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कह मुकरियाँ

वन्दे मातरम बंधुओं,

मेरी कोख से जन्म लिया जिन,
सीना मेरा छलनी किया तिन,
निज औकत का नही है भान,
क्यों सखी बेटा? नही सखी पकिस्तान !!1!!

मैंने ही जिसको है बनाया,
सुख यश और सम्मान दिलाया,
मेरे ही दम से जो दमदार,
क्यों सखी साजन? नही सखी सरकार !!2!!

वो करता हमपे वार पे वार,
फिर भी हम करते सत्कार,
आसमान पर जिसके भाव,
क्यों सखी दामाद? नही सखी कसाब !!3!!

जीवन भर जो मांगे खाए,
मांगने ही जो दर पे आये,
सदा ही हमसे जो है लेता,
क्यों सखी भिखारी? नही सखी नेता !!4!!

हमको निश दिन नाच नचाये,
कई दिनों तक भूखा सुलाए,
जुदा किये जिन बहन ओ भाई,
क्यों सखी शासक? नही सखी महंगाई !!5!!

निज जीत पे फूले नही समाते,
हारे को नीचा है दिखाते,
गालियों की सौगात देते भेज,
क्यों सखी पगला? नही सखी अंग्रेज !!6!!

मांस बड़े स्वाद से चबाये,
हड्डी को भी चूसे जाए,
चमड़ी की भी है दरकार,
क्यों सखी कुक्कर? नही सखी सरकार !!7!!

6 टिप्‍पणियां:

vishwajeetsingh ने कहा…

सच को दर्शाते सुन्दर , सटीक कटाक्ष ।

हरीश सिंह ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति, आभार

अमित शर्मा ने कहा…

पञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको और आपके कुटुंब को संपन्न व स्वस्थ रखें !
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"आइये प्रदुषण मुक्त दिवाली मनाएं, पटाखे ना चलायें"

आशुतोष की कलम ने कहा…

दीपो का ये महापर्व आप के जीवन में अपार खुशियाँ एवं संवृद्धि ले कर आये ...
इश्वर आप के अभीष्ट में आप को सफल बनाये एवं माता लक्ष्मी की कृपादृष्टि आप पर सर्वदा बनी रहे.

शुभकामनाओं सहित ..
आशुतोष नाथ तिवारी

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

शुभ दीपावली

किलर झपाटा ने कहा…

आदरणीय राकेश जी एवं अन्य सभी उपस्थित जनों को इस उत्कृष्ट रचना के लिये सादर बधाई एवं दीपावली की हार्दिक हार्दिक शुभकामनायें।