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रावलपिंडी में मौल बनाने के लिए एक गुरूद्वारे पर कब्ज़ा किया गया !

रावलपिंडी में मौल बनाने के लिए एक गुरूद्वारे पर कब्ज़ा किया गया !

राजा बाजार,रावलपिंडी, पाकिस्तान में स्थित इस गुरुद्वरा सिंहसभा की प्राचीन ईमारत को देखिये ! यह ईमारत ध्वस्त करके जल्दी ही यहाँ एक बहुमंजिला मौल बनाने वाला है ! भारत सरकार से इसकी रक्षा के लिए लगायी गयी गुहार का क्या कोई असर होगा सोनिया सरकार पर या ऐसा करने से उनका वोट बैंक खिसक जायेगा ? हिन्दू स्मिता पर लगे हुए इस प्रश्न-चिन्ह का क्या कोई उत्तर है किसी सेकुलर के पास ? अल्पसंखयकों के नाम पर अपनी रोटी सेकने वाले नेता क्या इन अल्पसंखयकों के लिए भी कुछ करेंगे ?


रावलपिंडी के राजा बाजार में स्थित गुरुद्वारा सिह्सभा को माल बनाने के लिए ध्वस्त किये जाने का समाचार प्रकाश में आया है ! इस घटना के बाद से हिन्दू-सिख समुदाय में काफी आक्रोश फ़ैल गया है और लोगों ने भारत सरकार से मांग की है कि वह बची हुई हिन्दू-सिख पहचान को बचाए रखने का मामला अंतररास्ट्रीये
स्तर पर उठाये ! आश्चर्य की बात तो यह है कि यह कृत्य उस ''पाकिस्तान इवैक्यूई ट्रस्ट प्रोपर्टी बोर्ड'' की तरफ से किया गया है जिसके कंधे पर वहाँ हिन्दू-सिखों द्वारा छोड़ी गयी सम्पति की रक्षा का दायित्व है !

इस गुरूद्वारे पर कब्जे के प्रयास विभाजन के बाद से ही शुरू हो गए थे जब यहाँ १९४७-४८ में पुलिस चौकी बनायीं गयी थी ! रावलपिंडी के ही निवासी अब्दुल माजिद ने १९६५ में बची हुई ईमारत में एक स्कूल शुरू किया जिसे १९७२ में नेशनल स्कूल स्तर की मान्यता मिल गयी और सारी जायदाद पंजाब शिक्षा विभाग के नाम स्थानांतरित हो गयी ! १९९६ में जब स्कूल में गर्मियों की छुटियाँ चल रही थी तो इटीपीबी ने स्कूल की जमीन पर फिर कब्ज़ा कर लिया ! इटीपीबी का कहना है कि उन्होंने १९७२ में ही स्कूल प्रबंधकों को बता दिया था कि यह उनकी सम्पति नहीं है और यहाँ स्कूल नहीं चलाया जा सकता ! दोनों पक्षों के बिच गुरूद्वारे की ईमारत के मालिकाना हक़ के लिए झगड़ा चल ही रहा था एक तीसरे पक्ष के रूप में अंजुमन एंड कम्पनी ने अदालत में यह याचिका लगायी कि उसने सन २००८ में गुरूद्वारे की ५२ मरले जमीन को इटीपीबी से लगभग साढ़े तीन करोड़ में खरीद लिया है ! कम्पनी को यहाँ तीन मंजिला व्यवसायिक ईमारत मौल बनानी है जिसमे दो मंजिलों पर व्यवसायिक गतिविधियों का सञ्चालन होगा व् तीसरी मंजिल पर स्कूल चलेगा ! कम्पनी ने दावा किया है कि इस सौदे के लिए वह इटीपीबी को ६.२० लाख रुपये अग्रिम के रूप में भुगतान भी कर चूकी है ! दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने एक अन्य अदालत में याचिका दायर कर मांग की है कि गुरूद्वारे की जमीन स्थायी तौर पर उनको दी जाय और यहाँ व्यवसायिक ईमारत का निर्माण रोका जाय ! स्कूल बनाम कम्पनी के नाम से यह मामला अदालत में विचारधीन है ! जीत चाहे जिसकी हो परन्तु यह तो तय है कि जल्द ही गुरूद्वारे को पूरी तरह तोड़ दिया जायेगा !

2 टिप्‍पणियां:

Abhishek ने कहा…

अब सारे सेकुलर कुत्ते शुतुरमुर्ग की तरह रेट में मुह दबाये बैठे रहेंगे

कौशलेन्द्र ने कहा…

भारत सरकार को इस सम्बन्ध में ठोस पहल करनी चाहिए...अन्यथा एक दिन पूरे पाकिस्तान से हिन्दू-सिख पहचान के सारे चिन्ह मिट जायेंगे .....