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मुफलिसी के तन से तूने, खींची चादर लाज की........

बड़ा ही खतरनाक रहा, बड़ना तेरा विकास,
मुफलिसी के तन से तूने, खींची चादर लाज की........

झोपड़ियां मिटा के कैसे, पांच सितारा हो खड़े,
गरीबी की रोटी पे तूने, रखी नजर बाज की..........

हरे भरे बन काट तूने, कंक्रीट के बनाये जंगल,
है खबर इक बड़ी कीमत, हमे चुकानी है इस काज की.........

दूसरों का पेट भरने, खेत खटता बैल बन जो,
मुद्दत से किसान की बेटी, नही देखी शक्ल प्याज की..........

सारा परिवार साथ बैठ, देखता सी ग्रेड फ़िल्में,
ये कौन सी है संस्क्रती, ये कैसी बात आज की .............

संध्या वन्दन भूल बैठे, भूल बैठे जोत बाती,
शोर को संगीत समझे, ना बात करें साज की.........

बलशाली के पाँव पकड़ो, तलुवे चाटो नाक रगडो,
भूखे को लात मारो, ना फ़िक्र कोई मोहताज की.........

बेशक पैर तले अपनों की लाश, बड़ना लेकिन है जरूरी, 
तन का हो या मन का सौदा, ना बात करो राज की...........

2 टिप्‍पणियां:

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" ने कहा…

क्या बात है कोमरेड आपने तो दिल ही जीत लिया जनाब ......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राहुल पंडित ने कहा…

हल्दी घाटी की रज का मै तिलक लगाया करता हूँ
अरि शोडित की लाली से मै आंख सजाया करता हूँ
भगत सिंह का साफा हूँ मै झाँसी रानी का सेनानी
मै जौहर की भीषण ज्वाला बाजु मेरे पाषाणी
कालि दास का अमर काव्य हूँ मै तुलसी की रामायण
अमृत वाणी हूँ गीता की घर घर होता परायण
मै भूषण की शिवा भवानी आला का हुंकारा हूँ
सूर दास का मधुर गीत मै मीरा का एक तारा हूँ

वरदाई की अमर कथा हूँ रण गर्जन गंभीर हूँ
मेरा परिचय इतना की मै भारत की तस्वीर हूँ
भारत की तस्वीर हूँ!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!