समर्थक

"जबर मारय....रोबय भी न देय"





बाप रे! सांसदों के विशेषाधिकार का हनन हो गया......सच्ची क्या ? 

देश में इतने घोटाले हुए, देश का पैसा बाहर चला गया .....देश की प्रतिभाएं बाहर चली गयीं ........सन १९४७ के बाद से स्वशासन के झंडे तले विकास के नाम पर न जाने क्या-क्या अनाचार-कदाचार-भ्रष्टाचार होता रहा ....देर-सबेर सबके बारे में देश-दुनिया को पता चलता रहा. पर ये विशेषाधिकार हनन कब हो गया पता ही नहीं चला....वह भी उनके विशेषाधिकार का हनन जो सबके अधिकारों का हनन करना अपना जन्म सिद्ध अधिकार माने बैठे हैं. सचमुच, यह तो गजब हो गया . इतना बड़ा काण्ड हो गया और किसी को पता तक नहीं चला. मेरा मन गाना गाने का हो रहा है - "गज़ब भयो रामा जुलुम भयो रे"     


कलुआ नाई उबल पडा -  इन्होने पूरे देश को बेवकूफ समझ रखा है क्या ? किसने किसका अधिकार हनन किया है किसी से छिपा है ? यह तो वही बात हुयी कि शेर ने मेमने से कहा " तूने नहीं तो तेरे पुरुखों ने जूठा किया होगा पानी ? सजा तो मिलेगी ही"

मैंने कहा - देखो भाई कलुआ जी ! जब देश की बहुतेरी जनता सोयी रहे और कोई एक अन्ना अपने दो-चार जागरूक लोगों के साथ शहीद होने को निकल पड़े तो शहादत की भूमिका तो बनेगी ही. ...वही तो बन रही है ...इसमें गुस्सा करने की नहीं कुछ दृढ निश्चय करने की आवश्यकता है .

आज अन्ना, किरण बेदी, अरविंद....सब गुनाहगार हो गए. क्योंकि इन्होने कातिल को कातिल कह दिया. इन्होने कहा कि अब बस ...और नहीं चलेगा ये कातिलपना......कतल तुम्हारा अधिकार नहीं .....अपने हक़ मांगना हमारा अधिकार है ...और इसे हम लेकर रहेंगे. अन्ना- किरण और अरविंद वे लोग हैं जिन्होंने अपना सब कुछ त्याग दिया. अंधभक्त प्रशासन को लगता है कि ये टैक्सचोर हैं ..और कुछ नहीं तो इन्होने या इनके पुरुखों ने नदी का पानी जूठा क्यों किया....... उस नदी का पानी जिसे इन बेचारों ने तो पीया ही नहीं.....और जिसे पीना कुछ ख़ास दुष्टों का ही अधिकार है.

किरण बेदी एक ऐसी शख्सियत है जिसका कार्यकाल बेदाग़ और सुखद कीर्तिमानों से भरा रहने के कारण निरंतर मानसिक यंत्रणाएं भोगने के लिए बाध्य रहा है....और जिस पर पूरे देश को गर्व रहा है. आज उसी किरण
बेदी को कटघरे में खड़ा किये जाने का बेहया षड्यंत्र किया जा रहा है. यद्यपि यह भी सच है कि खिसियानी बिल्ली के खम्बा नोचने से खम्बे का कुछ बिगड़ने वाला नहीं है बल्कि उसी की बेवकूफी ज़ाहिर हो रही है. ज़ाहिर यह भी हो रहा है कि बदले की कार्यवाही कितने घटिया स्तर तक जा सकती है. 

जब देश का राजा आत्मविश्लेषण के स्थान पर बदले की कार्यवाही पर उतारू हो जाय तो समझ लेना चाहिए कि कोई बड़ा परिवर्तन होने वाला है. यह परिवर्तन किसी भी प्रकार का हो सकता है जिसके लिए पूरे देश को तैयार रहना होगा. 

कलुआ अचानक गंभीर हो गया है....और मैं उसकी गंभीरता को पढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ. 

2 टिप्‍पणियां:

सुज्ञ ने कहा…

सही कहा कौशलेन्द्र जी!! सटीक विश्लेषण॥

drshyam ने कहा…

सत्य बचन महाराज.....