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प्रश्न और उत्तर....ड़ा श्याम गुप्त...

उछाले गए प्रश्न,
'अनुशासन हीन क्यों है आज की पीढ़ी?'
'क्यों है द्वंद्व, अंतर्द्वंद्व,दूरियां -
बच्चों व माता पिता के मध्य ?'

चुनते रहे पत्तियाँ, उत्तरों की--
बच्चों पर बड़े दबाव हैं,
पढाई के , ट्यूशन के,
माँ-बाप की आकांक्षाओं के |

बच्चों से बहुत कुछ सीख सकते हैं ,
माँ-बाप-
बच्चों को गुरु मान कर

बच्चोंको सिर्फ पैसे-सुविधा नहीं,
अपना समय भी दें ,
मित्र बनें ,
उनकी पूरी बात सुनें |

बच्चे भी माँ-बाप की बजाय ,
अपनी ही तानते हैं ;
दोस्तों व टीचर की अधिक मानते हैं ,
टीवी, सिनेमा, इंटरनेट को अधिक पहचानते हैं |

कौन जा पाया जड़ में ---
आरहा है देश में (अवांछित ) धन,
(बहुत कुछ हमारा अपना ही-
जो जमा किया हुआ है देश के -
जमाखोरों ने ,चोरों, भ्रष्टाचारियों ने )
योरोप अमेरिका के --
जुआ घरों से,
चकलाघरों से,
नंगे नाच के क्लबों से,
आतंकवाद व निरीहों पर अत्याचार व-
शस्त्रों की होड़ के पोषण के लिए,
हथियारों की बिक्री की ,
कमाई से |

कभी विकास के नाम पर सहायता,क़र्ज़ व-
एन जी ओ प्रोजेक्ट -या-
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बिकास में लिप्त--हमें ,
मोटी-मोटी आमदनी, पे व पर्क्स ,
के रूप में |
" जैसा खायें अन्न वैसा होगा मन ".....

4 टिप्‍पणियां:

आशुतोष की कलम ने कहा…

जैसा खायें अन्न वैसा होगा मन.
सत्य वचन ..हमारे बदलते परिवेश का असर तो पद ही रहा है..
आधुनिकता की अन्ध्दौड़ में मूल से कटते जा रहें हैं हम

गंगाधर ने कहा…

बच्चोंको सिर्फ पैसे-सुविधा नहीं,
अपना समय भी दें ,
मित्र बनें ,
उनकी पूरी बात सुनें |
सच कहा आपने, भाग दौड़ की जिन्दगी में हम अपने बच्चो से दूर होते जा रहे हैं.

rubi sinha ने कहा…

सत्य वचन ..हमारे बदलते परिवेश का असर तो पद ही रहा है..

drshyam ने कहा…

dhanyavaad , रूबी जी, गंगाधर और आशुतोष...
---परिवेश ..सांस्कृतिक जड़ों पर भी घातक प्रभाव डालता है...