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पंडाल से निकलने के बाद का सच ...4 जून रात के 4 बजे ....लोकतंत्र की हत्या

                                   इस से आगे का सच अब मुझसे सुन लीजिये  .......वह व्यक्ति जिसने उस गोल चौराहे पर चढ़ के भीड़ को संबोधित किया वो मैं था .......मैंने सबसे आह्वाहन किया की सब इकट्ठे  हो कर जंतर मंतर  चलें ....क्योंकि सुना था की हमें जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति प्राप्त थी और शांतिपूर्वक सत्याग्रह करना हमारा मूल अधिकार है .......हम सब इकट्ठे हो कर जंतर मंतर चल पड़े ......पुलिस वहां एक barrier लगा के खड़ी थी ........रात के 3 बज रहे थे ......पर हम लग उस barrier को लाँघ के आगे निकल गए .......पुलिस ने हमें रोका नहीं ....3 -4 हज़ार लोग रहे होंगे महिलायें और बूढ़े भी थे ......तभी वहां times now का एक पत्रकार और cameraman आये ......हम लोग लगभग 1 किलो मीटर आगे बढ़ते हुए कनाट प्लेस पहुचने वाले थे ...तभी वहां पुलिस ने एक और barrier लगा दिया .....हमने सोचा की हम यहाँ से भी आगे निकल जायेंगे ....पर इस बार पुलिस को लाठी  चार्ज का आदेश मिल चुका था ...मैं भीड़ का नेतृत्व कर रहा था ...और पुलिस ने मुझे भाषण देते भी पहचान ही लिया था ......बिना कोई चेतावनी दिए पुलिस ने लाठी भांजनी शुरू कर दी .....मुझे कई लाठियां लगी ....हम भागे ....पर एक लड़का बिलकुल नहीं भागा .......उसे पुलिस ने बुरी तरह मारा ...पर वो टस से मस नहीं हुआ ...पिटता रहा ..और अंत में गिर गया ....जो भागते हुए गिर गया पुलिस ने उसे गिरा के मारा ..... बूढों को मारा औरतों को मारा ......उद्देश्य वहां से भगाना नहीं था ...भाग तो हम पहली लाठी पे ही लिए थे .......वो तो हमें  मारने के लिए मार रही थी ........जबकि हम एक दम निहत्थे ,शांतिपूर्वक वन्देमातरम और भारत माता की जय बोलते जा रहे थे .........मुद्दा ये है की सरकार ने लाठियों से हमारी जुबान बंद कराई ......लोकतंत्र में शान्तिपूर्वक सत्याग्रह ,धरना ,विरोध,हमारे मौलिक और संवैधानिक अधिकार है .....हम अपने लिए कुछ नहीं मांग रहे थे ......देश का पैसा देश में वापस लाने की मांग कर रहे थे ......
इस लाठी चार्ज को हमारे अलावा किसी ने नहीं देखा ...वो पत्रकार तो पहले ही गायब हो गया था ......रात के 4 बज रहे थे .......ये घटना  भारत के इतिहास में दर्ज होगी ....नए भारत का इतिहास जब लिखा जायेगा तो ये लिखा जायेगा की एक नई क्रांति की शुरुआत राम लीला मैदान से शुरू हुई .....और कैसे एक चुनी हुई लोकतान्त्रिक सरकार ने लोगों का दमन किया ........

7 टिप्‍पणियां:

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

सादर वंदे मातरम्!

सबकुछ भयावह !
… एक जलजले का पूर्वसंकेत !!

पुलिस का दमनचक्र घोर शर्मनाक !

बर्बरता की पराकाष्ठा !



बाबा रामदेव का उद्देश्य निसंदेह बहुत अच्छा है। इनका समर्थन किया ही जाना चाहिए।

कोई यह बताए तो सही कि -
संविधान में लिखा है क्या कि यदि आप हिन्दू भगवा धारी हैं तो राजनीति नहीं कर सकते?
सिर्फ भ्रष्ट लोग ही आ सकते हैं इस लाइन में?
संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का कोई अर्थ है या नहीं ?
'समानता के अधिकार' की कोई अहमीयत है अथवा नहीं ?



जिन्हें यह देश अपनी मां समान लगता है , जो इसे भ्रष्टाचारियों के ख़ूनी पंजे से मुक्त कराना चाहते हैं ,
वे दिलो-जान से बाबा रामदेव के साथ हैं … बल्कि इनके प्रति आभारी हैं ।
और जो इस देश को लूटने की चाह रखते हैं सिर्फ़ वे ही आज बौखलाए घूम रहे हैं।



इस प्रकरण के सहारे देश की यथास्थिति पहचान कर गंभीरतापूर्वक दायित्व-निर्वहन के प्रयत्न करने का समय है …

# मसखरी में या घटना की अनदेखी करके बात उड़ा देने का समय नहीं है …




सोते लोगों पर करे जो गोली बौछार !
छू’कर तुम औलाद को कहो- “भली सरकार”!!


- राजेन्द्र स्वर्णकार

क्रांतिकारी हिन्दोस्तानी देशभक्त ने कहा…

निस्संदेह आपका काम प्रशंसनीय है आप जैसे नव युग के क्रांतिवीरों को हमारा प्रणाम हम आपके साथ हैं @ राजेन्द्र स्वर्णकार जी ने बहुत ही अच्छा बताया है की संबिधान में कहाँ ऐसा लिखा है की भगवा धारी राजनीती नहीं कर सकता और कहाँ ऐसा लिखा है की सिर्फ चोरों को ही राजनीति करने का अधिकार मिला है, हमें अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा करनी होगी और मिलकर देश के लिए लड़ना होगा !
जय हिंद जय भारत बंदे मातरम

chooti baat ने कहा…

सिर्फ चोरों को ही राजनीति करने का अधिकार मिला है aur jab tak ye chor daku aatankwadi log sarkar me hai o baba
ka aandolan daba ke hi rahege chahe isme baba ki jaan hi kio na chali jay

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

मेरे से पहले आयी टिप्पणी में सब कुछ कह दिया है,

दीर्घतमा ने कहा…

सबसे पहले देश को जानने का अधिकार है की राजीव गाढ़ी फ़ौंडेशन की पूजी और उसकी फंडिंग कहा से है 2g घोटाले का कितना शेयर उसमे है.

Er. Diwas Dinesh Gaur ने कहा…

आदरणीय अजीत सिंह जी मैं भी इस आन्दोलन में शामिल था...मैंने अपने शरीर पर तीन लाठियां खायीं थीं...आप इस क्रान्ति में मेरे ही साथ थे यह मैं नहीं जानता था...क्रान्ति का दौर चल पड़ा है...आशा है पुन: किसी आन्दोलन में आपका साथ मिले...
इस आन्दोलन की मेरी आपबीती-http://pndiwasgaur.blogspot.com/2011/06/blog-post_07.html

kirti hegde ने कहा…

desh ko bachane ke liye sabhi ko ekjut hona hoga.