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एक आम आदमी से, डरी सरकार क्यों ?.........

वन्दे मातरम बंधुओं,

अन्ना के अनशन पे, इतना हाहाकार क्यों,
एक आम आदमी से, डरी सरकार क्यों ?.........

हिटलर ओ नाजी से, पी एम् हुए हैं क्यों?
स्वतंत्र भारत में, स्वतन्त्रता पे वार क्यों?.........

लोकपाल जबकि, सरकार लाना चाहती है,
लोकपाल पे आखिरश, खीची तलवार क्यों?.........

बाबा रामदेव का, दमन ये कर चुकी,
हक मांगने वालों पे, करती अत्याचार क्यों?.........

सत्ता से सडक तक, दलाल ही दलाल बस,
लोभी, लम्पट, लालचियों की, आई बहार क्यों?.........

भ्रष्टाचार खत्म हो, है सबकी जुबान पे ये,
लोकपाल बनने में, फिर भ्रष्टाचार क्यों?.........

लोकतंत्र जबकि, जनता के दम से है,
मेरे भारत वर्ष में, फिर लोकतंत्र की हार क्यों?.........




2 टिप्‍पणियां:

राहुल पंडित ने कहा…

बहुत बड़ी विडम्बना है की हम उन लोगों से देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने की आशा कर रहे हैं जो खुद ही इसके सहनशाह हैं.
कोई भी अपने विरुद्ध काम करने वाला कानून बनाने की नहीं सोच सकता,तो मनमोहन सिंह,सोनिया गाँधी,कपिल सिब्बल,दिग्विजय सिंह,मनीष तिवारी,प्रणव मुखर्जी,.....से एक शशक्त लोकपाल की आशा बेमानी है

अन्ना हजारे साहब को सन्देश-
यह नहीं शांति की गुफा युद्ध है रण है
तप नहीं आज केवल तलवार शरण है.
आप अनशन करके क्या करेंगे,कुछ दिन में ही आपके खिलाफ सीबीआई(कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन)
की जाँच बैठाएंगे ये लोग,और ये ऐसी संस्था है जो कही न कहीं से आप जैसे राष्ट्रभक्तों को राष्ट्रद्रोही घोषित करवा ही देगी.
-इन्कलाब जिंदाबाद-

आशुतोष की कलम ने कहा…

नपुंसक सरकार से इससे ज्यादा क्या उम्मीद की जा सकती है..
अन्ना हो या बाबा हम सबके साथ है..