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अनिवार्य हिन्दी कापी और कवि कौ जनमु दिन.......कविता ..डा श्याम गुप्त ....

अनिवार्य हिन्दी कापी और कवि कौ जनमु दिन.....      ( ब्रज भाषा )
कवि गोरखधंधा जी के 
जनमु दिना पे आयोजित गोष्ठी में ,
कविवर  पांडे जी नै -
बडी सकुचाहट ते याद दिलायौ ;
धंधा जी अबहि छै महीना पहलै ही तौ ,
आपने आपुनि जनम दिना हतो  मनायौ |
कवि जी सकपकाय गए , हडबड़ाये , फिरि-
मुसुकावत भये बोले-
पर भैया !, कवि तौ -
अखिल भारतीय कहिलाबै है ;
वाकौ तौ केन्द्र सरकार की नीतिन ते ही,
नातौ होबै है , और -
केन्द्रीय भाषा नीति तौ ,
द्विभाषी है ;
वा जनमु दिना तौ -
असल अंगरेजी आलेख हतो ,
ये तौ वाकी -
अनिवार्य हिन्दी कापी है ||
 

4 टिप्‍पणियां:

vidhya ने कहा…

वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

drshyam ने कहा…

धन्यवाद विद्या जी .......

कौशलेन्द्र ने कहा…

जय हो दाऊ जी की ! आजु तो आपनै मनमयूर कों बृजमय बनाय दियो हे. १०-११ सितम्बर तो कब को बीति गयो.....सम्मलेन को कछू हाल ना दियो...हम कब सें बाट जोय रये हैं.

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी रचना।