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ये वक्तव्य

देश के मुखिया ने फरमाया -
"नहीं होने देंगे 
और आतंकी हमले"
युवराज ने फरमाया -
"सभी आतंकी हमलों को रोकना 
मुमकिन नहीं"
तब से 
मैं बैठाने की कोशिश कर रहा हूँ 
कोई तालमेल 
इन दोनों के फरमानों में. 

....................................
बचपन से अबतक .....जीवन के उत्तरार्ध तक 
कितने आश्वासन सुने हैं 
पूरे 
न जाने कब होंगे ?
होंगे भी या नहीं ...कौन जाने ? 
....................................
उन्होंने देखा ...वे देखते रहे ....वे देख लेंगे .....
पता नहीं क्या ? 
हम तो देखते रहे हैं ....
देख रहे हैं ......
और शायद देखते रहेंगे .......
यूँ ही .....
बहता हुआ खून,
घुटती हुयी चीखें 
अनाथ होते मासूम
और........
तुम्हारी लफ्फाजी.
.........................
पर 
अब कोई सुनता नहीं है  
शिखंडियों के प्रलाप       
इसलिए   
बंद करो ये वक्तव्य 
और 
मातम तो मना लेने दो हमें 
ज़रा ठीक से.

1 टिप्पणी:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

अब यही तो रह गया है करने के लिये...