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आखिर कब तक...... डा श्याम गुप्त...

                  आखिर कब तक सब  जानबूझकर  आँखें बंद रखेंगे  .............और क्यों ?   


 कब तक बंद रखेंगे,
अखियों के झरोखों को ||

इन नैन झरोखों से ,
जो छन कर आती है ;
वो हवा सभी के मन को -
तन को भरमाती है |

कब तक मन से तन से ,
खेलेंगे आँख-मिचौली|
फिर सम्मुख खुली पवन  हो,
रोकें क्यों झोंकों को |
 ,

1 टिप्पणी:

निरामिष ने कहा…
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