समर्थक

सुरक्षा की तलाश में घर से बाहर भटकने को विवश एक आम भारतीय



देश का आम नागरिक असुरक्षित है ....
जेलों में बंद आतंकवादी सुरक्षित हैं....
बस्तर के पुलिस थाने असुरक्षित हैं .......पुलिस के लिए सुरक्षित स्थान कहाँ है जहाँ उसे रखा जाय ? शायद जेल ही सबसे सुरक्षित स्थान है क्यों न वहीं रख दिया जाय ?                        
    नागपुर के लोगों ने विचार किया कि हमसे तो बेहतर आतंकवादी हैं .....उन्हें रश्क है उनसे ...उन्होंने मांग की है कि हमें भी अजमल कसाब और अफजल गुरू जैसी सुरक्षा दी जाय. मैं इसमें इतना और जोड़ना चाहता हूँ कि ........"और हर भारतीय कैदी को कसाब जैसा ही भोजन भी दिया जाय"  हमसे वसूले गए टैक्स का कुछ हिस्सा उन बेचारों को भी मिलना ही चाहिए केवल कसाब को ही नहीं. 


    यह एक आम भारतीय की खीझ हो सकती है ....निराशा हो सकती है .....व्यवस्था पर व्यंग्य हो सकता है ....और एक अपरोक्ष सन्देश भी. सन्देश यह कि देश की सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा में हमारी व्यवस्था कितनी असफल हो जाती है पर वही व्यवस्था आतंकवादियों के लिए कितनी चुस्त-दुरुस्त ! सन्देश यह भी है कि सरकार को देश और देशवासियों की कोई परवाह नहीं है. अरुणान्चल में चीन की सीमा पर यह चुस्ती दिखाई नहीं देती ...पकिस्तान की सीमा पर दिखाई नहीं देती .........अपनी किसी तकलीफ के लिए किसी राज्य के सचिव से मिलने जाइए तो नानी याद आ जायेगी ......व्यवस्था इतनी चाक चौबंद ...लगता है कि यही व्यवस्था चीन और पाकिस्तान की सीमा पर होती तो क्या नाक कट जाती इनकी ? 

   उधर मुम्बई हमले के लिए एक बार फिर हमारे राष्ट्रीय विचारक-चिन्तक दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का हाथ होने से इन्कार नहीं किया है.......उत्तम चिंतन है ....यहाँ लोगों की जानें जा रही हैं वहाँ उन्हें उस पर भी राजनीतिक रोटियाँ सेकने  में मजा आ रहा है ! दोष उनका नहीं है ...हर व्यक्ति सरल की ओर पहले देखता है .....इन्डियन मुजाहिदीन और सिम्मी का नाम लेना इतना सरल है क्या ? नाम लेना तो दूर ज़रा कोई माई का लाल सोच कर भी बताये .......गनीमत है माननीय जी ने किसी शंकराचार्य का नाम नहीं बता दिया .....( इसके लिए हम उनके आभारी हैं.....कसम से .......आभारी हैं ). 

   और चलते -चलते ......आज इस सत्र के लिए छत्तीसगढ़ में तीसरी बार पी.एम.टी. की परीक्षा होने जा रही है....और पता चला है कि जहाँ नए प्रश्नपत्रों को रखा गया है वहीं पुराने भी अभी तक रखे ही हैं ...उन्हें हटाया नहीं गया है. हो सकता है कि कल समाचार पत्र में पढ़ने को मिले ...."भूल से नए की जगह पुराने परचे वितरित किये जाने से परीक्षा तीसरी बार भी रद्द " ......किसी में भी रिकार्ड तो बनाना ही चाहिए न !  

1 टिप्पणी:

blogtaknik ने कहा…

हे माँ दुर्गा ! कल से मेरा मन क्रंदन कर रहा है ! हमारे राज्यकर्ताओं की नपुंसकता की शिकार पुनः हमारी हमारी भोली भली जनता हो गयी ! हे माँ इन असुरों की संहार के लिया या तू अवतरित हो या हमें इनके सर्वनाश के लिए भक्ति और शक्ति दे ! अब यह सब असहनीय हो गया है !