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हम कुछ और नहीं माँगते ...बस ! केवल भर पेट पानी ...दे पायेगी सरकार, भारत के नागरिकों को ....आज़ादी के ६५ साल बाद भी

पेय जल हमारा नैसर्गिक अधिकार हैफिर हम इससे वंचित क्यों हैं कैसे मिलेगा हमें हमारा अधिकार ?कौन दिलाएगा ....या हमें खुद छीनना होगा जेल में बंद आतंकवादियों पर प्रतिदिन लाखों रुपये खर्च करने वाली सरकार हिन्दुओं के बारे में कब सोचेगी 
भ्रष्टाचार और आदर्श के झंझट में प्यास से मर रहे हैं हम. आदर्शों से पहले हमें पानी चाहिए ...ताकि हम जीकर फिर कोई और लड़ाई लड़ सकें ...... 
क्या आपको पता है ?बाईस करोड़ हिन्दुओं को पीने का पानी उपलब्ध नहीं है. हम कुछ और नहीं माँगते ...बस !  केवल भर पेट पानी तो पिलवा दो ब्लोगर भाइयो !

आपका बहुत उपकार होगा !  
    
.....बिन पानी सब सून ........इसे यूँ जाया न करें.
बच्चों को संस्कार दें कि पानी ही हमारी जान है 
  मध्यप्रदेश का बुन्देलखंड तो  जलविहीन  मरुस्थल होता जा रहा है …….       ऐसे में  क्या भ्रष्टाचार की बातें करते हो 
  
संसद में क्या करते हो 

सुप्रीम कोर्ट क्या मुक़दमे लड़ती है 

 
हम क्या कविताएँ ब्लॉग लिखते हैं . बंद करो ये सब विषय 
अरे खा लेने दो,  दो चार लाख करोड़ ,
मना लेने दो सांसदों को मौज 
जीत जाये पकिस्तान ,
हिंदुओं को पेट भर पानी तो दिलवा दो ब्लोगी भाइओ !
और ये हैं सरकारी दावे :
अप्रैल 2005, तक 96.13 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों पूरी तरह और 3.55प्रतिशत को आंशिक तौर पर पेयजल सुविधा मिल रही थी 
क्या आप इससे सहमत हैं  !



Right to Drinking Water in India
Introduction
Despite constitutional mandates and official proclamations,India has lagged behind, among others, in the two most important concerns for the well being of people in any society: (income)poverty and access to clean drinking water and sanitation. Millions of Indians, especially women and children, are living (rather forced to live) in conditions of severe poverty devoid of any meaningful living conditions. About 226 million people lack access to safe water and about 70 per cent of population (about 640 million) lack basic sanitation facilities. About 46 per cent of India's people are living in absolute poverty (i.e. less than one US dollar a day) while 88 percent of pregnant women in the age group 15-49 suffer from anemia. About 62 million children under the age of five are malnourished and one-third of children below 16 are forced into child labour (Haq, 1997). The waterrelated diseases are claiming the lives of about 1.5 million children (500,000 children due to diarrhoea alone) under 5 years and person-days lost in India are estimated to be about 180-200 million a year (Krishnakumar, 2003; Parikh et al, 1999).

 



जब आप शहरों में अपने फ्रिज का पानी पी रहे हों. शेवब्रुश  के वक्त नल चला रखा हो तो उन लोगों को भी याद कर लेना जिनके पास पीने  का पानी भी नहीं है.

जब आप किसी विषय पर कोई सुन्दर सी कविता या महान विषय पर ब्लॉग लिख रहें हों. तब कभी कभी एक लेख पानी की मांग पर भी लिख देना प्रिय भाइयो  
  
पर इनके बारे में तो तब सोचेंजब सरकार इन हिंदुओं को भारतीय नागरिक मानती हो,  उसे तो केवल अफजल गुरू और कसाब की चिंता है………..

3 टिप्‍पणियां:

I and god ने कहा…

प्रिय हरीश जी,
आपने यह टिप्पणी मेरे ब्लॉग पर लिखी , आपका अतिशय धन्यवाद , इसलिए कि आपने इसे टिप्पणी के योग्य समझा .
इसलिए में यहाँ चस्पा कर रहा हूं कि यह एक बड़ा मंच है=

हरीश सिंह said...
अशोक जी, आप हमारे बुजुर्ग हैं, हम आपके अनुभवों से सीख लेना चाहेंगे. महत्वपूर्ण ब्लॉग नहीं होता बल्कि उसकी पठनीय सामग्री होती है. और वह आपके ब्लॉग में होती है. आप द्वारा उठाया गया हार मुद्दा प्रशंसनीय होता है.

JULY 17, 2011 9:11 AM

कौशलेन्द्र ने कहा…

अगला विश्वयुद्ध पेय जल के कारण ही होने वाला है .....हवा, पानी और मिट्टी पर किसी का अधिकार नहीं था ......अब हो गया है.
ईश्वर सोच रहा है कि हमने तो ये नैसर्गिक चीजें मुफ्त में उपभोग के लिए बनायी थीं ...इनका भी व्यापार शुरूकर दिया इन लोगों ने ........ईश्वर ने कान पकड़ लिए हैं ..अब कभी अन्य किसी भी ग्रह पर ऐसा नहीं करेंगे ....भूलकर भी नहीं ......गरीबों का हक सिर्फ और सिर्फ इसी पर तो होता है ...वह भी छिन गया .....

I and god ने कहा…

प्रिय हरीश जी एवं कौशलेन्द्र जी,

आपकी टिप्पणियों के लिए धन्यवाद ,

आज सुबह ही मुझे मेरे एक मित्र के द्वारा पानी व भोजन की कमी के बारे में पता चला. मैंने इन्टरनेट पर वास्तविकता देखि , और इसे आपके साथ शेयर किया .

जब से पता चला है , मेरा तो किसी और मुद्दे से मन ही उचट गया है.

मेरी लिखने की बड़ी सीमा है इसलिए फोन पर आपसे बात करूँगा .

पुनः धन्यवाद
दासानुदास
अशोक गुप्ता
दिल्ली