीं दिया, जिससे बाबा की इज्जत को मिटटी में मिलाया, हाँ सोनिया गाँधी का अन्ना हजारे को समर्थन के दिखावटी व्यक्तव्य का अन्ना ने बड़ा सा आभार माना और धन्यवाद दिया, यह किस तरफ झुकाव का संकेत हे.
अन्ना बार बार कहते हे, की वो सच बोलने से किसी से डरते नहीं हे, फिर क्यों नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के अभूतपूर्व विकास की सच्ची तारीफ करने के बाद हिन्दू विरोधी मानसिकता वालो तथा कोंग्रेश की आलोचना से डर कर अपने व्यतव्य पर कायरता पूर्ण सफाई देने लगे, क्यों निडरता से अपनी बात पर अडिग नहीं रहे की नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में जो विकाश किया हे वो वर्तमान की सचाई हे, बल्कि अपने को खोखले धर्मनिरपेक्षता की चादर में लपटने मोदी की आलोचना करने गुजरात चले गए, जहाँ उन्हें भ्रस्टाचार नजर आने लगा, इसकी भी जाँच की जरुरत हे की अन्ना को कोंग्रेश शासित तथा अन्य राज्यों जैसे महारास्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली,हरियाणा या यु, पी. में कहीं भ्रस्टाचार नहीं दिखा, क्या वो सच बोल रहे थे, या सोनिया को खुस करने कोंग्रेश की भाषा बोल रहे थे, शायद इसके बाद से ही कोंग्रेश ने अन्ना से दुरी बनाना सुरु किया और उनके ऊपर वास्तविक हमले सुरु किये, जो पहले जनता को भ्रम में रखने अन्ना के साथियों पर दिखावटी हमले कर रही थी.
यह भी विचारणीय विषय हे की अन्ना बार बार स्कूली बच्चों की तरह सोनिया गाँधी को शिकायत क्यों करते हे की कोंग्रेश वाले उन्हें भाजपा या संघ का मुखोटा बता कर आलोचना करते हे. अति ज्ञानी अन्ना की टीम यह तो जरुर ही समझती हे की कोंग्रेश में बिना सोनिया की सहमती व् आदेश के किसी की ओकात नहीं हे की कुछ भी बोले, फिर भी सोनिया से शिकायत, क्या यह जाहिर नहीं करता की अन्ना नोटंकी कर रहे हे. फिर अन्ना को भाजपा या संघ से परहेज क्यों हे, देश की कुल आबादी के करोड़ों लोग जो भाजपा को वोट देते हे, जो संघ से जुड़ा हे क्या वो भारतीय नहीं हे, क्या अन्ना देश की उस जनता का अपमान नहीं कर रहे हे जहाँ भाजपा की या उनके सहयोगिओं की सरकारे हे, जिसमे देश का विकसित राज्य गुजरात भी हे जिसका नेतृत्व देश के सर्व श्रेष्ठ घोषित मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे हे, भाजपा से दुरी का स्वांग करके लोकपाल के लिए आन्दोलन करना जाहिर करता हे की अन्ना की नियत सही नहीं हे, या अहंकारी प्रवृति हे,हो सकता हे उनका मूल मकसद बाबा के आन्दोलन से जनता का ध्यान हटाना हे, जो भाजपा के अनुकूल तथा कोंग्रेश के लिए उनके उजले चेहरों के पीछे की काली सचाई को सामने लाने वाला बन जाये.
अन्ना व उनकी टीम के लोग कहते हे कि पहले तो कोंग्रेसिओ को प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने में कोई आपति नहीं थी, अब पता नहीं क्यों मना कर रहे हे, या मनमोहन सिंघजी को लोकपाल के दायरे में आने में क्या डर हे,. पता नहीं जब भी सोनिया या राहुल गाँधी कि बात आती हे अन्ना के साथियो व मीडिया वालों कि अक्ल कंहा घास चरने चली जाती हे, जो यह नहीं समझ पाते कि पहले जब कोंग्रेशियो ने पी. एम. को लोकपाल के दायरे में लाने कि बात कही थी तब उनके दिमाक में मनमोहन सिंह जी थे , वो लोकपाल के सिकंजे में आये या नहीं उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता पर जब उनको यह याद आया कि मनमोहन सिंघजी तो कितने दिन पी एम रहेंगे उनका असली मकसद तो राहुल गाँधी को पी.एम. बनना हे, अब भला किस कोंग्रेशी में हिम्मत हे, कि वो कहे कि राहुल गाँधी को भी लोकपाल के दायरे में आना चाहिए. कोनसा कोंग्रेशी यह चाहेगा कि उनके पूर्व ह्रदय सम्राट राजीव गाँधी कि तरह का ही वर्त्तमान ह्रदय सम्राट राहुल गाँधी का भी हश्र हो, देश भर में बदनाम करने वाले भ्रस्टाचार के आरोपों कि जाँच का सामना करना पड़े, जो आरोप निश्चित रूप से लगेंगे ही. अब तो मीडिया ने भी राहुल गाँधी को पी. एम. बनाने का माहोल बनाने वाले, उनकी बिरुदावली गाने के, उनके गुणगान करने वाले प्रोग्राम बनाने शुरू कर दिए हे,मीडिया का यह करना समझ में आता हे क्योकि भारत निर्माण विज्ञापन का सरकारी बजट शायद १४०० करोड़ का हे इसका हिस्सा पाने के लिए लालची मीडिया देश हित और निष्पक्षता तो आसानी से छोड़ सकता हे, पर अगर अन्ना के साथियो को यह नहीं समझ में आये तो यही तो माना जायेगा ना कि वो राहुल गाँधी कि छवि जनता में ख़राब ना हो इसके लिए जनता कि नजर में असली बात लाना नहीं चाहते , वो यह नहीं कहते कि कोंग्रेश का मकसद मनमोहन जी को बचाना नहीं राहुल गाँधी को बचाना हे,
अन्ना कि टीम में स्वामी अग्निवेश का होना भी यह दर्शाता हे कि वो कोंग्रेश के पक्ष में हे, सब जानते हे अग्निवेश मुस्लिम परस्त मानसिकता के हे, हिंदूवादी संगठनो को गाली देना उनकी फितरत हे, अमरनाथ यात्रा को गलत पर कश्मीर के अलगाव वादी देश तोड़ने कि भावना रखने वाले नेताओं से गले मिलना सही मानते हे, नक्शली आतंकियो के खास हिमायती हे, आतंकी के मरने पर पुलिश को जी भर कर गालियाँ देते हे, पर सामूहिक नरसंहार में पचासों पुलिश के जवान मरे तो सुतुरमुर्ग कि तरह रेत में मुंह छुपाये पड़े रहते हे, अन्ना कि टीम का सहयोग कम, कोंग्रेस के भेदिये का रोल ज्यादा निभा रहे हे. यह भी इस बात का संकेत हे कि अन्ना का आन्दोलन का मकसद वो नहीं हे जो जनता को बताया जा रहा हे.
पहले तो अन्ना और कोंग्रेश द्वारा एक दुसरे कि आलोचना दिखावटी लगती थी, पर जबसे कोंग्रेश ने बाबा रामदेव के आन्दोलन को दमन पूर्वक कुचला हे, लगता हे कोंग्रेश अन्ना को भी निपटा देना चाहती हे, ताकि भविष्य में उनका भ्रस्टाचार बिना रूकावट चलता रहे, अन्ना कि भी प्रतिस्ठा दांव पर लग गयी हे, अगर अन्ना ने वास्तव में ही देश हित के लिए आन्दोलन शुरू किया था तो अपना अहंकार छोड़ कर, ढोंगी धर्मनिरपेक्षता को भूल रामदेव जी के साथ मिल कर अपना आन्दोलन चलाना चाहिए, स्वामी अग्निवेश तथा धर्मनिरपेक्षता के नाम पर साम्प्रदायिकता का जहर घोलने वालो से छुटकारा पाना चाहिए, भाजपा हो या संघ पुरे देश को अपना परिवार मान सबका सहयोग लेकर देश हित में अपना आन्दोलन चलाना चाहिए ,तभी वो पुरे देश का आदर पा सकेंगे मीडिया द्वारा प्रायोजित बढा चढ़ा कर दिखाया जाने वाला आदर देश कि सच्चाई नहीं हे, मीडिया तो कोंग्रेश का इशारा मिलते ही वेसी ही घटिया तरह कि आलोचना करने लगेगा जैसी आजकल बाबा रामदेव कि करने लगा हे.
इसमें एक संभावना यह भी हो सकती हे कि देश को धोका देने में माहिर हो चुकी कोंग्रेश ने बाबा रामदेव के आन्दोलन को कमजोर करने अन्ना के आन्दोलन को बढ़ावा दिया, फिर बाबा रामदेव को धोका देकर उनके आन्दोलन को दमन पूर्वक कुचल कर अपना मतलब निकाल जाने के बाद अन्ना को भी धोका दे रही हे, तभी तो पहले सारी बाते मान कर अब कुटिलता से लगभग सभी मंत्री अन्ना से कि सभी बातों से मुकरने लगें हे, हर बात में रोड़े लगा रहे हे, कभी लोकपाल बिल के दो मसोदे बना कर मंत्री परिसद को भेजने कि बात कभी सर्वदलीय बैठक में विचार, के बहाने बिल को टालना चाहती हे, जबकि सभी जानते हे, मंत्री परिषद् कोंग्रेशियो के मसोदे को ही मानेगी, और जब कोंग्रेश संख्या बल से पी.ए.सी. के रिपोर्ट को समाप्त करवा सकती हे, तो अपनी मनपसंद लोकपाल बिल के मसोदे को लागु क्यों नहीं करवा सकती,
कोंग्रेश का एकमात्र मकसद राहुल गाँधी तथा अपनी पार्टी के सांसदों को भ्रस्टाचार के आरोप होने पर भी किसी भी कार्यवाही से बचाना तथा देश का धन लुटते रहना हे, अन्ना अगर ईमानदारी से यह काम कर रहे हे तो बाबा रामदेव के साथ मिलकर यह आन्दोलन चलाना चाहिए तथा देश हित के लिए किसी का भी समर्थन निडरता से लेना चाहिए, फिर चाहे कोई कितनी हीआलोचना करे की वो भाजपा या संघ का मुखोटा हे. 

4 टिप्‍पणियां:

ROHIT ने कहा…

मै तो अन्ना हजारे की नियत बहुत पहले ही समझ चुका था.
कांग्रेस ने अपने एजेँट अग्निवेश के माध्यम से अन्ना पार्टी को खड़ा किया .
ताकि बाबा रामदेव को फेल किया जा सके.
अस्थिर मनोव्रति वाला अन्ना भी नही समझ पाया कि उनके साथ बैठने वाला साँप अग्निवेश कांग्रेस का जासूस है. जिसको फूट डालने के लिये कांग्रेस ने भेजा है.
वाकई कांग्रेस के कमीनेपन की दाद देनी पड़ेगी.
मुझे नफरत है ऐसे चिरकुट अन्ना से.
जिसको अपनी कोई अक्ल ही नही है.

बाबा रामदेव ने भी एक गलती की . जो पिछले दो साल से अपने शिविरो मे अन्ना पार्टी को ले जा जाकर जनता से रुबरु करवाते रहे.
और एक मंच प्रदान किया.

blogtaknik ने कहा…

राहूल गाँधी राजीव गाँधी ट्रस्ट और पार्टी के खातों का खुलासा करे!!

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

अब भला किस कोंग्रेशी में हिम्मत हे, कि वो कहे कि राहुल गाँधी को भी लोकपाल के दायरे में आना चाहिए...
--एक दम सटीक व्याख्या की है...घटनाक्रम से तो ऐसा ही लगता है...अन्ना के साथ भी सारे नौकरशाह , वकील व चालाक व अमीर लोग आदि ही हैं ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

baba ko aur josh se lagna chahiye. ye samay aur josh se jutne ka hai.