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5 कदम देश के विकास के लिए


अमेरीका,चीन,जापान,यूरोप,ऑसट्रेलिया आदि की सफलता का क्या राज है? वैदिक युग में भारत की सफलता का क्या राज था? क्या कारण है कि कोई भी कटटर मुस्लिम देश जैसे कि पाकिस्तान, इराक, ईरान आदि कभी विकास नही कर पाय़ा? इन सभी सवालों का जवाब य़ह है कि कोई भी देश बिना महिलाओं के विकास करे बिना विकास नही कर सकता लेकिन भारत और पाकिस्तान के विभाजन के इतने सालो बाद आज भी हमारे देश में ऐसे बहुत से कटटर मुस्लिम है जो अपनी मुस्लिम लडकियो को तो बिलकुल आजा़दी नही देते लेकिन दूसरे धम की लडकियो से शादी करके उनहे मुस्लिम बनाना उनकी पहली पसंद होती है. वोट के भूखे हमारे देश के महान नेताओ ने कटटर मुस्लिमो को खुश करने के लिए अलग से विशेष इस्लामिक कानून बना रखे है जिसके तहत एक मुस्लिम आदमी बिना अदालत गए तलाक ले सकता है और एक साथ कई शादियाँ कर सकता है. आज हम सभी को यह प्रण लेना चाहिए कि हम अपना वोट उसी को देगें जो निम्नलिखित 5 कदम लेगा-


1. सभी लोगो के लिए एक जैसा कानून होना चाहिए चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम और एक से अधिक पतनी और दो से अधिक बच्चे होने के खिलाफ सख़्त कानून होना चाहिए.

2. चेहरा छिपाने पर प्रतिबंध होना चाहिए क्योंकि कोई भी देश महिलाओं को परदे के पीछे रखकर विकास नही कर सकता. उन मौलवियों के खिलाफ़ भी कङी कारवाई होनी चाहिए जो महिलाओं के खिलाफ फत़वा जारी करते है.


3. सभी क्षेत्रो में विशेषकर परिवहन और पुलिस में अधिक से अधिक महिलाओं की भर्ती होनी चाहिए ताकि कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ सके और महिलाओं के प्रति अपराध में कमी आ सके.


4. उन फिल्मों और टी. वी. सीरियलो पर रोक लगाई जानी चाहिए जो पाकिस्तानी डॉन दाउद इबाहिम के अनुसार बन रही है और सेक्स, हिंसा और गंदी भाषा का इस्तेमाल कर रही है.


5. धारा 370 तुरंत हटनी चाहिए ताकि इस धर्मनिरपेक्ष देश में गैर मुस्लिम भी कश्मीर में रह सके. बाडर की सुरक्षा बहुत सख़्त होनी चाहिए ताकि गैरकानूनी तरीके से पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम भारत ना आ सके. (भारत दुनिया का एकमात्र देश है जहाँ के नेता मुस्लिम वोट पाने के लिए हज्ञ पर करोडो रुपयों की सब्सिडी देते है)

1 टिप्पणी:

कौशलेन्द्र ने कहा…

निश्चित ही भारत के सभी नागरिकों के लिए, चाहे वह किसी भी धर्म का अनुयायी क्यों न हो, एक समान नागरिक संहिता ...एक समान क़ानून होना चाहिए. विभिन्न समाजों के लिए पृथक-पृथक क़ानून समाज और देश के लिए घातक है ...सबके लिए एक समान राष्ट्रीय क़ानून होना अनिवार्य है सामाजिक न्याय तभी मिल सकेगा. किन्तु यदि यह हठ किया जाता है कि किसी धर्म विशेष के लिए पृथक क़ानून होना चाहिए और ऐसा क़ानून अस्तित्व में रहता है तो ऐसे समाज के लिए द्वितीय नागरिकता के प्रावधान के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं है.