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मेरे देश में कोई भूखा नहीं…डा श्याम गुप्त...



मेरे देश में,

अब कोई भूख से नहीं मरता;

क्योंकि, अब-

देश में बडे बडे बिज़नेस स्कूल हैं,

शाही ठाठ बात से सज़े, आई आई एम

बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हैं;

जो अरबों कमाती हैं, और-

उनके कर्मचारी भी लाखों पाते हैं

सरकारी कर्मचारी तो ,

सिर्फ़ ड्यूटी पर विदेश जाते हैं;

ये काम तो देश में करते हैं, पर-

पुरस्कार लेने मलयेशिया जाते हैं।


मेरे देश की चमचमाती सडकों पर, प्रतिपल-

तमाम कार, स्कूटर, टेक्सियां फ़र्राटा भरतीं हैं; और

पटरियों पर, वातानुकूलित शताब्दी,

राजधानी एक्स्प्रेस मैट्रो दौडती हैं।


मेरे देश मे अब-

बडे बडेमौलसुपर बाज़ार ,

बहुमन्ज़िली इमारतों का मेला है।

हर जगह कोल्ड ड्रिन्क्स, ठन्डा, काफ़ी,

फ़ास्ट फ़ूड,पिज़्ज़ा , बर्गर, आइसक्रीम, -

ब्रान्डेड आइटम का रेलम पेला है।

टी वी, रडियो, केबुल पर-

आइटम सोन्ग, आइटम डान्स, -

आइटम कन्याओं का ठेलम ठेला है।


यहां हर गली मेंगुरूहैं

हर कोई किसी किसी का

चमचा या चेला है


भूखा वही मरता है,

जो हठेला है,

शान्त स्वाधीन अकेला है,

जुबान का करेला है,

जिसका कोई गुरू-,

चमचा चेला है


4 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बिल्कुल ठीक! कहां है भूख, गरीबी और बेरोजगारी..

कौशलेन्द्र ने कहा…

छीलती हुयी रचना ! किन्तु डॉक्टर साहब ! आज भी मरता तो गरीब ही है. आपके यहाँ मायावती कितनी गरीब है बेचारी ! ओबेसिटी और डायबिटीज वाले कितने गरीब होते हैं . मायावती को अगर कहीं डायबिटीज हो गयी तब तो और गरीब हो जायेगी. हीरे खाकर इन्सुलिन नहीं बनेगा न ! न घी खा सकते हैं न मिठाई .......बेचारे. अमीर तो मैं हूँ, गाडी-बंगला नहीं पर जो चाहूँ खा सकता हूँ...जहाँ चाहूँ सो सकता हूँ ....जहाँ चाहूँ जा सकता हूँ. अरबों की दौलत वाले कर के दिखाएँ ऐसा.

गंगाधर ने कहा…

बिल्कुल ठीक! कहां है भूख, गरीबी और बेरोजगारी..

drshyam ने कहा…

धन्यवाद , भारतीय नागरिक..गंगाधर जी व कौशलेन्द्र जी...क्या बात कही है कौशलेन्द्र जी..सटीक