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गणतंत्र ....डा श्याम गुप्त

वे राष्ट्रगान गाकर 
जनता को देश पर मर मिटने की,
कसम दिलाकर ;
बैठ गये लक्ज़री कार में जाकर ।    
टोपी पकडाई पी ए को,
अगले वर्ष के लिये -
रखे धुलाकर ॥

 
 हमारा सच्चा खुशहाल गणतंत्र दिवस ,
तब होगा, जब हमारा प्यारा भारत ;        
भ्रष्टाचार, अनैतिकता से मुक्त होगा ।

5 टिप्‍पणियां:

हरीश सिंह ने कहा…

आपकी बात से सहमत हूँ. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना .....

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

dhanyavaad , hareesh jee......

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

@ वर्तमान की सच्चाई
तुकबंदी में फरमाई.
डॉ. श्याम गुप्त जी,
बधाई बधाई.

dinesh kumar ने कहा…

डॉ. श्याम गुप्त जी, क्या मै आपकि पोस्ट को कोपि कर के कही और पेस्ट कर सकता हू

drshyam ने कहा…

धन्यवाद.प्रतुल जी ..सुन्दर आशु-तुकबन्दी है ..

--धन्यवाद..दिनेश कुमार जी ...बिल्कुल कर सकते हैं...इसीलिये तो है...