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बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीत


इतिहास का पहला अनशन

भारतीय साहित्य में सबसे पहले अनशन का जिक्र आया है रामायण में.  


आप अधिकतर ने यह पढ़आ हुआ है, में केवल याद दिला रहा हूँ 


जब सुंदरकांड में भगवान राम ने मर्यादा पूर्वक सागर से रास्ता माँगा 


       
विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत। 


बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीत।।




तीन दिन बहुत विनय की , 


फिर श्री राम ने लक्षमन से कहा मेरा धनुष लाओ . 


पर अन्ना तो अहिंसा के पुजारी हैं .  काश श्री राम भी अहिंसा के पुजारी होते . 

2 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

सरकार के अड़ियल रवैये और अन्ना की दृढ इच्छाशक्ति के बीच अन्ना के प्राण आ गए हैं. यदि अन्ना को कुछ हो गया तो अहिंसक जनता को हिंसक होते देर नहीं लगेगी. यह भीड़ का स्वभाव है ...जिसकी सरकार को प्रतीक्षा है. यह हिंसा देश व्यापी होगी इसे अन्ना भी रोक नहीं सकेंगे. इस हिंसा को कांग्रेस का पूरा समर्थन होगा. केंद्रीय सत्ता अपने अवसान की ओर है...इसे वे भी अच्छी तरह समझ चुके हैं. इसलिए जाने से पहले कांग्रेस के इतिहास को दोहराते हुए एक बार फिर इमरजेंसी का आनंद उठाना चाहते हैं. हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसा कुछ भी न हो और सरकार अन्ना की ही नहीं बल्कि कोटि-कोटि भारतीयों की भावनाओं का सम्मान करते हुए जनलोकपाल बिल को अस्तित्व में लाये.

Dr. shyam gupta ने कहा…

सही याद दिलाया....