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एक महा झूठ , ताज महल एक मकबरा है ,

17.7.11


एक महा झूठ , ताज महल के बारे में ,


एक महा झूठ , ताज महल एक मकबरा है , एक सरकारी झूठ , चल रहा है , चलने दो

ताजमहल..... मकबरा नहीं............ अति प्राचीन शिव मंदिर है

  
प्रिय पाठकों ,


ये ब्लॉग कंट्रोल सी एवं कंट्रोल वी का कमाल है , पर किसी ने तो खोज की है , और जानकारी इतनी सटीक है कि अचम्भा होता है , इतना बड़ा झूट इतने स्तर पर सरकारों द्वारा व समाज द्वारा चलते रहते हैं. 

वस्तुतः मुसलमानों की कुरआन में शरीर के मकबरों को अति सम्मान देना कुफ्र माना जाता है.  ये जितने भी मकबरे हिन्दुस्तान में हैं, आप देख लीजिए केवल हिन्दुस्तान में हैं . 

पुरे अरब में एक भी आलीशान मकबरा नहीं मिलेगा. में वहाँ रह कर, देख कर , और इस विषय में बात कर के आया हूं. 

हिन्दुस्तान में मंदिरों की अस्मिता भंग करने के लिए , मंदिरों में , मरे हुओं कि कब्रें बना कर उन्हें अपवित्र करने के लिए उन्हें मकबरों में बदला गया . 

 यह पोस्ट हमें मेल द्वारा  blog के माध्यम से मिली, हमें लगा की यह जानकारी भरी पोस्ट सबके सामने आनी चाहिए.

पद्मनाभ मंदिर के तहखाने खोलने पर जोर दिया जा रहा है . ताज महल में २२  कमरे क्यों नहीं खोले जा रहे, मत खोलो कारण तो बताओ, सरकार . 

आखिर यह झूठ कहाँ से , क्यों , और किसने शुरू किया , 
है कोई माई का लाल जो सुप्रीम कोर्ट को , सरकार को सही बात बताने के लिए विवश करे . 
दासानुदास 
अशोक गुप्ता

3 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

अशोक जी ! पुरुषोत्तम नारायण ओक जी ने इन विषयों पर कई प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं. लखनऊ का इमामबाड़ा, आगरे का ताजमहल, और फतेहपुर सीकरी की इमारतों के बारे में उन्होंने पृथक-पृथक पुस्तकें लिखी हैं जो प्रचलित हुयी हैं ...आश्चर्य .....फिर भी अभी तक तथाकथित राष्ट्र वादी दलों ने इस बारे में आवाज तक नहीं उठायी. आखिर हम चुनते ही क्यों हैं ?

हरीश सिंह ने कहा…

यह पोस्ट दोबारा लगायी गयी है, ताजमहल नहीं तेजोमहालय है, जय श्री राम

blogtaknik ने कहा…

शाहजहाँ प्रेम की मिसाल के रूप पेश किया जाता रहा है और किया भी क्यों न जाय ,८००० ओरतों को अपने हरम में रखने वाला अगर किसी एक में ज्यादा रुचि दिखाए तो वो उसका प्यार ही कहा जाएगा।
मुमताज के बाद शाहजहाँ ने अगर किसी को टूट कर चाहा तो वो थी उसकी बेटी जहाँआरा। जहाँआरा को शाहजहाँ इतना प्यार करता था कि उसने उसका निकाह तक होने न दिया। धिक्कार है ऐसे इतिहासकारों पर जिन्होंने जहाँआरा को शाहजहाँ की रखैल बताया। बेटी और रखैल तोबा तोबा किसने कह दिया?वो तो अब्बू का प्यार था। बाप के इस प्यार को देखकर जब महल में चर्चा शुरू हुई, तो मुल्ला मोलवियों ने एक हदीस का उद्धरण देते हुए कहा कि माली को अपने द्वारा लगाये पेड़ का फल खाने का हक़ है।
क्या अपनी बेटी से व्यभिचार करे वाला क्रूर व्यक्ति प्रेम का पुजारी हो सकता है.