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कंधों पर गुलामी के बोझ ढो रही है जल और वायु सेना

नयी दिल्ली। देश जब आजादी के 65 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तो इस बात का अहसास बहुत कम लोगों को है कि सुदूर समुद्र और आकाश में स्वाधीनता की रखवाली करने वालों के कंधों पर अंग्रेजी जमाने की गुलामी के चिन्ह आज भी बरकरार हैं।


वहीं, थल सेना ने देश की आजादी के साथ ही ब्रिटिश चिन्हों को अलविदा कह दिया और अपने कंधों पर गौरव चिन्ह के रुप में अशोक की लाट के राष्ट्रीय चिन्ह को अपना लिया। थल सेना के अधिकारियों के कंधों पर आज एक भी गुलामी की यादों का चिन्ह नहीं है।
भारतीय नौसेना के अधिकारियों के कंधों की पट्टी पर जो चिन्ह पीले रंग की रिंग के रूप में नजर आते हैं वे ब्रिटिश अधिकारी लार्ड नेल्सन की स्मृति में रॉयल इंडियन नेवी ने स्वीकार किए थे। आजादी के बाद नौसेना ने रॉयल शब्द को गुलामी का प्रतीक मानते हुए अपने नाम से अलग कर लिया लेकिन नौसेना के अधिकारियों की वर्दी पर ब्रिटिशराज के पुराने चिन्ह बरकरार रह गए।

इसी तरह भारतीय वायु सेना भी आजादी से पहले रॉयल इंडियन एयरफोर्स हुआ करती थी लेकिन देश के स्वतंत्र होने पर इसे भारतीय वायुसेना नाम दिया गया। लेकिन वायु सेना ने अपने कंधे पर गौरव चिन्हों को ब्रिटिश एयरफोर्स की वर्दी की तरह ही बरकरार रखा।

स्वाधीनता के 64 साल पूरे होने पर भी ये चिन्ह हमारी वायु सेना और नौसेना के कंधों पर सजे हुए हैं। वर्दी पर नेल्सन रिंग को बरकरार रखने के खिलाफ नौसेना के युवा अधिकारियों में सुगबुगहाट भी शुरू हो गई है।

3 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

इस सुगबुगाहट का स्वागत है ......

blogtaknik ने कहा…

सिर्फ सता का स्थानातारन हुआ है. देश आज भी गुलाम है. परिवारवाद, खांग्रेश, को सेकुलरों कुत्ते और अब मिडिया भी सब के सब विदेशी गुलाम बन बैठे है. चिन्ह ही नहीं कानून की बहुत सी धारा और सविधान भी उन्हिका बनाया हुआ है बस आंबेडकर साहेब का नाम आता है. वास्तविक आज़ादी तो अभी मिली ही नहीं है. शिक्षा पध्धति भी उन्ही की है. और अब तो धार्मिक परतंत्रता भी आ रही है. अब हम मानसिक धार्मिक गुलाम बन रहें है.

बेनामी ने कहा…

थल सेना मेँ सहायक जैसी
दासप्रथा का अँत कब होगा