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जब कांग्रेसियों ने भारतीय संसकृति के मूल को ही नकार दिया तो फिर कट्टर ईसाई के स्वास्थय लाभ के लिए मन्दिरों में पूजा-पाठ-यज्ञ के मायने क्या?

वेशक हिन्दू संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति का दर्शन इतना विशाल है कि हिन्दूओं वोले तो भारतीयों ने दुनियाभर से भारत में आनेवाले गैर हिन्दूओं को अपने यहां उसी तरह जगह दी जिस तरह मां वच्चों को अपने आंचल में जगह देती है।


ये बात और है कि जैसे-जैसे इन गैर हिन्दूओं की जनसंख्या बढ़ी बैसे-बैसे इनकी दुष्टता सामने आने लगी ।अपनी नीच सोच के चलते ही इन गैर हिन्दूओं ने भारत को कई टुकड़ों में विभाजित करवा दिया।आज बचे-खुचे भारत में भी इन गैर हिन्दूओं ने हर तरफ कोहराम मचा रखा है।



जब से CIA ऐजेंट इटालियन एडवीज एंटोनियाअलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने 6-6 भारतीयों का कत्ल करवाकर कांग्रेस पार्टीपर कब्जा कर अपनी गुलाम सरकार भारत में बनवाई है तब से ये


कट्टर ईसाई देशभक्त हिन्दूओं को ठिकाने लगाने का कोई मौका नहीं चूक रही है।


अब ये भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी इसाई Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 के नाम से एक ऐसा कानून बनाबाने की फिराक में है जिससे गैर हिन्दूओं को हिन्दूओं पर हमला करने के बाद कानूनी रूप से सजा मिलना लगभग असम्भव हो जाएगा।

फिर भी ये बौद्धिक गुलाम कॉंग्रेसी मन्दिरों मे जाकर इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी के स्वास्थयलाभ के लिए पूजा-अरचना व यज्ञ कर रहे हैं ताकि ये फिर से भारत आकर भारत के मूल निवासी हिन्दूओं को और नुकसान पहूंचा सके।

जब कांग्रेसियों ने भारतीय संसकृति के मूल को ही नकार दिया तो फिर ये सब करने का क्या औचित्य है?

अगर ये सब इस इटालियन अंग्रेज को खुश करने के लिए किया जा रहा है तो कांग्रेसियों को समझना चाहिए कि इस अंग्रेज को भारतीय संसकृति से इतनी नफरत है कि हो सकता है ये कांग्रेसी जो भारतीय संसकृति के अनुसार इस अंग्रेज के स्वास्थय लाभ की कामना कर रहे हैं इसके निशाने पर आ जायें।










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