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फिजा में है गर्जना, एक नौजवान की...

वन्दे मातरम आदरणीय बंधुओं,
मेरा एक छोटा सा प्रयास आपके सम्मुख है .........

अन्ना हजारे के अनशन पर 

 
राम लीला मैदान से, बहती हुई हवा,
आमद है यकीनन, एक नये तूफ़ान की.........
जागो, उठो, लडो, कि तुम्हे जीतना ही है,
फिजा में है गर्जना, एक नौजवान की........
लोकपाल पर जीत
ये, तेरी नही मेरी नही,
सरकार पर जीत ये, है जीत हिन्दुस्तान की......

बिखरते परिवारों
पर

गैरों से क्या शिकवा करूं, अपनों ने है ठगा,
मेरी जां ने ही लगाई कीमत मेरी जान की......... 
कल तक जहाँ रहती थी, खुशियों की ही सदा,
सन्नाटे में गूंजती है चीख , उस मकान की........

मजहब के ठेकेदारों पर

मजहब, धर्म, जातियों में, बट के कल तलक,
हम लूटते रहे जान, मजदूर की किसान की ........
हैं कोशिशें उनकी की हम, फिर्कों में हों बंटे,
पर चल ना सकी दुकनदारी, उनकी दुकान की.......

 
दिल चीर कर दिखाने से, हासिल कहाँ है कुछ,
जो दिखी ना सच्चाई उन्हें, मेरे ब्यान की........
उनको खबर कहाँ कि, जो खामोश हो
ज़बां,
ये शायरी ज़बां है किसी बेज़बान की........

सरहद पे या कि घर में जान जाए जवान की

सर पर कफन को बांधे बढ़ता हूँ मैं मगर,
चिंता कहाँ है उनको मेरी जान की.......

वो ज़ेब ही भरने में हर पल रहे मग्न,
मुझको सदा है चिंता मेरे भारत महान की.......

टाटा बढ़ेगा क्यूँकर रिलायंस को फायदा हो,
उन्हें फ़िक्र कहाँ मजदूर की किसान की .........

तोपों में हो घोटाला बेशक बुल्ट हो नकली
सरहद पे या कि घर में जान जाए जवान की .........

हिन्दू मरा या मुस्लिम इसकी फ़िक्र किसे है,
लाशों पे ही रखी है नीव मेरे मकान की .........

बेशक तेरे कहर से मेरी जबां बंधी है,
ये शायरी जबां है किसी बेजुबान की...........

भारतीय संस्कृति का केंद्र कराची और दोगले, काले अंग्रेज नेहरु की काली करतूत

भारतीय संस्कृति का केंद्र कराची
कराची का पुराना नाम देवल नगर था। वहां कभी कितने मंदिर होंगे, इसका हिसाब लगाना कठिन है, पर पाकिस्तान में शामिल हो जाने के बाद भी आज वहां हिंदुओं के अनेक मंदिर हैं। कुछ बंद कर दिए गए हैं, तो कुछ ऐसे हैं, जहां शापिंग मॉल बना दिए गए हैं।

पाकिस्तान में कराची की स्थिति वही है, जो भारत में मुबई की है। इन दोनों नगरों में आज भी गुजराती सभ्यता के दर्शन होते हैं। मुंबई में कोई व्यक्ति यदि कच्छी बोलता हुआ मिल

मुस्लिम जनसंख्या का एक कटु सत्य यह भी

मुस्लिम जनसंख्या के आंकड़ों का इतिहास विश्व में अपनी अलग ही हकीकत बयान करता है. सब  कुछ खुला है...न कुछ छिपा हुआ न कुछ बनावटी . क्या इसे नज़र अंदाज़ कर दिया जाना चाहिए ? कम से कम मुस्लिम जनसंख्या के बढ़ने से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति हमें सचेत तो हो ही जाना चाहिए.
जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक मौलाना मौदूदी कहते हैं कि कुरान के अनुसार विश्व दो भागों में बँटा हुआ है, एक वह जो अल्लाह की तरफ़ हैं और दूसरा वे जो शैतान की तरफ़ हैं। देशो की सीमाओं को देखने का इस्लामिक नज़रिया कहता है कि विश्व में कुल मिलाकर सिर्फ़ दो खेमे हैं, पहला दार-उल-इस्लाम (यानी मुस्लिमों द्वारा शासित) और दार-उल-हर्ब (यानी “नास्तिकों” द्वारा शासित)। उनकी निगाह में नास्तिक का अर्थ है जो अल्लाह को नहीं मानता, क्योंकि विश्व के किसी भी धर्म के भगवानों को वे मान्यता ही नहीं देते हैं।
इस्लाम सिर्फ़ एक धर्म ही नहीं है, असल में इस्लाम एक पूजापद्धति तो है ही,

प्रिय पाठक बंधुओं

आज से मैंने भी अपने एक निजी ब्लॉग पर लेखन का कार्य शुरू किया है ! जिससे अपने विचारों व जानकारियों को अपने राष्ट्र्यवादी मित्रों तक पंहुचा सकूँ व उनसे मार्गदर्शन प्राप्त कर सकूँ ! मैं भी अपने हिन्दुतत्व धर्म का प्रचार प्रसार व नव राष्ट्रया निर्माण मैं एक सक्रिय भूमिका निभाना चाहता हूँ !
आप सभी राष्ट्र्यावादी ब्लोगर मेरे प्रेरणा श्रोत है ! मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ व विशेष धन्यवाद vishvguru ब्लागस्पाट अध्यक्ष - कौशलेन्द्र जी को जिनके ब्लॉग से मैंने लेखन कार्य शुरू किया !
आप सभी से अनुरोध है की आप भी मेरे ब्लॉग पर जा कर आपने विचार, व कमेन्ट दे कर मेरा उत्सह वर्धन करें !
धन्यवाद ! ब्लॉग लिंक - http://jhindu.blogspot.com/

बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीत


इतिहास का पहला अनशन

भारतीय साहित्य में सबसे पहले अनशन का जिक्र आया है रामायण में.  


आप अधिकतर ने यह पढ़आ हुआ है, में केवल याद दिला रहा हूँ 


जब सुंदरकांड में भगवान राम ने मर्यादा पूर्वक सागर से रास्ता माँगा 


       
विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत। 


बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीत।।




तीन दिन बहुत विनय की , 


फिर श्री राम ने लक्षमन से कहा मेरा धनुष लाओ . 


पर अन्ना तो अहिंसा के पुजारी हैं .  काश श्री राम भी अहिंसा के पुजारी होते . 

साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक राष्ट्रीय एकता के लिए घातक

विमल कुमार राठौर
प्रस्तावित “साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक – 2011” एक खतरनाक कानून है। भारत सरकार के सम्मुख प्रस्तुत किए गए इस प्रस्तावित विधेयक को बनाने वाली टोली की मुखिया हैं श्रीमती सोनिया गांधी हैं। सोनिया गांधी के अतिरिक्त टोली का कोई और व्यक्ति जनता के द्वारा चुना हुआ जनप्रतिनिधि नहीं है। विधेयक तैयार करने वाली इस टोली का नाम है ‘‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद’’। श्रीमती गांधी की टोली में शामिल अन्य लोगों में सैयद शहाबुद्दीन जैसे मुसलमान, जॉंन दयाल जैसे इसाई और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे धर्मनिरपेक्ष लोग हैं।

इस प्रस्तावित विधेयक के मूल पाठ का अवलोकन करने के बाद कई विचारणीय बातें खुलकर सामने आईं हैं जिन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक हैं-

1- प्रस्तावित विधेयक में कहीं भी विधेयक के उद्देश्य को उल्लेखित नहीं किया गया है।

ओबामा ने की हिंदू संगठन की सराहना


ओबामा ने की हिंदू संगठन की सराहना

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यहां जनसेवा में जुटे हिंदुत्वनिष्ठ संगठन 'हिंदू अमेरिकन सेवा चैरिटीज' (एचएएससी) की जमकर तारीफ की है।

ओबामा ने संगठन के दूसरे वार्षिक सम्मेलन में भेजे अपने संदेश में कहा, “एचएएससी जैसे संगठन दूसरों की मदद करके अमेरिकी जनता की सेवा भावना को प्रकट करते हैं। यह इस बात का भी प्रमाण है कि हम दुनिया भर की चुनौतियों का सामना मिलकर कर सकते हैं।”

एचएएससी के तत्वाधान में 'इंपार्टिंग चेंज इन अमेरिका एंड एब्रॉड' नामक तीन दिवसीय समारोह 29 जुलाई से आरंभ हुआ था। व्हाइट हाउस में पहले दिन के समारोह में 200 हिंदू अमेरिकी और अन्य लोग उपस्थित थे।

ओबामा ने कहा, “अमेरिकी होने के नाते हम खुद की और दूसरों की जिम्मेदारी लेते हैं। हम मानवता और दूसरों के भले के लिए पूरा योगदान देते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जनसेवा के कार्य को लेकर समझ और विकसित होगी।”

वीएचवी। अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो। पवन। 04 अगस्त 2011

करने प्रकाश सारे जग में, बिजली सा कोंद चलो यारों..

वन्दे मातरम बंधुओं,

सच का गला रेतने को, शमसीर हजारों हैं बेशक,
ईमानदारी की राह रोकने, तीर हजारों हैं बेशक,
भय, भूख और भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, गुंडा गर्दी,
हम तोड़ के इनको निकलेंगे, जंजीर हजारों हैं बेशक.........
सोने की चिड़िया लूटने की, आदत उनको है बेशक,
गरीब, मजबूर कुचलने की, ताकत  उनको है बेशक,
दूध दही का देश मेरा, आज हुआ भूखा नंगा,
फिर दूध की नदी बहाने की, चाहत हमको है बेशक............

बेशक सत्ता की नजरों में, हम आतंकी, हम अपराधी,
है अखतियार उनको वो हमे, घोषित करदें बेशक बागी,
अब जहर से लड़ने की खातिर, जहर हमे बनना होगा,
वो बना हमारा सम्बल है, आजादी का दूजा गाँधी.........

अन्ना ने जो राह दिखाई, उस पर दौड़ चलो यारों,
रिश्वतखोरों की छाती को, पैरों रोंद चलो यारों,
भ्रष्टाचार जो खून बना, बहता तेरी मेरी नस नस,
करने प्रकाश सारे जग में, बिजली सा कोंद चलो यारों...........






चैतन्य विज्ञान बनाम जड़ विज्ञान ! जड़ जगत की सृष्ठी हैं पदार्थ, जबकि प्राण जगत की तरंगे ।

    जड़ विज्ञान पदार्थों की क्रिया प्रतिक्रिया का शास्त्र हैं जिसका प्रकृति और स्वास्थ्य से बहुत ही सीमित संबंध हैं इसका स्थूल उदाहरण होम्योपैथिक औषधियाँ हैं जैसे किसी के शरीर मे आइरन की कमी हो जाये और डॉक्टर उसे फेरम फॉस 200 लेने को कहें तो आप देखेंगे की आइरन फेरस से बनी होने पर भी उसमें आइरन न होकर केवल अल्कोहल ही होगा । 

अन्ना आंदोलन एवं जन क्रान्ति व उसका इतिहास ....ड़ा श्याम गुप्त ...





वामन व राजा बलि

राजा वेन की जंघा मंथन





भगवान राम

 युग कांतिकारी कृष्ण  




महात्मा गांधी
 



                   सरकार व उसके अधिकाँशतर चुप रहने वाले पीएम व सर्व विज्ञ मंत्रीगण एवं मसखरे सिब्बल यह कहते नहीं अघाते कि नियम, क़ानून व व्यवस्था हर एक के या  चार-पांच लोगों के या सिर्फ अन्ना के   कहने से नहीं बनते अपितु एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत संसद में ही बन् सकते हैं | क्या वे नहीं जानते कि यहाँ लोक तो रहता ही सडकों

जब देशविरोध-हिन्दूविरोध ही कांग्रेस की असलियत है फिर कांग्रेस से देशभक्ति की उम्मीद क्यों?


Angry smile
हम सब जानते हैं कि कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ने भारतविरोधियों वोले तो हिन्दूविरोधियों के हित साधने के लिए 1885 में की।
अंग्रेज द्वारा कांग्रेस की स्थापना का एकमात्र मकसद था एक ऐसा गिरोह तैयार करना जो भारतीयों को अपना सा लगे लेकिन जिसका मूल मकसद हो भारत को तबाह करना।
कांग्रेस की स्थापना से लेकर आज तक कांग्रेस पर उन्ही लोगों का कब्जा रहा जिनमें भारतविरोध वोले तो हिन्दूविरोध कूट-कूट कर भरा हो। वेशक इसमें कुछ अपबाद भी देखने को मिले ।

खिलाफत अन्दोलन के समर्थन के बहाने मुसलिम अलगावबाद का समर्थन

1923 में जब देश में स्वातन्त्रता संग्राम के दौरान सब हिन्दू-मुसलिम मिलकर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से तंग आकर एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे तभी कांग्रेस ने अलगाववादी मुसलमानों के दबाब में आकर खिलाफत अन्दोलन का समर्थन कर एक ऐसा षडयन्त्र किया जिसाक परिणाम मुसलिम लीग की स्थापना के रूप में हुआ जो आगे चलकर सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन का एककारण वनी। यहां हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि डा वलिराम हेडगेवार जी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने गांधी-नैहरू के इस निर्णय का विरोध किया लेकिन गांधी-नैहरू ने किसी की एक न सुनी। बाद में डा हेडगेवार जी ने 1925 में RSS की स्थापना कर देशभक्त नागरिकों के निर्माण का कार्य शुरू किया जो आज तक जारी है। आज देशभक्त नागिरकों की बढ़ती फौज ही कांग्रेस की परेसानी का सबसे बढ़ा कारण बन रहा है।

प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी का विरोध

Netaji Subhash chander Bose ji1939 में प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी का नेहरू-गांधी के विरोध के बाबजूद कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना। लेकिन ये ऐसी घटना थी जिसने हिन्दूविरोधी देशविरोधी कांग्रेसियों को झकझेर कर रख दिया । बस फिर क्या था ये सब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी नैहरू-गांधी के नेतृत्व ऐसे षडयन्त्र करने में जुट गए जिनके परिणाम प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा।

गिरि गोधन को उठाया होगा....ड़ा श्याम गुप्त ...

                                                   ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

 










गोवर्धन गिरिधारी ने जब, गिरि गोधन को उठाया होगा ।
मन में एक बार तो हरि के, एसा भी कुछ आया होगा।
गीता ज्ञान दिया गोविन्द ने, मन कुछ भाव समाया होगा |
नटवर ने कुछ सोचा होगा, मन कुछ भाव बसाया होगा।।

युग युग तक ये कर्म कथाएँ ,जन मानस में पलती रहें।
तथा
कर्म, कर्मों की गति पर,संतति युग युग चलती रहें ।

5 कदम देश के विकास के लिए


अमेरीका,चीन,जापान,यूरोप,ऑसट्रेलिया आदि की सफलता का क्या राज है? वैदिक युग में भारत की सफलता का क्या राज था? क्या कारण है कि कोई भी कटटर मुस्लिम देश जैसे कि पाकिस्तान, इराक, ईरान आदि कभी विकास नही कर पाय़ा? इन सभी सवालों का जवाब य़ह है कि कोई भी देश बिना महिलाओं के विकास करे बिना विकास नही कर सकता लेकिन भारत और पाकिस्तान के विभाजन के इतने सालो बाद आज भी हमारे देश में ऐसे बहुत से कटटर मुस्लिम है जो अपनी मुस्लिम लडकियो को तो बिलकुल आजा़दी नही देते लेकिन दूसरे धम की लडकियो से शादी करके उनहे मुस्लिम बनाना उनकी पहली पसंद होती है. वोट के भूखे हमारे देश के महान नेताओ ने कटटर मुस्लिमो को खुश करने के लिए अलग से विशेष इस्लामिक कानून बना रखे है जिसके तहत एक मुस्लिम आदमी बिना अदालत गए तलाक ले सकता है और एक साथ कई शादियाँ कर सकता है. आज हम सभी को यह प्रण लेना चाहिए कि हम अपना वोट उसी को देगें जो निम्नलिखित 5 कदम लेगा-

आशियाना कालोनी लखनऊ में अन्ना समर्थन रैली.....ड़ा श्याम गुप्त...

        लगभग ४ दिनों सेआशियाना कालोनी सेक्टर -के  की जागरूक महिलायें अन्ना  हजारे के समर्थन में प्रतिदिन एक सांध्य रैली का आयोजन कर रही हैं | पेश है शनिवार-२०-०८-११  की एक सांध्य रैली की झलक ...जिसकाआयोजन श्रीमती शर्मा, श्रीमती शुभा श्रीवास्तवने व  नेतृत्व श्रीमती सुषमा गुप्ता व नीलम गुप्ता ने किया , साथ में श्रीमती अपर्णा गुप्ता,  श्रीमती सिंह ,श्रीमती सुमन . ममता दास , मीनू चावला ,मिली खरबंदा, शशि मिश्रा , श्रीमती शशि शर्मा , श्रीमती राय  व  कु.यशिका आदि ने भाग लिया |



कु यशिका व अन्य ध्वज  लहराते हुए...

“दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे हम वतन के लिए॒सिर कटाते रहे”

280 लाख करोड़ का सवाल है ...
"भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा" ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का ! स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है.

चिंतन मनमोहन सिंह का


पन्द्रह अगस्त हमारा स्वाधीनता दिवस है। इस दिन प्रधानमंत्री महोदय लालकिले से भाषण देते हैं। इसमें वे देश और विदेश की नीति तथा अपनी उपलब्धियों की चर्चा करते हैं।

इस भाषण के बारे में चिंतन-मनन काफी पहले से होने लगता है। पिछले दिनों इसी चिंतन में डूबे मनमोहन जी को बैठे-बैठे झपकी लग गयी। उन्हें लगा मानो वे लालकिले से भाषण दे रहे हैं। उसके कुछ अंश आप भी सुनें।

भाइयो और बहनो, जय हिन्द।

आज हम आजादी की सालगिरह मना रहे हैं। कैसी हैरानी की बात है कि

गोधरा नरसंहार पर न्यायालय का निर्णय


गोधरा नरसंहार के नौ वर्ष बाद आये विशेष न्यायालय के फैसले में 11 अभियुक्तों को मृत्युदण्ड और 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी है। न्यायालय ने मुख्य अभियुक्त मौलवी उमरजी सहित 63 अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया; वहीं तत्कालीन कांग्रेस पार्षद हाजी बिलाल पर अभियोग सिद्ध हुआ है। न्यायालय ने उसे मौत की सजा सुनाई है।

मुसलमानों के साथ क्यों जुड़ गया पिछड़ापन


विभिन्न कांग्रेसी प्रधानमंत्री मुसलमानों की कमजोर आर्थिक हालत का हवाला देते हुए उनके लिए नई योजनाएं और नए अवसरों की बात करते हैं। सच्चर आयोग सहित कई आयोगों और समितियों ने भी इसी तरह की बात कही है। लेकिन ये संस्थाएं और नेता सारे हालात को उनकी पूरी पृष्ठभूमि और समग्रता के चश्मे से देखने में प्रायः नाकाम ही रहे हैं। मुसलमानों के आर्थिक पिछड़ेपन की असलियत को जानने के लिए इस मुद्दे को राजनैतिक पूर्वाग्रह से मुक्त होकर देखने की जरूरत है।

कंधों पर गुलामी के बोझ ढो रही है जल और वायु सेना

नयी दिल्ली। देश जब आजादी के 65 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तो इस बात का अहसास बहुत कम लोगों को है कि सुदूर समुद्र और आकाश में स्वाधीनता की रखवाली करने वालों के कंधों पर अंग्रेजी जमाने की गुलामी के चिन्ह आज भी बरकरार हैं।


वहीं, थल सेना ने देश की आजादी के साथ ही ब्रिटिश चिन्हों को अलविदा कह दिया और अपने कंधों पर गौरव चिन्ह के रुप में अशोक की लाट के राष्ट्रीय चिन्ह को अपना लिया। थल सेना के अधिकारियों के कंधों पर आज एक भी गुलामी की यादों का चिन्ह नहीं है।
भारतीय नौसेना के अधिकारियों के कंधों की पट्टी

पर भारत की बात निराली....ड़ा श्याम गुप्त....



                                     ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
पर  भा की बात निराली 

सारा जग सुंदर अति सुंदर,
पर भारत की बात निराली |
गूंजे  प्रेम-प्रीति की भाषा ,
 वन उपवन तरु डाली डाली |
मेरे देश की बात निराली,
भारत की हर बात निराली ||

अहिंसा क्या है ?


साधारण अर्थ में मन , वचन और कर्म के द्वारा किसी भी प्राणी को कष्ट न देना , न सताना , न मारना अहिंसा कहलाता है । अहिंसा परमधर्म है । किन्तु अहिंसा की यह परिभाषा बहुत ही अपूर्ण और असमाधान कारक है । केवल शब्दार्थ से अहिंसा का भाव नहीं ढूँढा जा सकता , इसके लिए योगेश्वर श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दी गई व्यवहारिक शिक्षा का आश्रय लेना पडेगा ।
जिस पुरूष के अन्तःकरण में ' मैं कर्ता हू ' ऐसा भाव नहीं है तथा जिसकी बुद्धि सांसारिक पदार्थ और कर्मो में लिप्त नहीं होती है , वह पुरूष सब लोगों को मारकर भी वास्तव में न तो मारता है और न ही पाप से बंधता है । जिस हिंसा से अहिंसा का जन्म होता है , जिस लडाई से शान्ति की स्थापना होती है , जिस पाप से पुण्य का उद्भव होता है , उसमें कुछ भी अनुचित या अधर्म नहीं है । वास्तव में मानवता की रक्षा के लिए दुष्टों का प्राण हरण करना तो शुद्ध अहिंसा है । अत्याचारी के अत्याचार को सहन करने का नाम अहिंसा नहीं यह तो मुर्दापन है । मृत शरीर पर कोई कितना ही प्रहार करता रहे , वह कोई प्रतिकार नहीं करता । इसी प्रकार जो मनुष्य चुपचाप अत्याचार सह लेता है , वह मृत नहीं तो और क्या है ?
भारतीय वैदिक संस्कृति में अत्याचार सहने का नहीं बल्कि अत्याचारी को दण्ड देने का विधान है जैसा कि मनुस्मृति के निम्नलिखित श्लोक से प्रकट है -

अगीत ---ड़ा श्याम गुप्त...



वे राष्ट्र गान गाकर,गाकर ,
भीड़ को देश पर मर -मिटने की ,
कसम दिलाकर ;
बैठ गए लक्ज़री कार में जाकर ;
टोपी पकडाई पी ऐ को-
अगले वर्ष के लिए ,
रखे धुलाकर |


एक आम आदमी से, डरी सरकार क्यों ?.........

वन्दे मातरम बंधुओं,

अन्ना के अनशन पे, इतना हाहाकार क्यों,
एक आम आदमी से, डरी सरकार क्यों ?.........

हिटलर ओ नाजी से, पी एम् हुए हैं क्यों?
स्वतंत्र भारत में, स्वतन्त्रता पे वार क्यों?.........

लोकपाल जबकि, सरकार लाना चाहती है,
लोकपाल पे आखिरश, खीची तलवार क्यों?.........

बाबा रामदेव का, दमन ये कर चुकी,
हक मांगने वालों पे, करती अत्याचार क्यों?.........

सत्ता से सडक तक, दलाल ही दलाल बस,
लोभी, लम्पट, लालचियों की, आई बहार क्यों?.........

भ्रष्टाचार खत्म हो, है सबकी जुबान पे ये,
लोकपाल बनने में, फिर भ्रष्टाचार क्यों?.........

लोकतंत्र जबकि, जनता के दम से है,
मेरे भारत वर्ष में, फिर लोकतंत्र की हार क्यों?.........




आतंकवादियों के गिरोह PUCL ने माननीय Bombay High Court सहित सम्पूर्ण न्यायापालिका को Communal घोषित कर मालेगांव धमाके की जांच महाराष्ट्र के बाहर करवाने की मांग रखी...-1

माननीय उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त 2011 को मालेगांव धमाके के सबन्ध में जमानत यचिका की सुनवाई के दौरान सबूतों के आधार पर पाया कि शिवनारायण कलसांगरा व शयाम साहु का मालेगांव धमाके से कोई सरोकार नहीं है ।उन्हें सिर्फ इसलिए अपराधी करार नहीं दिया जा सकता क्योंकि वो उन लोगों को जानते थे जिन पर धमाके करवाने का संदेह है।

पुनर्मूषको भव......ड़ा श्याम गुप्ता

रहते थे जब हम जंगल में ,
कंद मूल फल खाया करते |
नर-नारी,फल-फूल जुटाने ,
 दोनों ही वन जाया करते |

जीवन कठिन, सरल मानव था ,
 हिंसक जीव राह में मिलते |
 वर्षा धूप शीत को सहते,
 जीवन कठिन बिताया करते |

  हंसी खुशी से सारे ही तो ,
   जीवनके व्यवहार थे चलते |
   सुख-दुःख के वे सारे ही स्वर, 
   खुले गगन में ही थे ढलते  |

भारत के सर्वनाश करने का बीजारोपण

प्रिय बंधुओ ! 
     इस मानसून सत्र में प्रस्तावित विधेयक-  "साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम ( न्याय एवं क्षतिपूर्ति)  २०११ " भारत को हिंसा की आग में झोंक देने की पृष्ठ भूमि है . अल्प संख्यकों के हित की आड़ में पूरे देश को कई वर्गों में बाँट देने का षड्यंत्र हमें समझना होगा. यदि यह क़ानून बनता है तो इसके दूरगामी परिणाम भारत को खंडित करने वाले होंगे . धर्म के आधार पर एक बार खंडित हो चुके भारत के इतिहास ने पूरे विश्व को यह सन्देश दे दिया है कि भारत को आसानी से खंडित किया जा सकता है . एक पांचवी पास रोमन कैथोलिक महिला स्वतन्त्र भारत में भारतीयों के द्वारा ही भारत के सर्वनाश करने का बीजारोपण कर रही है और हमारा विपक्ष तमाशा देख रहा है . निश्चित ही इस विध्वंसक  क़ानून के बनने  के बाद  देश में एक भयानक साम्प्रदायिक और जातीय आग भड़केगी   ...........एक ऐसी भीषण आग जो ज़ल्दी बुझाए नहीं बुझेगी. एक ऐसी अराजकता उत्पन्न होने वाली है जो बहुसंख्य भारतीयों के मौलिक अधिकारों को निगल जायेगी . जातीय भेदभाव, जो बहुत सीमा तक वर्त्तमान भारत से समाप्त हो चुका है, को पुनः लादने का षड़यंत्र किया जा रहा है. "दुश्मन का दुश्मन अपना मित्र " के सिद्धांत के आधार पर सारे अल्प संख्यकों का अभूतपूर्व ध्रुवीकरण धर्मांतरण के लिए उत्प्रेरक  का काम करेगा.
 भारतीय समाज को "समूह "नाम की एक और नयी जाति में बाँट देने का षड्यंत्र किया जा रहा है जो निश्चित ही स्वयं को धर्मांतरण के लिए स्वस्फूर्त गति से प्रस्तुत करेगी. मैं जानना चाहता हूँ कि आज शालाओं से लेकर महाविद्यालयों तक और निजी या सरकारी विभिन्न संस्थानों

अनुकरणीय है तजाकिस्तान का नया नियम

   अमन पसंद  मुसलमानों के लिए तजाकिस्तान का नया नियम अनुकरणीय है . मुस्लिम बहुल तजाकिस्तान की सरकार ने धार्मिक उन्माद को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अट्ठारह साल से कम उम्र के युवकों को मस्जिदों में जाकर नमाज़ अदा करने पर आज से प्रतिबन्ध लगा दिया गया है.
     इस बात से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि तजाक सरकार को विवश हो कर यह क़ानून बनाना पड़ा है. जब सामान्य समझाइश से काम नहीं चलता, क़ानून तभी बनाया जाता है. सरकार की सोच यह रही कि अट्ठारह वर्ष से कम उम्र के युवक धर्म के बारे में परिपक्व नहीं होते, उन्हें आसानी से बरगलाया जा सकता है और धर्म के नाम पर आतंकवाद या असामाजिक गतिविधियों की और धकेला जा सकता है . तजाकिस्तान सरकार की नियति स्पष्ट है कि वह अपने देश की युवा शक्ति को सही दिशा में ले जाने के लिए दृढ संकल्पित है. 
     इस्लामी दुनिया के तमाम देशों के लोगों को तजाकियों से सबक लेने की आवश्यकता है. यही बात भारत के लिए भी है कि जब मुस्लिम बहुल देश ऐसा कदम उठा सकते हैं तो भारत में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता ?    

राष्ट्रद्रोहियों की पैरोकार ! सोनिया सरकार

नई दिल्ली में हिना ने बढाया अलगाववादियों का एजेंडा ! क्यों चुप रही भारत सरकार ?
'जंगे आजादी के समर्थन' पर आपत्ति क्यों नहीं की भारत के गृह मंत्रालय ने ?
श्री नगर में नजरबन्द अलगाववादी नेताओं को किस कानून के अंतर्गत वार्ता के लिए रिहा किया गया ?
और उन्हें सरकारी खर्चे पर दिल्ली लाया गया हिना रब्बानी का हुश्न दिखाने के लिए ?
क्या भारत का कोई मंत्री पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्रों में सक्रिय पाकिस्तान विरोधी नेताओं से भेंट कर सकता है ?

हिन्दू दलाल, कुत्ता, पाखंडी, श्री हरामी स्वामी अग्निवेश


अग्निवेश के बयान से आहत हिंदुओं ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। श्री अमरनाथ बर्फ़ानी लंगर संगठन ने सोमवार को राजधानी के प्रसिद्ध धरनास्थल जंतर मंतर पर स्वामी अग्निवेश के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता अग्निवेश द्वारा बाबा अमरनाथ के संबन्ध में दिये गये बयान का विरोध कर रहे थे। विश्व के करोडों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बयान देने के लिए उन्होंने अग्निवेश के गिरफ़्तारी की मांग भी की।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संगठन के प्रधान विजय ठाकुर ने कहा कि श्रीनगर में कुख्यात देशद्रोही सैयद अलीशाह गिलानी के घर जाकर स्वामी अग्निवेश द्वारा यह कहा जाना कि श्री अमरनाथ यात्रा धर्म के नाम पर आडम्बर और पाखण्ड है तथा यह भगवान नहीं बर्फ़ का टुकडा है, विश्व के करोडों हिन्दुओं की भावनाओं पर कुठाराघात है।

कुरान

१. ''आरम्भ साथ नाम अल्लाह के क्षमा करने वाला दयालु ।'' (१ : १)
समीक्षक-''मुसलमान लोग ऐसा कहते हैं कि यह कुरान खुदा का कहा है। परन्तु इस वचन से विदित होता है कि इसका बनाने वाला कोई दूसरा है क्योंकि जो परमेश्वर का बनाया होता तो ''आरम्भ साथ नाम अल्लाह के'' ऐसा न कहता किन्तु ''आरम्भ वास्ते उपदेश मनुष्यों के'' ऐसा कहता।'' (पृ ५४४)

२. ''सब स्तुति परमेश्वर के वास्ते है जो परबरदिगार अर्थात्‌ पालन करने हारा है तब संसार का। क्षमा करने वाला दयालु है।'' (१ : २)
समीक्षक-''जो कुरान का खुदा संसार का पालन करने हारा होता और सब पर क्षमा और दया करता है तो अन्य मत वाले और पशु आदि को भी मुसलमानों के हाथ से मरवाने का हुकम न देता। जो क्षमा करने हारा है तो क्या पापियों पर भी क्षमा करेगा ? और जो वैसा है तो अगे लिखेंगे कि ''काफ़िरों को कतल करो'' अर्थात्‌ जो कुरान और पैगम्बर को न मानें वे काफ़िर हैं, ऐसा क्यों कहता है? इसलिए कुरान ईश्वरकृत नहीं दीखता।'' (पृ. ५४४-५४५)

जन्माष्टमी का चंदा उघाई


जन्माष्टमी की बधाई , आप सबको 



दिल्ली में जहाँ में रहता हूं, वहाँ के श्री राम मंदिर में , जन्माष्टमी का चंदा इकठ्ठा किया जाता है. चूँकि जन्माष्टमी के दिन बहुत लाइटें लगती हैं , झाकियां सजती हैं,  बहुत सारा प्रशाद वितरित होता है .


कभी कभी में भी उगाहने वालों के साथ होता हूं. 


पहले तो यह विचार हुआ कि , देख भगवान में तेरे लिए दरवाजे दरवाजे जा रहा हूं . जरा नोट रखना, कि मैं तुम्हारे लिए , लोगों की , बातें भी सुन रहा हूं. कुछ सम्मान भी करते हैं, तो कुछ व्यंग भी करते हैं.
ध्यान रखना , जब मेरे बारी आये तब .

आर एस एस के लिए , एक ईसाई जज क्या कहते हैं ?


8.8.11


आर एस एस का , एक ईसाई जज द्वारा, चेहरा बेनकाब


rss : an eye-opening speech by a christian judge, about a hindu organisation

आर . एस . एस . के बारे में एक ईसाई सुप्रीम कोर्ट का जज क्या कहता है , ये जानें.
(उनके लिए भी , जो आर . एस एस को केवल अख़बारों से जानते हैं )
बहुत तोल कर जज साहिब ने लिखा है . 
मुझे पसंद आया . शायद आपको भी आये .

समसामयिक उल्लेखनीय कृतियाँ - भूलने के विरूद्ध - गल्प किन्तु सत्य - डॉक्टर मनोहर भंडारी

प्रिय सुधी पाठक बंधुओ ! सादर नमन !!!
इस बार से हम भारतीय संस्कृति पर "समसामयिक उल्लेखनीय कृतियाँ " शीर्षक से एक नया स्तम्भ प्रारम्भ कर रहे हैं. इस स्तम्भ के अंतर्गत विभिन्न रचनाकारों की उन रचनाओं का समावेश किया जाएगा जो भारतीय संस्कृति, सनातन हिन्दू धर्म और भारतीयता के स्वरों के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध होंगी . प्रारम्भ कर रहे हैं डॉक्टर मनोहर भंडारी की संवाद शैली में लिखी कृति " भूलने के विरुद्ध " से .
   
इसके साथ ही ब्लॉग जगत में भी प्रिंट मीडिया की तरह विभिन्न विषयों पर विभिन्न विधाओं में किये गए लेखन को सुव्यवस्थित करने एवं संकलन योग्य बनाने के उद्देश्य से "स्तम्भ " का शुभारम्भ किया जा रहा है. आशा है यह पहल आपको अच्छी लगेगी. हम आपके विचारों के लिए आपके आभारी रहेंगे . धन्यवाद.

महात्मा गान्धी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के फिजियोलोजी विभाग में डिमांसट्रेटर के पद पर कार्यरत डॉक्टर मनोहर भंडारी भारतीय चिंतन के प्रखर पुरोधा हैं. अपनी सांस्कृतिक विरासत को विस्मृत करती जा रही आधुनिक पीढी को जगाने के लिए लेखन के माध्यम से प्रारम्भ किया गया उनका आन्दोलन अनुकरणीय है. इस सांस्कृतिक विस्मृति के विरुद्ध संवाद शैली में लिखी उनकी कृति पर वरिष्ठ पत्रकार एवं चिन्तक कृष्ण कुमार अष्ठाना के विचार कुछ इस तरह हैं -

सृजन साहित्यिक संस्था लखनऊ का वार्षिक सम्मान समारोह....आमंत्रण पत्र ...ड़ा श्याम गुप्त



 आमंत्रण -पत्र ...

समस्त साहित्यकार व साहित्य प्रेमी जन आमंत्रित हैं .....

जब कांग्रेसियों ने भारतीय संसकृति के मूल को ही नकार दिया तो फिर कट्टर ईसाई के स्वास्थय लाभ के लिए मन्दिरों में पूजा-पाठ-यज्ञ के मायने क्या?

वेशक हिन्दू संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति का दर्शन इतना विशाल है कि हिन्दूओं वोले तो भारतीयों ने दुनियाभर से भारत में आनेवाले गैर हिन्दूओं को अपने यहां उसी तरह जगह दी जिस तरह मां वच्चों को अपने आंचल में जगह देती है।


ये बात और है कि जैसे-जैसे इन गैर हिन्दूओं की जनसंख्या बढ़ी बैसे-बैसे इनकी दुष्टता सामने आने लगी ।अपनी नीच सोच के चलते ही इन गैर हिन्दूओं ने भारत को कई टुकड़ों में विभाजित करवा दिया।आज बचे-खुचे भारत में भी इन गैर हिन्दूओं ने हर तरफ कोहराम मचा रखा है।

हिन्दी और हिन्दुस्तानी

   राष्ट्र भाषा के प्रश्न के बारे में भी गांधी जी ने मुसलमानो का अनुचित पक्ष लिया इतना किसी और जगह नही मिलता। किसी भी से देखा जाय तो हिन्दी को बहुत महत्व दिया। परन्तु जब उन्होने देखा कि मुसलमान हिन्दी को पसन्द नही करते तो उन्होने अपनी नीति ही बदल दी तथा हिन्दी की जगह हिन्दुस्तानी का प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि हिन्दुस्तानी नाम की कोई भाषा ही नही है। न उस भाषा का कोई व्याकरण है और न शब्दावली यह तो केवल बोलने में आती हैं यह भाषा केवल हिन्दी और उर्दू की खिचडी है और गांधी जी पूरे प्रयत्न करके भी इस खिचडी भाषा को सर्वप्रिय न कर सके परन्तु मुसलमानो को खुश करने के लिए इस बात पर जोर दिया कि इसी हिन्दुस्तानी भाषा का प्रचार करने लगे और कुछ कुछ कही कही इस भाषा का प्रयोग भी किया जाने लगा जैसे बादषाह राम बेंगम सीता आदि वाहियात शब्दो का प्रयोग होने लगा परन्तु इस महात्मा को इतना साहस न हुआ कि मिस्टर जिम्मा को श्रीयुत जिन्ना कह कर पुकारे और मौलाना आजाद को पंडित आजाद कहे। उन्होने जितने भी अनुभव प्राप्त किए वे केवल हिन्दुओ की बलि देकर ही किये। वे हिन्दू मुस्लिम एकता की खोज में बढ़ते जा रहे थे। 

Haunted Hindu

१००० बर्षो की दासता झेलते झेलते हिन्दुओं को अब गुलाम बने रहने की आदत सी पद गयी है ! सबसे बड़ी शर्म की बात यह है की हिन्दुओं ने इतिहास से सबक लेने की कभी कोशिस नहीं की ! हिन्दू कल गुलाम था, आज भी गुलाम है , और अगर हिन्दू समय रहते नहीं जगा तो कल तो हिन्दू ही नहीं रहेगा! यह सब देखते हुए भी बहुत कम ही हिन्दुओं ने ही इस फैशन शो का बहिस्कार या विरोध किया होगा!

न जवानी न बुढ़ापा ........हल्ला बोल दो , देश के गद्दारों पर , स्वतंत्रता दिवस की बधाई


5.8.11


न जवानी , ना बुढ़ापा , भ्रस्थाचारिओं की बल्ले बल्ले, हैप्पी स्वतंत्रता डे


शीला की जवानी ....ओर अब......... शीला का बुढ़ापा .....हम क्या आजाद होना चाहते हैं भी ?

शीला की जवानी 
           


ओर अब शीला का बुढ़ापा :

हिना रब्बानी की भारत यात्रा




भीषण रक्तपात और अमानुषिक अत्याचारो के बूते भारत का सांप्रदायिक विभाजन करवाकर अस्तित्व में आए , विभाजित भारत को भी पूर्णतया इस्लामिस्तान बनाने की योजना और षणयंत्रो में दिन रात संलग्न एवं कश्मीर सहित सम्पूर्ण भारत में आतंककारी षणयंत्रो के सूत्रधार, हमारे जन्मजात तथा आमरण शत्रु पाकिस्तान की विदेशमंत्री बेगम हिना रब्बानी की भारत यात्रा ने भारतीय राजनय की मेरुदंडहीनता और भारतीय प्रसार माध्यमों की स्वाभ...िमान शून्यता के इतिहास में एक और लज्जाजनक अध्याय जोड़ दिया है। 

हिना के आकर्षण बाहुव्यक्तित्व के विषय में मेरी टिप्पणी व्यर्थ है , क्यो की भारत के प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने चार दिन तक उसका अखंड और अनवरत स्तुतिगान किया है । मेरे लिए महत्वपूर्ण ये है की केवल 34 वर्ष 6 मास की

मैं हूँ ना........

बात उन दिनों की है जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था .......हम लोग पटियाला में रहते थे उन दिनों .......शाम 6 बजे curfew जैसी स्थिति हो जाती थी .......बसें बंद हो जाती थीं ........सिख आतंकवादी सरे आम हिन्दुओं को बसों से उतार कर गोलियों से भून दिया करते थे .......कानून व्यवस्था एवं प्रशासन नाम की चीज़ नहीं रह गयी थी .....अदालतों ने आतंकवादियों के मुक़दमे सुनने बंद कर दिए थे क्योंकि न्यायाधीशों की कोई सुरक्षा नहीं रह गयी थी ......अखबारों ने आतंकियों के निर्देश पर उन्हें आतंकवादी न लिख कर खाड़कू लिखना शुरू कर दिया था ..........स्थिति बेहद निराशाजनक थी .......सो उन दिनों की बात है ........मेरी नई नई शादी हुई थी .......तभी खबर आयी की ज्योति के पिता जी को कल रात उठा के ले गए ......ज्योति यानी मेरी बहनों और पत्नी की एक अत्यंत घनिष्ठ सहेली जिनसे हमारा बहुत नजदीकी पारिवारिक सम्बन्ध भी था .........बड़ी बुरी खबर थी .......अब ये घटना थी मेहता चौक की .....मेहता चौक अमृतसर जिले का एक अंदरूनी इलाका था और भिंडरावाले का गढ़ था .......वहां का नाम सुन के ही रूह कांप जाती थी उन दिनों ...........खैर ,हम दोनों पति पत्नी चल पड़े बस से ......4 -5 घंटे का सफ़र था ......पूरी बस में सब सिख थे सिर्फ हम 4 -6 लोग हिन्दू

निश्चल प्रेम का प्रतीक ....hachiko

मेरी पत्नी ने हाल ही में एक फिल्म देखी है .....कई बार उसका ज़िक्र कर चुकी है ......Hachiko ..a dogs tale ............. ये जापान की एक सच्ची कहानी पे आधारित है .....1924 की बात है एक जापानी प्रोफेस्सर को रेलवे स्टेशन से एक कुत्ते का बच्चा मिल गया और उन्होंने उसे पाल लिया ..........उसका नाम रखा Hachiko ........धीरे धीरे दोनों में बहुत ज्यादा प्रेम हो गया .........प्रोफेस्सर प्रतिदिन अपने शहर Shibuya से ट्रेन पकड़ कर दूसरे शहर जाया करते थे ...एक दिन जब वो घर से निकले तो hachiko भी पीछे पीछे आ गया ...अब प्रोफेस्सर परेशान ...करें तो क्या करें .......बहुत समझाया पर hachiko कहाँ मानने वाला था ......सो उस दिन प्रोफेस्सर को ट्रेन छोड़ देनी पड़ी और वो hachiko को वापस घर ले कर आये .........खैर अगले दिन उसे अच्छी तरह घर में बंद करके चुपचाप घर से निकले और आधे रास्ते पहुंचे तो क्या देखते हैं की जनाब hachiko साहब चले आ रहे हैं पीछे पीछे ........खैर उसे प्यार से समझाया की देखो भैया ,मुझे नौकरी करनी है यार ........कल का दिन तो छुट्टी मरवा दी तुमने ..आज भी करवाओगे क्या ..........जाओ घर जाओ ....पर hachiko जी कहाँ मानने वाले थे , तो दोनों यूँ ही बात करते करते स्टेशन पहुंचे. वहां प्रोफेसर ने उसे बिस्कुट खिला के समझा बुझा के घर भेजा और किसी तरह ट्रेन पकड़ी ..........शाम को जब वापसी की ट्रेन से उतरे तो देखा की जनाब वहीं खड़े हैं रिसीव करने के लिए ....खैर दोनों हँसते खेलते घर पहुंचे और उसके बाद ये एक रूटीन बन गया ....hachiko रोजाना प्रोफेस्सर को ट्रेन पे see off करता और शाम को रिसीव करता .......दोनों हँसते खेलते ...मस्ती करते वापस आते ..........ये सिलसिला दो तीन साल तक चलता रहा .........

रावलपिंडी में मौल बनाने के लिए एक गुरूद्वारे पर कब्ज़ा किया गया !

रावलपिंडी में मौल बनाने के लिए एक गुरूद्वारे पर कब्ज़ा किया गया !

राजा बाजार,रावलपिंडी, पाकिस्तान में स्थित इस गुरुद्वरा सिंहसभा की प्राचीन ईमारत को देखिये ! यह ईमारत ध्वस्त करके जल्दी ही यहाँ एक बहुमंजिला मौल बनाने वाला है ! भारत सरकार से इसकी रक्षा के लिए लगायी गयी गुहार का क्या कोई असर होगा सोनिया सरकार पर या ऐसा करने से उनका वोट बैंक खिसक जायेगा ? हिन्दू स्मिता पर लगे हुए इस प्रश्न-चिन्ह का क्या कोई उत्तर है किसी सेकुलर के पास ? अल्पसंखयकों के नाम पर अपनी रोटी सेकने वाले नेता क्या इन अल्पसंखयकों के लिए भी कुछ करेंगे ?


रावलपिंडी के राजा बाजार में स्थित गुरुद्वारा सिह्सभा को माल बनाने के लिए ध्वस्त किये जाने का समाचार प्रकाश में आया है ! इस घटना के बाद से हिन्दू-सिख समुदाय में काफी आक्रोश फ़ैल गया है और लोगों ने भारत सरकार से मांग की है कि वह बची हुई हिन्दू-सिख पहचान को बचाए रखने का मामला अंतररास्ट्रीये

यह कैसी धर्मनिरपेक्षता


१.-विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश है, क्या कोई एक भी मुस्लिम देश है जो हज सब्सिडी देता है ?
२.-क्या एक भी मुस्लिम देश है , जहाँ हिन्दुओ का विशेष अधिकार है जैसा मुस्लिमो को भारत में दी जाती है ?
३.-एक भी मुस्लिम देश है जिसका राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री गैर मुसलमान हो ?
४.-बताए कि किसी एक मुल्ला या मैलावी ने आतंकवादियों के खिलाफ “ फतवे “ घोषित किये हो ?
५.-हिंदू बहुल बिहार, महाराष्ट्र केरल, पांडिचेरी आदि के मुख्यमंत्रियों के रूप में मुसलमान निर्वाचित है| क्या कभी एक हिंदू, मुस्लिम बहुल जम्मू और कश्मीर या ईसाई बहुल नागालैंड/मिजोरम के मुख्यमंत्री बनाने कि कल्पना कर सकता है ?
६.-मंदिरों के फंड मुसलमानों और ईसाईयों के कल्याण केल्लिये क्यों खर्च किया जाता है ? जब कि वे अपने पैसा मुक्त रूप से कही पर खर्च कर सकते है |
७.-क्यों गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन (हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के साथ कुछ नहीं) का समर्थन किया है और क्या वह बदले में मिल गया?
८.-क्यों गाँधी जी ने कैबिनेट के निर्णय पर आपत्ति जताई की सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सार्वजनिक धन से नही किया जायेगा ? जब कि १९४८ में नेहरू और पटेल को सरकारी खर्च पर दिल्ली के मस्जिदों के नवीनीकरण के लिए दबाव बनाया |