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पहले सोमनाथ फिर विश्वनाथ और अब पद्मनाभ

भारतीय संस्कृति में धर्म का एक विशेष महत्त्व रहा है और इसी लिए दान का भी महत्त्व रहा है |हमारे मंदिरों की सम्रद्धि सदैव से लुटेरों के आक्रमण का केंद्र रही है पहले मुस्लिम आक्रान्ताओं के सोमनाथ मंदिर को कई बार लुटा और अब इस्लामिक और ईसाई गटबंधन केरल के पद्मनाभ मंदिर को लूट रहा है और देश के हिन्दू ये देख ही नहीं पा रहे हैं की उनकी संपत्ति को छिना जा रहा है जो की बाद में इस्लाम और ईसाइयत के प्रचार में लगाई जाएगी | हिन्दू मंदिरों की संपत्ति से जेहादी शस्त्र खरीदेंगे और मिशनरी इसी धन की सहायता से धर्मान्तरण कार्य करेंगे |

कुछ लोग ये तर्क दे रहे हैं की यह धन देश का है और इस लिए देश के कल्याण और विकास में खर्च किया जाना चाहए परन्तु उन लोगों की कभी भी यह तर्क मस्जिदों और मजारों के धन के देने की हिम्मत नहीं होती है | कभी यह नहीं कहा जाता है हज यात्रियों पर जो धन खर्च किया जाता है उसे देश के विकास में लगाया जाय क्यों की पता है की ऐसा करते ही फतवे भी निकल सकते है और तलवारें भी (जिस तरह से एक ईसाई शिक्षक का हाथ काटा गया) परन्तु हिन्दू मंदिरों की सम्रद्धि पर इन लोगों की गिद्ध दृष्टी लग गयी है |

सबसे पहली बात तो यह की ये जो धन मिला है ये भगवन पद्मनाभ का है तो इसका राष्ट्रीयकारण क्यों किया जाना चाहिए वह भी उस समय में जब की सभी सरकारी चीजों का निजीकरण किया जा रहा है ?? यह धन भगवान पद्मनाभ का धन है तो इसे भगवान पद्मनाभ के भक्तों के कल्याण में लगाया जाना चाहिए ना की भगवान के मंदिरों के लुटेरों के कल्याण में | इसके अतिरिक्त जिन लोगों ने यह धन दान में दिया था वो हिन्दू थे और उन्होंने यह धन मंदिर को दिया था ना की किसी सरकार को इस लिए इस धन पर मंदिर का ही अधिकार है | इसके अतिरिक्त कुछ लोग इस धन की तुलना विप्रो या किसी कोरियाई कंपनी की संपत्ति से कर रहे हैं तो विप्रो की संपत्ति का निवेश कैसे करना है ये विप्रो निर्धारित करती है और कोरियाई कंपनी यह निर्धारित करती है की उस संपत्ति का निर्धारण कैसे करना है तो पद्मनाभ मंदिर के ट्रस्ट को मिलाना चाहिए |

इसके अतिरिक्त कुछ लोग कह रहे हिं की इस धन को गरीबों के कल्याण के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए | जब लोग कहते हैं गरीबों के कल्याण के लिए तो उनका मतलब मुस्लिम होता है | केरल के तो के मंत्री ने इस धन को "गरीबों और अल्पसंख्यकों " पर खर्च करने की मांग भी कर दी है | मुस्लिमों की गरीबी उनके स्वयं के द्वारा उत्पन्न की गयी परिथितियों की दें होती है , मुस्लिम औरतें बच्चे पैदा करने की मशीन से अधिक कुछ नहीं होती हैं और मुस्लिम पुरुष उनको जेहादी और दंगाई बनाते हैं | मुस्लिम महिलाएं आतंक के लिए कच्चे माल का उत्पादन करती हैं और मुस्लिम पुरुष उस कच्चे माल को शाश्त्र में परिवर्तित करते हैं | यही उनकी नियति है क्यूँकी यही उनका धर्म है |मुस्लिमों के तो देश की आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकी है क्योंकी इस बुरी स्थिति का कारण उनके धर्म में है | उत्पादन में मुस्लिमों का सहयोग नगण्य ही होता है इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नई होती है और जो कुछ धन होता भी है तो केरल के मुस्लिम वो धन लव जेहाद जैसे कार्यक्रमों पर खर्च करते हैं और हिन्दू शर्मनिरपेक्ष यह मांग कर रहे हैं की स्वामी पद्मनाभ का धन "लव जेहादियों" को दे दिया जाय ताकि वो और तेजी से लव जेहाद कर सकें ??

अब प्रश्न यह है की इस धन का किया क्या जाय ?? यह धन पद्मनाभ मंदिर का है तो इसे मंदिर के अन्दर ही रहना चाहिए | वहां पर एक संग्रहालय बनाया जा सकता है जहाँ पर इस सब वस्तुओं को प्रदर्शन के लिए रखा जा सकता है | ये सभी वस्तुएं एतिहासिक महत्त्व की हैं तो इनके प्रदर्शन मात्र से मंदिर प्रशासन को आय हो सकती है और उसके बाद इस आय का उपयोग लव जेहाद पीड़ितों के पुनर्वास एवक उनको न्याय एवं सुरक्षा दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया में किया जाना चाहिए |

4 टिप्‍पणियां:

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

सही कहा ..

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

हिन्दुओं का पैसा है ही फ़ालतू तभी तो पडा रहता है, और कोई भी ले जाये कोई कुछ कहता भी नहीं है

आशुतोष की कलम ने कहा…

सरकार प्राकृतिक संसाधनों की लुट के बाद दलाली खाने निकल पड़ी..
अब उसकी हवस इन मंदिरों के धन को स्विस भेज कर मिटेगी...सोचिये वो परिवार कितना महान है जिसने इतने धन को वर्षों से छुवा तक नहीं अब सरकारी गिद्ध इस पर आँखे लगाये बैठे हैं..
अल्पसंख्यक तुस्टीकरण की हड्डिय तो १०% डाली जाएँगी बाकि सब मैडम इटली भेजने की तयारी है..
अगर अब भी हिन्दू कायर बना रह तो यही परिणिति होनी है..

कौशलेन्द्र ने कहा…

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