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26 /11 का जख्म तो अब तलक भरा नही ..........

वन्दे मातरम बंधुओं,

खतना तेरा हो गया, या बिन खतने का है तू आदमी,
बम ने फटने से पहले, एक लफ्ज़ तक पूछा नही...........

राम तेरा बाप है, या रहीम की औलाद तू ,
बम रखने वालों ने एक पल को भी सोचा नही........

खून आलूदा हैं सड़के, तन में मन में खून भरा,                                      
मौत जब झपटी तो उसने, हिन्दू मुसलमां देखा नही.........

उजड़े घरों में गूंजते, फातिमा की चीख सीता के नाले,
ये किस जहाँ में आ गया, ये स्वप्न तो मेरा नही.............

फिर सीना लहू लुहान हुआ, फिर पीठ में खंजर घोंप दिया,
26 /11 का जख्म तो अब तलक भरा नही ..........

2 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

क्योंकि बम असली सेक्यूलर होते हैं .........लक्ष्य भेद में कोई पक्षपात नहीं करते .........उन्हें वोट नहीं लेना लेना होता है न !

rakesh gupta ने कहा…

वन्दे मातरम भाई कौशलेन्द्र जी,
आपने बिलकुल ठीक कहा है ........ इस वोट बेंक के चक्कर ने देश का बेडा गर्क कर दिया है