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हिन्दू दलाल, कुत्ता, पाखंडी, श्री हरामी स्वामी अग्निवेश


अग्निवेश के बयान से आहत हिंदुओं ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। श्री अमरनाथ बर्फ़ानी लंगर संगठन ने सोमवार को राजधानी के प्रसिद्ध धरनास्थल जंतर मंतर पर स्वामी अग्निवेश के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता अग्निवेश द्वारा बाबा अमरनाथ के संबन्ध में दिये गये बयान का विरोध कर रहे थे। विश्व के करोडों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बयान देने के लिए उन्होंने अग्निवेश के गिरफ़्तारी की मांग भी की।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संगठन के प्रधान विजय ठाकुर ने कहा कि श्रीनगर में कुख्यात देशद्रोही सैयद अलीशाह गिलानी के घर जाकर स्वामी अग्निवेश द्वारा यह कहा जाना कि श्री अमरनाथ यात्रा धर्म के नाम पर आडम्बर और पाखण्ड है तथा यह भगवान नहीं बर्फ़ का टुकडा है, विश्व के करोडों हिन्दुओं की भावनाओं पर कुठाराघात है।


श्री ठाकुर ने कहा कि इसके लिए स्वामी अग्निवेश को अबिलम्ब मांफ़ी मांगनी चाहिये। उन्होंने अग्निवेश को अलगाववादियों और आतंकवादियों का सरगना करार दिया।

उल्लेखनीय है कि स्वामी अग्निवेश ने पिछले दिनों कहा था, "अमरनाथ में बनने वाला शिवलिंग एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे धर्म से जोड़ा जाना सही नहीं है। मेरी समझ से बाहर है कि लोग अमरनाथ यात्रा के लिए क्यों जाते हैं। यह धर्म के नाम पर धोखा है।"

कार्यक्रम में महेन्द्र गोयल, पवन सिंहल, अनिल सिंहल, राकेश पाण्डे और विवेक कक्कड के अलावा बाबा अमरनाथ यात्रा के दौरान चलने वाले अनेक भण्डारों के प्रतिनिधि एवं शिवभक्त मौजूद थे।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्वामी अग्निवेश द्वारा भगवान शिव के अपमान से हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह से आहत हुई हैं।

वीएचवी। नई दिल्ली ब्यूरो। प्रदीप। 24 मई, 2011

6 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

अकल के अंधे महाराज
स्वामी अग्निवेश ने गलत क्या कहा ?
सही ही तो है ....... हम लकीर के फकीर कब तक बने रहेंगे ? प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के पहाड़ को आस्था से जोड़ना कहाँ की बुद्धिमानी है

Abhishek ने कहा…

@benami
फिर काबा और मक्का जैसी घटिया जगहों को अल्लाह का घर कहना कहा की अक्लमंदी है ये भी बता दो. अग्निवेश तो कुत्ता है ही किन्तु तू तो लगता है अग्निवेश का भी पालतू है.

कौशलेन्द्र ने कहा…

अग्निवेश के वक्तव्यों में अग्नि की तप्तता होना स्वाभाविक है. वे तामसिक स्वामी हैं, भारतीय परिवेश के अनुकूल नहीं हैं इसलिए उनके वक्तव्यों पर प्रतिक्रिया की आवश्यकता नहीं है.
अमरनाथ के भौतिक स्वरूप को छोड़ दें तो भी वहाँ दिव्यता की अनुभूति होती है. हमारी आस्था उसी दिव्य अनुभूति के लिए है.
श्रीमान बेनामी जी ! हमारे लिए तो यह भी एक नाम है, पर स्वयं आपके लिए नहीं है. आपको इतनी सी बात कहने के लिए अपना परिचय छिपाना पडा ? यह आत्म विश्वास में कमी का द्योतक है. मनोवैज्ञानिकों की माने तो personality disorder का एक प्रकार है यह. सबल बनिए बन्धु ! व्यक्तित्व को प्रकाश में लाइए ...तब देखिएगा आप स्वयं प्रकाशवान हो उठेंगे. yadi sthool kaashth के jalane से sookshm प्रकाश utpann हो sakataa है तो barf के tukade में divyatv की अनुभूति kyon नहीं हो sakatee बन्धु ?

blogtaknik ने कहा…

मैंने सुना था की भारत देश में गधों की संख्या में निरंतर कमी हो रही है. पर इस बेनामी की बातों से लगता है की इनकी नयी नस्ल आ गयी है.

ePandit ने कहा…

अग्निवेश तो एक कुत्ता है जहाँ हड्डी दिखती है चला जाता है। महन्त नित्यानन्द दास ने उसे सही सबक दिया।

Jai Hindu ने कहा…

बेनामी को छोड़ कर सभी प्रिय बंधुओ सभी को टिपण्णी के लिए धन्यवाद,
पता नहीं ये बेनामी कौन सी नस्ल का है, हम मैं से तो कोई हो नहीं सकता हो सकता है की यह कोई मुसलमानों का चमचा या उनका चमचा हो या फिर किसी सेकुलर की औलाद हो! कुछ अजीब ही वारिएटी है ये ! मित्रो इसकी बातो पर मत जाओ !