समर्थक

क्या विदेशी बहु कहकहे लगा रही होगी, भारतीओं द्वारा भारतीओं पर अत्याचार करवाकर.

आजादी के पहले के अंग्रेजो कि गुलामी के समय के बारे में सब लोग जानते हे, मुठी भर अंग्रेज भारतीओं पर भारतीओं द्वारा ही लाठी, गोली चलवाते थे, तमाम तरह के अत्याचार करवाते थे, जनता को भारतियो द्वारा ही मरवाकर कहकहे लगाते थे, कभी खुद भी अत्याचार करते थे, लेकिन भारतियो के सहयोग से, उस समय भी कई लालची और मक्कार लोग अपने स्वार्थ के लिए जनता पर क्रूर अत्याचार करते थे, अंग्रेजो को खुस करने, उनकी नजरो में रहने के लिए अपने ही देश वासिओ पर जुल्म करने में सदा तत्पर रहते थे, कांग्रेश पार्टी ऐसे समय कि ही पैदावार हे, उस समय के कई कोंग्रेशी भी ऐसे कामो में लगे थे जो जनता के सामने तो अंग्रेजों का विरोध करते थे, पर मन ही मन उनके समर्थक भी थे, वो विदेसिओं के राज में भी कोई बुराई नहीं समझते थे,
वेसी ही कुछ स्तिथि वर्तमान समय में दिख रही हे, कोंग्रेश पार्टी को विदेशी मूल कि बहु ने अपने में कब्जे में कर लिया हे, एक विदेशी मूल कि महिला को खुस करने में पूरी पार्टी वेसे ही लगी हे, जेसे अंग्रेजो को खुस करने में लालची मक्कार और देशद्रोही किस्म के लोग लगे रहते थे. अपनी विदेशी महरानी को बचाने ,उन्हें खुस करने लिए अपने ही देश वासिओं पर अत्याचार करने के गुण शायद उन्हें अपने पूर्वजो से मिले हो,
बाबा रामदेव के भ्रस्टाचार और कालाधन वापस लाने समन्धी आन्दोलन से शायद कोंग्रेश पार्टी के लोगो को, तथा हो सकता हे उनकी विदेशी मूल कि महरानी कि असलियत और उनका घिनोना चेहरा जनता के सामने आने का खतरा हो, तभी इस तरह का सोते हुए अनसन करते लोगो पर अचानक लाठी चार्ज करने जसी बर्बर कार्यवाही जैसा कदम महारानी को खुस करने, उनके इशारे पर लिया गया, इस कार्यवाही को जिसमे भारतियो द्वारा भारतीओं पर विदेशी को खुस करने के या बचाने के लिए अत्याचार किया गया, विदेशी महारानी कितनी खुस हुयी होगी इसकी एक झलक तब दिखी जब विदेशी महारानी के सबसे करीबी साथी दिग्विजय सिंह जनता पर किये गए बर्बर अत्याचार के बाद बेहद कुटिल और मक्कारी से इस कार्यवाही को सही बता रहे थे. उनकी कुटिल मुस्कान से लग रहा था कि महारानी कितने कहकहे लगा रही होगी.
वहां कि कुछ महिलाये कह रही थी,कि जिस पार्टी कि प्रमुख महिला हो वो पार्टी ऐसा अत्याचार केसे कर सकती हे, पर शायद वो महिला यह नहीं जानती कि वो भारतीय महिला नहीं विदेशी महिला हे, उस में भारतीय संस्कृति नहीं हे, विदेशी मानसिकता वाली महिला भारतीय महिलाओं जैसी नहीं हो सकती, वो विदेसियो को खुस करने के लिए देशवासिओं पर अत्याचार करने कि मानसिकता वाले दिग्विजय सिंह जैसे लोगो द्वारा कुछ भी करवा सकती हे,
हमारा कर्त्तव्य हे ऐसे लोगो के खिलाफ संगठित हो कर इन्हें सबक सिखाये, फिर से देश में भारतीयता लाये, देश को लुटाने वाले चेहरों पर से सराफत का नकाब हटायें, सोचिये.

4 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

बिल्कुल

blogtaknik ने कहा…

इस नागिन से क्या उमीद कर सकते है.

drshyam ने कहा…

sab sach bayaan hai...

गंगाधर ने कहा…

इस नागिन से क्या उमीद कर सकते है.