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तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहें न रहें.... राजीव भाई को श्रधांजलि



                                                                                          
                                                                                       
भाई राजीव दीक्षित जी के नाम स्वदेशी और आजादी बचाओ आन्दोलन  से हम सभी परिचित  हैं.. एक
अमर हुतात्मा, जिसने अपना पूरा जीवन मातृभाषा मातृभूमि को समर्पित कर दिया..आज उनका जन्मदिवस और पहली पुण्यतिथि भी है..आज ही के दिन ये अमर देशभक्त हमारे बिच आया था और पिछले साल हमारे बिच से आज ही के दिन राजीव भाई चले गए..अगर राजीव भाई के प्रारम्भिक जीवन में झांके तो जैसा की हम सब जानते हैं ,राजीव भाई एक मेधावी छात्र एवं  वैज्ञानिक भी थे..आज के इस भौतिकतावादी दौर में जब इस देश के युवा तात्क्षणिक हितों एवं भौतिकवादी साधनों के पीछे भाग रहा है, राजीव भाई ने राष्ट्र स्वाभिमान एवं स्वदेशी की परिकल्पना की नीव रखने के लिए अपने सम्पूर्ण जीवन को राष्ट्र के लिए समर्पित कर त्याग एवं राष्ट्रप्रेम का एक अनुकरणीय उदहारण प्रस्तुत किया..सार्वजनिक जीवन में आजादी  बचाओ आन्दोलन से सक्रीय हुए राजीव भाई ने स्वदेशी की अवधारणा एवं इसकी वैज्ञानिक  प्रमाणिकता को को आन्दोलन का आधार बनाया.. 
स्वदेशी शब्द हिंदी के " स्व" और "देशी" से मिलकर बना  है."स्व" का अर्थ है अपना और "देशी" का अर्थ है जो देश का हो.. मतलब स्वदेशी वो है "जो अपने देश का हो अपने देश के लिए हो" इसी मूलमंत्र को आगे बढ़ाते हुए राजीव भाई ने लगभग २० वर्षों तक अपने विचारो,प्रयोगों एवं व्याख्यानों से एक बौद्धिक जनजागरण एवं जनमत बनाने का सफल प्रयास किया, जिसके फलस्वरूप हिन्दुस्थान एवं यहाँ के लोगो ने अपने खुद की संस्कृति की उत्कृष्ठता एवं वैज्ञानिक प्रमाणिकता को समझा और वर्षों से चली आ रही संकुचित गुलाम मानसिकता को छोड़ अपने विचारों एवं स्वदेशी पर आधारित तार्किक एवं वैज्ञानिक व्यवस्था को अपनाने का प्रयास किया..
वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के प्रबल विरोधी राजीव भाई ने अंग्रेजो के ज़माने से चली आ रही क्रूर कानून व्यवस्था से लेकर टैक्स पद्धति में बदलाव के लिए गंभीर प्रयास किये..अगर एक ऐसा क्षेत्र  लें जो लाल बहादुर शास्त्री जी के के बाद सर्वदा हिन्दुस्थान में उपेक्षित रहा तो वो है "गाय,गांव और कृषि " इस विषय पर राजीव भाई के ढेरो शोध और प्रायोगिक अनुसन्धान सर्वदा प्रासंगिक रहे हैं..वैश्वीकरण एवं उदारीकरण की आड़ में पेप्सी कोला जैसी हजारों बहुराष्ट्रीय कंपनियों को, खुली लूट की छूट देने वाले लाल किले दलालों के खिलाफ राजीव भाई की निर्भीक,ओजस्वी वाणी इस औद्योगिक सामाजिक मानसिक एवं आर्थिक रूप से गुलाम भारत को इन बेड़ियों से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त करती थी..मगर सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन की राह और अंतिम अभीष्ट  सर्वदा विरोधों और दमन  के झंझावातों से हो कर ही मिलता है..व्यवस्था परिवर्तन की क्रांति को आगे बढ़ाने में राजीव भाई को सत्ता पक्ष से लेकर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का कई बार टकराव झेलना पड़ना और इसी क्रम में यूरोप और पश्चिम पोषित कई राजनीतिक दल और कंपनिया उनकी कट्टर विरोधी हो गयी..
 अगर हम भारत के स्वर्णिम इतिहास के महापुरुषों की और नजर डाले तो राजीव भाई और विवेकानंद को काफी पास पाएंगे..जिस प्रकार विवेकनन्द जी ने गुलाम भारत में रहते हुए यहाँ की संस्कृति धर्म और परम्पराओं का लोहा पुरे विश्व के सामने उस समय मनवाया जब भारत के इतिहास या उससे सम्बंधित किसी भी परम्परा को गौण करके देखा जाता था, उसी प्रकार राजीव भाई ने अपने तर्कों एवं व्याख्यानों से भारतीय एवं स्वदेशी संस्कृति ,धर्म , कृषि या शिक्षा पद्धति  हर क्षेत्र में स्वदेशी और भारतीयता की महत्ता और प्रभुत्व  को पुनर्स्थापित करने का कार्य उस समय करने का संकल्प लिया जब भारत में भारतीयता के विचार को ख़तम करने का बिदेशी षड्यंत्र अपने चरम पर चल रहा था..काल चक्र अनवरत चलने के साथ साथ कभी कभी धैर्य परीक्षा की पराकाष्ठा करते हुए हमारे प्रति क्रूर हो जाता है..कुछ ऐसा ही हुआ और इसे देशद्रोही विरोधियों का षड्यंत्र कहें या नियति का विधान राजीव भाई हमारे बिच से चले गए..मगर स्वामी विवेकानंद जी की तरह अल्पायु होने के बाद भी राजीव भाई ने व्यक्तिगत एवं  सामाजिक जीवन के उन उच्च आदर्शों को स्थापित किया जिनपर चलकर मानवता धर्म देशभक्ति एवं समाज के पुनर्निर्माण की नीव रक्खी जानी है..
अब यक्ष प्रश्न यही है की राजीव भाई के बाद हम सब कैसे आन्दोलन को आगे ले जा सकते हैं. जैसा की राजीव भाई की परिकल्पना थी की एक संवृद्ध  भारत के लिए यहाँ के गांवों का संवृद्ध होना आवश्यक है..जब तक वो व्यक्ति जो १३० करोण के हिन्दुस्थान के आधारभूत आवश्यकता भोजन का प्रबंध करता वो खुद २ समय के भोजन से वंचित है,तब तक हिन्दुस्थान का विकास नहीं हो सकता..हम चाहें जितने भी आंकड़ों की बाजीगरी कर के विकास दर का दिवास्वप्न देख ले मगर यथार्थ के धरातल पर गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीर और अमीर..इसी व्यवस्था के खिलाफ शंखनाद के लिए मूल में ग्रामोत्थान  के तहत कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना होगा ,कृषि के क्षेत्र में पारम्परिक कृषि को प्रोत्साहन देकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाने होंगे..शायद इस क्षेत्र में हजारों के तादात में स्वयंसेवक संगठन  और बहुद्देशीय योजनायें चलायी जा रही हैं,मगर अपेक्षित परिणाम न देने का कारण शायद सामान्य जनमानस में इस विचारधारा के प्रति उदासीनता और बहुरष्ट्रीय कंपिनयों के मकडजाल में उलझ कर रह जाना..
इस व्यवस्था के परिवर्तन के लिए हमे खुद के व्यक्तित्व में स्वदेशी के "स्व" की भावना का मनन करना होगा उसकी महत्ता को समझना होगा.."स्व" जो मेरा है और स्वदेशी "जो मेरे देश का है,मेरे देश के लिए है"..हमें अपने अन्दर की हीन भावना और उस गुलाम मानसिकता को ख़तम करना होगा, जो ये कहता है की अमेरिका यूरोप और पाश्चात्य देशों की हर चीज आधुनिक और वैज्ञानिक है और वहां की हर विधा हमारे समाज में प्रासंगिक है, चाहे वो नारी को एक ऐसे देश में ,नग्न भोग विलासिता के एक उत्पाद के रूप में अवस्थित करना हो ,जिस देश में नारी पूज्य,शील और शक्ति का समानार्थी मानी जाती रही है..हिन्दुस्थान शायद विश्व का एकमात्र देश होगा जहाँ आज तक गुलामी की भाषा अंग्रेजी बोलना, तार्किक और आधुनिक माना जाता है और मातृभाषा हिंदी,जिसका एक एक शब्द वैज्ञानिक दृष्टि से अविष्कृत है ,बोलना पिछड़ेपन की निशानी माना जाता है..ऐसी  गुलाम मानसिकता विश्व के शायद ही किसी देश में देखने को मिले..इसी गुलाम मानसिकता को तोड़ने का प्रयास राजीव भाई के आन्दोलन का मूल है...यदि देश,व्यवस्था या व्यक्ति की विचारधारा को पंगु होने से बचाना है तो हमे सम्पूर्ण स्वदेशी के विचारों पर चल कर ही सफलता मिल सकती है.. विश्व का  इतिहास गवाह है की किसी भी देश का उत्थान उसकी परम्परा और संस्कृति से इतर जा कर नहीं हुआ है..
व्यवस्था परिवर्तन की राह हमेशा कठिन होती है और बार बार धैर्य परीक्षा लेती है ..सफ़र शायद बहुत लम्बा हो सकता है कठिन हो सकता है मगर अंतत लक्ष्य  प्राप्ति की ख़ुशी,उल्लास और संतुष्टि उससे भी मनोरम और आत्म सम्मान से परिपूर्ण ..राजीव भाई ने एक राह हम सभी को दिखाई और उस पवित्र कार्य  लिए अपना जीवन तक होम कर दिया..आज उनके जन्मदिवस  और पुण्य तिथि के अवसर पर आइये हम सभी आन्दोलन में अपना योगदान निर्धारित करे और एक स्वावलंबी एवं स्वदेशी भारत की नीव रखके उसे विश्वगुरु के पड़ पर प्रतिस्थापित करने में अपना योगदान दे .....शायद हम सभी की तरफ से ये एक सच्ची श्रधांजली होगी राजीव भाई और उनकी अनवरत जीवनपर्यंत साधना को...

आशुतोष नाथ तिवारी 

पाठक मित्रों से अनुरोध है कि आलेख के विस्तार को देख कर इसे नकारे नहीं. स्वर्ग का रास्ता भी तो लम्बा होता है.

http://jhindu.blogspot.com/#!/2011/11/blog-post_25.html [यह लेख मेरा अपना नहीं है, मेरी और आपके तरह किसी राष्ट्रियावादी का है, लेकिन यह मेरा सपना ज़रूर है!  इस लेख को पढ़े, कॉपी करे और अन्य लोगो तक फॉरवर्ड करे !
इस लेख को जनक्रांति बनाने के लिए और आप तक पहुचाने के लिए अपने ब्लॉग पर ज़रूर पोस्ट कर रहा हूँ ! किर्पया इस लेख का क्रेडिट मुझे न दे !]
India Against Congress द्वारा 24 सितंबर 2011 को 20:31 बजे पर
मैं अपने एक  मित्र के बीमार पिता से मिलने उसके घर गया था. यह नितांत पहली बार था जब मैं उसके घर जा रहा था. मुख्य सड़क से गली के अन्दर मैं अपने मित्र के  साथ हीं जा रहा था. अचानक जो दिखा वो हतप्रभ करने वाला था. वह एक मुस्लिम बहुल मोहल्ले में रहता था, यह तो मुझे पहले से हीं पता  था. मोहल्ले के पहले घर के दरवाजे पर हीं एक विशालकाय गाय उलटी टंगी थी. असाधारण बदबू! मैं सहन नहीं कर पा रहा था. मैंने नाक पर रुमाल रखीं चाही तो मेरे दोस्त ने मना कर दिया (ऐसा करने से मुसलमान नाराज हो जाते हैं) . गली में लगभग  दो सौ मीटर अन्दर उसका घर रहा होगा. इस दो सौ मीटर की दुरी कम से कम पांच गाय उल्टी टंगी हुई मिली. जैसे तैसे जब मैं उसके घर पहुंचा तो बीमार पिता के हालचाल जानने कि बजाये खुद हीं उल्टी करने लगा. घर के अन्दर तक दुर्गन्ध आ रही थी. कुछ देर बाद मेरे मित्र की दादी जो कि अत्यंत वृद्ध थीं, उन्होंने मुझसे बांग्ला में कहा कि कोई भी जब पहली बार उनके घर आता है तो उसकी यही स्थिति होती है (मैं पश्चिम बंगाल में कोलकाता के एक उपनगरीय इलाके में रहता हूँ). मैंने उनसे पूछा कि वे लोग क्यों एक मुस्लिम बहुल इलाके में रहते हैं तो वे रो पड़ीं. उन्होंने ने बताया  कि वे लोग पूर्वी पाकिस्तान (अब बंगलादेश)  से आये हैं. पूर्वी पाकिस्तान के चटगाँव में उनकी एक बड़ी सी हवेली थी. सैकड़ों एकड़ जमीन थी और वे एक संपन्न परिवार की महिला थी. 1947 के बटवारे ने सब कुछ छीन लिया. उनके पुत्री और मेरे मित्र के बुआ के साथ बलात्कार हुआ. उनके भाई और देवर कि हत्या कर दी गयी. और सब कुछ छोड़ कर हजार समस्याएं  झेलते हुए वे लोग कोलकाता पहुंचे.  किसी तरह थोड़ी  सी जमीन खरीद कर एक छोटा सा घर बनाया. तब इलाका हिन्दू बहुल था. लेकिन मार्क्सवादी नेता और एक जनसंघी के लड़ाई में यहाँ के समीकरण बिगड़  गए. मार्क्सवादी नेता ने अपना वर्चस्व कायम करने  के लिए वहां मुसलमानों को बसाना शुरू किया. कुछ वर्षों में हीं वहां मुसलमानों कि बहुलता हो गयी. फिर गो-हत्या  जैसी चीजे खुलेआम होने लगे. हिन्दुओ कि लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार आम होने लगा. हिन्दुओं के त्योहारों के समय उनके घरों में खिरकी से गो मांस फ़ेंक दिया जाता. वक्त के साथ मार्क्सवादी ताकतवर होते गए और जनसंघी बंगाल में कमजोड होते गए. कोई हिन्दुओं कि बात सुनने वाला नहीं था. फलतः एक एक कर के हिन्दू परिवार इलाका छोड़ते  गए. अब वे हीं एकमात्र हिन्दू बचे हैं वहां. संसाधन की  कमी के कारण वे दूसरी जगह घर नहीं ले सकते और इस घर को बेचने से उचित कीमत नहीं मिलेगी, क्योंकि  कोई भी इस इलाके में रहना नहीं चाहता. मजबूरन उन्हें इन्ही मुसलमानों को औने पौने दामो पर बेचना पड़ेगा. उनका अंतिम वाक्य बिलकुल तिलमिला देने वाला था. वे पूछती हैं कि जब यही सब होना था तो पूर्वी बंगाल हीं क्या बुरा था (बंगाली आज भी बंगलादेश को पूर्वी बंगाल हीं कहते हैं, शायद यादे छूटती नहीं). वे भगवन श्री कृष्ण की तस्वीर  अपने हाथ में लेकर इस जीवन से मुक्ति मांग रही हैं.

इस व्यथा को वही समझ सकता है जो इस कष्ट को भुगत रहा है, लेकिन मैं तो यह दृश्य अधिक देर तक देख नहीं पाया और उलटे पाँव वापस लौट आया. कई दिनों तक नींद नहीं आई. मुझे हमेशा वही सब दिखता रहता था. मैं परेशान हो कर एक संघी से मिला और अपनी व्यथा सुने और अपने मित्र के लिए मदद  मांगी. सुनकर वे बहुत द्रवित हुए, लेकिन कुछ करने में असमर्थता जताई.  बंगाल में जब कि सत्ता पक्ष से लेकर प्रमुख विपक्षी दल तक मुसलमानों कि दलाली में लगे हुए हैं तो ऐसे किसी भी कोशिश का परिणाम रासुका जैसे कानून हीं होंगे. लेकिन उन्होंने मुझे हिन्दुओं के हाथ मजबूत  करने कि सलाह दी और आज मैं उसी रास्ते पर चल रहा हूँ. मै यहाँ बता देना चाहता हूँ कि मैंने अभी तक अपने जन्मदिन कि रजत जयंती नहीं मनाई है अर्थात २५ साल से कम उम्र का हूँ. लेकिन मैं नास्तिक से मार्क्सवादी, मार्क्सवाद से धर्मनिरपेक्ष कांग्रेसी लोगों के सांगत में रह चूका हूँ . लेकिन इस घटना ने मेरे सामने स्पष्ट कर दिया कि धर्मनिरपेक्षा वास्तव में राष्ट्रद्रोह का हीं एक रूप है. और यह हिन्दुओ को इस बात की  सजा है क्यों वह गजनी और गोरी के भय से मुसलमान नहीं हुआ और हिन्दू बना रहा. सचमुच देश के हिन्दू अभी गुलाम हैं. और जब तक मातृभूमि के यह सपूत गुलाम हैं. यह मातृभूमि भी गुलाम है.   जिन्ना  ने कहा था - " हिन्दू और मुस्लिम दो संप्रदाय नहीं बल्कि दो अलग विचारधारा है, अलग सभ्यताये हैं . एक का आदर्श क्षत्रपति शिवाजी तो दुसरे का चंगेज खान है. ये दो विचारधराये कभी एक साथ नहीं रह सकती." मैं मानता हूँ कि जिन्ना ने सही कहा था. सचमुच ये दो विचारधाराएँ एक साथ नहीं रह  सकती. तो होना तो ये चाहिए था कि वे लोग भारत भूमि  छोड़कर अपने देश को लौट जाते. लेकिन अंग्रेजो ने उन्हें भारत का सीना चीरकर दे दिया. करोडो  हिन्दू बेघर हो गए. लेकिन हिन्दुओ के दुखो का अंत यहीं नहीं हुआ. जो भारत हिन्दुओ के लिए बचा भी उसमे कांग्रेस वालों ने जमाई रख लिया. और वो घर-जमाई अब घर के मालिक बन बैठे हैं. ये घर-जमाई खाते तो यहाँ का हैं लेकिन गुण कहीं और का हीं गाते हैं. भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच चल रहा हो तो ये मस्जिद में भारत के हार की दुआ करते हैं.

वे लोग स्वप्न में जीते हैं जो कहते हैं कि भिन्न भिन्न धर्म इश्वर के पास पहुँचाने के भिन्न भिन्न रास्ते हैं. ऐसा नहीं है, ये इस्लाम धर्म नहीं है सभ्यता है. और हर सभ्यता दुसरे कि मौत पर फलना  और फूलना चाहता है. कभी भी कोई  सच्चा मुसलमान इस देश के लिए  उस तरह का प्रेम और आदर नहीं रख सकता जैसा कि हम हिन्दू रखते हैं. जो युद्ध और पराजय हमारे दिल पर आज भी जख्म के तौर पर मौजूद हैं वही इन मुसलमानों के लिए भारत में उद्भव का कारण है.

इसलिए हमें समझ लेना चाहिए कि देश कि एकता अखंडता और भव्यता के लिए इसका हिन्दू राष्ट्र होने अतिअवाश्यक है. लेकिन यह कैसे हो? इसके लिए हमें समझना होगा कि भारत के मुस्लिमों कि प्रकृति क्या है. हमारे देश में दो तरह के मुस्लिम हैं. एक जो गजनी, गोरी, और बाबर जैसे लुटेरों के साथ आये, दुसरे जिन्होंने इनके अत्याचार से परेशान होकर अथवा किसी लोभवश अपना धर्म परिवर्तन कर लिया. यद्यपि कुछ ऐसे भी मुस्लिम हैं जो व्यापार इत्यादि के उद्देश्य से आये और यहीं के होकर रह गए लेकिन उनकी संख्या नगण्य है. ऐसे में हमें यह तो तय कर हीं लेना चाहिए कि हमें इन मुसलमानों से किसी प्रकार की सहानुभूति रखने कि जरूरत नहीं है.

हम सब ने एक कहानी पढ़ी है कि शिक्षक ने बच्चे को एक श्यामपट (blackboard)  पर दो लकीर खींचकर कहा कि एक लकीर लम्बी कर दो. सबने दुसरे लकीर को मिटाया और एक ने पहले लकीर को बढाया. कहने कि जरूरत नहीं पहले लकीर को बड़ा करने वाले को विजेता घोषित किया गया. यदि इस शिक्षा को यहाँ लगायें तो तात्पर्य है कि हिन्दू अधिकाधिक संतान को जन्म दें. लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूँ. इससे बड़ी मात्र में संसाधनों का अकाल पड़ेगा और बेरोजगारी और गरीबी के कारण स्थिति पाकिस्तान और बंगलादेश जैसी हो जाएगी. मैं दुसरे तरीके का कायल हूँ. अपनी लकीर बड़ी करने के लिए दुसरे कि लकीर छोटी कर दी जाये. इसकेलिए कई स्तर पर काम करना होगा.

एक यह हो कि सभी अल्पसंख्यक शिक्षण सन्सथानो को बंद कर देना होगा. दूसरा संसद में कानून बनाकर हिन्दू धर्म के अतिरिक्त किसी भी धर्म में धर्मपरिवर्तन को असंभव कर देना होगा. इसके बाद हिन्दू सनागाथानो को मुसलमानों खासकर उस समुदाय को जो हिन्दू से मुस्लिम हुआ है उसे अपने धर्म में वापस लाने के प्रयत्न करने होंगे. यदपि हम इसमे बहुत अधिक सफल नहीं हो सकेंगे, लेकिन आगे का रास्ता आसन हो जायेगा. भारत बंगलादेश से सिख सकता है कि कैसे 1971 तक 30 प्रतिशत हिन्दू आबादी वाले बंगलादेश में आज 90 प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं. यह कैसे है सबको मालूम है और उसी तरीको को यहाँ भी प्रयोग में लाना होगा. लेकिन यह होगा कैसे? क्या बकरी के तरह मिमियाने वाले मनमोहनी सरकार के तत्वाधान में ? या फिर इटालियन माता के कुसंसकारी संतानों के भरोसे?


नहीं!  यह तो तभी होगा जब कोई हिन्दू कुल शिरोमणी इस देश का प्रधानमंत्री होगा. वैसा शेर तो आज के समय में नरेन्द्र मोदी हीं हैं . यही हमारे हजार साल से अधिक के गुलामी के कलंक को मिटा सकते हैं. मैं यह दावा करता हूँ कि यदि ठीक समय पर मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाये तो भाजपा, 2014 के अम्म चुनाव के पश्चात्  अपने 1999 के 181 सीटों में 100 कि बढ़ोतरी कर के 281 सीटों के साथ केंद्र की सत्ता में आरुढ़ होगी. यदि सही तरीके से प्रयत्न हुआ तो 2030 तक भारत में 90 प्रतिशत से अधिक जनसँख्या हिन्दुओ कि होगी. 2030 का समय भारत के लिए निर्णायक होगा.

यदि 2030 तक हिन्दू जनसँख्या को 95 प्रतिशत के ऊपर पहुंचा दे तो भारत कि 95 प्रतिशत आतंरिक समस्यायों का समाधान हो जायेगा. यह वो समय होगा जब चीन की  ताकत बहुत अधिक बढ़ चुकी होगी और वह सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती दे रहा होगा. अमेरिका पाकिस्तान के रवैये के कारण अफगानिस्तान की लड़ाई  लगभग हार चूका होगा. पाकिस्तान में चीन का हस्तक्षेप बहुत बढ़ चूका होगा और अमेरिका सहित सभी पश्चिमी देश यह समझ चुके होंगे कि चीन को संभालना उनके बस में नहीं है. तब वे इस लड़ाई को भारत के नेतृत्व में लड़ेंगे क्योंकि पश्चिमी देशों के लिए भारत कभी उतना बड़ा खतरा नहीं रहा जितना बड़ा चीन. भारत पश्चिमी देशों के मदद से पाकिस्तान से चीन को बाहर करने  के लिए आगे बढेगा और यह लड़ाई पाकिस्तानी जमीन पर हीं होगी नतीजा पाकिस्तान कि 90 प्रतिशत जनता इस लड़ाई में मारी जाएगी और भारत का पाकिस्तान पर कब्ज़ा हो जायेगा. इसी समय बंगलादेश अपनी बढाती जनसँख्या और इस्लामिक कट्टरता  के कारण असाध्य रोग हो चूका होगा और पाकिस्तान में हुए नरसंहार का बदला लेने के लिए वह भारत पर आक्रमण करेगा.

आप तो जानते हीं हैं कि जब गिदर कि मौत आती है तो वह शहर कि तरफ भागता है. फिर भारत के पास बंगलादेश पर एक परमाणु बम डालने का पर्याप्त कारण होगा. इस तरह अखंड भारत का पुनः एकीकरण होगा. देश से मुस्लिमों का विनाश होगा और देश फिर से अपने वास्तविक भौगोलिक और सांस्कृतिक स्वरुप में आ जायेगा. इस तरह हम भारतीय 1100 साल के कलंक को धो डालेंगे. यादें तो फिर भी रह जाएँगी लेकिन जख्मों के दाग धुल जायेंगे. एक चीज हमें समझना होगा कि 2030 का निर्णायक समय तो आएगा हीं आएगा. इसके लक्षण अभी से दिखने लगे हैं. लेकिन हमें इस परीक्षा कि घरी में कितने खरे उतरते हैं यह हमें सोचना है.

इसीलिए मैं दक्षिनापंथी भाइयों से कहना चाहता हूँ कि हिम्मत ना हारे. अच्छा समय आने वाला है.   जब यह सब हो जायेगा तो हम फिर से स्वामी विवेकानंद का वह नारा दोहरा सकेंगे " क्या मैं चाहता हूँ कि हिन्दू धर्म के अतरिक्त सभी धर्म समाप्त हो जाए. कतई नहीं. वरन मैं तो चाहता हूँ कि सभी धर्मों कि पताकाएं एक साथ लहराए."  सचमुच हमें इरान और इराक में इस्लाम को नहीं मिटाना हमें अमेरिका और इंग्लैंड के इसाई होने से भी कोई समस्या नहीं. हमारा भारत भारतीय रहे बस इतना चाहते हैं हम. अभी यह दोहराएंगे तो लोग कहेंगे " क्षमा  शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो". तो पहले गरल (विष) हो फिर क्षमा करें.

एक हिन्दू राष्ट्रवादी !!

रास्ता लम्बा है लेकिन क्या यह स्वर्ग को नहीं जाता ?       

बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मायाजाल


भारत में लोकतन्त्र की पूरी तरह से हत्या हो चुकी है सभी स्तंभ ढह चुके है लेकिन वे ऐसा ढोंग कर रहे है जैसे कुछ नहीं हुआ इस लोकतन्त्र के शरीर मे कंपनी तंत्र घुस गया है और ये कंपनी-तंत्र जवाहरलाल के समय से शुरू हुआ है काफी दबाव से ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत से खदेड़ा लेकिन 126 विदेशी कंपनीया तो 1948 मे थी भारत मे…. ये सब काम नेहरू के दिशा निर्देशो के अनुसार हुआ । इस तंत्र मे कंपनियाँ जो चाहती है वही होता है कंपनियाँ चाहती है लोकतन्त्र का दिखावा करने वाली लच्चर संसदीय प्रणालियाँ, भ्रष्ट नौकरशाही, न्याय की जगह जटिल कानून, उनके घटिया उत्पादोको वैज्ञानिक समर्थन, उनके सनुकूल राष्ट्रिय नीतियाँ, मानसिक गुलामी फैलाने वाली स्कूली शिक्षा …. । वेटिकन चाहता है की भारत ईसाई बने तो सब जगह नर्सरी और किंडर गार्डन बन रहे है स्वाभाविक है ईसाई बनते भारतीय संस्कृति सांप्रदायिक हो जाती है और ईसाई तंत्र जीवन पद्धति मतलब कंपनी तंत्र का समर्थन ! क्योंकि कंपनियों को भी धर्म और संस्कृति से कोई लेना देना नहीं होता सिवाय पैसे के । एक जांच संस्थान कोक पेप्सी मे कीटनाशक पाए जाने की जांच करती है और जांच मे कीटनाशक पाए जाते है । कंपनियों के खिलाफ जबर्दस्त विरोध का माहोल वनता है, नेताओ की भ्रष्ट टोली जेपीसी बैठाती है लेकिन शरद पवार जैसे नेता और गोयनका जैसे दलाल साथ मिलकर के उस कंपनियों को अभयदन देते है, फिर मीडिया के जरिये लीपापोती की जाती है की “ऐ ! मूर्ख जनता पियो पेप्सी कोला जियो पेप्सी कोला, अब यही तुम्हारी नियति है” आज वही सब हो रहा है कंपनियाँ चाहती है नमक बेचना तो आयोडाइज्ड नमक हो गया कानूनी और अन्य नमक बेचना गैर कानूनी, कंपनियाँ चाहती है घटिया तेलो को रेफ़ाइंड कर बेचना तो डॉक्टर उसे स्वास्थ्य प्रद बताने लगे इस कंपनी तंत्र ने इतनी आर्थिक विषमता फैला दी है की एक ओर पाँच करोड़ लोगो की आय दस रूपए से भी कम है तो दूसरी ओर ऐसे लोग भी है जिनकी प्रतिदिन की आय लाखो-करोड़ो मे है । व्यक्ति मानव न रहकर इन शिकारी कंपनियों का शिकार बनकर रह गया है । लोकतन्त्र की आड़ मे ही ऐसे धंधे होते है । लोकतन्त्र की आड़ मे आहार, शिक्षा, नीति, कानून शोध ,म चिकित्सा, आर्ट, मीडिया सभी पर अपना शिकंजा कस लिया गया है अर्थात आपको हर जगह वही देखने सुनने को मिलेगा जो कंपनियाँ चाहेगी पूरी मीडिया पर कंपनी और चर्च तंत्र का कब्जा है ऐसी परिस्थियों में एक ही उपाय है की इस तंत्र से असहयोग करें ।
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भारत की आज़ादी का कानून

ब्रिटेन की संसद द्वारा पास किये गए "भारत की आज़ादी का कानून-१९४७" की
छायाप्रति सल...ग्न है- pdf Copy of "Indian Independance Act-1947"
यह वही कानून जिसकी वजह से भारत का बटवारा हुआ और इसके बारे में हमें कभी भी
नहीं बाते गया. इसमे साफ लिखा है की इंडिया और पाकिस्तान ब्रिटेन की सता के
अधीन होंगे और इसी में लिखा है इन अधीन राज्यों का गठन १५ अगस्त-१९४७ को किया
... जायेगा. इसी के आधार पर "ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर अग्रीमेंट" हुआ था जिस पर नेहरू और
बेटन ने १४ अगस्त की रात को हस्ताक्षर किया था.
इस पीडीऍफ़ कापी को कम से कम १०० भारतीयों को जरुर भेजे जिससे वे जान सके की
भारत के साथ कैसे धोखा किया गया है.
जय भारत
http://groups.google.com/group/bharatswabhimantrust/attach/b8af953b1a4ee2e3/Indian+Independence+Act+1947.pdf?part=4%E0%A4%94%E0%A4%B0 आगे देखें
द्वारा: Rameshwer Bishnoi
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अगस्त्य संहिता में विद्युत बैटरी का सूत्र (Formula for Electric battery in Agastya Samhita)

अगस्त्य संहिता में विद्युत बैटरी का सूत्र (Formula for Electric battery in Agastya Samhita)

अगस्त्य संहिता में एक सूत्र हैः


संस्थाप्य मृण्मये पात्रे ताम्रपत्रं सुसंस्कृतम्‌।
छादयेच्छिखिग्रीवेन चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥
दस्तालोष्टो निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:।
संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्‌॥

अर्थात् एक मिट्टी का बर्तन लें, उसमें अच्छी प्रकार से साफ किया गया ताम्रपत्र और शिखिग्रीवा (मोर के गर्दन जैसा पदार्थ अर्थात् कॉपरसल्फेट) डालें। फिर उस बर्तन को लकड़ी के गीले बुरादे से भर दें। उसके बाद लकड़ी के गीले बुरादे के ऊपर पारा से आच्छादित दस्त लोष्ट (mercury-amalgamated zinc sheet) रखे। इस प्रकार दोनों के संयोग से अर्थात् तारों के द्वारा जोड़ने पर मित्रावरुणशक्ति की उत्पत्ति होगी।

यहाँ पर उल्लेखनीय है कि यह प्रयोग करके भी देखा गया है जिसके परिणामस्वरूप 1.138 वोल्ट तथा 23 mA धारा वाली विद्युत उत्पन्न हुई। स्वदेशी विज्ञान संशोधन संस्था (नागपुर) के द्वारा उसके चौथे वार्षिक सभा में ७ अगस्त, १९९० को इस प्रयोग का प्रदर्शन भी विद्वानों तथा सर्वसाधारण के समक्ष किया गया।

अगस्त्य संहिता में आगे लिखा हैः


अनेन जलभंगोस्ति प्राणो दानेषु वायुषु।
एवं शतानां कुंभानांसंयोगकार्यकृत्स्मृत:॥

अर्थात सौ कुम्भों (अर्थात् उपरोक्त प्रकार से बने तथा श्रृंखला में जोड़े ग! सौ सेलों) की शक्ति का पानी में प्रयोग करने पर पानी अपना रूप बदल कर प्राण वायु (ऑक्सीजन) और उदान वायु (हाइड्रोजन) में परिवर्तित हो जाएगा।

फिर लिखा गया हैः

वायुबन्धकवस्त्रेण निबद्धो यानमस्तके उदान स्वलघुत्वे बिभर्त्याकाशयानकम्‌।

अर्थात् उदान वायु (हाइड्रोजन) को बन्धक वस्त्र (air tight cloth) द्वारा निबद्ध किया जाए तो वह विमान विद्या (aerodynamics) के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

स्पष्ट है कि यह आज के विद्युत बैटरी का सूत्र (Formula for Electric battery) ही है। साथ ही यह प्राचीन भारत में विमान विद्या होने की भी पुष्टि करता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि हमारे प्राचीन ग्रन्थों में बहुत सारे वैज्ञानिक प्रयोगों के वर्णन हैं, आवश्यकता है तो उन पर शोध करने की। किन्तु विडम्बना यह है कि हमारी शिक्षा ने हमारे प्राचीन ग्रन्थों पर हमारे विश्वास को ही समाप्त कर दिया है।

हम आज भी गुलाम है, इंग्लॅण्ड के उपनिवेश है ! (Part - II)

  • Indian Citizenship Act,
  • Indian Advocates Act, Indian ,
  • Education Act, Land,
  • Acquisition Act, Criminal,
  • Procedure Act, Indian,
  • Evidence Act, Indian,
  • Income Tax Act,
  • Indian Forest Act,
  • Indian Agricultural Price Commission Act
सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए | इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है
(हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है | हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है | हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही 70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है | इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए | आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके
डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है | इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा | भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है | अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और विदेश मंत्री जैसे पद पर बैठे गधे UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं | आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ?

-तरक्की का नया नज़रिया ....पढाई आवश्यक नहीं ......डा श्याम गुप्त ..




               आखिर क्या कहना चाहते हैं हम ....इस प्रकार के आलेख रूपी  समाचार से.......क्या समझाना चाहते हैं नई पीढी को...कोमल माटी -तन- मन बच्चों को  ....क्या सन्देश देना चाहते हैं......की क्लास बंक करें , पढाई बीच में छोड़कर अन्य सब्ज-बागों  में मन लगाएं ...... नियमित -व पूरी स्कूली-कालि ज की शिक्षा का कोइ लाभ नहीं है......

हम आज भी गुलाम है, इंग्लॅण्ड के उपनिवेश है ! (Part - I)

अभी कुछ समय पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है । ये Commonwealth का मतलब होता है समान सम्पति । किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति । आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो । Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त 1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ....... हमारे यहाँ के अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं - (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है | भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is Bharat " जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हमारा देश भारत है इंडिया नहीं
हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है | भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है (यहाँ देखें) जिसमे एक शख्स को भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर | इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था | इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे | इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने
अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) | आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर क किताब की दुकान देखते होंगे "व्हीलर बुक स्टोर" वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है | इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले येगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland में जहाँ "I" का मतलब Irish है वही भारत के IPC में "I" का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है)
  • Indian Citizenship Act,
  • Indian Advocates Act, Indian ,
  • Education Act, Land,
  • Acquisition Act, Criminal,
  • Procedure Act, Indian,
  • Evidence Act, Indian,
  • Income Tax Act,
  • Indian Forest Act,
  • Indian Agricultural Price Commission Act
सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए | इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है
(हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है | हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है | हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही 70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है | इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए | आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके
डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है | इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा | भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है | अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और विदेश मंत्री जैसे पद पर बैठे गधे UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं | आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ?
क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का हिस्सा है | 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का सिस्टम शुरू किया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन कार्ड होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में | अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में बड़ा कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय शुरू किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए विशाल कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है | हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है | ये अंग्रेजो के इंग्लैंड क़ि संसदीय प्रणाली है | ये कहीं से भी न संसदीय है और न ही लोकतान्त्रिक है| लेकिन इस देश में वही सिस्टम है क्योंकि वो इस संधि में कहा गया है | और इसी वेस्टमिन्स्टर सिस्टम को महात्मा गाँधी बाँझ और वेश्या कहते थे (मतलब आप समझ गए होंगे) | ऐसी हजारों शर्तें हैं | मैंने अभी जितना जरूरी समझा उतना लिखा है | मतलब यही है क़ि इस देश में जो कुछ भी अभी चल रहा है वो सब अंग्रेजों का है हमारा कुछ नहीं है | अब आप के मन में ये सवाल हो रहा होगा क़ि पहले के राजाओं को तो अंग्रेजी नहीं आती थी तो वो खतरनाक संधियों (साजिस) के जाल में फँस कर अपना राज्य गवां बैठे लेकिन आज़ादी के समय वाले नेताओं को तो अच्छी अंग्रेजी आती थी फिर वो कैसे इन संधियों के जाल में फँस गए | इसका कारण थोडा भिन्न है क्योंकि आज़ादी के समय वाले नेता अंग्रेजों को अपना आदर्श मानते थे इसलिए उन्होंने जानबूझ कर ये संधि क़ि थी | वो मानते थे क़ि अंग्रेजों से बढियां कोई नहीं है इस दुनिया में | भारत की आज़ादी के समय के नेताओं के भाषण आप पढेंगे तो आप पाएंगे क़ि वो केवल देखने में ही भारतीय थे लेकिन मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे | वे कहते थे क़ि सारा आदर्श है तो अंग्रेजों में, आदर्श शिक्षा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श अर्थव्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श चिकित्सा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कृषि व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श न्याय व्यवस्था है
तो अंग्रेजों की, आदर्श कानून व्यवस्था है तो अंग्रेजों की | हमारे आज़ादी के समय के नेताओं को अंग्रेजों से बड़ा आदर्श कोई दिखता नहीं था और वे ताल ठोक ठोक कर कहते थे क़ि हमें भारत अंग्रेजों जैसा बनाना है | अंग्रेज हमें जिस रस्ते पर चलाएंगे उसी रास्ते पर हम चलेंगे | इसीलिए वे ऐसी मूर्खतापूर्ण संधियों में फंसे | अगर आप अभी तक उन्हें देशभक्त मान रहे थे तो ये भ्रम दिल से निकाल दीजिये | और आप अगर समझ रहे हैं क़ि वो ABC पार्टी के नेता ख़राब थे या हैं तो XYZ पार्टी के नेता भी दूध के धुले नहीं हैं | आप किसी को भी अच्छा मत समझिएगा क्योंक़ि आज़ादी के बाद के इन 64 सालों में सब ने चाहे वो राष्ट्रीय पार्टी हो या प्रादेशिक पार्टी, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता का स्वाद तो सबो ने चखा ही है | खैर ............... तो भारत क़ि गुलामी जो अंग्रेजों के ज़माने में थी, अंग्रेजों के जाने के 64 साल बाद आज 2011 में जस क़ि तस है क्योंकि हमने संधि कर रखी है और देश को इन खतरनाक संधियों के मकडजाल में फंसा रखा है | बहुत दुःख होता है अपने देश के बारे जानकार और सोच कर | मैं ये सब कोई ख़ुशी से नहीं लिखता हूँ ये मेरे दिल का दर्द होता है जो मैं आप लोगों से शेयर करता हूँ | ये सब बदलना जरूरी है लेकिन हमें सरकार नहीं व्यवस्था बदलनी होगी और आप अगर सोच रहे हैं क़ि कोई मसीहा आएगा और सब बदल देगा तो आप ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं | कोई हनुमान जी, कोई राम जी, या कोई कृष्ण जी नहीं आने वाले | आपको और हमको ही ये सारे अवतार में आना होगा, हमें ही सड़कों पर उतरना होगा और और इस व्यवस्था को जड मूल से समाप्त करना होगा | भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करता है | इतने लम्बे पत्रलेख को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद् | और अच्छा लगा हो तो इसे फॉरवर्ड कीजिये, और ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये |

बाल दिवस : मेरे देश के बच्चों के आदर्श नहीं हो सकते नेहरू ?





ये है सच जवाहर लाल नेहरू का जो अपनी बेटी समान लड़कियों को भी अपनी अय्याशी का साधन समझता रहा । इसके जैसे निर्लज्ज अय्याश पुरूष को मैं क्या बच्चे भी स्वीकारने को तैयार नहीं कि इसे चाचा कहा जाये ।
जब स्वतंत्रता के संघर्ष में सत्ता का हस्तांतरण हुआ तो सारा श्रेय कांग्रेस को मिला । प्रधानमंत्री पद के चुनाव में कुल 15 वोटों में से 14 वोट सरदार पटेल के पक्ष में और 1 वोट नेहरू के पक्ष में पड़ने के बाद भी नेहरू गांधी जी की कृपा से देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने । लेकिन 1955 में " ओह दैट आफुल ओल्ड हिपोक्रेट " Oh, that awful old hypocrite - ओह ! वह ( गांधी ) भयंकर ढोंगी बुड्ढा कहकर नेहरू ने अपने प्रति किये गये गांधी के महान त्याग को अपमानित कर दिया ।
विदेश में पढ़ा एक व्यक्ति जो भारत की सनातन संस्कृति से अनजान था । जो अपने को हिन्दू कहलाने में अपमान समझता था । जो पराई स्त्री के चक्कर में इतना गिर सकता है कि जिसका कोई चरित्र ही नहीं हो , जो उन्मुक्त रूप से एक औरत के साथ सिगरेट पीता दिखाई देता है । ऐसे व्यक्ति के जन्मदिन को अगर हमारी सरकार बाल दिवस के रूप में मनाती है , विभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम करती है और कहती है इसने प्रेरणा ले ? अगर हमारे देश की आने वाली पीढ़ी इसके पद चिन्हों पर चलने लगे तो भारत का भविष्य अंधकारमय होगा ।
आज देश में जो आतंकवाद , संप्रदायवाद की समस्या है । कश्मीर की समस्या , राष्ट्र भाषा हिन्दी की समस्या और चीन तथा पाकिस्तान द्वारा भारत की भूमि पर अतिक्रमण की समस्या है । इन सभी समस्याओं के मुख्य उत्तरदायी जवाहर लाल नेहरू है , जिन्हें भारत सरकार चाचा नेहरू कहती है ?
- विश्वजीत सिंह

ऐसा क्या लिखा था जिसके कारण इस वैबसाइट को भारत मे बंद करवा दिया गया ? पढ़िये

by भगवा हैं भारत का झण्डा
अभी भी आप यहाँ देख सकते है http://www.fire-proxy.com/www.hinduunity.org/hitlist.html
इन सेकुलर लोगो ने Hinduunity.org नाम की तेजी से उभरती हुई वैबसाइट को एक ही झटके मे भारत मे बंद करवा दिया (2004 मे )

इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था की 2004 मे इस वैबसाइट के 800,000 subscribers थे और इसे हर रोज 17 हजार लोग देख रहे थे

सेकुलर कीड़ो और गद्दारो की पोल खोलती इस वैबसाइट को बोलीवुडिया भांड़ो की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने बंद करवा दिया

क्या भारत के मदरसो को बंद करने की ताकत है जहां सिने पर बम बांधने की शिक्षा दी जाती है ? काफिरो को क़तल करने की शिक्षा दी जाती है ?
समाचार मे : http://ia.rediff.com/news/2004/may/26hindu.htm
Wiki: http://en.wikipedia.org/wiki/Hindu_Unity
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चलिये आपको दिखाते है यह कौनसा लेख था जिसके कारण
इस वैबसाइट को भारत मे बंद करवा दिया गया :

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इसकी खास बात यह है की सोनिया ने जिन लोगो को NAC का मेम्बर बनाया है उसमे से 85% लोगो के नाम इस लेख मे है

THE BLACK LIST ENEMIES OF HINDUS EXPOSED!


THIS PAGE EXPOSES THE EVIL FORCES THAT ARE AGAINST THE HINDU PEOPLE. EACH OF THESE PERSONS
AND OR ORGANIZATION HAVE BEEN FOUND GUILTY OF LEADING EFFORTS AGAINST OUR MOVEMENT THROUGH THEIR ACTIONS OR OTHERWISE. THEIR CRIMES ARE CRIMES AGAINST THE HINDU PEOPLE.

KNOW YOUR ENEMIES! KNOW WHO WILL BE RESPONSIBLE FOR THE DOWNFALL OF BHARAT!...and prepare yourselves for the duty towards your religion and nation.

-HinduUnity.org
PERVEZ MUSHARRAF - Crime: For overthrowing the last hope of democracy in Pakistan and hopes for peace in Kashmir. This man is directly responsible for the lives of thousands of Indian-Jawans killed at the L.O.C.
E-mail: CE@pak.gov.pk

Begum Khaleda Zia - Prime Minister of Bangladesh. Crime: Directly responsible for Hindu Genocide against the Hindu minority in Bangladesh. For more information on Hindu torture, rape and plunder please visit:http://www.hrcbm.org SYED AHMED BUKHARI(IMAM OF JAMA MASJID, DELHI) - Crime:has issued a fatwa against our entire nation ..!!!! he has publicly stated that should the Ram Mandir be constructed , he would personally engineer an economic blockade of Bharat by making use of unconditional help from the Islamic world. This criminal has publicly declared support for the actions of the Taliban for the destruction of the Buddha statues. SONIA GANDHI - Crime: Traitor to India and Hindus, Pro-Christian/Muslims agendas. This criminal is the most wanted as has a long list of crimes committed against the Hindu people. The day Sonia Maino Ghandhi becomes the prime Minister of India, that day will dooms day for India. Never must Hindus allow this Italian foreigner to rule our Country. See Photo
The Pope - Crime: One of the biggest enemies of Hinduism. He has vowed to harvest India into Christianity. This devil is the backbone of all the immoral, unethical and forceful conversions in India.
Hindus need to be aware about the forces at work to tear Hinduism apart. The Vatican, which the Pope is head provides huge amounts of money for missionary activities, particularly in India. The money is hundreds of millions of dollars. These missionaries do anything they can to convert. They purposely pass of misinformation about Hinduism, use monetary incentives and these are two of the mildest methods. The Pope has said in no uncertain terms that he will 'harvest India to Christianity'. This automatically makes the Pope an enemy of Hindus. Our heritage and culture is so rich, it is something to be preserved and appreciated. Why do they want to wipe Hindu culture of the face of the Earth? Conversion to Christianity robs so much of a Hindu. Our scriptures cover the same conduct as Christianity (albeit with more reasoning) but the most important robbery is of freedom. In Hinduism one can has the opportunity to question beliefs and choose which to be adopted and still be a Hindu. With Christianity you have to accept the Bible and Christ or you will go to hell! The bible famously quotes Christ as saying: 'None come to God accept through me'
But in the Bhagwad Geeta Shree Krishna says'People can come to me through all paths'It is not our intention to insult Christianity - but doesn't a system which believes that sincerity of worship, nobility of thought and action and unselfishness (among other qualities) get a person to God regardless of whom they decide to worship make more sense? Isn't such a system of reason based religion something to be preserved and protected at all costs? It would promote peace between religions but alas Christianity cannot see it (Muslims of course need no mention).
For an interview with a former Catholic who exposes the Pope's hypocrisy check the following link:
http://www.rediff.com/news/1999/nov/04pope1.htm

Indeed this make The Pope a very serious enemy!

OSAMA BIN LADEN - Crime: A criminal against humanity.
Has waged unholy wars in the name of Allah against India, U.S.A and Israel. Wanted for bombings of the U.S embassy in Kenya and Tanzania. Bin Laden is the basic building blocks of Islamic Terrorism that exist in the world today.

PAT ROBERTSON (700 Club) - CRIME: THIS MAN IS EXTREMELY TERRIFIED OF HINDUISM AND WILL DO ANYTHING IN HIS POWER TO DESTROY IT. What he fears most is that Christians are converting to Hinduism. He has gone on to great extents by calling Hinduism a 'satanic religion'. He cannot be forgiven nor can his speeches be forgotten. He is truly a devil out to destroy something as pure as Hinduism.

BENNY HINN: This man is a Baptist evangelist who goes to countries around the world, especially those with large Hindu populations, like Trinidad or Guyana, and preaches about "the evil of Hindus and Hinduism". He also tries to covert Hindus to Christianity. All self respecting Hindu Jawans are asked to stop his gathering by all means possible.
LALOO PRASAD YADAV - Crime: Swindled the Gau-Chara's money, millions of rupees. Money was sent into his state from the federal government to be used as cow feed to protect the cows from starvation. Laloo somehow managed to get this hands on a large portion of this money. He will burn in hell for eternity. Laloo is also directly responsible for killing the dalits in his regime. See Photo of Laloo and Rabri


M.F. Hussian - Crime: This scum is responsible for painting provocative poctures of Hindu deities in the name of "freedom of expression". We would like to see him paint a sexual picture of Prophet Muhammed engaged in having sex with a little 6 year old Aiesha. Now that would be real freedom of expression. ALL HIS ART WORK SHOULD BE DESTROYED IMMEDIATELY BY ANY SELF RESPECTING HINDU SOLDIER. NO MERCY SHOULD BE SHOWN TOWARDS THIS DESTROYER OF HINDUISM.
Photo of M.F.Hussian

ABU ASIM AZMI - Pro ISI,anti indian, pro jehadi, threat to nation prime accused in mumbai bomb blast.samajwadi party memeber: Locatopn: Mumbai. In a public meeting at mumbai he openly gave a lecture to his followers. CHAHE HINDUSTAN KE TUKDE TUKDE HONE DO PARVAH NAHIMAGAR ISLAM KO IN HINDU KAFRON SE BACHANA HAI

DAWOOD IBRAHIM - The leader of the pack who eats away at the foundation of Hinduism by bringing in his filth into Indian movies. His hidden messages in these movie are corrupting Hindu minds. The master mind thug behind bollywood. ISI agent, helper and financier.

PROPERTY OWNED BY THE DAWOOD GROUP IN KARACHI
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A 239, Block 13C, Gulshan-e-Iqbal
25, Rufi Cottage, Block 13D, Gulshan-e-Iqbal
Ahmadi Apartments, Gulshan-e-Iqbal
Meymar Arcade, Fourth Floor, Gulshan-e-Iqbal
C-201 Karachi Development Scheme, Extension 1A
Moin Palace, Second Floor, Ghazi Dargah, Clifton
Khayaban-e-Samsher, Defence Officers' Housing Authority

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PHONE NUMBERS USED BY THE DAWOOD GROUP
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+92 300249526 (used by Shakeel, usually answered by his associate Fahim)
+92 21 521504
+92 21 8117516
+92 21 479507
+92 21 4937773
+92 21 4930345
+92 921 4977077
+92 21 493034

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DAWOOD IBRAHIM'S PASSPORTS
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K 650098 dated July 30, 1975, Mumbai.
M 110522 dated November 13, 1978, Mumbai.
P 537849 dated July 30, 1979, Mumbai.
R 841697 dated November 26, 1981, Mumbai.
V 57865 dated January 3, 1983, Mumbai.
A 333602 dated June 4, 1985, Mumbai.
A 501801 dated July 26, 1985, Mumbai.
F 823692 dated September 2, 1989, Mumbai.
G 866537 dated August 12, 1991, Rawalpindi.


Bharat Shah - Film Financer with Links to Islamic Mafia Viz Dawood Ibrahim . Caught by Mumbai Police for having conversation with Chota Shakeel a Gangster , Extortionist , a Pakistani ISI Man. See Photo
DILIP KUMAR - Actor, non-resident Pakistani, notorious Hindu hater. See Photo
SHABANA AAZMI - Muslim Actress, ISI & Jihad supporter against India. Anti-National spreads her venom through bollywood. Was involved in making several Anti-Hindu movies with immoral themes. This women will do anything to make Hinduism look bad. See Photo


S.RANGARAGAN & N. RAVI - Editors of THE HINDU publication based in Chennai. Both of them lead the anti-Hindu media brigade by publishing articles, editorial made up of lies and propaganda.
SHARUKH KHAN - (Actor) Hindus should stop watching his movies at once! This Hindu hater has publicly spoken against Hinduism. Dawood Ibrahim and Sharukh have come together to destroy Hindu culture and heritage. Sharukh has declared Osama Bin Laden as his hero. This criminal needs to be sent packing back to Pakistan. shahrukh@shahrukh.com

Salman Khan (Actor) - His Links to Underworld Mafia Dons are well know to world and Particularly DAWOOD IBRAHIM. Anti-Hindu, Anti-India.
Arun Ghandhi - Grandson of the "Mahatma" Ghandhi who sold his own motherland piece by piece while allowing the Hindu genocide. Arun Ghandhi, following footsteps of his grandfather is in the same line of non-violence preaching. - He has written several articles for News India times (anti-Hindu paper) with outright lies about the VHP and BajrangDal. He openly criticizes the BajrangDal for the Godhra violence but not one mention of why and what the muslims of India are did in Godhra(Burned 58 Hindu women and children). Hopefully this rotten apple who hasn't fallen far from the grand-tree meets the same end as his traitor Mahatma! Resides in Florida as of date.

Biju Matthews: Anti-Hindu Commie! Anti-U.S, Antu-India. Wishes to bring Communism to India and in the process destroy the soul of Hinduism. He has allied himself with Christian Missionary and Islamic Jihad organizations to destroy the fabric of Hinduism. Biju Matthews is a member of PROXA and FOIL, both of which are communist organizations working under the guise of liberalism. He has close links with ANSWER(Act Now to Stop War & End Terrorism) and participated in an Anti-War rally on Oct26 2002 which opposed any military action against Iraq. A traitor living in the U.S, Biju Matthews was also noted for his anti-war stance on Afghanistan.

Biju Mathew, Assistant Professor of Business, Rider University, 2083 Larenceville Road
Lawrenceville, NJ 08648 USA
phone: 609-895-5551
FAX: 609-896-5304
email: mathew@rider.edu

See Photo of Matthews

MR. KRIPASHANKAR SINGH (Home Minister Mantralaya)
Crime: For supporting Muslim thugs and harassing Shiv Sena members.

DAVID DUKE: Crime - supremacy, anti-Semitism, neo-eugenics, neo-Nazism, racial tribalism, Christian Identity (racial-religious fundamentalism), and that Hindus are a dusky inferior race of white-black-yellow mongrels, following primitive superstition. This can be found in his book 'My Awakening'.

M C Subarno - (Senior Indian Administrative Service officer and former regional development commissioner of Chhotangapur, Ranchi). Crime: Charged in the cow fooder scam scandle. Subarno has been named accused in case no. RC 38 (A)/96 of the multi-crore scam.Subarno has been charged with abetting the scam and receiving monetary benefits from the scamsters. Anyone who steals from Gau Mata especially fodder can easily turn on his own mother. Penalty: 1000 lashes and 30 year prison term.
Syed Ali Shah Geelani (Hurriyat Conference leader) Found Guilty of conspiring against India.Pro-Pakistani, Extremist and an avid supported of Islamic militant groups - Hizbul Mujahiddin and Laskhar e Taiyba

RAJENDRA YADAV - For disrespecting Lord Hanuman in an article he wrote for 'Hans' Magazine declaring Lord Hanuman, Shivaji, Bhagat Singh as terrorists. No self respecting Hindutva activists should tolerate this.

SID HARTH - Crime: Hundred of article published against Hindutva. This man is a walking encyclopedia of propaganda against anything Hindu. 1000 lashes for this man cannot be enough. Sid Harth, Newlife Enterprises, 1950 South Shore Drive, Erie, PA 16505. Tel: (814)459-8567, kashiram@erie.net

M.J.AKBAR - this criminal is a very cunning musalmaan, he is editor of congress mouthpiece in A.P.called Deccan Chronicle [daily news paper].He is on the forefront of anti-hindutva brigade. His news paper publishes all blatant lies on hindutva. See Photo

Zafaryab Jilani - Crime: The Babri Masjid Action Committee and the Vishwa Hindu Parishad seem to be on a collision course. VHP president Ashok Singhal said here on Sunday the date for starting the construction of the Ram temple would be announced on January 21 by the Dharam Sansad, even as Babri committee convenor Zafaryab Jilani said that Muslims would physically resist such an attempt.
M. Veerappa Moily - Crime: For the deaths of 5 Hindu patriots who wanted to hoist our national flag during Independence day. This criminal was responsible for commanding the police to shoot at these patriots. Their deaths will be avenged.

B.N. Pande - Cirme: In The Telegraph newspaper dated 3/1/2001, the imbecilic Mani Sankar Ayer, reported that the historian Vishwanathan Pande had revised Mughal history to show that Aurangazeb did not sack Kashi-Vishwanathan temple because he was a Muslim. B. N. Pande apparently wrote that a Nepalese princess was entrusted to the care of Aurangazeb; he put her in the Kashi temple. But the hindu priests molested her and other hindu ladies with her. To avenge her honour Aurangazeb destroyed the temple. I do not know whether the historian had actually written these things or Ayer is making it up, but someone is lying their heads off. I also hold the newspaper responsible for publishing such lies in the name of secularism.

Kanwal Rekhi - This criminal and his group The IndUS Entrepreneurs have decided to invest in Pakistan. This will allow the Pakistanis to benefit economically and more importantly militarily. Thus will in turn allow I.S.I. to operate with more resources in it's promotion of terrorism to India.

Mulayam Yadav Singh - Crime: For ordering the killing of Kar Sevaks. Charged with : MURDER. See Photo

Amar Singh - Right hand man of Mulayam Singh Yadav. See Photo

Kuldeep Nayar - Journalist [See Photo] Crime: Extremely Anti-Hindu, resident Pakistani. Address: D-7/2, Vasant Vihar, New Delhi .Tel. - 6143949, 6142388, Fax - 6143949
33, Lodi Estate, New Delhi 110003 Tel. - 4658840. " There is an attempt at polarisation in the sense that the RSS Parivar is trying to destroy the pluralistic character of the country. It is not the consolidation of Hindu votes, but of those few who want the fundamentalists to establish a theocratic state.I am surprised by the absence of action against religious terrorism. Members of the Vishwa Hindu Parishad and the Bajrang Dal are no different from the Taliban. The world woke up to their obscurantism and violence after their attacks in the US. India is waking up to their barbarism after their massacres in Gujarat. The Taliban disfigured Islam; the RSS Parivar is
disfiguring Hinduism." On Godhra :" Gujarat may well be a laboratory for the Parivar.". He also said " The Hindutva representatives -- the VHP and the Bajrang Dal -- are destroying the lofty aims of the independence struggle. Not only that, they are demolishing the country's ethos of pluralism. "

"More than the ISI, Al-Qaeda and jehadi elements, it is people like Nayyar who encourage terrorism in all its forms. This kind of statement is harmful to the morale of security personnel, and encourages terrorist elements in the country," VHP Surendra Jain said. Another photo of Kuldeep Nayar


Deepa Mehta - Crime: For producing movies that depict Hinduism as being immoral. Her sidekick Shanana Azmi. Wolves are known to travel in packs.

Jyoti Basu - Crime: Anti-India, Anti-BJP and The Sangh Parivar, A strong communist who wishes to steal India's democracy using all methods. Basu is a known supporter of the Islamic terrorist network which operates in India.
See Photo of Basu

Romila Thaper - Crime: For distorting the true history of India. professor at the JNU in New Delhi, the Mecca of secularism and negationism in India, denied the Muslim genocide by replacing it instead with a conflict of classes : "Muslims brought the notion of egalitarianism in India", they argue . In her "Penguin History of India", co-authored with Percival Spear, writes again : "Aurangzeb's supposed intolerance, is little more than a hostile legend based on isolated acts such as the erection of a mosque on a temple site in Benares. See Photo.

Vincent Kunudukulam - Crime: This priest from of the St Thomas Pontifical Seminary, Aluva who claims to have a doctoral degree has written his thesis on the R.S.S . He has openly declared in several of his works that the RSS is a fascist organization and that Hindutva was a distorted version on Hinduism. It is clearly that his work of "forceful conversions" of Hindus is being interrupted by the Sangh. Too Bad! This scum of the earth needs an attitude adjustment.
Dilip D'Souza - Crime: Has writing several articles against Hindutva. This man is a Hindu hater.
http://www.rediff.com/news/dec/16dilip.htm
e-mail: dilipd@rediff.co.in

Stephen R. Welch - A journalist who writes for The Secular web, web site:http://www.infidels.org. Welch is responsible for writing several propaganda articles against Hindutva. His e-mail is: welchs@corpdc.utc.com

RABI MAHARAJ - This guy is a so called ex-yogi turned Christian. Supossidly lectured in over 500 univ. in 80 countries against hinduism. His funda is that Hinduism is very very satanic and what so ever good is in it, they copied from Christianity. He has no knowledge about Hinduism and is a self styled Hindu expert in west. This shameless scum is still prowling around. He wrote a anti-Hindu book called "***********i". He is hailed as the christian answer to Hinduism.

Helen Heklund - This scum owns several web sites that spread false propaganda about Hinduva. This criminal is directly responsible for spreading false lies about the Sangh Parivar and is determined to cause a strife between the Hindus and the Sikhs. Her pro-muslim agenda is clear! The criminal may be using several alias but her mailing address is PO BOX 2427, Grandbury, TX, 76048 (taken off the whois directory on the net). Telephone #: Not-listed. E-mail: heklund20@HOTMAIL.COM

Dr. Ram Punuyani - Rabid Anti-Hindu who claims to be an expert on Hindu nationalism and religious fundamentalism has made a living spreading anti-Hindutva venom.
Somnath Charterjee - On POTA - "It is only for the purpose of creating a feeling of scare among some communities". See Photo

Mani Shankar Aiyar - Pseudo Secularist , Propaganda Artist , Pro Muslim , Anti Hindu , ANTI ISRAEL , ANTI JEW. See Photo

Sunil Dutt - Pro Muslim , ANTI HINDU, Pseudo Secular , CONGRESSMAN , Born in Pakistan and having special Attachments with Islamic Terrorists (I.S.I). His Son, Actor Sanjay Dutt was Arrested on TADA and Helped in Bombay Blast. See Photo. See Photo of Sunil and Sanjay

Sanjay Dutt - Son of actor Sunil Dutt recently caught on tape talking to Dawwod Ibrahim.(Muslim mafia don and financier to the muslim terror network known as I.S.I) See Photo.

Salman Khurshid - Former Indian State Minister for Foriegn Affaris. A hardcore pro-Pakistani living in India; As a minister of external affairs he assured that Dawood's (Islamic Mafia Don) mother get the passport & visa within 24 hours and fled out of the country.

Inder Kumar Gujral - He declared in parliament in late December 1990, that "a color is being seen these days which was also seen at the time of the Mahatma's murder. I don't need to give the name of the color." (Refering to our Hindutva flag - Bhagwa which is orange. This commie bastard doesn't realize his own color of Red.

Nirmala Despande - Psuedo-Secular at it's best, pro-Ghandhi, pro-Muslim and extremely anti-Hindu. Her website:
http://www.nirmaladeshpande.org/
Permanent address : (i) Gandhi Ashram, Kingsway Camp, Delhi-110009 and (ii) Brahmavidyamandir, P.O. Paunar, District Wardha, Maharashtra 442111 See Photo

Chandresh Kumari, Shirimati - Rani Chandresh Kumari (Princess of Jodhpur) , Member of Parliament and former Minister of State for Tourism (Himachal Pradesh). P-sec, Pro-Muslim and is ready to bleed Hindus if given a chance. 8, Ferozeshah Road, New Delhi. 110001Tel. - 3719870 kumari@sansad.nic.in Permanent Address Clouds End Villa, Dharmshala, Dist. Kangra, Himachal Pradesh Tel. - 24904. See Photo

Jairam Ramesh - who at present is the Secretary of the Economic Affairs Department of the Congress Party in New Delhi, the Deputy Chairman of the Karnataka State Planning Board. P-sec, extremely Pro-Islamic!

Praveen Rashrapal - What is the difference between racial discrimination and caste discrimination? "The first is like raping a woman without a condom and the second is raping her with a condom. "That analogy was made by
Praveen Rashtrapal, Member of Parliament from the Congress Party, India's main Opposition party. He was speaking at a press conference held by the Dalit Caucus and National Campaign for Dalit Human Rights. The subject of the press conference was, "Include Caste and Caste-based Discrimination in WCAR and UN Agenda." ANTI-HINDU !

Gulam Nabi Azad - Member of Congress. Anti-Hindu right to the core. Would love to see India turn Islamic. Crime: Passing on Information to all Militants in Kashmir-- SHAME TO U GULAM! See Photo.

Buddadeb Battacharaya - Communist Leader. Wishes to bring communism to India and has to allied himself with Muslim terrorists working in India . See Photo.

Sitaram Yechuri - Wants to make India Red! Another communist Hindu hater. See Photo.

Ram Vilas Pasan - P-Sec & Anti-Hindu! and thriving on Dalit votes! Driving a wedge between among Hindus using caste and helping anti-Hindu forces indirectly
Amedkar, Shri Parkash Yashwant - Thriving on Dalit Votes! Shame, shame! Driving a wedge between among Hindus using caste and helping anti-Hindu forces indirectly. See Photo & Biodata.

Udit Raj - National Chairman of the All India Confederation of Schedule Caste and Schedule Tribe Organizations Driving a wedge between among Hindus using caste and helping anti-Hindu forces indirectly. 44-year-old Udit Raj (previously Ram Raj) is one of the youngest Dalit leaders of the country.
Converted to Buddhism a year ago, this Additional Commissioner of Income Tax in Delhi is busy forging new alliances with Dalit Muslim organizations and other Buddhist associations. Although associated with one of the largest Dalit organizations in the country, his limitation is that he has not been able to form a political party yet.

"While Ambedkar crafted the Constitution , the Hindutva brigade is carrying on a review with the purpose of killing it. Ambedkar stood for reservation for SC/STs, the BJP stands for eroding it. Ambedkar converted to Buddhism, the BJP is thinking of introducing a provision against religious conversion. An amalgamation of Ambedkar with Hindutva is a dishonour of Babasaheb. The minorities have become a worse untouchable post-Godhra. The natural alliance of Dalits can only be with the Dalit Muslims and other backward Muslims. " -- UDIT RAJ. See Photo of Udit Raj.

VR Krishna Iyer - Former Judge, Supreme Court of India. Anti-Hindu, P-Sec. Pro Islamic. Iyer writes "...Therefore, hidebound Hindutva, red in tooth and claw, is an invasion of the basics of our Constitution". Quoted by Communalism Combat another anti-Hindu paper. See Photo

MORE ANTI-HINDU COMMIES

Angana P. Chaterjee - Anti-Hindu Commie! Residing in San Francisco at
163 Liberty Street, San Francisco CA 94110. Tel: (415)648-0138. Director of Research with the Asia Forest Network, Center for Southeast Asia Studies, University of California, Berkeley. See Photos
KARUNANIDHI - Pro-Muslim, Hindu Hater. He abolished the Hindi language as well as learning Sanksrit from Tamil Nadu. See Photo

Harkishan Singh Surjeet. See Photo

Ardhendu Bhushan Bardhan - General secretary of Communist Party of India

Shri Yusuf Sarwar Khan (Alias: Dilip Kumar) - Delhi Address: 7 GRC Road, New Delhi. Tel: 3019349. Permanent Address: Saira Bunglow, G-1, 34-B, Pali Hill Road, Bandra (West), Mumbai. 400050. Tel: 6465786,6055666, Fax 6465786, e-mail: dk@sansad.nic in.

Arundathi Roy - said "In the era of the global village, war between India and Pakistan is like a war between Dalits and Adivasis." See Photo1,
See Photo2, See Photo3


Tavleen Singh - Anti Hindu and Perfect Pseudo secular Reporter
She rubs shoulders with Khalistanis and Anti-Hindus (Muslims, Commies)

Praful Bidwai - Another journalist who defames Hinduism and the Sangh Pariwar and a spoon for the Muslims. Photo1, Photo2, Photo3

Vir Singhvi - Anti-Hindu/India, P-sec! See Photo.

Bipan Chandra - Anti-Hindu, Pro-Muslim! Former Professor of History, Jawaharlal Nehru University (The Mecca of negationism in India). See Photo

Dr. Harbans Mukhia - Anti-Hindu, P-sec. A professor at JNU. Fax: +91-11-616-5886 eMail: mukhia@global-studies.de
Kushwant Singh - Anti-Hindu, P-Sec. See Photo.

Mahesh Bhatt - His Comment on Sanjay Dutt's conversation with Mafia Boss Chota Shakeel : "Let's not seize the moment and say that the conversation between these gangsters and the people mentioned in these
tapes suggests that these people are part of the underworld crime network"

Meera Nair - Pro-Muslim, Anti-Hindu film maker who retains a Hindu name for benefits from the Indian Society to watch her filth. Her latest movie in the pipe line is about Sept 11th Muslim heroes. See Photo


Amitava Kumar
417 W Nittany Ave,
State College, PA 16801-4057
Amitava Kumar has written several articles against the Hindutva movement and has deliberately shown support for Muslims and Christians without any concern for Hindus. He wrote recently for telekha.com against HinduUnity.org.

Vijay Prashad - This "pretend to be Hindu" bastard has written several anti Hindutva articles for Little India Magazine. His last article was against HinduUnity.org which appeared in the May 2001 issue of Little India. This traitor to Hinduism is helping muslims and christians do their dirty work against the Hindu people by writing articles full of Hindu hatred and propaganda. The Soldier of Hindutva are watching you Vijay! Please visit him and call him at: 199 Beacon St, Hartford, CT 06105-2927
Tel: (860)232-4815. Photo of this devil
Example:


Smita Narula of Human Rights Watch - involved in anti-Hindu and anti-India propaganda. HRW is dedicated to throw down play the Hindutva movement with false lies and extreme propaganda.

Pankaj Mishra - Anti-Hindu, Pro-Muslim journalist. Mishra's tendency is to blame the VHP and other Hindu organizations for attacks against Christians and Muslims but will NEVER provide any context for those attacks. .

Drishti Patel - Anti-Hindu journalist working for TV Asia News.

Girish Patel - Anti-Hindu journalist writes " the BJP–RSS–VHP–Bajrang Dal combine have acted in the way Hitler did in Germany".

Ashok Mitra - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListHosbet Suresh - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListAruna Roy - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListNilopat Basu - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListNC Saxena - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListKS Dhillon - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListFali S Nariman - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListVibhuti Narain Rai - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListHarsh Mander - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListIndira Jaisingh - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist ListDr. V Kannu Pillai - Communalism Combats' Anti-Hindu Journalist List

Dr. Mohammad Netatullah Siddiqi - Anit-Hindutva propangda activist who's sole purpose is to incite Muslims to commit violence against Hindus.

Praveen Swami - Another anti-Hindu who writes for FrontLine Magazine as well as others use lies, deceit and propaganda to defame Hindutva activists in their right to protect the Hindu people from Islamic terrorism.

Manu Joseph - Another Hindu hater journalist(Outlook magazine) out to defame the righteous nationalists of India. His aim: to destroy the image of VHP, BJP, RSS etc and his new project is the character destruction of Narendra Modi.

Niraj Pant - Anti-Hindu journalist. Amongst his barrage of Anti-Hindu views and articles, articles,

Aziz Haniffa - A Muslim reporter for India Abroad known to spew venom and hatred against the Hindu people

Celia Dugger - Reporter for the New York Time has covered the Godhra incident with an extreme Anti-Hindu bias while claiming innocence for Muslims. The first headline, for a report by Celia Dugger, on February 28, reads: “Firebombing of Train Carrying Hindu Activists Kills 57.” The headline does not mention Muslims. The word “activists” provides the “damper clause” to underplay, if not rationalize, the gruesome crime perpetrated by the Muslim mob that carried out the attack. Read More as Celia Dugger gets exposed.


Shashi Tharoor - Virulently Anti-Hindu Journalist.

Mahdi Masud - Writer for The News Internationals. Anti-Hindu, Pro-Muslim!
Masud Akhtar Shaikh - Anti-Hindu writer for The News International
Karmat Khan - Writer for The Frontier Post. Anti-Hindu, Anti-India, Pro-Muslim
Mubarak Shah - Another journalist of The Frontier Post who spews venon against the Hindutva movement. Anti-Hindu, Anti-India!

Syed Atiq ul Hassan - Anti-Hindu journalist for The Frontier Post
Sugita Katyal - Anti-Hindu journalist for Reuters
Rajyasri Rao - Anti-Hindu journalist, BBC correspondent in Delhi
Rashmee Z Ahmed- Anit-Hindu journalist for Times of India
Sultan Shahin - Muslim journalist working for Asia Times. Very Anti-Hindu
Anthony J. Aschettino - Virulently Anti-Hindu Journalist from Paknews.com
Javed Jabar - Journalist of The Hindu. Anti-Hindu, Anti-India, Pro-Muslim
Martin Woollacott - Writer for Guardian. Strong Anti-Hindu, Pro-Muslim stance.

ANTI-HINDU NEWSPAPERS, MAGAZINES & MEDIA OUTLETS


The Hindu
NDTV
Communalism Combat
News-India Times
Times of India
India Today
Little India
Aag Tak
Star News
Zee News
P7NEWS

Mid-Day - Publisher: Mid-day Multimedia Ltd.
Editor: Khalid A H Ansari
website: www.mid-day.com
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Headquarters of the newspaper: 64, Sitaram Mills
Compound, N M Joshi Marg, Lower Parel (East), Mumbai
-400011. Tel: 23054515, 23017171.

The New York Times - When Hindus kill Muslims, The New York Times mentions both groups, with the stress being on Hindus who are supposedly doing the killing. When Muslims kill Hindus, Muslims are not mentioned. Many American readers don't go beyond the headlines, especially dealing with international affairs. The NYT, by skewing headlines against India's Hindu majority, seems to indicate to its readers that Hindus are to blame for all religious conflict in India. New York Times Exposed!


Public Broadcasting System (PBS) - for glorying Islam and hiding the
facts about prophet Muhammad's true intentions, identify and crimes

BBC - Blatantly anti-Hindu

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इसकी खास बात यह है की सोनिया ने जिन लोगो को NAC का मेम्बर बनाया है उसमे से 85% लोगो के नाम इस लेख मे है
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http://anonymouse.org/cgi-bin/anon-www.cgi/http://hinduunity.org/hitlist.html