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कोंग्रेश के अनुसार संघ (आर.अस.अस.) रास्ट्रभक्त संगठन हे

जब से बाबा रामदेव जी तथा अन्ना हजारे ने भ्रस्टाचार मिटाने, विदेशों में जमा काला धन वापस लाने तथा एक मजबूत तथा प्रभावी लोकपाल कानून बनाने के लिए आन्दोलन चला रहे हे, सरकार कि नीन्द उडी हुयी हे, सही भी हे, अगर सरकार यह कर दे तो सबसे ज्यादा उनकी तथा उनके सहयोगी दलों के लोगो कि असलियत जनता जान जाएगी, हो सकता उनके कई महान,व त्यागी घोषित नेताओ को देश छोड़ कर भागना पड़ जाये,.अब सरकार साफ साफ तो यह कह नहीं सकती कि वो यह काम नहीं करेगी या यह कानून नहीं बनाएगी . अब कोंग्रेश के पास अपनी हर बुराइयों , नाकामियों भ्रस्ट आचरण आदि से छुटकारा पाने का सिर्फ एक ही तरीका नजर आता हे, सब कामो के लिए आर. अस. अस. या वी.एच. पी.तथा भाजपा पर आरोप लगा दो. कोई भी अच्छा काम जो कांग्रेश कि पोल खोलता हो उसके पीछे संग का हाथ बताओ, पार्टी के सभी नेता चीख चीख कर हर काम के पीछे आर.अस.अस.का हाथ होने कि तोता रटंत शुरू कर देते हे,
बाबा रामदेव तथा अन्ना हजारे के आन्दोलन से सरकार कि भारी किरकिरी होने लगी, तथा भ्रस्टाचार, कालाधन तथा लोकपाल बिल के मुद्दे पर सरकार के नकारात्मक रवैये से जब जनता में सरकार कि यह छवि बनने लगी कि सरकार यह काम करना ही नहीं चाहती , सरकार अपनो को बचाने के लिए इन कामो को टाल रही हे, इस बदनामी से बचने के लिए सरकार व् कांग्रेस पार्टी ने वही पुराना घिसा पिटा आरोप लगाया कि बाबा रामदेव तथा अन्ना हजारे का आन्दोलन आर. अस. अस. कि देन हे,इसके पीछे आर.अस.अस. कि सोच हे, ये लोग संघ का मुखोटा हे, इनको भाजपा का समर्थन हे.
इस पूरी बात से यह बात साबित हो जाती हे, कि संघ तथा भाजपा चाहते हे कि देश से भ्रस्टाचार मिटे, विदेशों से काला धन भारत में वापस आये, तथा एक मजबूत तथा प्रभावी लोकपाल कानून बने, ताकि देश विकसित देश बने, जनता खुशहाल हो. गरीबी ,मंहगाई तथा भूख से त्रस्त जनता को राहत मिले. देश एक आर्थिक महाशक्ति बने, भ्र्स्ताचारियो, देश का धन लूट कर विदेश भेजने वालो से ना सिर्फ लूट का धन वापस लिया जाये, बल्कि उन्हें कठोर सजा मिले ताकि ना केवल उनको बल्कि दूसरो को भी सबक मिले, तथा उन्हें डर भी बना रहे,
अगर संघ यह सब कर रहा तो वास्तव में संघ ही सच्चा देशभक्त संगठन हे, संघ देश को लुटने वालो से देश को बचाना चाहता हे,देश व देश वासिओं कि खुशहाली चाहता हे, देश के लोग भ्रस्ट व बेईमान ना होकर ईमानदार और सदाचारी बने, अपने किसी काम के लिए उनको किसी नेता या अफसर के सामने गिडगिडाना या रिश्वत देना नहीं पड़े, अगर यह सब होता हे तो प्रगति पुरे देश कि होगी जिसमे हिन्दू मुस्लिम सभी होंगे, संघ ने तो यह कभी नहीं कहा कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ हिन्दुओं का हे, यह तो हमारे धरमनिरपेक्ष (सही मतलब धरम विहीन ) प्रधानमंत्री मनमोहन सिंघजी ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का हे, कोन हे असली सांप्रदायिक आप समझ सकते हे.
इसके विपरीत कोंग्रेस पार्टी नहीं चाहती, कि वह देश कि जनता का धन लूटे, लुटने वालों को बचाए, विदेशो में काला धन रखने वालो को सरंक्षण मिले, देश में बिना रिश्वत दिए जनता का कोई काम ना हो, देश में भूखे व गरीबों कि संख्या बढे, ताकि वो लोग अपने को राजा समझने वाले कान्ग्रेसिओं तथा भ्रस्ट अफसरों के सामने गिडगिडाते रहे, देश में कोई लोकपाल कानून नहीं बने ताकि उनके भ्रस्ट और काले कारनामे ढके रहे, इसके लिए वो संघ पर आरोप लगा कर हिन्दू मुस्लिमो में फुट डाल कर धरमनिर्पेक्षता का लबादा ओढ़ साम्प्रदायिकता फैला कर इन सभी आन्दोलनों को कुचलना चाहती हे, ताकि उनकी पार्टी के बड़े नेताओं का काला व घिनोना चेहरा जनता के सामने नहीं आ सके.
अब आप सोचिये कोन हे देश भक्त, जनता कि खुशहाली चाहने वाला संघ या जनता का धन लूटने के लिए लगातार प्रयासरत रहने वाली कांग्रेश पार्टी, वेसे सबसे बड़े सांप्रदायिक वो हे जो देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुस्लिमों का बताते हे, दुनिया के सबसे बड़े आतंकी को "ओसमाजी"जेसे शब्दों से सन्मान दर्शाता हे, क्योंकि वो मुसलमान हे, जो फांसी कि सजा पाए आतंकियों को बचाने में लगे ह, जेल में बंद सेंकडो भारतीओं के हत्यारे पाकिस्तानी आतंकी कि खातिरदारी पर करोड़ों का खर्चा करती सिर्फ इसलिए कि मुसलमान हे, ये ही असली सांप्रदायिक हे, संघ नहीं. आतंकी हमलो में जनता मरती हे तो तब घर बेठने लेकिन पुलिस कार्यवाही में आतंकी के मरने उसके घर सहानुभूति जताने जाकर देश कि पुलिस का अपमान करने वाले असली सांप्रदायिक हे, देश वासिओं को अत्याचारों से बचाने कि सोच रखने वाला संघ नहीं.
अदालत के फेसले ने यह साबित किया कि जिस ढांचे को गिराया गया वही जगह श्रीराम के जन्म कि सही जगह हे, इस बात ने साबित कि वो ढांचा जिसे अपने को धरमनिरपेक्ष कहने वाले बाबरी मस्जिद कहते हे, को मंदिर तोड़ कर बनाया गया था. अतः; हिन्दुओं का उसे तोड़ना सही था, सदियों में ऐसा लगा कि हिन्दू समाज का स्वाभिमान कायरता का लबादा छोड़ कर जागा हे, पर अफ़सोस हे कि उसके बाद हिन्दू स्वाभिमान फिर से कायरता का मोटा लबादा ओढ़ कर सो गया हे, ए़सी बेहोसी कि नींद में कि कोई कितना ही मरो-पीटो, कुचालो ,लूटो जाग ही नहीं रहा हे.
जनता सोचे समझे, किसी के बहकावे में नहीं आकर अपने विवेक से निर्णय करे कोन सही हे, कोन गलत , आपको संघ द्वारा दी गयी खुशहाली चाहिए या कोंग्रेश कि लुट, संघ का दिया गया स्वाभिमान चाहिए या मुस्लिमो में नाम पर कांग्रेश का दिया अपमान , संघ व बाबा रामदेव कि सोच वाला आर्थिक रूप से संपन्न भारत चाहिए या आजादी के बाद से ज्यादातर सत्ता में रही कोंग्रेश का दिया गरीब, सारी दुनिया में आर्थिक सहायता कि भीख मांगता भारत . क्या आप ऐसा भारत चाहते हे जिसका अथाह धन विदेशों में पड़ा रहे, सेंकडों टन अनाज सड़ता रहे, और जनता भूखी रहे,
आप सोचिये आप को कोंग्रेश कि धरमनिरपेक्षता(बिना धरम का ) चाहिए, या संघ कि धरम निष्ठता. कांग्रेश ने भी यह माना हे इन सभी आन्दोलनों को संघ का समर्थन हे अतः वो ही रास्ट्रभक्त संगठन हे, इन आन्दोलनों को सत्ता का दुरुपयोग कर रात में सोती हुयी निहथी जनता कि मार पिटाई कर कुचलने वाली उनकी पार्टी नहीं.

5 टिप्‍पणियां:

किलर झपाटा ने कहा…

कांग्रेस तो भैया अति प्राचीन बदमाश पार्टी है ही। मगर यहाँ बाबा रामदेव भी बहुत सी बातें गैर व्यवहारिक कर रहे हैं बिल्कुल आठवीं पास स्टाइल में। और इसीलिये सरकार को संभलने का मौका मिल जा रहा है।
हाँ मगर सोते लोगों पर बर्बरता नि:संदेह सरकार की दुष्टता को परिलक्षित कर चुकी है। रण तो निश्चित है पर जीतेगा कौन ये देखना है।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

ये तो है यदि अ # b तो ब # अ..

satpanthi ने कहा…

प्रधानमंत्री ने ४ घंटो के भीतर ऐसे इन्सान की मौत पर शोक जताया, जिसने भारत माता की अश्लील तस्वीर बनायीं. और ये वही प्रधानमंत्री है, जिनको रामलीला मैदान में हुए नरसंघार को सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण बताने के लिए ३ दिन लग गए... सोचो देशवालो, ये वोट की राजनीती नहीं तो और क्या है..कांग्रेस क्या इस लिए दुखी है अब हुसैन साहब और अश्लील तस्वीरे नहीं बना सकते?

Abhishek ने कहा…

@Laxmipat Jii
क्या शानदार बात लिखी है आपने. पढके मजा आ गया.

राहुल पंडित ने कहा…

इतिहास गवाह है कांग्रेसियों बारे में.इन्होने हमेशा ही देश भक्तों का विरोध किया है,भगत सिंह,राणा प्रताप,...............एक दो हों तो बताऊँ