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खबरनवीस मर गया क्या ???????? या बिक गया ??????????

                                      आज  सुबह डा.सुब्रमण्यम  स्वामी  ने  देहरादून में ये आरोप लगाया की इधर देश में कोहराम  मचा है और राजमाता सोनिया जी और युवराज पिछले चार दिन से switzerland में बैठे हैं ........अब पिछले कुछ सालों में सुब्रमण्यम स्वामी ने देश विदेश में ये image बनायी है की वो अनर्गल प्रलाप नहीं करते हैं ....जो बोलते हैं सोच समझ कर बोलते हैं ........नाप तोल कर बोलते है .......कुछ भी बोलने से पहले पूरी research करते हैं ........पिछले कुछ सालों में उन्होंने बहुत बड़े बड़े ....विशालकाय   घोटाले खोजे हैं ....उनपे बड़ी व्यापक खोजबीन की है ......अब इतनी बड़ी बात कह दी उन्होंने आज सुबह .........आरोप लगाया की दोनों माँ बेटा switzerland गए हैं अपने खातों की देखरेख करने .........पूरे देश में आम आदमी ये बात खुल कर कहता है और मानता है  की प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह जी व्यक्तिगत रूप से बेहद इमानदार होते हुए भी भ्रष्टाचार एवं काले धन पर कोई प्रभावी कदम इसलिए नहीं उठा पा रहे क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता गण......( गाँधी परिवार समेतकी गर्दन सबसे पहले नप जाएगी ........अब ऐसे माहौल में आज कोढ़ में खाज हो गयी  ....कमबख्त ..........मुए स्वामी ने इतनी बड़ी बात कह दी किसी एक चैनल पर ............अब हमारे जैसे लोग चिपक गए भैया टीवी से ...वैसे भी हम लोग चिपके ही रहते हैं ........पर वाह ....क्या बात है .......किसी भी माई के लाल हमारे न्यूज़ चैनल ने  उस बयान को दुबारा नहीं दिखाया ....खोज बीन करना....बाल की खाल निकालना तो दूर की बात है ........सारा दिन टीवी पर surfing करने के बाद ( हांलाकि न्यूज़ तो अब भी चल रही है ) शाम को हमने इन्टरनेट पर गोते लगाए ........सारी न्यूज़ खोज मारी ..........कहीं तो कुछ निकलेगा .......कहीं तो कोई चर्चा होगी ...किसी ने डॉ स्वामी को quote ही किया होगा ...कहीं से कोई खंडन ही आया होगा ..........अब हम क्या जानें दिल्ली में कौन क्या कर रहा है ....पर दिल्ली वाले तो जानते हैं की कहाँ हैं सोनिया जी ....कहाँ हैं अपने राहुल बाबा .....और इन  मीडिया वालों के लिए तो ये एक मिनट का काम है .....एक फोन मारा और ये लो .....हो गयी पुष्टि ....या ये रहा खंडन ..........पर कुछ नहीं ....शांति ...एकदम मरघट वाली शांति है आज ........ पुष्टि.... खंडन ............
                                                  पर दोस्तों .....मरघट की ये शांति .......चीख चीख कर कुछ कह रही है ..............ध्यान से सुनिए .....दूर वहां कोई रो रहा है .........किसी की मौत पर .....पर मुझे सचमुच  विश्वास नहीं होता की वो मर गया ..........इतनी आसानी से मरने वाला वो था तो नहीं ....बड़ी सख्त जान था कमबख्त .......क्या वाकई मर गया ...खबरनवीस ............ कोई आवाज़ हलचल ........माजरा क्या है .....
                                             आज सुबह एक लेख लिखा मैंने की कैसे सरकार हमारे मूल अधिकारों को कुचल रही है .....इसके अलावा मैं लिखता रहा हूँ की कैसे न्यूज़ मर रही है ............पिछले दस दिनों से मैं महसूस कर रहा हूँ की news channels पर सरकारी विज्ञापनों की बाढ़ सी गयी है .........अब ये कोई खोजी पत्रकार या संस्था ही  आंकड़े खोजेगी की किस महीने में कब कितने सरकारी विज्ञापन आये news channels पर, और  अखबारों में ........... .....सच्चाई सामने आनी ही चाहिए ...........और जैसे ही इन्हें सरकारी विज्ञापन मिले इनकी तोपों का मुह सिविल सोसाइटी की तरफ मुड़ गया ..........ये लगे  जन आन्दोलन को बदनाम करने ....सरकार और पार्टी का गुणगान करने और भ्रम फैलाने ..............जो मीडिया एक एक byte के लिए मारा मारा फिरता है ....आज डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के इतने सनसनीखेज बयान के बाद भी चुप है ....मरघट सी शांति है .......पुष्टि नहीं तो खंडन तो आना चाहिए ........सरकार की तरफ से सही पार्टी की तरफ से ही सही .......अगर सोनिया जी और राहुल जी देश में हैं तो बताया जाए और डॉ स्वामी से कहा जाए की प्रलाप बंद करो ......और अगर कहीं बाहर हैं तो ये भी बताया जाए की कहाँ हैं .......... चुप्पी साध के देश का मीडिया गाँधी परिवार को बचा रहा है क्या ??????? या ये मुद्दा...ये प्रश्न ....सचमुच इतना छोटा ...इतना घटिया है की इसपे टिप्पणी करना नहीं चाहता ............पर ये बहुत कडवी सच्चाई है की आज अधिकाँश लोग  ...चाहे वो कांग्रेस समर्थक लोग ही क्यों हों........ ये मानते हैं की गांधी परिवार के खाते हैं...... विदेशी banks में .......अब इसका जवाब या तो हाँ में हो सकता है या ना में ........चुप रहना  कोई जवाब नहीं है ....और चुप रहे तो गाँधी परिवार रहे ....मीडिया क्यों चुप है  ???????? कुत्ते का काम है भोंकना ........यहाँ कुत्ते  को एक गाली के रूप में ले कर एक रक्षक के रूप में लिया जाए please ........कुत्ते का काम है भोंकना और गुर्राना  ....ज़रा सी आहट  पर भी भोंकना  ..........क्यों चुप है आज ...आहट सुनाई नहीं दी ........या हड्डी चूसने  में इतना मगन है .......देखो कहीं मर तो नहीं गया ........खबरनवीस बिक गया क्या  ???????? लोकतंत्र का चौथा खम्बा भी टूट रहा है क्या ????????








11 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

आपने सही कहा, अब तो इस मीडीया पर भी भरोसा नहीं है।
बिक चुकी है, बेकार हो चुकी है, अब तो किसी जलजले का इंतजार है।
अब ये देश जुगाड पर भी नहीं चल रहा है।

Abhishek ने कहा…

क्या सही लेख लिखा है. कहते है देश चलने के लिए 4 स्तम्भ होते है. जिसमे मिडिया भी बोहोत जरुरी है आज हिंदुस्तान का मिडिया तो दलालों के हाँथ में चला गया है.

हरीश सिंह ने कहा…

संदीप जी व अभिषेक जी, यहाँ पर मैं पूर्ण रूप से आपसे सहमत नहीं हूँ. मैं मानता हू मीडिया अपनी भूमिका सही रूप से नहीं निभा रही है, पर यह बात हर जगह लागू नहीं होती, मीडिया की देन है की आज बड़े-बड़े घोटालो का पर्दाफाश हुआ है और लोग जेल की हवा भी खा रहे हैं. पर मीडिया के लोग भी इसी समाज के हैं. सिर्फ जनसेवा से ही किसी काम नहीं चलता, वे लोग भी किसी की नौकरी कर रहे हैं. मेरा खुद का अनुभव है, हम चाहते हुए भी कभी-कभी वह नहीं कर पाते जो हम करना चाहते हैं क्योंकि आज हर चैनल और समाचार पत्र किसी न किसी पूजीपति का है. मीडिया भी व्यवसाय का रूप ले चुका है. जो मालिकान कहते हैं वह करना पड़ता है न करे तो पत्ता साफ हो जाता है. फिर भी मीडिया अपनी जिम्मेदारी से बिमुख नहीं है. किसी बात का एक पहलू हमें नहीं देखना है. आज अन्ना और बाबा की बात को जन-जन तक पहुंचा कर मीडिया ही एक बड़ा आन्दोलन खड़ा किया.. क्या बिना मीडिया के सहयोग के ऐसा मुमकिन था कदापि नहीं. सिक्के का एक पहलू देखने से ही बात नहीं बनेगी. सिर्फ मीडिया ही नहीं प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना होगा, चाहे वह किसी भी कार्य में लगा है.
अजित जी यह लेख अच्छा है. विचार करना होगा.

गंगाधर ने कहा…

यदि मीडिया बिक गयी होती तो रामलीला मैदान का सच हम कैसे जानते. ए. राजा और कलिमोड़ी जैसे लोग जेल में कैसे होते. लखीमपुर की घटना का खुलासा कैसे होता. जी नहीं आज मीडिया की ही देन है की बड़े बड़ो के पसीने छूट रहे हैं. आज बाबा रामदेव यदि लोकप्रिय हैं तो मीडिया की ही देन है. सोच को संकुचित नहीं रखना चाहिए. और देंखे तो हम लोग वेब मीडिया से जुड़े हैं क्या हम सभी लोग भ्रष्ट है.

Ajit Singh Taimur ने कहा…

मीडिया लोगों को सिर्फ उतना दिखा रहा है की उसकी दूकान दारी चलती रहे ......उसमे भी मीडिया बालंस बना के चलता है ....दोनों तरफ ......राम देव जी को बदनाम करने का षड़यंत्र किसके इशारे पर चल रहा है मीडिया में .........किसी एक आदमी ने कह दिया बाबा लालची है ...आपने दिखाना शुरू कर दिया ....बिना किसी तथ्य के .....साथ में सिक्के का दूसरा पहलू भी दिखाना चाहिए था ........बाबा को भी तो मौका देना चाहिए था ..........अपना पक्ष रखने का ....इस तरह गाली तो दुनिया में किसी भी आदमी को दी जा सकती है ...दिलवाई जा सकती है .....पर सोनिया जी के मामले में बिलकुल चुप्पी साध लेना ....पूरे देश का मीडिया क्यों चुप है ???? जवाब चाहिए .......पिछले 10 दिन में कितने सरकारी विज्ञापन आये ...जवाब चाहिए .......देश को .....

blogtaknik ने कहा…

पुराने जूते इकट्ठे करना शुरू किया जाये...वक़्त पर बहुत कामपुराने जूते इकट्ठे करना शुरू किया जाये...वक़्त पर बहुत काम आयेंगे...!!! आयेंगे...!!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

मीडिया भी अब प्रोफेशन बन चुका है. धंधा पूरी तरह से न कि मिशन.

रंजना ने कहा…

शब्दशः सहमति है आपसे...

लोगों को लगता है दिखा तो रहे हैं ये समाचार .... लेकिन ये समाचार कितने मैनेज्ड होते हैं, लोग तिनका भर भी समझ नहीं पाते...
औद्योगिक घरानों के ओण्ड इन समाचार माध्यमों से क्या अपेक्षा की जाय कि ये लोकतंत्र के प्रहरी/चौथा खम्भा बनेंगे ???
ऐसे में आपलोगों का आभार जो सच का कुछ अंश तो बाहर निकल कर आ रहा है..
कृपया यह प्रयास तबतक अबाधित रखें जबतक यह भ्रष्ट सरकार इन माध्यमों पर भी पहरा नहीं बैठा रही...

आशुतोष की कलम ने कहा…

खबरनवीस के मुह में हड्डियाँ ठूस दी गयी..

Swarajya karun ने कहा…

कुछ रुक गए ,कुछ झुक गए,
जो नहीं रुके ,जो नहीं झुके ,वो चूक गए !

कौशलेन्द्र ने कहा…

हरीश जी की बात से सहमत हूँ. मीडिया कर्मी किसी के सेवक हैं .....स्वतन्त्र चौथा खम्भा नहीं ...इस खम्भे के जो मालिक हैं वे इसी भ्रष्ट तंत्र के एक अंग हैं ...इनसे निष्पक्षता की आशा नहीं की जा सकती..क्योंकि यह खम्भा व्यावसायिक है ....पूंजीपतियों का उद्योग है....पर धन्यवाद उस खबरिया का जिसने सुरसुरी तो फैलाई कि कांग्रेस की राजमाता बच्चों के साथ अपने खातों की चिंता में स्विटजरलैंड गयी है...अब हमारा आपका काम है कि इसे याद रखें ....यह खबर काम की है वक़्त पर काम आयेगी. यद्यपि होना तो यह चाहिए था कि इस खबर पर राष्ट्रवादी (?) दल सोनिया की खबर लेते ...पर नहीं, वे भी राष्ट्रवादी कहाँ रहे अब ? उन्हें तो यह बात तब याद आयेगी जब अगला चुनाव होगा. अर्थात उनका उद्देश्य होगा केवल वोट लूटना.... किसी गन्दगी को साफ़ करना नहीं.
गाहे-बगाहे हमें ही इस मुद्दे को ज़िंदा रखना होगा.