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हिंदू कौन

हम कैसे हिंदू हैं, कैसे गर्व करें.

     

आज मेरे घर के सामने एक पडोसी के यहाँ श्री रामचरित मानस का अखंड पाठ रखा गया.
बड़े लोग थे सो बड़े बड़े  लोग पाठ में आये, और किताब खोल कर बैठ गए .

पुजारी जी को क्या सूझा , उन्होंने सबसे उच्च स्वर में पाठ करने को कहा,  बहुतों ने एकदम शुरू कर दिया, उनको साधुवाद है . पर , अफ़सोस है कि अधिकतर सही उच्चारण नहीं कर पा रहे थे ,
मैं उन्हें जानता हूं, बड़ी बड़ी  हिंदू सभा सोसाइटीओं के पदाधिकारी हैं . पढ़ें लिखे हैं . पर उच्चारण नहीं कर पा रहे हैं,  समझना तो बड़ी दूर की बात है . वे धार्मिक नहीं है बल्कि धार्मिक होने का ढोंग करते है.


आखिर ऐसे सेकुलर हिंदू होने के मायने क्या हैं. ! 

हिंदू परिवार में जन्म ले लेना , हिंदू नाम होना , बस ...........


मैं  जानता हूं , आप भी जानते होंगे आपके आस पास . रामायण की एक चौपाई नहीं आती, गायत्री मंत्र नहीं आता, शिखा-सूत्र , तिलक की तो बात ही मत करो, 

 ऐसे  लोग  जिन्हें हिन्दू धर्म के बारे में पता नहीं है. जो खुद को सेकुलर कहलाने में फख्र समझते हैं. ऐसे लोंगो के विचार  राम जन्मभूमि कि बात आते ही बाहर आने लगते हैं. जिन्हें खुद को हिन्दू होने में गर्व नहीं है. वे सेकुलर कुत्ते बोलते है फालतू की लड़ाई  है , वहाँ तो अस्पताल बनाना चाहिए  , मस्जिद भी बन जाये तो क्या फर्क पड़ता  है , 
यही सेकुलर कुत्ते यह भी कहते है की कौन जाने राम हुए भी थे या नहीं , और वहीँ हुए थे इसकी क्या गारंटी है , 

और भी क्या क्या ............

मिशनरी स्कूलों में पढ़े हैं , बच्चे भी उन्हीं में पढ़ रहे हैं . 
 हिन्दू धर्म में जन्म लेने के बाद भी ईसाइयत की शिक्षा लेने वाले क्या सचमुच हिन्दू है. क्या इन्ही हिंदुओं पर हमें गर्व है , क्या ये हिंदू हैं.  इनसे क्या आशा रखें. 


इनका क्या करें. 

        

9 टिप्‍पणियां:

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

अच्छा दृश्यावलोकन है....बधाई ....

सुज्ञ ने कहा…

लेखक के मंतव्य से सहमत नहीं।

महज इसलिए कि हिंदु को उच्चारण नहीं आता, इसलिए उसे हिंदु कहलाने का हक़ नहीं और इसलिए सारे मंदिरो पर मस्जिदें होनी चाहिए?
हिंदु को उसके धर्म-ग्रंथों का अर्थ नहीं पता (जो कि वास्तव में तो गुरूगम्य बिना सम्भव नहीं) इसलिए राम के अस्तित्व से ही इन्कार करदिया जाय।
गर्व नहीं तो गौरवहीन बन लिया जाय?

I and god ने कहा…

आदरणीय डा साहिब एवं सुज्ञ जी ,

टिपण्णी के लिए धन्यवाद ,

असल में मेरी टाइप प्रोब्लम होने से , में पूरी तरह बात लिख नहीं सका , वर्ना जो सुज्ञ जी कहा रहे हैं , वही मेरा मतलब है .

अशोक गुप्ता
दिल्ली

chooti baat ने कहा…

pahle kuchh gine chune hindu hi pdhe likhe hua karte the tab un golo ne saare hiduo ko gyan nahi diya ki kahi hamse aage na ho jaye unhone jatio me aur baat diya छत्रिय ब्राह्मण सूद्र वैशय chaar
hisse kar dene ke baad ab hindu aysa hai jaysa aapne likha asal hindu kon hai kon jane

chooti baat ने कहा…

agar hindu dharm ko janna hai padhe
http://agniveer.com/ me
pranam

सुज्ञ ने कहा…

अशोक गुप्ता जी,
@जो सुज्ञ जी कहा रहे हैं , वही मेरा मतलब है .

मैं समझ नहीं पाया आप क्या कहना चाह रहे है?

मैने को कटाक्ष प्रश्न उपस्थित किए थे, क्या आप वाकई यह कहना चाहते है?

Ankit.....................the real scholar ने कहा…

मित्रों , मुझे इस मंच पर सलाहकार का दायित्व दिया गया है अतः मेरे कुछ कर्तव्य हिं इस मंच के प्रति | मैं इस मंच पर अशोक जी द्वारा लगातार इस मंच की भावना के विपरीत पोस्ट लगाये जाने की सार्वजनिक रूप से अत्यंत कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ और अशोक जी तथा उनके लेखों को इस मंच पर बनाये रखने के प्रबंध तंत्र के निर्णय से असहमति जताते हुई इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के निवेदन के साथ इस निर्णय का भी विरोध करता हूँ क्यों की मुझे लगता है की यां निर्णय और यह निष्क्रियता इस मंच के लिए हानिकर है |
वन्दे मातरम

I and god ने कहा…

प्रिय अंकित जी,

में आपके दायित्व का सम्मान करते हुए, यदि ब्लॉग की भावनाओं कि विरुद्ध यदि मैंने कुछ लिखा हो तो उसका मुझे अफ़सोस है.

मेरा विचार है कि हल्ला बोल , हिंदुओं की भावनाओं को मुखर करने के लिए बना ब्लॉग है, और हिंदू मात्र को सशक्त करना ही मेरा मंतव्य भी है .

यदि कहीं इसमें चूक हुई है तो मैं छमाँ प्रार्थी हूं , पर यदि कुछ पता चल पाता तो मुझे सावधानी रखने में सुविधा होती ,

अशोक गुप्ता
दिल्ली

कौशलेन्द्र ने कहा…

प्रिय बंधुओ ! आज अभी-अभी श्री अशोक गुप्त जी का सन्देश मिला. आप लोगों की आहत हुयी भावनाओं के लिए दुखी हैं.....वस्तुतः उनकी भावना त्रुटियों की ओर ध्यान दिलाकर परिमार्जन की आवश्यकता बताने की थी ...अंग्रेजी अभ्यास के कारण एवं हिन्दी के अल्प ज्ञान और हिन्दी टाइपिंग में अनभ्यस्त होने के कारण हुयी त्रुटि के लिए वे दुखी हैं. मैं तो उनकी विनम्रता का कायल हो रहा हूँ ....मैंने उनसे अनुरोध किया है कि वे किसी भी लेख को हल्ला बोल में प्रकाशन से पूर्व सम्पादन हेतु मेरे या हरीश जी के पास भेज दें. मैं आशा करता हूँ कि अब कोई मनोमालिन्य नहीं रहेगा.